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प्रतिक्षासूची पर रेल विभाग की गुलाटी; प्रतिक्षासूची में यात्री संख्या बढ़ाई जाएगी।

30 जून 2025, सोमवार, आषाढ़, कृष्ण पक्ष, पँचमी, विक्रम संवत 2082

हाल ही में जारी आदेश के तहत रेल आरक्षण की अमर्याद प्रतिक्षासूची को संकुचित करने हेतु, विभिन्न स्टेशनोंके कोटे से केवल 25% तक ही प्रतिक्षासूची के टिकट जारी करना शुरू किया गया। इस आदेश को इस तरह समझते है, जैसे किसी यात्री गाड़ी में फलाँ स्टेशन से 100 बर्थ का कोटा है। सारी 100 बर्थ बुक होने के बाद आगे केवल 25 बर्थ तक ही प्रतिक्षासूची के टिकट जारी किए जा रहे थे। छब्बीसवें टिकट के लिए ‘नॉट अवेलेबल’ या ‘रिग्रेट’ दिखाई देता था।

कुछ ऐसे हाल है, रेल आरक्षण के! उपरोक्त तस्वीर erail.in से साभार

प्रतिक्षासूची के संकुचन का उद्देश्य यह था की, चार्टिंग के बाद भी यात्रिओंकी भारी तादाद में प्रतिक्षासूची पर रह जाना, ई-टिकट प्रणाली में टिकटोंका रद्द होना और PRS पर जाकर प्रतिक्षासूची के टिकटोंको रद्द करना, इस तरह की परेशानी से यात्रिओंको मुक्ति दिलाना था। कुछ यात्री PRS के प्रतिक्षासूची टिकट लेकर वैसे ही आरक्षित यानों में चढ़ जाते थे, हालाँकि रेल विभाग, चार्टिंग के बाद प्रतिक्षासूची के टिकटोंपर आरक्षित यानोंमें यात्रा करना पहले ही वर्जित है और इस तरह की यात्रा करना दण्डित रहेगा यह घोषित कर चुका है। ऐसी अवस्था को काबू में करने के लिए केवल प्रतिक्षासूची के टिकटोंको सीमित संख्या में ही जारी करना यह अच्छा विकल्प था। रेल विभाग इस दिशा में अपने प्रयास का पहला कदम उठा चुकी थी और टिकिटिंग प्रणाली भी यह काम शुरू कर चुकी थी।

अचानक रेल विभाग ने अपनी घोषणा पर रोल बैक किया और जारी किए नए आदेशानुसार अब प्रतिक्षासूची के टिकट मूल कोटे से 25% की संख्या से बढ़ाकर 30 से 60% तक करने के आदेश जारी किए है।

नया आदेश :

पूर्व आदेश : जिसमे विभिन्न स्टेशनोंके निर्धारित कोटे से 25% यात्री संख्या तक प्रतिक्षासूची टिकट जारी करने के आदेश दिए गए।

क्या पूर्व आदेश जारी होने के चन्द दिनों में ही रेल गाड़ियोंमे बर्थ खाली चलने लगे थे? क्या यात्री इस संकुचित वेटिंगलिस्ट टिकट की संख्या से इतने हतोत्साहित हो गए थे की, आरक्षण काउंटर्स ओस पड़ गए थे। इतनी भी क्या जल्दी थी की रेल विभाग को अपने ही निर्णय पर गुलाटी मारनी पड़ी और पॉलिसी को आननफानन में बदलना पड़ा?

खैर, यह सारे निर्णय किसी प्रयोगके तौर पर लागू किए जा रहे है और बदले जा रहे है। रेल आरक्षण प्रणाली में आमूलचूल बदलाव होने जा रहा है। हो सकता है, आगे और भी उन्नत तकनीक के चलते यात्रिभिमुख, सकारात्मक बदलाव आएंगे। रेल विभाग अभी यह विभिन्न प्रयोग गाड़ियोंमे यात्री संख्या कम रहने के मौसम में कर रहा है जो की मुनासिब भी है। हालाँकि अवस्था यह है, भारतीय रेल में सभी सीज़न ‘पिक’ ही रहते है, अब कोई सीज़न ‘लीन’ नही रहा। गाड़ी प्रस्थान के तिथी से 60 दिन पूर्व आरक्षण शुरू होता है और चन्द मिनटों में गाड़ियाँ फुल्ल हो जा रही है। सामने त्याहारों का मौसम है, गणेशजी, दुर्गा पूजा, दशहरा, दीपावली छुट्टियाँ सब आनेवाली है और इस सीज़न के टिकट बुक हो रहे है।

बदलाव के बहार में एक गुलदस्ता यात्रिओंको मनचाही आरक्षित बर्थ के चुनाव करने का भी है, जैसे वह सिनेमा हॉल में खाली सीटों में से अपनी पसंदीदा सीट चुन सकता है। चलिए देखते है, क्या क्या नए बदलाव आएंगे!

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