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रेल टिकटोंके ई-आरक्षण व्यवस्थामें, देश के एक बड़े उद्योग समूह की सेन्ध?

18 जून 2023, रविवार, आषाढ, कृष्ण पक्ष, अमावस्या, विक्रम संवत 2080

बड़े अखबारों की बड़ी सुर्खियाँ ☺️ हमारे देश मे जनता को बड़ी ही आसानी से भ्रमित किया जाता रहा है। अब उपरोक्त हेडलाइन ही देख लीजिए। देश के बड़े उद्योग समूह ने एक रेलवे की ई-टिकटींग वेबसाइट, व्यवसाय के सम्पूर्ण अधिग्रहण की खबर मीडिया में चल रही है। अब यह उद्योग समूह रेल टिकटों के आरक्षण में लोअर बर्थ, विन्डो सीट्स, ओवर नाइट जर्निज के टिकटमें प्रीमियम किराये लगाकर बुकिंग कराएगा, इस तरह का भ्रामक प्रचार, प्रसार किया जा रहा है। आइए सही तथ्य समझते है।

यह उद्योग समूह केवल रेल ई-टिकट व्यवसाय करने वाले एक चैनल, फ्रेंचाइजी का अधिग्रहण कर रहे है, न की भारतीय रेल की ई-टिकट प्रणाली का और ना ही उसकी व्यवस्था का।

भारतीय रेल में आरक्षित टिकट दो तरीकोंसे बुक किये जाते है। एक रेलवे स्टेशनोंके PRS (पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम) आरक्षण काऊंटर्स पर जो की कागज पर छपा मैन्युअल फिजिकल टिकट है और दूसरा ई-टिकट जो की डिजिटल फॉर्मेट में IRTCT की वेबसाइट, ऐप्स पर निकाला जाता है।

रेल आरक्षण टिकटोंमे केवल और केवल भारतीय रेल विभाग का ही एकाधिकार (मोनोपली) है, चाहे PRS की छपी टिकट हो या डिजिटल ई-टिकट हो। IRCTC यह भारतीय रेल की ही उपकम्पनी है।

यह IRTCT कम्पनी अपने ई-टिकट आरक्षण व्यवसाय के चैनल्स की फ्रेंचाइजी याने चलाने का अधिकार कुछ नियमोंके अधीन वितरित करती है। देशभर में ऐसे कई फ्रेंचाइजी है और उनके सब एजेंट भी है। चाहे कितनी भी वेबसाईट्स हो, चैनल्स हो, लेकिन यह अन्ततः IRCTC के माध्यम से ही ई-टिकट बुक करते है। यूँ समझिए की इन सारे निजी चैनल्स की गंगोत्री IRCTC ई-टिकट वेबसाइट ही है।

अब आप ही बताए, इन किसी एक चैनल के अधिग्रहणमें सम्पूर्ण रेलवे की ई-टिकट प्रणाली में बदलाव कैसे हो सकता है? भ्रामक जानकारी में बहने की जरूरत नहीं उन्हें केवल मनोरंजन के तौर पर या अतिरिक्त जानकारी में समझिए।☺️

मित्रों, भारतीय रेलवे की विभिन्न जानकारियोंके लिए केवल उनकी अधिकृत वेबसाइटों/ऐप्स का उपयोग कीजिये। ई-टिकट बुकिंग के लिए irctc.co.in, गाड़ियोंकी स्थिति जानने के लिए NTES ऍप या indianrail.gov.in वेबसाइट, अनारक्षित टिकटोंके लिए uts ऍप! यह अलग अलग निजी वेबसाइट्स, ऍप्स, भारतीय रेल के अधिकृत चैनल्स से ही लिंक बनाकर जानकारीयाँ प्रस्तुत करते है।

याने जानकारी वही रहेगी केवल उनके प्रस्तुतिकरण में बदलाव या आधुनिकता रहेगी, बस! मतबल ई है, कथावाचक भले ही अलग हो, रामायण तो भगवान श्री राम जी की ही रहेंगी।😊

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