21 मई 2024, मंगलवार, वैशाख, शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी, विक्रम संवत 2081
मध्य रेल वाणिज्यिक प्रशासन ने यात्री गाड़ियोंपर काम करनेवाले टी टी ई एवं कन्डक्टर, जिन्हें एमिनिटीज स्टाफ़ कहा जाता है, घटाया जा रहा है।
मध्य रेलवे क्षेत्रमें पाँच मण्डल है। मुम्बई, पुणे, सोलापुर, नागपुर एवं भुसावल। इन मण्डलों के अन्तर्गत आने वाले सभी एमिनिटीज स्टाफ़ की संख्या को यात्री गाड़ियोंकी मौजूदगी में तीन माह के लिए कमी की जा रही है। यह कालावधि 01 मई से 31 जुलाई तक रहेगा।
हाल ही में जारी वाणिज्यिक आदेश के जरिए, मध्य रेल अपनी कम स्टापेजेस वाली प्रीमियम गाड़ियोंमे वातानुकूल यात्री कोचों में प्रत्येकी आठ कोचों के बीच एक कन्डक्टर अपनी सेवा देगा जबकि फिलहाल यह प्रत्येक पाँच कोच के बीच एक कन्डक्टर रहता है। यही ग़ैरवातानुकूलित यात्री कोच में प्रत्येक छह कोच के बीच एक टी टी ई अपनी ड्यूटी करेगा, पहले एक टीटीई को तीन कोच पर सेवा देनी रहती थी। नियमित मेल/एक्सप्रेस पर यही उच्च वर्ग के छह कोच एवं ग़ैरवातानुकूलित के पाँच कोच अटेंड करने होंगे। जबकि फिलहाल यह पाँच एवं तीन ऐसी थी।
इसमे और एक मानदण्ड है, रात नौ बजे से अलसुबह 4 बजे अपने प्रारम्भिक स्टेशन से चलनेवाली यात्री गाड़ियोंमे, उच्च श्रेणियों में पाँच कोच देखेगा और उसके अगले यात्रा चरण में छह कोच देखेगा। फिलहाल यह ड्यूटी नॉर्म, तीन कोच एवं पांच कोच अटेंड कर रहे है। वहीं ग़ैरवातानुकूलित कोचों में पहले चरण में चार कोच और अगले चरण में पांच कोच पर अपनी ड्यूटी देनी होगी। फिलहाल यह सेवा दो स्लिपर कोच पहले चरण में और अगले चरण में तीन कोच पर हाजिरी देनी होती थी। हालांकि यह व्यवस्था प्रायोगिक तौर पर तीन माह के लिए लागू की जा रही है और यदि कोई असुविधा की शिकायत नही आती है तो उसे आगे भी लागू कर दिया जाएगा।
अब हम अपने मुद्दे पर आते है, देशभर की अमूमन सभी नियमित मेल/एक्सप्रेस एवं सुपरफास्ट गाड़ियों के कोच संरचना मे ग़ैरवातानुकूलित कोचों की व्यापक कमी की गई है। पूर्ण गाड़ी की कोच संरचना में दो, तीन स्लिपर कोच रह गए है। मगर न ही द्वितीय श्रेणी टिकटों के बिक्री पर कोई निर्बंध है और न ही प्रतिक्षासूची टिकटों पर। ऐसी स्थिति में द्वितीय श्रेणी अनारक्षित यात्री एवं प्रतिक्षासूची के यात्री जब कोच पर टीटीई/कन्डक्टर की अनुपस्थिति में सीधे वातानुकूल कोचों में सवार हो रहे है। एमिनिटी स्टाफ़ जो आठ कोच के बीच एक इस प्रमाण में अपनी ड्यूटी कर रहा, किस तरह इस अवैध घुसपैठ को रोक पाएगा? एक बार इस तरह यात्रिओंकी अवैध घुसपैठ के साथ गाड़ी स्टेशन से रवाना हो जाए तो यात्रा पूर्ण होने तक जस की तस बनी रहती है।
रेल जानकार कहते है, मध्य रेल प्रशासन, रेलवे बोर्ड के सन 1992 का वह आदेश भूल रहा है जिसमे प्रत्येक दो आरक्षित कोचों के बीच एक टीटीई की मौजूदगी आवश्यक है। यात्री एमिनिटीज, अर्थात यात्री सुविधाओं की सरासर अनदेखी हो रही है। महीनों पहले आरक्षण किया हुवा आरक्षित यात्री अपनी रेल यात्रा करने में बहुत परेशानी महसूस कर रहा है। स्लिपर क्लास जनरल के भाँति भरभराकर चलता है तो वातानुकूल कोच में भी अवैध यात्री अब उसी प्रकार घुसपैठ मचाए रखे है। शायद रेलवे प्रशासन ने अपने यात्रिओंको भगवान भरोसे छोड़ दिया है। इसीलिए उन्हें यात्री किराया सीधे तौर पर बढाने के लिए संकोच होता है और छुपे रास्ते अर्थात नियमित मेल/एक्सप्रेस को सुपरफास्ट करना, नियमित सवारी गाड़ियोंको मेल/एक्सप्रेस में बदलना, ग़ैरवातानुकूलित कोचों की जगह उच्च श्रेणियों, वातानुकूल कोचों में बदल कर ज्यादा यात्री किराया वसूला जा रहा है।
यात्री सुविधाओं को यात्री के लिए ईपलब्ध कराने वाले स्टाफ़ में कमी करना, रेल प्रशासन का यह निर्णय बेहद दुखदायी एवं आरक्षित यात्रिओंकी परेशानी बढ़ाने वाला रहेगा यह बात निश्चित है। गाड़ियाँ अवैध यात्रिओंसे इस कदर भरी रहती है की वर्किंग कमर्शियल स्टाफ़ उन कोचों में चढ़ ही नही पाता और किसी उच्च श्रेणी के कोच में बैठे बैठे खानापूर्ति कर देता है। इसके बावजूद ‘हम 57% किरायोंमे ही यात्रा करा रहे है’ यह टैग लाइन सभी रेल टिकटों पर यथावत है।
