19 नवम्बर 2024, मंगलवार, मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2081
भारतीय रेल में यात्रा टिकट आरक्षण को लेकर बहुत जद्दोजहद है। पहली बात यह की जब चाहों, जिस तिथि और गाड़ी में चाहों आरक्षण मिल जाए यह लॉटरी लगने जैसा पल होता है। मगर कई बार परिस्थितियाँ विपरीत रहती है और जिस यात्री का कन्फर्म टिकट बन चुका है, उसकी जगह किसी अन्य पारिवारिक सदस्य को यात्रा पर भेजना पड़ता है। इन परिस्थितियों में भारतीय रेल में ‘चेंज ऑफ पैसेंजर’ अर्थात अन्य यात्री यह पर्याय उपलब्ध है। आइए देखते है इसकी नियमावली और प्रक्रिया किस तरह है।
आरक्षित यात्री परिवर्तन के लिए सबसे पहले केवल आरक्षित यात्री का ही परिवर्तन किया जा सकेगा। प्रतिक्षासूची यात्री के परिवर्तन को अनुमति नही है। गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशन से छूटने के समय से, कमसे कम चौबीस घण्टे पहले तक यात्री परिवर्तन की अर्जी की जा सकेगी। यात्री परिवर्तन केवल परिवार के अंतर्गत ही किया जा सकता है। इस परिवार का अर्थ माता, पिता, भाई, बहन, पुत्र, पुत्री तक सीमित है। चाचा, बुआ, मामा, मौसी, बहु, जवाई, सास, ससुर इनमें परिवर्तन नही किया जाता है।
आरक्षित यात्री द्वारा निकटतम रेलवे स्टेशन जहाँ कम्प्यूटराइज्ड रिजर्वेशन सेंटर (संगणकीकृत आरक्षण केंद्र ) हो, स्टेशन मैनेजर के नामे आवेदन पत्र देना होगा। इसमे आरक्षित यात्री का पहचान पत्र (आई डी), जिस व्यक्ति के नाम पर परावर्तित करना है, उसका पहचान पत्र, दोनों व्यक्ति एक परिवार से है, इस बात का प्रमाण (जैसे की राशन कार्ड), आरक्षित टिकट की प्रतिलिपि (यदि ई-टिकट निकाला गया हो तो उसके पीडीएफ फाइल की प्रिन्ट) यह सारे कागज़ात जोड़े जाए। हाँ, उन सारे संलग्न कागजात के ओरिजिनल्स आपके साथ होना आवश्यक है।
उपरोक्त कागज़ात का सेट स्थानीय स्टेशन मैनेजर के पास देना होगा। वह उसे अधिस्वीकृत कर मुख्य आरक्षण अधिकारी (CRS) को उक्त PNR में बदलाव करने की अनुमति देंगे और इस प्रकार स्थानीय आरक्षण कार्यालय में जाकर ‘चेन्ज ऑफ पैसेंजर’ की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। आरक्षण कार्यालय के अधिक्षक, यदि यात्री का आरक्षित टिकट PRS याने छपा टिकट होगा तो उसी टिकट पर बदलाव किया गया ऐसे लिखकर, हस्ताक्षर और मुहर लगा दी जाएगी और ई-टिकट होगा तो PDF प्रिन्ट पर परिवर्तन किया गया यह लिख दिया जाएगा।
हालाँकि जितना सरल यह काम दिखाया जाता है, सभी सरकारी कामकाज के भाँति, यह काम भी उतने सरलतापूर्वक रेल कर्मचारी होने नही देते। यदि किसी मण्डल मुख्यालय स्टेशन पर आप यह काम करवा रहे है, तो बजाय स्टेशन मैनेजर कार्यालय आपको मण्डल वाणिज्य अधिकारी DCM से अधिस्वीकृति लानी होंगी, और बहुत सहज है, की महज दस मिनट के काम के लिए आपको चार घण्टे या पूरा का पूरा दिन लग जाए और आप यह ठान ले की इससे बेहतर होता आप अपना कन्फर्म टिकट रद्द करवा लेते और दोबारा नया टिकट बनवा लेते।
दरअसल किसी एक ही परिवार में टिकट परिवर्तन करना है तो रेल विभाग उसे ऑनलाइन पद्धति से भी पूर्ण कर सकती है। यह ठीक अभी अभी शुरू की गई दिव्यांगजन के रियायती पास की तरह ही कागज़ात अपलोड करने से लिया जा सकता है। इससे यात्री को बहुत सुविधा होगी और रेल विभाग के कर्मचारियों के नियमित कार्यकलापों में भी अवांछित, अकस्मात काम की बाधा टाली जा सकेगी।

