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यात्रीगण सावधान! आप विशेष गाड़ी में यात्रा कर रहे है।

29 मार्च 2024, शुक्रवार, चैत्र, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2080

चौक गए! चौंकिए मत, सावधान हो जाइए। यदि आप विशेष गाड़ी में यात्रा करने जा रहे है तो आपको कुछ बातें समझ लेना बेहद जरूरी है। रेल विभाग यह बातें आपको कभी नही बताएगा।

सर्वप्रथम यदि आप विशेष गाड़ी की समयसारणी देख अपनी यात्रा का नियोजन कर रहे है, तो भूल जाइएगा की यह गाड़ी समयपर आपको आपके गन्तव्य स्टेशनपर पहुंचाने वाली है। भैय्या, जब प्रारम्भिक स्टेशन से समयपर चली हो तब ही तो न आगे समय पर चली 😊 आप रेल विभाग के ऍप, वेबसाइट पर किसी भी विशेष गाड़ी का परिचालन देख लीजिए, ऐसे चलती है, जैसे समयसारणी इनके लिए बनी ही नही है, 2-4 घण्टे देरी से चलना इनके लिए सामान्य बात है।

इन गाड़ियों के शेड्यूल में स्टोपेजेस बहुत कम होते है, यह बात और है की अनशेड्यूल्ड स्टोपेजेस पर यह गाड़ियाँ घण्टों बिता देती है, जहाँ चाय, नाश्ते की क्या पानी तक की अपेक्षा आप नही रख सकते। गाड़ी में पेंट्रीकार नही होती इसका अर्थ यह है की आपका खानपान केवल अवैध विक्रेता के रहमोंकरम पर निर्भर है। यह दाता लोग आपको जो लाकर खिला देई, जम जावे तो जो दाम मांगे देकर खा लीजिएगा। हाँ, एक विशेष गौर करने लायक बात है, गाड़ी का रखरखाव स्टाफ़ आपको पानी बोतलें ₹20/- में बेचता हुवा मिल जाएगा। तात्पर्य यह है, इस गाड़ी के यात्री अपना दाना-पानी का जुगाड़ साथ ले कर चले अन्यथा अपनी यात्रा का पारणा गन्तव्य स्टेशनपर ही हो पाएगा।

रेल विभाग इन विशेष गाड़ियोंमे यात्रिओंको अतिरिक्त किराया दर से टिकट बेचता है, उनका मन करता है, तो सुपरफास्ट की संज्ञा भी इन गाड़ियोंमे जोड़ देते है, और किरायों में इज़ाफ़ा! ओर प्रताड़ना ऐसी की, सुपरफास्ट और अतिरिक्त किराया लेने के बावजूद गाड़ी 5-6 घण्टे देरी से चलाते है।

आप उदाहरण के तौर पर 01045/46 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – प्रयागराज जंक्शन के बीच चलनेवाली विशेष गाड़ी को लीजिए। 01045 सुपरफास्ट (?) विशेष लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 12:15 को प्रत्येक मंगलवार को निकलती है और बुधवार को सुबह 11 बजे प्रयागराज को पहुंचती है और वापसी में 01046 विशेष उसी दिन, बुधवार को शाम 18:50 पर प्रयागराज से अपनी वापसी दौड़ शुरू करती है। तो जनाब यह गाड़ी इसके इतिहास में कभी 11:00 बजे प्रयागराज में नही पहुंची। 01045 विशेष को प्रयागराज में उसी प्लेटफॉर्म क्रमांक 2 पर लिया जाता है, जहाँ से उसे 01046 बन कर वापसी यात्रा शुरू करनी होती है और वह भी उसी समयपर जैसे अमूमन गाड़ियाँ अपने प्रारम्भिक स्टेशनपर चलने के लिए लगती है। अर्थात 01045 मुंबई से प्रयागराज गाड़ी शाम 17 से 18 बजे के अंदाज में प्रयागराज पहुँचेंगी और 01046 बिल्कुल समयपर अपनी वापसी यात्रा शुरू कर देगी। अब आगे विडम्बना देखिए, 01046 शाम 18:50 को प्रयागराज से चल कर अगले दिन 16:05 को लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुँचने वाली है। मगर लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर इस के रैक की जरूरत रात 22:15 को थिविम के लिए रवाना होने वाली 01187 विशेष के लिए है तो रेल प्रशासन उसे ठीक उसी समय के अंदाज में लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर ले जाता है, अर्थात 5-6 घण्टे देरीसे अमूमन रात 22 बजे।

रेल विभाग के सुत्रोंसे पता चलता है, सारी विशेष गाड़ियाँ उनके लिए अनशेड्यूल्ड अर्थात उनके समयपालन पत्रक के हिसाब में अतिरिक्त गाड़ियाँ है, जिन्हें शून्य प्रायोरिटी, शून्य प्राथमिकता पर चलाया जाता है

ऐसी स्थिति में हम रेल विभाग से आग्रह करते है, विशेष गाड़ियोंके समयसारणी का संशोधन कीजिए और जो आपके समयपालन में सेट होता हो वहीं यात्रिओंके सामने रखिए। यात्रिओंसे अतिरिक्त तत्काल किराए, सुपरफास्ट अधिभार लगाकर उन्हें धोखा मत दीजिए। मा. उच्च न्यायालय ने हाल ही में ट्रेन प्रायोरिटी पर संज्ञान लेकर रेल विभाग को खूब सुनाया है, जब मालगाड़ियाँ चल सकती है, तो यात्री गाड़ियाँ क्यों नही चल सकती।

रेल विभाग अपनी सहूलियत के हिसाब उन्हें टर्मिनल स्टेशन पर पहुंचाती है तो उस के मुताबिक समयसारणी क्यों नही बनाती? यात्री जब टिकट बुक करता है तो उसे रेल विभाग की दी गई समयसारणी पर विश्वास होता है और रेल विभाग उस विश्वास को पूरा रसातल में डुबो देता है। विशेष गाड़ियोंकी समयसारणी ऐसी हो की यात्री को पता हो, गाड़ी गंतव्य स्टेशन पर कब पहुंचने वाली है, टिकट बनाते वक्त कमसे कम यात्री तो किसी धोखे में नही रहेगा।

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