19 मार्च 2026, गुरुवार, चैत्र, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा, विक्रम संवत 2083
रेल विभाग यह मानता है, की रेल परिसर एवं रेल गाड़ियोंमें अनधिकृत विक्रेता खाद्य सामग्री की बिक्री करते है। हालाँकि इस तरीकेसे रेल में फेरी लगाकर सामान बेचना दण्डनीय अपराध है और रेल एवं आईआरसीटीसी के अधिकारी, रेल सुरक्षा बल को साथ ले कर विशेष अभियान चलाकर इन्हें धरते है।
रेल विभाग अब अधिकृत विक्रेताओं को QR कोड सक्षम पहचान पत्र जारी करेगी। साथ ही खाद्य सामग्रियों के पैकिंग पर भी QR कोड लगवाया जाएगा। विस्तृत सूचना निम्नप्रकार है,



आम यात्रिओंका यह कहना है, QR कोड रेल विभाग के जाँच करने वाले दल के लिए ठीक है, आम यात्रिओंके लिए तो रेल विभाग का आश्वासन महत्व का है, की इन तमाम व्यवस्था के बाद उसे खराब खाना न मिले, अनधिकृत विक्रेताओं से उसकी माथापच्ची करने की नौबत कभी न आए और यदि कोई अधिकृत विक्रेता उससे दुर्व्यवहार करता है तो उसके शिकायत की फौरन दख़ल ली जाए।
दरअसल रेल यात्रा में अनधिकृत विक्रेताओं की तो छोड़िए, आजकल अधिकृत वैंडर्स से ही बहुत विवाद होते है। कोई यात्री, इन वेन्डर्स की शिकायत करता है तो उसकी पूछताछ आईआरसीटीसी द्वारा की जाती है और संबंधित संस्था या एजेंसी को दण्डित किया जाता है। इससे यात्री को सीधे तौर पर कोई समाधान नही मिलता, उसे कई बार शिकायत का फॉलोअप लेने के बाद सूचित कर दिया जाता है की संबंधित व्यक्ती को दण्डित किया गया है, बस। जबकि यात्री की अपेक्षा रहती है, उसे जो भी परेशानी हुई है या खाद्यान्न में ज्यादा चार्ज किया है उसका समाधान हो, उसे कोई राहत मिले मगर आईआरसीटीसी द्वारा ऐसा कुछ नही किया जाता।
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है, रेल यात्रा के दौरान यात्री और विक्रेता सीधे आमने-सामने रहते है। छोटे से विवाद पर बड़ा बवाल हो जाता है। इसमे यात्री अकेला पड़ जाता है, जबकि विक्रेताओं का गुट हाथापाई तक उतर जाता है। रेल विभाग या आईआरसीटीसी यह सुनिश्चित करें कि सभी अधीकृत विक्रेता यात्री के प्रति विनम्र हो, व्यवहार केवल बिल देकर ही किया जाए और खाद्यान्न के दाम मीनू पर दर्ज अनुसार ही लिए जाए। यात्री या वेन्डर्स किसी की शिकायत पर वेन्डर्स के मैनेजर का निर्णय, बयान या उसने किस तरह समाधान किया इस पर विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। यात्री की शिकायत का समाधान हो सके जब तक मौक़े पर हो ऐसी व्यवस्था रेल प्रशासन द्वारा होना चाहिए।
रही बात अनधिकृत विक्रेताओं की, इसके लिए स्थानीय सुरक्षा बल को जिम्मेदारी सौप देनी चाहिए। यदि यात्री की, अनधिकृत विक्रेताओं सम्बन्धी कोई भी शिकायत आती है तो रेल प्रशासन उसकी पड़ताल सीधे स्थानीय सुरक्षा बल के कर्मी जिसे इस व्यवस्था को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उस से की जानी चाहिए। व्यवस्था में खामी पाई जाती है तो जिम्मेदार व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई की जाए। इस तरह कामकाज रहा तो कुछ ही दिनों में सम्पूर्ण रेल विभाग अनधिकृत विक्रेता मुक्त किया जा सकता है।
