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एक दिशाहीन निर्णय…

25 जून 2024, मंगलवार, आषाढ़, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2081

रेल प्रशासन पता नही किस विचारधारा में काम कर रहा है। पहले निम्नलिखित परिपत्रक देखिए,

20413/14 वाराणसी इन्दौर वाराणसी वाया सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर काशी महाकाल द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस एवं 20415/16 वाराणसी इन्दौर वाराणसी वाया प्रयागराज काशी महाकाल साप्ताहिक एक्सप्रेस की कोच संरचना में बदलाव होने जा रहा है। इन फुल्ली रिजर्व्ड याने पूर्णतः आरक्षित यात्री गाड़ी में चार कोच द्वितीय साधारण (LWS) जुड़ने जा रहे है।

अब हम दिशाहीनता की बात करते है, जिसका उल्लेख हमने ब्लॉग के शीर्षक में किया है। पूर्णतः आरक्षित यात्री गाड़ी में द्वितीय साधारण कोच का जोड़ा जाना याने फिर वहीं अमर्याद अनारक्षित टिकटोंकी बिक्री और इन यात्रिओंकी आरक्षित कोच की ओर होनेवाली भागदौड़ शुरू हो सकती है।

भारतीय रेल में राजधानी, शताब्दी, दुरन्तो, हमसफ़र, गरीबरथ इस तरह की कुछ गाड़ियाँ फुल्ली रिजर्व्ड ट्रेन्स घोषित रहती है। इन गाड़ियोंके लिए यात्रा हेतु अनारक्षित टिकट नहीं दिया जाता। काशी महाकाल  यह पर्यटकों के लिए शुरू की गई प्रीमियम गाड़ी थी। ‘थी’ इसलिए कहेंगे की अब द्वितीय साधारण के कोच संरचना के साथ यह गाड़ी शायद सर्वसाधारण मेल/एक्सप्रेस के श्रेणी की गाड़ी बन कर रह जाएगी। आगे चलकर इसके समयसारणी में भी सुपरफास्ट से साधारण मेल/एक्सप्रेस श्रेणी का पतन होता हुवा दिखाई दे सकता है।

मित्रों, रेल प्रशासन उक्त पर्यटक हेतु विशेष संचालित इस गाड़ी में यात्रिओंकी सुविधा बढाना चाहता ही है तो इन द्वितीय श्रेणी साधारण कोच को 2S श्रेणी में याने द्वितीय श्रेणी आरक्षित सिटिंग श्रेणी में चलाए। आम तौर पर पर्यटक कभी भी अनारक्षित स्वरूप में यात्रा नही करता। चूँकि पर्यटन यह एक पूर्वनियोजित संकल्पना है और अनारक्षित यात्रा यह आकस्मिक यात्रा का कारण है और इसीलिए यह अनारक्षित कोच इस पर्यटन गाड़ी में बेमानी लग रहे है।

क्या रेल प्रशासन द्वारा, इस तरह अपनी प्रीमियम गाड़ियोंका अवपतन दिखाई देगा? क्या अब अन्य प्रीमियम गाड़ियोंमे भी द्वितीय साधारण कोच जोड़े जाएंगे? यह शुद्ध ठोस निर्णयोंमें दिशाहीनता का दर्शक है।

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