Uncategorised

छह राज्यों के तेरह जिलों में लगभग 574 किलोमीटर रेल लाइनों की बढ़ोतरी के निर्माण कार्य को अनुमति दी गई।

31 जुलाई 2025, गुरुवार, श्रावण, शुक्ल पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2082

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 574 किलोमीटर की वृद्धि करते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और झारखंड राज्यों के 13 जिलों को कवर करने वाली चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को अनुमति दी।

कुल 11,169 करोड़ रुपये (लगभग) की अनुमानित लागत वाली ये परियोजनाएं वर्ष 2028-29 तक पूर्ण होंगी।

परियोजनाओं के निर्माण के दौरान लगभग 229 लाख मानव दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज रेल मंत्रालय की कुल 11,169 करोड़ रुपये (लगभग) लागत वाली चार परियोजनाओं को अनुमति प्रदान की। इन परियोजनाओं में सम्मिलित हैं:

इटारसी – नागपुर चौथी लाइन
औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) – परभणी दोहरीकरण
अलुआबारी रोड- न्यू जलपाईगुड़ी तीसरी और चौथी लाइन
डांगोपोसी- जारोली तीसरी और चौथी लाइन

बढ़ी हुई लाइन क्षमता गतिशीलता में काफी वृद्धि करेगी, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव संचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़ को कम करने के लिए निर्मित किए गए हैं। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नवीन भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र में व्यापक विकास के माध्यम से क्षेत्र के लोगों को “आत्मनिर्भर” बनाने के साथ-साथ रोजगार/स्वरोजगार के अवसर भी सृजित करेंगी।

परियोजनाओं की योजना पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पर बनाई गई है, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारक परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल संपर्कता और रसद दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध संपर्कता प्रदान करेंगी।

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और झारखंड राज्यों के 13 जिलों को कवर करने वाली चार परियोजनाओं से भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 574 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना लगभग 2,309 गांवों तक संपर्कता बढ़ाएगी, जिनकी जनसंख्या लगभग 43.60 लाख है।

ये कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, जिप्सम, फ्लाई ऐश, कंटेनर, कृषि उत्पाद और पेट्रोलियम उत्पादों आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 95.91 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) सामान की आवाजाही होगी। रेलवे, पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने, तेल आयात (16 करोड़ लीटर) कम करने और सीओ2 उत्सर्जन (515 करोड़ किलोग्राम) कम करने में मदद करेगा, जो 20 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

इटारसी – नागपुर के 297 किलोमीटर लम्बी चौथा रेल मार्ग

अनुमानित खर्च ₹5,451 करोड़

महाराष्ट्र के नागपुर एवं मध्यप्रदेश के बैतूल, नर्मदापुरम एवं पांढुर्णा जिले को लाभ

दिल्ली – चेन्नई ग्रैंट ट्रंक रेल मार्ग पर रेल आवाजाही को बड़ा फायदा

आलूबाड़ी रोड – न्यू जलपाईगुड़ी के 57 किलोमीटर के बीच नया तीसरा और चौथा रेल मार्ग

अनुमानित लागत ₹1,786 करोड़ पूर्वोत्तर राज्योंकी रेल सम्पर्कता बढ़ेगी।

बिहार के किशनगंज एवं पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग और उत्तर दिनाईपुर जिलों को लाभ

छत्रपति संभाजीनगर – परभणी के बीच 177 किलोमीटर रेल दोहरीकरण

अनुमानित लागत ₹2179 करोड़

मराठवाड़ा के लिए महत्वाकांक्षी रेल परियोजना, मुम्बई – सिकंदराबाद के बीच पर्यायी रेल सम्पर्क

संभाजीनगर के बढ़ते औद्योगिक क्षेत्र को लाभ

छत्रपति संभाजीनगर, जालना एवं परभणी ज़िले लाभान्वित

दांगोंआपोसी – जारोली के बीच 43 किलोमीटर में रेल की तीसरी एवं चौथी लाईन का निर्माण

अनुमानित लागत ₹1752 करोड़

पोलाद उत्पादन में सहायक

ओडिशा के केंदुआझार एवं झारखण्ड के पश्चिम सिंगभूम जिले को लाभ

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में घोषित 31 रेल परियोजनाएं

Leave a comment