31 अगस्त 2023, गुरुवार, निज श्रावण, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा, विक्रम संवत 2080
रेल प्रशासन अपने आय बढ़ाने के लिए निरन्तर प्रयासरत है। और क्यों न हो, जब राजनीतिक दबावों के चलते रेल विभाग अपने यात्री किराया तालिकाओं में कोई बदलाव नही कर पाता तब अन्य मार्गों से आय के स्रोत खोजे जाते है, उनपर लक्ष्य निर्धारित किए जाते है।
यात्री किरायोंका गुणागणित तो सामान्य सवारी गाड़ियाँ बन्द कर दी गयी, उन्हें एक्सप्रेस गाड़ियोंमें बदल दिया गया, वहीं उनका किराया दुगुना, तिगुना हो गया। उनके किराए, दर सूची से ही गायब हो गए। सामान्य मेल/एक्सप्रेस गाड़ियाँ जिनकी औसत गति को मामूली समयसारणी बदल कर लगभग 55 kmph से आगे बढ़ा दी गई तो उनकी श्रेणी मेल/एक्सप्रेस से सुपरफास्ट हो जाती है और किराया दर सूची में एक सुपरफास्ट शुल्क जुड़ जाता है। गाड़ियोंमें नीला, आसमानी विनायल चिपकाए तो गाड़ी ‘हमसफ़र’ श्रेणी बन गयी और किरायोंमे झट 12 से 15 प्रतिशत की वृद्धि। इसी तरह कुछ ‘महामना’ श्रेणी की भी गाड़ियाँ है। आम मेल/एक्सप्रेस श्रेणियोंमे ही मिलने वाली सुविधाओंका, केवल गाड़ी का नाम, रंग बदलने से ज्यादा किराया बढ़ जाता है। है, न अजीब!
इसी तरह किरायोंके अलावा नॉन फेयर रेवेन्यू के अंतर्गत रेल आहाते के पार्किंग लॉट्स आते है। इन पार्किंग लॉट्स का अमूमन वार्षिक, पंचवर्षीय इस तरह की अवधि के लिए ठेका निकलता है। रेल विभाग तो ज्यादा बोली लगानेवाले से पैसा समेटे सन्तोष प्राप्त कर लेती है, मगर यह बिल्कुल भी नही देखती की पार्किंग के नाम पर जो शुल्क आम जनता से खींचा जा रहा है, उसके ऐवज में उसे सुविधा क्या मिल रही है?
चार पहिया पार्किंग के नाम पर कोई शेड नही होता। रेल आहाते में ही, एक कोना जहाँ गर्मी, बरसात, धूल मिट्टी झेलते वाहन खड़े रहते है, जिसका शुल्क तो ठेकेदार ले लेता है मगर वाहन के नुकसान की कोई जिम्मेदारी उस पर नही ऐसी हिदायत भी वाहन मालिक को दे देता है। उसपर पार्किंग ठेकेदार अपने झोंपड़ेनुमा दफ्तर में कभी पार्किंग ठेके का विवरण, जैसे ठेकेदार का नाम, शुल्क, ठेके की अवधि, सम्पर्क क्रमांक, अनियमितता की शिकायत, सुझाव का समाधान हेतु जिम्मेदार व्यक्ति, संस्था का विवरण इत्यादि कुछ भी उपलब्ध नही रहता।
आये दिन, यात्रिओंको केवल पिकअप या ड्रॉप करने वाले वाहनधारकोंसे पार्किंग ठेकेदारों की हिलहुज्जत चलते रहती है। चूँकि नियमावली का कोई अतापता नही रहता। ठेकेदार के कर्मी हमेशा ही दादागिरी कर वाहनधारकोंसे अवैध वसूली के फिराक में रहते है। इस तरह की परेशानियों के चलते कई वाहनधारक अपनी गाड़ियाँ रेल आहाते के बाहर ही लॉक कर छोड़ना पसन्द करते है।
रेल विभाग को चाहिए, की उक्त पार्किंग ठेकेदार को अपने ठेके सम्बन्धी सारा विवरण, पार्किंग शुल्क स्पष्ट रूप से बैनर बना कर लगाना अनिवार्य करें। साथ ही वाहन का पिकअप, ड्रॉप अवस्था निशुल्क रहें, वाहनतल पर शेड, पीने के पानी, स्वच्छतागृह, वाहन के टायर्स में हवा भरने की सुविधा इत्यादि व्यवस्था समुचित तरीकेसे उपलब्ध हो। वाहनतल पर पार्किंग रसीद इलेक्ट्रॉनिक पद्धति से बनाई जाए, ई-पेमेन्ट की सुविधा का पर्याय और वाहनतल पर समुचित कैमरे लगे हो।
यदि ठेकेदार या रेल विभाग उपरोक्त सेवा वाहनधारक को उपलब्ध ना करा पाए तो वहाँ रेल विभाग को भी पार्किंग क्षेत्र निशुल्क ही रखना चाहिए।
