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जलगाँव – भुसावल तीसरी रेल लाइन का सुरक्षा निरीक्षण कल होगा

जलगाँव – भुसावल के बीच तीसरी और चौथी लाइन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का एक भाग याने तीसरी लाइन का सुरक्षा परीक्षण कल 11 जून को होने जा रहा है। 25 किलोमीटर के इस खण्ड में भादली से भुसावल के बीच तीसरी लाइन पर पहलेही गाड़ियाँ शुरू हो चुकी है। कल जलगाँव से भादली और भादली यार्ड का निरीक्षण हो कर सम्भवतः जलगाँव से भुसावल तक तीसरी लाइन पर गाड़ियाँ चलना शुरू हो जाएगी। यह प्रोजेक्ट इतना महत्वपूर्ण क्यों है इस पर बात करते है।

दरअसल जलगाँव जंक्शन पर पश्चिम रेलवे के उधना से डबल लाइन, मुम्बई – भुसावल डबल मेन लाइन से जुड़ती है। यदि भुसावल से किसी गाड़ी को पश्चिम रेलवे के ट्रैक पर जाना है तो मुम्बई की ओर जानेवाली मुख्य लाइनोंपर ब्लॉक लग जाता था और वही परे से आने वाली गाड़ियोंको भी जलगाँव के मुख्य मार्ग पर आने के लिए घंटो इंतजार करना पड़ता था। जब यह प्रोजेक्ट डिजाइन हुवा तो उसमे परे की उधना – जलगाँव दोहरी लाइन को समर्पित तरीकेसे हवाई क्रॉसिंग कर के भुसावल जंक्शन तक लाया गया।

तरसोद फ्लैग स्टेशन एरिया में निर्माणाधीन रेल ओवर रेल क्रॉसिंग ब्रिज (अब यह दोनों लाइनोंपर ब्रिज का निर्माण पूरा हो चुका है।) photo courtesy Piyush S. @RailfanPiyush indiarailinfo

अब आप भुसावल स्टेशनपर इसकी तैयारी देखिए। हमने दो दृश्य यहाँपर रखे है। पहले दृश्य में एकदम दायीं ओर नवनिर्मित प्लेटफार्म नम्बर 1 और 2 दिख रहे है। यह दोनोंही प्लेटफार्म इन तीसरी, चौथी लाइन से सीधे कनेक्ट है। यही व्यवस्था जलगाँव में भी की गई है, वहाँपर 4 एवं 5 नम्बर के प्लेटफार्म उधना डबलिंग लाइन से सीधे जुड़े है। यानी उधना से भुसावल तक सीधा समर्पित गलियारा बनकर तैयार। अब आगे उधना में प्लेटफार्म नम्बर 4 एवं 5 का निर्माण लगभग पूर्णत्व की ओर है।

भुसावल स्टेशन का सम्पूर्ण दृश्य (photo courtesy : central railway)
भुसावल स्टेशन का मानक दृश्य रेलपोस्ट से साभार

अब थोड़ा गहराई से समझते है। बान्द्रा से भुसावल अंतर है 574 किलोमीटर उधना बाइपास, भेस्तान चलठान होकर और मध्य रेल के मुम्बई से है 445 किलोमीटर। हालांकि यह अन्तर 130 किलोमीटर ज्यादा है, मगर पश्चिम रेलवे के मार्ग में कोई घाट नही है और आपात स्थितियों में यह मार्ग उपयुक्त है। याद कीजिए ऑक्सीजन स्पेशल गाड़ियाँ इसी मार्ग से निकली थी। पश्चिम रेलवे का मुम्बई दिल्ली मार्ग प्रीमियम ट्रंक मार्ग है। बहुतसी राजधानी, दुरान्तो गाड़ियोंका यही मार्ग है। इस मार्ग की अवस्था क्षमता से डेढ़ से दो गुनी गाड़ियाँ उसपर चलाई जा रही है। वहीं उधना से जलगाँव नवनिर्मित दोहरीकरण युक्त अत्याधुनिक, तेज गति वाला मार्ग अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग नही कर पा रहा है और उसकी वजह जलगाँव में बननेवाला ब्लॉक ही था। अब तीसरी लाइन पर गाड़ियाँ दौड़ने लग जाएगी तो समस्या खत्म और ज्यादा से ज्यादा एक वर्ष में चौथा मार्ग भी रेलवे के हाथों सुपुर्द हो जाएगा।

कुल मिलाकर यह समझिए, पश्चिम रेलवे अपनी बहुत सी गाड़ियाँ इस मार्ग पर शुरू कर देगी। उधना एक बड़ा टर्मिनल बन कर उभरेगा। सूरत भुसावल के बीच सीधी मेमू गाड़ियाँ चलेगी। यह सब इस समर्पित जलगाँव भुसावल तीसरी, चौथी लाइन के गलियारे से सम्भव होने जा रहा है।

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