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रे, रेलवाळा काकोसा, म्हाणी रेल गाड्या कद छोड़सी?

यह सवाल हर राजस्थानवासी का है, राजस्थान जाने के इच्छा रखनेवालोंका है। आज सुदूर देश मे राजस्थानी लोग अपने कामकाज की वजहों से बसे हुए है, और देश के हर कोने से राजस्थान के बड़े शहर की रेल्वेसे भलीभांति सम्पर्कता है।

संक्रमण काल मे तो कोई गाड़ी चल ही नही रही थी, लेकिन जब से थोड़ी थोड़ी गाड़ियाँ खोलना शुरू किया गया है, राजस्थान की गाड़ियोंके तरफ कोई ध्यान ही नही दिया जा रहा है। विशेष कर के मध्य भारत के राज्योंसे महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, विदर्भ, खान्देश फिर मध्यप्रदेश के निमाड़, मालवा भागोंसे राजस्थान के अजमेर, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर शहरोंके लिए रेल गाड़ियोंकी मांग की जा रही है। गुजरात के अहमदाबाद से भी राजस्थान के लिए खासी रेल गाड़ियाँ उपलब्ध रहती थी, लेकिन छोड़ी गई स्पेशल गाड़ियोंकी लिस्ट में इनका भी नामोनिशान नही है।

सीधे सीधे हिसाब किया जाए तो मुम्बई, बांद्रा से अजमेर, जयपुर, जोधपुर, बिकानेर के लिए नियमित 12-13 गाड़ियाँ चल रही थी, जो सिर्फ एक 02479/80 बांद्रा जोधपुर सूर्यनगरी डेली स्पेशल चल रही है और एक गाड़ी हाल ही में शुरू की गई 06587/88 यशवंतपुर बीकानेर द्विसाप्ताहिक स्पेशल जो की कल्याण होकर राजस्थान जाती है। यानी मुम्बई से केवल एक गाड़ी और मुंबई उपनगर कल्याण से एक, कुल दो गाड़ी चल रही है।

मराठवाड़ा के नान्देड, पूर्णा से नियमित गाड़ियोंमे एक गाड़ी श्रीगंगानगर और हैदराबाद से जयपुर के लिए दो गाड़ी चलाई जा रही थी जो मराठवाड़ा के राजस्थान यात्रीयोंके लिए उपयुक्त थी, यह गाड़ियाँ फिलहाल शुरू नही की गई है। विदर्भ के वर्धा, नागपुर से अजमेर, जयपुर, जोधपुर के लिए 14 गाड़ियाँ नियमित समयसारणी में उपलब्ध थी, जिनमेसे केवल एक 02975/76 मैसूरु जयपुर द्विसाप्ताहिक स्पेशल हाल ही में शुरू की गई। यह सोचने की बात है, जहां नियमित 14 गाड़ियोंमे लम्बी प्रतिक्षासूची लगी रहती थी, वहाँपर केवल एक द्विसाप्ताहिक गाड़ी से क्या यात्रिओंकी माँग पूरी हो सकती है?

उधर, मध्यप्रदेश के मालवा, निमाड़ क्षेत्र से राजस्थान मे, कई लोगोंका व्यापार व्यवसाय निमित्त हमेशा ही जाना आना लगा रहता है। इन्दौर से अजमेर, जयपुर के लिए रोजाना चलनेवाली गाड़ियाँ हमेशा फूल रहती थी, लेकिन स्पेशल गाड़ियोंकी लिस्ट में इस क्षेत्र को एक भी गाड़ी नही मिली है। रतलाम से चित्तौड़गढ़ होते हुए अजमेर के लिए 10 गाड़ियाँ थी, फिलहाल एक भी नही। इन्दौर, रतलाम के तमाम व्यापारी, व्यवसायिक रेल प्रशासन की राह जोत रहे है की कब इनकी मेहरनजर इन गाड़ियोंपर भी पड़े और इनका जाना आना शुरू हो।

आज भी हर एक राजस्थानी के मन मे यही सवाल है, ” म्हारी गाड्या कद चालसी?” भाया, हाल तो युप्पी, बिहार रो नम्बर चाल रियों ह, थारो नम्बर आ जासी तो थारी भी गाड्या दौड़ जासी

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