22 जनवरी 2026, गुरुवार, पौष, शुक्ल पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2082
एक वक्त था, नई गाड़ियाँ, गाड़ियोंके विस्तार, गाड़ियोंके फेरे, नए स्टोपेजेस इत्यादि बदलाव केवल और केवल रेल बजट की घोषणाओं में होते थे। नई समयसारणी की यात्रिओंको उत्सुकता रहती थी। एक निर्धारित तिथि होती थी, जिसपर रेलवे स्टेशनोंके चक्कर लगा-लगाकर यात्री समयसारणी खरीदते थे और अपने रेल यात्रा के नियोजन हेतु सम्भाल कर रखते थे। कई रेल कर्मियों में इतनी परफेक्शन होती थी की वह केवल समय देखकर यह फलाँ गाड़ी होगी यह बता देते थे। मगर आज यह सब बदल गया है।
नई सरकार, नए नियम! रेल बजट आम बजट में समाहित कर दिया और बजट घोषणाओंकी सारी उत्सुकता हवा हो गई। आजकल नई गाड़ियाँ अमूमन राज्योंके चुनाव तिथियोंके बस चन्द दिनों पहले घोषित होती है। जिन राज्योंमें में चुनाव होने वाले है, वहाँ के निवासियों की चल निकलती है। उन्हें नई आधुनिक वन्देभारत, अमृतभारत जैसी गाड़ियोंकी सौगातें दी जाती है। जहाँ स्टोपेजेस माँग-माँग कर यात्रिओंके गले सुख जाते है, अर्जियाँ कर कर निराश हो जाते है, जरूरतों भरे स्टोपेजेस को लेकर रेल विभाग यात्री पदभार कम होने की दुहाइयाँ देते है, मगर चुनाव घोषणा के पहले सारे रोड़े, स्टेशनोंकी कमाई सब कहीं नजरअंदाज हो जाते है। स्टेशनोंकी ये लम्बी सूचियाँ परिपत्रोंमें टंगी नजर आती है। हाल ही के उदाहरण, बिहार, पश्चिम बंगाल और अब केरल, तमिलनाडु।
गौरतलब यह है, यात्री सुविधाओं को तो कभी भी शुरू करवाइए बेहतर ही है। चाहे नई गाड़ियाँ हो, नए स्टोपेजेस हो, स्टेशन छोटा हो या बड़ा, स्टोपेज मिला है तो भाई, यह भारत है! यहाँ प्रचण्ड जनसंख्या है, गाड़ी कहीं से कहीं चलवा दीजिए, कहीं स्टोपेजेस बढ़ा दीजिए, यात्री भार मिलना तय है। लेकिन घोषणाओं समय, एकदम वहीं, निकटतम चुनावी तिथियाँ।
अच्छा, एक फण्डा और है। नई आधुनिक गाड़ियाँ जिनके रैक बहुत कम संख्या में उपलब्ध है मगर क्षेत्र तो ज्यादा साधना है, फिर उन्हें हर एक दिन अलग अलग मार्गोंपर साप्ताहिक स्वरूप में चला दिया जाता है। मार्ग पर यात्रिओंकी मांग भले ही हो न हो या प्रतिदिन की हो। अब देखिए, अमृतभारत जैसी ग़ैरवातानुकूलित गाड़ी, जिसमे भी अनारक्षित यान ज्यादा, क्यों नही भर भर कर चलेगी? वहीं कुछ प्रीमियम गाड़ियाँ है, जिन्हें महंगे किरायोंके चलते यात्रिओंकी प्रतीक्षा है।
एक बात और आपके ज़हन में कौंधी तो होगी जिस तरह एक प्रतिनिधि तमाम ‘टैरिफ’ की बेबाक़ फ़रमान निकालते है, लगभग इधर भी अब तक तमाम प्रीमियम गाड़ियोंके शुभारंभ हमारे माननीय के शुभ हस्ते ही हुए है। उक्त विभाग के मुखिया के हिस्से में तो दुय्यम दर्जो की गाड़ियाँ आती है। खैर, हमारे देश के सिरमौर है, उन्हें शोभा भी देता है, और देश की जनता भी बेताब रहती है, दौरा घोषित हुवा है, जरूर कुछ न कुछ नई गाड़ी आने वाली है।

चलिए, यह हम सब रेल यात्रिओंके ‘मन की बात’ ही कर रहे है। आखिर यात्री को बेहतर सुविधाएं मिलती है, गाड़ियाँ उपलब्ध हो रही है, स्टोपेजेस बढ़ रहे है तो भाई यात्री तो खुश है। माननीय जल्द जल्द ऐसे इलाकोंके दौरे करें, जहाँ यात्रिओंको रेल सुविधाओं की आवश्यकताएं है।
AI image : chatGPT
