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‘हम जहाँ खड़े होते है, लाईन वहींसे शुरू होती है’

जालना – जलगाँव रेल मार्ग सर्वेक्षण का टेण्डर
जालना पीट लाइन

पोस्ट का शीर्षक बहुत कुछ कह रहा है। मराठवाड़ा में यात्रिओंकी ढेर मांगे अनसुनी है। आज भी हिंगोली जिला मुख्यालय से राजधानी मुम्बई के लिए सीधा रेल सम्पर्क उपलब्ध नही है। यात्री गाड़ियोंके कमी की लगातार मांग होती रही है। ऐसे में अचानक क्षेत्र को रेल मंत्रालय मिल जाये तो किस तरह प्रोजेक्ट्स “अम्ब्रेला” ही नहीं “पैराशूट” से क्षेत्र में टपकते है। जालना पीट लाइन, जालना – जलगाँव रेल मार्ग का सर्वे यह उदाहरण है।

खैर, वर्षोंसे प्रताड़ित, प्रलंबित रेल प्रोजेक्ट्स को किधर से ही सही, राह मिली यह महत्वपूर्ण बात है। औरंगाबाद में न हो और जालना में पीट लाईन हो जाये या जालना ही जलगाँव, भुसावल, खामगांव से जुड़ जाता है तो भी क्षेत्र में रेल गाड़ियोंकी आवाजाही बढ़ेगी। वैसे भी मनमाड – औरंगाबाद और अकोला – पूर्णा – नांदेड़ विद्युतीकरण प्रगतिपथ पर है।

अच्छा है, अब क्षेत्र में यात्री गाड़ियाँ भी बढ़ने की खबरें चलने लगे तो, ‘हर गंगे!’

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आखिर माज़रा क्या है इन मेल/एक्सप्रेस के आरक्षित/अनारक्षित टिकटोंका? भैया, जनरल टिकट 11 मार्च को मिलना शुरू होगा या 01 जुलाई को?

भारतीय रेल मे द्वितीय श्रेणी साधारण अर्थात आम यात्री की भाषा मे चालू टिकट, जनरल टिकट का अनन्य साधारण महत्व है। ये वह टिकट है की, यात्री की बस इच्छा या अचानक ही रेल मे यात्रा करने की जरूरत, बस स्टेशन पहुँच जाइए, टिकट खिड़की से टिकट लीजिए और गाड़ी के द्वितीय श्रेणी जनरल डिब्बे मे यात्रा शुरू कर लीजिए। संक्रमण काल के दौरान यह सभी डिब्बे रेल प्रशासन ने अग्रिम आरक्षित व्यवस्था मे बदल दिए थे। सभी नियमित मेल/एक्सप्रेस गाडियाँ विशेष श्रेणी ‘0’ नंबर से चलाई जा रही थी। खैर, यह बात तो पुरानी हुई और अब रेल प्रशासन ने गाडियाँ नियमित गाड़ी क्रमांक से चलानी शुरू कर दी मगर आरक्षित द्वितीय श्रेणी 2S यह वर्ग बरकरार था। यात्रीओंकी लगातार मांग के चलते आखिरकार रेल प्रशासन ने सभी नियमित लंबी दूरी की मेल/एक्स्प्रेस/सुपरफास्ट गाड़ियों और जो भी ऐसी गाडियाँ है जिनमे द्वितीय श्रेणी के डिब्बों को 2S आरक्षित द्वितीय सीटींग मे बदला गया था जिनमे अंत्योदय, जनसाधारण आदि गाडियाँ शामिल है उनकी जनरल अनारक्षित श्रेणी को पुनर्स्थापित करने का आदेश जारी कर दिया। देखिए निम्नलिखित पत्र;

रेल प्रशासन दिनांक 28 फरवरी को आदेश जारी कर कह दिया, जो भी नियमित गाडियाँ चल रही है उनमे द्वितीय श्रेणी यानों की आरक्षित या अनारक्षित स्थिति संक्रमनपूर्व काल मे थी, उसे फिर बहाल कर दिया जाए। चूँकि रेल्वे की आरक्षण प्रणाली मे लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे ARP अग्रिम आरक्षण अवधि 120 दिनों की है, तो आदेश भले ही 28 फरवरी का है मगर कई यात्रीओं ने 120 दिनों तक मतलब जून महीने की आखिर तक 2S के आरक्षण कर रखे है अतः रेल प्रशासन ने यह ARP अवधि या कोई बुकिंग न हो ऐसी तारीख से यह अनारक्षित द्वितीय श्रेणी व्यवस्था लागू किए जाने की सूचना सभी क्षेत्रीय रेल को की। अब प्रत्येक क्षेत्रीय रेल्वे ने अपने क्षेत्र से चलनेवाली लम्बी दूरी की गाडियाँ जिनमे पहले द्वितीय श्रेणी साधारण डिब्बे उपलब्ध थे, उनकी सूची बनाई और एक तारीख 01 जुलाई तय कर दी ताकि यह व्यवस्था समान रूप से सभी क्षेत्रीय रेल्वे मे लागू की जा सके। हालांकि परिचालन मे अलग अलग स्टेशनोंपर 1-2 दिन का फर्क या सकता है मगर यह तय है की मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंमे जनरल टिकट जारी होने की तारीख 01 जुलाई रहेंगी। साथ ही संबंधित क्षेत्रीय रेल्वे के अंतर्गत चलनेवाली इंटरसिटी गाडियाँ जिनकी ARP अवधि 120 दिनों से कम है या ऐसा टर्मिनल स्टेशन जो अलग निकटतम क्षेत्रीय रेल्वे मे पड़ता है ऐसी गाड़ियों पर उपरोक्त निर्णय करना अभी बाकी रखा गया है। आप पश्चिम रेल्वे का उपरोक्त विषय पर जारी किया पत्र देख सकते है। परे ने 200 गाड़ियोंकी सूची भी पत्र के साथ प्रकाशित की थी।

अब पेंच फंस कहा रहा है? तो उत्तर पश्चिम रेल्वे के निम्नलिखित ट्विट्स पर,

उपरोक्त ट्वीट देखिए, NWR के ट्वीट यह साफ दर्शाते है की, द्वितीय श्रेणी सामान्य टिकटें 11 मार्च से मिलना शुरू हो जाएगी, यात्री उ प रेल्वे की सूची मे प्रकाशित 97 लंबी दूरी की मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंके द्वितीय श्रेणी यानों मे अनारक्षित टिकट लेकर यात्रा कर पाएंगे। अब एक नजर NWR के CCM/ PS & PM के निम्नलिखित पत्र पर भी डाल लीजिए, जरा बताइए, कहाँ लिखा है की 11 मार्च से सूची की 97 गाड़ियोंमे अनारक्षित टिकट जारी किए जाएंगे? अधिकारी ने यह उद्धृत किया है, की 11 मार्च से प्रणाली मे बदलाव किए जाएंगे। लेकिन उसका अनर्थ किया गया और क्षेत्र के तमाम वृत्तपत्रों मे खबरें छप गई की बस! 11 मार्च से 97 गाड़ियों मे अनारक्षित डिब्बों मे यात्री अपना चालू, जनरल टिकट लेकर यात्रा कर पाएगा।

अब देखना यह है, सूची मे प्रकाशित 97 लम्बी दूरी की NWR के अलावा अन्य क्षेत्र की मेल/एक्स्प्रेस एवं सुपरफास्ट गाड़ियों मे क्या और किस तरह द्वितीय श्रेणी अनारक्षित टिकटों का आबंटन NWR करने वाला है? पूर्व मे 2S कोचों मे अग्रिम आरक्षण कर चुके मार्ग के ठहरावों से गाड़ी मे चढ़ने वाले यात्रीओं का क्या होगा, क्या उन्हे अपनी महीनों पहले की गई आरक्षित जगह मिलेगी या NWR के स्टेशनोंसे चढ़े अनारक्षित यात्रीओंसे टकराव और विवाद करना होगा?

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कोंकण रेल्वे की विस्तृत मान्सून समयसारणी

भारतीय रेल मे कोंकण रेल्वे ऐसा विभाग है की जिसका प्रत्येक वर्ष में 10 जून से 31 अक्टूबर तक नियमित समयसारणीसे अलग मान्सून टाइमटेबल रहता है। इतर क्षेत्रों से जैसे ही कोंकण रेल्वे क्षेत्र मे यात्री गाडियाँ प्रवेश करती है, उनकी समयसारणी मे बदलाव अर्थात थोड़े से ढीलेढाली समयसारणी लागू हो जाती है। कोंकण रेल्वे पूरा घाट सेक्शन है, बरसातों मे अक्सर पहाड़ों से चट्टान, मिट्टी खिसककर रेल्वे मार्ग पर या जाती है। इसीलिए यह समयसारणी थोड़े लूज टाइमिंगज् वाली रहती है। आइए देखते है,

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भारतीय रेल से आईआरसीटीसी है या आईआरसीटीसीसे भारतीय रेल?

यह कैसा सवाल है? भारतीय रेल विशाल हाथी है तो आईआरसीटीसी उसका महज एक भाग, एक उपकम्पनी। लेकिन मित्रों, आईआरसीटीसी प्रति निकले जनमानस के यह बोल जब कोई रेल अधिकारी बोलता है तो सहज ही समझ आता है, की रेल अधिकारियोंको आईआरसीटीसी की बेपरवाह कार्यशैली से कितनी नफ़रत है।

आईआरसीटीसी यह भारतीय रेलवे की मुख्यतः ई बिजनेस संभालने वाली वाणिज्यिक कम्पनी है, जो भारतीय शेयर बाजारोंमें लिस्टेड भी है। भारतीय रेलवे के ई-टिकटिंग यह इस कम्पनी के आय का प्रमुख स्रोत है और एकाधिकार वाला व्यवसाय है। जी मोनोपोली बिजनेस। कोई चैलेंज ही नही, सम्पूर्ण एकाधिकार। रेलवे की टिकट खिड़की से निकलने वाले PRS टिकट दिनों दिन कम होते जा रहे है और ई-टिकीटिंग का व्यवसाय फलफूल रहा है।

खैर! यह रेल प्रशासन का अन्तर्गत मामला है। मगर आईआरसीटीसी उनके द्वारा ई-टिकट निकाले हुए यात्रिओंके प्रति अपनी जिम्मेदारी का वहन योग्य प्रकार से करती है? शायद कभी नही। इसके हमारे पास हर दिन के उदाहरण मिल जाएंगे। ताजा उदाहरण लीजिए, दिनांक 03 मार्च को हजरत निजामुद्दीन से वास्को की ओर जानेवाली 12780 गोवा एक्सप्रेस दौंड स्टेशन से मीरज स्टेशन के बीच मार्ग परिवर्तन कर चलनेवाली थी। यह गाड़ी अपने नियमित मार्ग के पुणे, सातारा, सांगली स्टेशनोंको स्किप अर्थात छोड़कर दौंड, कुरदुवाडी, पंढरपुर होकर मीरज पहुंचने वाली थी। इस सम्बंध में भारतीय रेलवे द्वारा परिपत्रक 27-28 फरवरी को जाहिर हो गए थे, क्या आईआरसीटीसी को यह पता नही था? लेकिन 03 मार्च को हज़रत निजामुद्दीन का चार्ट तैयार किये जाने तक किसी भी कन्फ़र्म यात्री को इसकी सूचना आईआरसीटीसी द्वारा नही दी गयी। भोपाल से आगे मनमाड़ तक के यात्रिओंको जिनके पुणे, सातारा, सांगली के कन्फर्म टिकट थे उन्हें, भोपाल चार्टिंग के वक्त याने 03 मार्च को रात 20:00 के बाद मैसेजेस मिले। क्या यह उचित है?

जल्द मेसेज न देने की वजह टिकट रद्दीकरण के 100% धनवापसी को बचाए रखना यह तो नही? बिल्कुल यही होगी। लेकिन आपके महज कुछ रुपयोंको कमाने का चक्कर और यात्रिओंके प्रति अक्षम्य लापरवाही के चलते कितने ही वरिष्ठ नागरिक, महिला, कामकाजी यात्रिओंको इससे बेइंतहा परेशानी हुई। दौंड में गाड़ी बदलकर पुणे पहुंचना पड़ा या आगे रोड़ से यात्रा करनी पड़ी।

आईआरसीटीसी कहने को भारतीय रेल की उपकम्पनी है, मगर केवल पैसा कमाना यही इस कम्पनी का उद्देश्य है, जिम्मेदारी वहन के मामले में बिल्कुल जीरो। क्योंकी इनके लापरवाही का भुगतान रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों को झेलना पड़ता है। आईआरसीटीसी धरातल पर कभी नजर नही आती। टिकीटिंग सॉफ्टवेयर, प्रणाली भारतीय रेल के CRIS के जिम्मे, टिकट निकालता है यात्री खुद, इनको हर्र लगे न फिटकरी और रंग चोखा चोखा। बस पैसे बनाना है।

आईआरसीटीसी की यही मलाई खाने वाली प्रवृत्ति को देख, हाल ही में यह सुना जा रहा है की, रेलवे की CRIS और रेलटेल कम्पनी को इसमें सम्मिलित करने की सूचनाएं अर्थ विभाग द्वारा की गई है। ताकि आईआरसीटीसी पर कुछ तो संभालने की जिम्मेदारी तय हो? आईआरसीटीसी के बेपरवाह, गैरजिम्मेदाराना हरकतों को काबू में लाने के लिए न सिर्फ इस तरह के निर्णयों को जरूरत है अपितु इनके मोनोपोली बिजनेस जिसने भारतीय रेल ई-टिकट, तमाम खानपान के स्टॉल्स, पैंट्री कार के ठेके, पर्यटन कराने वाली गाड़ियाँ, रिटायरिंग रूम्स आदि को भी भारतीय रेल के द्वारा विकेंद्रीकरण करना जरूरी है। भारतीय रेल ने खुद ही खानपान, पर्यटन और ई-टिकीटिंग व्यवसाय के यथासंभव निविदाएं निकालकर दूसरी सक्षम व्यवस्थाएं निर्माण करना चाहिए। तभी यह एकाधिकारशाही पर लगाम कसी जा सकती है ऐसी सभी पीड़ित रेल यात्री और रेल कर्मियोंकी कामना है।