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🤭 फिर से गेंद, रेलवे के पाले मे…

महाराष्ट्र राज्य में मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे का मुख्यालय है। संक्रमण काल मे रेल प्रशासन और राज्य शासन दोनों के समन्वय से रेल गाड़ियोंका नियोजन किया जा रहा है। एक तरफ लम्बी दूरी की काफी गाड़ियाँ चल पड़ी है तो दूसरी तरफ उपनगरीय, सवारी और कम दूरी की गाड़ियोंके न चलने से स्थानिक यात्रिओंमें असंतोष गहरा रहा है। इस विषय मे रेलवे और राज्य के बीच पत्राचार भी जारी है।

उपरोक्त पत्र देखे, महाराष्ट्र राज्य शासन ने रेलवे से कहा है, हमने रेलवे को सभी अन्तरराज्यीय रेल सेवा शुरू करने की अनुमति दे दी थी, जिसमे दौंड – पुणे शटल की सेवाएं सम्मिलित है।

इस पत्राचार का शब्दशः रूपांतरण इस प्रकार है, “दौंड और पुणे के बीच शटल सेवाओं और राज्य में किसी अन्य शटल सेवाओं के संबंध में, यह अनुरोध किया जाता है कि स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में रेलवे यह सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र तैयार कर सकता है कि उक्त सेवाओं का उपयोग केवल उन यात्रियों को ही किया जा सकता है।  जो समय-समय पर राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा अनिवार्य के रूप में सभी सामाजिक दूरी और अन्य COVID 19 संबंधित प्रोटोकॉल को बनाए रखने के साथ दैनिक आधार पर आवश्यक कार्य के लिए सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।”

यह पत्र आपदा नियंत्रण महाराष्ट्र राज्य के सचिव ने मुख्य वाणिज्य अधिकारी मध्य रेलवे एवं पश्चिम रेलवे इनको लिखा है और साथ ही इसकी प्रतिलिपि महाराष्ट्र के सभी जिलाधिकारी समेत पुलिस विभाग और अन्य प्रशासनिक अधिकारियोंको दी है। इस तरह गाड़ियोंको चलाने की जिम्मेदारी फिर से रेलवे के अधिकार क्षेत्र की तरफ पलट कर आ गयी है।

आपको ज्ञात होगा हाल ही में दौंड पुणे यात्री संगठनों ने उनके खण्ड पर शटल, डेमू, मेमू या उपनगरीय गाड़ियाँ शुरू कराने के लिए दिनांक 20 जनवरी को रेल रोको आंदोलन की चेतावनी रेलवे प्रशासन को दे रखी है। यह पत्राचार उसी सम्बन्ध में चल रहा है और यह राज्य प्रशासन का उत्तर भी आ गया है।

इस पर यात्रिओंकी नजर अब रेल प्रशासन पर टिकी है, रेलवे की ओरसे अब क्या प्रतिक्रिया रहेगी, क्या अब सभी गाड़ियाँ चल पड़ेगी?

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