29 मई 2025, गुरुवार, जेष्ठ, शुक्ल पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2082
रतलाम – नागदा के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना से रेल गाड़ियोंकी भीड़ कम होने को खासी मदत मिलेगी। अंतर्देशीय क्षेत्रों से बंदरगाहों तक कनेक्टिविटी बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

41.4 किलोमीटर लंबे रतलाम – नागदा खंड को चार लेन का बनाने के लिए 1,018 करोड़ रुपये मंजूर; परियोजना से पहले वर्ष में 38 करोड़ किलोग्राम कार्बन CO2 और 7.5 करोड़ लीटर डीजल की बचत होगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत मध्य प्रदेश के 80 रेलवे स्टेशनों का आधुनिक सुविधाओं के साथ पुनर्विकास किया जा रहा है।

रेल मंत्रालय ने सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 की तैयारियां शुरू की। सुगम यात्रा सुनिश्चित करने और श्रद्धालुओं की अपेक्षित भारी भीड़ को पूरा करने के लिए उच्च स्तरीय बैठकों की योजना बनाई गई।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने के लिए रीवा – पुणे, जबलपुर – रायपुर और ग्वालियर – बेंगलुरु के बीच, 3 नई यात्री सेवाओं के शुरुआत की घोषणा की। दो महीने के भीतर इनका परिचालन शुरू हो जाएगा।
केंद्रीय रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज नई दिल्ली स्थित रेल भवन में मीडिया से बातचीत की। आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा हाल ही में रतलाम और नागदा के बीच स्वीकृत तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना के बारे में मुख्य विवरण साझा करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने परियोजना के प्रमुख पहलुओं और मौजूदा रेल लाइनों पर भीड़भाड़ कम करने, माल ढुलाई और यात्री यातायात दक्षता बढ़ाने, महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारों में कनेक्टिविटी मजबूत करने तथा इसके पूरा होने की लक्षित समयसीमा पर प्रकाश डाला।
मीडिया को संबोधित करते हुए, अश्विनी वैष्णव ने इस परियोजना के रणनीतिक महत्व और व्यापक लाभों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि उच्च घनत्व नेटवर्क का हिस्सा 41.4 किलोमीटर का खंड ₹1,018 करोड़ की लागत से चार-लाइन वाला होगा, जिससे लाइन क्षमता उपयोग 116% से घटकर 65% रह जाएगा। रतलाम जंक्शन, यह नागदा (उत्तर), वडोदरा (दक्षिण), इंदौर (पूर्व) और चित्तौड़गढ़ (पश्चिम) जैसे प्रमुख जंक्शनों को जोड़ेगा, जो क्षेत्रीय और राष्ट्रीय संपर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह परियोजना मध्य प्रदेश से कांडला, मुंद्रा, पिपावाव, हजीरा, दहेज, जेएनपीए और प्रस्तावित वधावन बंदरगाह जैसे प्रमुख पश्चिमी तट बंदरगाहों तक माल की आवाजाही को बढ़ाएगी, जिससे मध्य और उत्तरी आर्थिक क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ इंदौर एसईजेड, छिंदवाड़ा एसईजेड, एमएमपीएल इंदौर, एमएमएलपी भोपाल, दिल्ली – मुंबई औद्योगिक गलियारा और नागदा थर्मल पावर प्लांट जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों और रतलाम क्षेत्र में संबंधित विस्कोस और रासायनिक उद्योगों को होगा।
रेल मंत्री ने आगे बताया की इस बुनियादी ढांचे के उन्नयन से कृषि वस्तुओं, कोयले, कंटेनरों और पेट्रोलियम उत्पादों का तेज़ और अधिक कुशल परिवहन होगा। खजुराहो, ग्वालियर, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, सांची स्तूप, उज्जैन, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, अमरकंटक और भीम जन्मभूमि जैसे विरासत और धार्मिक स्थलों तक बेहतर पहुंच के साथ मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
इस परियोजना से 28 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की उम्मीद है और पहले वर्ष में 38 करोड़ किलोग्राम कार्बन CO2 की बचत करके पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान मिलेगा – जो 1.5 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है – और 11वें वर्ष तक 16.5 करोड़ से अधिक पेड़ों की बचत होगी। इसके अतिरिक्त, 7.5 करोड़ लीटर डीजल की बचत होगी। वधावन बंदरगाह के चालू होने के बाद, माल यातायात पहले वर्ष में 7 MTPA से बढ़कर 11वें वर्ष तक 76.4 MTPA हो जाने का अनुमान है, जिससे भारत की रसद और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मंत्री ने यह भी बताया कि महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत मध्य प्रदेश के 80 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिसमें उन्नत यात्री सुविधाएं, बेहतर सौंदर्य और आधुनिक सुविधाएं होंगी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के लिए बजटीय आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और राज्य सरकार के साथ निकट समन्वय में परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। रेलवे अगले एक से दो वर्षों के भीतर राज्य में सभी प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास पर परिवर्तनकारी प्रभाव सुनिश्चित होगा।
डॉ. अंबेडकर नगर-नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस की भारी मांग और लंबी प्रतीक्षा सूची के जवाब में, श्री वैष्णव ने बढ़ते यात्री भार को संबोधित करने के लिए तीन नई यात्री सेवाओं की शुरुआत की घोषणा की। नई सेवाओं में रीवा से पुणे तक जबलपुर और सतना होते हुए एक ट्रेन, जबलपुर से रायपुर तक नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया होते हुए एक और ट्रेन और ग्वालियर से बेंगलुरु तक गुना और भोपाल होते हुए एक तीसरी ट्रेन शामिल होगी। इन ट्रेनों का संचालन अगले दो महीनों के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।
मध्यप्रदेश की रेल कनेक्टिविटी को मजबूती देने वाली रतलाम-नागदा मल्टी ट्रैकिंग परियोजना को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। यह परियोजना न सिर्फ मालवा अंचल बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक बड़ी सौगात मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को पन्ना से वर्चुअल रूप से जुड़ते हुए प्रेसवार्ता में इस निर्णय का स्वागत किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया।
रीवा – पुणे एक्सप्रेस: रीवा से जबलपुर, बालाघाट, गोंदिया, नागपुर, भुसावल, मनमाड़ होते हुए पुणे तक — विंध्य से महाराष्ट्र के लिए सीधा रेल सम्पर्क
जबलपुर – रायपुर एक्सप्रेस: जबलपुर से रायपुर, वाया नैनपुर, गोंदिया होते हुए महाकौशल से छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी मजबूत।
ग्वालियर – केएसआर बेंगलुरु सिटी एक्सप्रेस: ग्वालियर से गुना, भोपाल, नागपुर, बल्हारशहा, काचेगुड़ा, धर्मावरम, बेंगलुरु तक — दक्षिण भारत से सीधा जुड़ाव।

784 गांवों के 20 लाख से ज्यादा नागरिक होंगे लाभान्वित रतलाम-नागदा मल्टी ट्रैकिंग परियोजना के साथ महाराष्ट्र में वर्धा से बल्हारशाह के बीच चौथी लाइन बिछाने की योजना को भी स्वीकृति दी गई है। करीब 3,399 करोड़ रुपए की लागत वाली इन परियोजनाओं से दो राज्यों के लगभग 20 लाख लोग लाभान्वित होंगे और भारतीय रेलवे नेटवर्क का 176 किलोमीटर तक विस्तार होगा। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया, केंद्रीय मंत्री चैतन्य काश्यप, सांसद विष्णुदत्त शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी वर्चुअली उपस्थित रहे।
