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क्या सचमे इसकी जरूरत थी?

28 फरवरी 2024, बुधवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल मुख्यालय ने फिर एक अकल्पनीय निर्णय लिया है। संक्रमनपूर्व सवारी गाड़ियोंके किफायती किराए यात्रिओंको लौटा दिए गए है।

भुसावल रेलवे टिकट काउन्टर पर निकला सामान्य यात्री टिकट

गौरतलब यह है, संक्रमण पूर्व काल की बहुतांश सवारी गाड़ियाँ मेल/एक्सप्रेस में बदली गयी है। उनमें परिचालनिक सुधार किया गया है। पुराने पारम्परिक ICF कोचों को बदल कर उन्हें डेमू/मेमू रैक में बदला गया है। यह गाड़ियाँ स्पीड-अप हुई है, उनके कुछ स्टोपेजेस भी रद्द किए गए है। कुल मिलाकर उन्हें एक्सप्रेस गाड़ियोंके स्वरूप में ढालने का प्रयास किया गया है।

अब विषय यह आता है, जब पुराने सवारी किराए लौटे है, तो वह कौनसी गाड़ियाँ है? यह केवल वह गाड़ियाँ है, जिनके स्टोपेजेस रद्द नही हुए है। जो अपनी पूरी यात्रा, अर्थात प्रारम्भिक स्टेशन से लेकर गंतव्य स्टेशन तक सभी स्टोपेजेस पर ठहराव ले रही है। जो गाड़ियाँ अभी भी विशेष गाड़ियोंकी श्रेणी में अपने गाड़ी क्रमांक में ‘0’ से शुरुवाती आँकड़े से कर रही है। जिसका परिचालन 200 से 250 किलोमीटर के भीतर का है। ऐसी परिभाषित गाड़ियाँ प्रत्येक मार्ग पर बिल्कुल गिनीचुनी बची है।

मध्य रेल के भुसावल मण्डल की बात की जाए तो सूरत की ओर जाने वाली तीन जोड़ी सवारी गाड़ियाँ थी, जिनमे दो जोड़ी एक्सप्रेस बन चुकी है और उनके किराए यथावत एक्सप्रेस के ही रहेंगे। केवल एक 09077/78 भुसावल – सूरत – भुसावल सवारी जो संक्रमण काल के पश्चात घटकर भुसावल – नंदुरबार – भुसावल बन गई, उसमे यह सवारी किराए लागू है। भुसावल – अमरावती मेमू जिसे भुसावल – बड़नेरा मेमू बनाया गया, उसमे भी यह सवारी किराए लागू है। मगर भुसावल वर्धा भुसावल सवारी जो अब एक्सप्रेस के स्वरूप में है और भुसावल – नागपुर – भुसावल ओवर नाइट सवारी बन्द की जा चुकी है, पुनर्स्थापित नही हुई और पुनर्बहाली के कोई आसार भी नही है। उसी प्रकार खण्डवा की दिशा में, भुसावल कटनी के बीच परिचालित सवारी गाड़ी सूरत भुसावल सूरत एक्सप्रेस से लिंक कर एक्सप्रेस में रूपांतरित हो चुकी है और भुसावल इटारसी के बीच चलने वाली सवारी भी एक्सप्रेस बन चुकी है। अर्थात भुसावल – खण्डवा मार्ग पर अब कोई सवारी गाड़ियाँ परिचालित नही हो रही।

फिर रेल प्रशासन के मद्देनजर, सवारी (ऑर्डिनरी) गाड़ियोंकी स्टेंडर्ड डेफिनेशन, मानक परिभाषा क्या है? मित्रों, परिपत्रक अनुसार तो संकल्पना क्या है, यह तो हमने उपरोक्त परिच्छेद में बताया है और एक रास्ता है, रेल विभाग के अनारक्षित टिकट बुकिंग ऍप UTS पर ऑर्डिनरी गाड़ियोंको ‘पैसेंजर विशेष’ ऐसा नामकरण किया गया है, उनमें यात्रियोंको सवारी गाड़ियोंके सामान्य किराए लागू होंगे।

यह वायरल मेसेज है, सोशल मीडिया में,

अब विचार करने की बात है, इस सस्ते किरायोंको फिर से बहाल करने की क्या आवश्यकता थी? यात्री तो मेल/एक्सप्रेस किराए चुका कर यात्रा करना शुरू हो गए थे। एक तरफ वन्देभारत प्रीमियम गाड़ियोंके टिकट पर भी छपता है, ‘रेल विभाग केवल 57% किराया ही वसूलता है’ दूसरी तरफ आप फिर से कम किराए बहाल कर रहे हो? दूसरा मुद्दा यह भी है, जितनी सवारी गाड़ियाँ संक्रमण काल के पूर्व में परिचालित थी उनमें से अमूमन 75% गाड़ियोंको रेल प्रशासन मेल/एक्सप्रेस में रूपांतरित कर चुकी है। मण्डल मुख्यालय या क्षेत्रीय मुख्यालय या खुद रेल प्रशासन भी इस सामान्य किरायोंकी पुनर्बहाली की सूचना आम हलक़ों में परिपत्रक निकाल कर दे नही रही। स्टेशनोंपर, टिकट खिड़कियों पर भी कोई सूचनाएं प्रदर्शित नही की गई है, तो क्या समझना है, यह प्रयोग है या यात्रिओंकी भावनाओं से किया गया खिलवाड़ है?

प्रीमियम, तगड़े किरायोंकी वसूली के बावजूद रेल प्रशासन वन्देभारत के टिकट पर अपनी ‘सब्सिडी’ वाली पंक्ति छापना नही भूलती

इससे बेहतर तो यही रहता, प्रशासन ने जो इन सवारी गाड़ियोंका मेल/एक्सप्रेस श्रेणी में उन्नतिकरण किया था भले ही केवल किरायोंको लेकर ही था, उसे अपने मानकों पर खरा करा देते, पूर्ण रूप से एक्सप्रेस की गति से, उचित समयसारणी पर चलवाते। यात्रिओंको मेल/एक्सप्रेस किराया देने में कोई परहेज नही था और आज रेल प्रशासन इनके किराए घटाकर ले रहा है तो कोई खुशी भी नही है।

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