गाड़ी कोच संरचना के मानकीकरण में किया जा रहा है यात्री आवश्यकता नुसार बदलाव
30 मार्च 2024, शुक्रवार, चैत्र, कृष्ण पक्ष, पंचमी, विक्रम संवत 2080
भारतीय रेल में यात्री गाड़ियोंकी कोच संरचना का मानकीकरण किया जाना, रेल के ग़ैरवातानुकूलित कोचों के यात्रिओंके आसन व्यवस्था की कटौती में बदल गया। किसी लम्बी दूरी की मेल/एक्सप्रेस में द्वितीय श्रेणी साधारण के यात्री कोच वैसे भी कम ही होते थे और यह लोग ग़ैरवातानुकूलित शयनयान स्लिपर में अपना तालमेल बिठा कर यात्रा कर लेते थे। कोच संरचना मानकीकरण में सारे ग़ैरवातानुकूलित कोच की भारी कटौती की गई और यह यात्रिओंका रुख वातानुकूलित कोचों में सीधी घुसपैठ की ओर बढ़ गया। आए दिन शिकायतें बढ़ने लगी और कोच संरचना का मानकीकरण विषय, बड़ा वादग्रस्त विषय बन गया।
रेल प्रशासन की, इस कोच मानकीकरण के जरिए जो मेल/एक्सप्रेस गाड़ियाँ अपने गंतव्य स्टेशन पर पहुँच कर खाली समय व्यतीत करती थी, उसका उपयोग कुछ देरी से पहुँचने वाली अन्य गाड़ियोंके वापसी फेरे के लिए उपयोग करने की सोच थी। मानकीकरण किए जाने से उन गाड़ियोंकी कोच संरचना एकसमान रहती थी और उससे यात्रिओंकी अग्रिम आरक्षण को कोई बाधा नही पहुंचती थी। साथ ही साथ देरी से पहुँची गाड़ी की वापसी फेरे में समयपर छोड़ी जा सकती थी। संकल्पना बहुत ही सटीक और व्यवस्थित थी मगर किसी मुख्यालय से निकले परिपत्रक की व्याख्या कोई क्षेत्रीय कार्यालय किस तरह करेगा इसका कोई भरोसा नही। आइए, पहले वह वर्ष 2022 का रेल मुख्यालय का परिपत्रक देखते है,

रेल प्रशासन ने कोच संरचना मानकीकरण के प्रपत्र में उनकी योजना जाहिर कर दी, मगर आगे उक्त विषय मे क्षेत्रीय रेल के संज्ञान को भी महत्व दिया गया है। क्षेत्रीय रेल अपनी आवश्यकताओं के अनुसार रेल प्रशासन से अग्रिम अनुमति ले कर कोच संरचना के मानकीकरण से परे जाकर, बदलाव करा सकती है। अर्थात किसी क्षेत्रीय रेल को यह एहसास है, अभ्यास है, की उनकी फलाँ गाड़ी में वातानुकूलित कोचों की जगह ग़ैरवातानुकूलित कोच, द्वितीय श्रेणी साधारण या स्लिपर कोच की संख्या ज्यादा हो, तो वह उस प्रकार की संरचना रेल प्रशासन से अनुमति प्राप्त कर, बना सकती है।
अब यह बात और हे, की कई क्षेत्रीय रेल ने इस बात को महत्व नही दिया और जिस तरह रेल मुख्यालय से कोच संरचना के मानक भेजे थे, उसी प्रकार अपनी गाड़ियोंमे कोच संरचना करवा ली। जब साधारण टिकटधारियों का हुजूम वातानुकूल यात्रिओंकी व्यवस्था में हाहाकार मचाने लगा और आए दिन शिकायतोंके अम्बार रेल मुख्यालय, मंत्रालय तक दस्तक देने लगे तब जाकर मुख्यालय ने इस बारेमे संज्ञान लिया और क्षेत्रीय रेलवे को कोच संरचना सुधारने के निर्देश दिए। इसका परिणाम यह हुवा की कई लम्बी दूरी की मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे वातानुकूल कोच कम होने जा रहे है और उसके ऐवज में ग़ैरवातानुकूलित कोच, स्लिपर और द्वितीय श्रेणी साधारण कोच बढ़ाए जा रहे है। उदाहरण के लिए 12779/80 वास्को हज़रत निजामुद्दीन वास्को गोवा सुपरफास्ट का यह कोच संरचना बदलाव देख लीजिए,

गोवा एक्सप्रेस में स्लिपर, साधारण कोच 02- 02 की जगह 06 और 04 किए जा रहे है। अर्थात वातानुकूल कोच टू टियर 02 की जगह 01, वातानुकूल थ्री टियर इकोनॉमी 04 की जगह 02 और वातानुकूल थ्री टियर 04 की जगह 01 रह जाएंगे। गाड़ी में कुल 20 कोच यथावत बने रहेंगे।
आखिरकार भारतीय रेल को आम रेल यात्री की सुध लेनी पड़ी। भले देर से आए मगर दुरुस्त आ ही गए! 😊
