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तेजस के रैक वाली राजधानी एक्सप्रेस गाड़ियोंकी किराया तालिका

हाल ही में 02951/52 मुम्बई नई दिल्ली के बीच चलनेवाली राजधानी एक्सप्रेस गाड़ियोंको अत्याधुनिक तेजस एक्सप्रेस के कोचेस से चलाया जाना शुरू किया गया है। इन तेजस कोचेस की विशेषताओं पर हमारे ब्लॉग में पोस्ट आ चुका है। इन रैक के लिए राजधानी गाड़ियोंकी अलग किराया तालिका बनाई गई है। राजधानी एक्सप्रेस के बेसिक किराया दरों से तेजस रैक वाली राजधानी गाड़ी का किराया लगभग 5 प्रतिशत ज्यादा रहेगा। इसके अलावा राजधानी एक्सप्रेस में जितने भी अतिरिक्त सरचार्ज लगाए जाते है, जैसे की आरक्षण, सुपरफास्ट, प्रीमियम इत्यादि यथावत लगते रहेंगे।

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क्या सचमुच स्टेशन, रेल गाड़ियाँ, पटरियाँ बिक गयी, या बेची जाएंगी?

हमारे देश मे आजकल एक अलग विचारधारा चलाई जाती है। एक तरफ बरसों पुराने या यूं कह सकते है की सदियों पुराने गन्दे से माहौल से रेलवे स्टेशन, रेल गाड़ियाँ, कुछ कर्मचारियोंकी अकर्मण्यता को ढर्रे पर ला कर एक नए साफ-सुथरे, सुन्दर लोकोपयोगी वातावरण में ले जाया जा रहा है तो दूसरी तरफ आम यात्रिओंको अज्ञानता भरी बातें कह कर बरगलाया जा रहा है।

आप बिलकुल सहजता से आजसे 8-10 वर्ष पहले के रेलवे स्टेशनों, गाड़ियों और उनकी सुविधाओंमें आया फर्क समझ सकते है। भुसावल यह मध्य रेलवे का मण्डल है, बहुत बड़ा जंक्शन है। एक जमाना था, हम लोग उम्रदराज यात्रियों और दिव्यंगों के लिए रैम्प की मांग करते रहते थे और रेलवे की ओरसे जवाब तक नही आता था। अधिकारी वर्ग में इस रैम्प के मांग की हँसी उड़ाई जाती थी। आज वहीं अधिकारियोंके पद है और तमाम भारतभर में न सिर्फ भुसावल बल्कि लगभग हर जंक्शन स्टेशन जहाँपर यात्री संख्या ज्यादा है, रैम्प बनाए गए है और बनाए जा रहे है।

रेम्प की क्या बात है, कई ऐसे रेलवे स्टेशन है की वहांके स्थानीय यात्रिओंने अपनी जिंदगी शायद पहली बार किसी एस्कलेटर पर कदम धरा हो, या भारतीय रेलवे स्टेशनोंपर 1 या 2 नही 4-4 लिफ्ट लगाए जाने का सपना देखा हो, मगर यह अब हकीकत है। एक वक्त था, स्टेशनोंपर कूड़ा-कचरा फेंकने के लिए कूड़ादान भी ढूंढने पड़ते थे वहाँ अब कचरे का नामोनिशान तक नही रहता।

जो इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल डिस्प्ले केवल मुम्बई जैसे महानगरों के रेलवे स्टेशनोंकी शोभा हुवा करते थे, वो आज सभी भारतीय रेलवे स्टेशनोंके बड़े, मझौले स्टेशनोंपर यात्रिओंकी सेवा के लिए लगाए गए है। रेलवे स्टेशन की हालात इस कदर सुधारी गई है कि पहले प्लेटफार्म पर गाड़ी पहुंचती थी तो मख्खियों के झुंड उठते थे, प्लेटफार्म के बगल की पटरियों पर भयावह गन्द रहती थी। उसकी जगह आकर्षक, साफसुथरे, चकाचक ग्रेनाइट कोटा स्टोन से सजे प्लेटफार्म दिखते है।

रेलगाड़ियाँ भी दिन ब दिन आधुनिक LHB कोच से सुसज्जित की जा रही है। गाड़ियोंकी गति में सुधार किया जा रहा है। प्रदूषण बढाने वाले डीजल लोको को धीरे धीरे कम कर सम्पूर्ण विद्युतीकरण की ओर भारतीय रेल को ले जाया जा रहा है। कई रेलवे स्टेशनोंपर सोलर विद्युतीकरण से कामकाज किया जा रहा है। रेल प्रोजेक्ट्स अब सिर्फ घोषणाएं ही नही रह जाती बल्कि उनको धरातल पर लाने की छटपटाहट बड़ी आसानी से समझ आती है।

यह सारी बाते हम इस लिए कह पा रहे है, क्योंकि हमने वह रेलवे स्टेशनोंके दृश्य भी जिए है और आज के आधुनिक सुविधाओंसे भरपूर व्यवस्थाओके भी लाभ लिए जा रहे है। जब हमारे दिव्यांग या बुजुर्ग यात्री बन्धुओंको बैटरी चलित गाड़ियोंसे रैम्प के जरिए ठेठ प्लेटफार्म पर गाडीके डिब्बे के पास उतरते देखते है तो सचमुच सार्थकता महसूस करते है। ऐसा लगता है, यह है सार्वजनिक व्यवस्थाओं में सुधार।

प्रोजेक्ट्स घोषित होते है और मशीनरी धड़क जाती है, काम शुरू हो जाते है। नजरों के सामने ही धड़ाधड़ विद्युतीकरण, एक लाइन की दो और दो की तीन रेल लाइन बढ़ती जा रही है। गाड़ियाँ 130 kmph की स्पीड दिखा रही है। रेलवे स्टेशनोंपर तारांकित होटल्स बनाए जा रहे है। रेलवे की टिकटें आजकल स्कूली बच्चे अपने मोबाइल पर यूँ बना देते है। है ना बदलाव?

मगर दोस्तों, हम तो पहले भी स्टेशनोंपर जाते थे, सामान ज्यादा होता या बुजुर्ग, दिव्यांग यात्री साथ रहते तो कुली उनको उठाकर प्लेटफार्म पार कराते। गाड़ियाँ आने पर अपने डिब्बों को ढूंढने भागदौड़ कर लेते। गन्दगी, कूड़ा करटक सार्वजनिक जगहोंपर देखना आदतन था। तो बताइए क्या वह सब ठीक था? इतना सुधार, सुविधाएं जिन्हें हम एक सपने की तरह देखते थे, हमारे नजरोंके सामने है जिनपर हम कुछ सुनते ही नही और ऐसी आधीअधुरी अज्ञानतापूर्ण बातें सुनकर अपने विचारों को खराब करते है।

जितनी भी PPP या निजीकरण की योजनाएं है उनका विस्तृत ब्यौरा रेलवे की वेबसाइटों पर उपलब्ध होता है, जिन्हें आप देखकर समझ सकते है की बेचना क्या होता है और किराएपर, लीज पे देना क्या होता है।

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दक्षिण पूर्व रेल SER के IRTTC टाइमटेबल कमिटी मीटिंग के प्रस्ताव

नई गाड़ियोंके प्रस्ताव

राँची नई दिल्ली राँची राजधानी साप्ताहिक

राँची लोकमान्य तिलक टर्मिनस राँची साप्ताहिक वाया लोहारड़गा, टोरी, डाल्टनगंज, चोपन, जबलपुर, भुसावल

राँची सूरत/उधना/अहमदाबाद राँची साप्ताहिक

टाटानगर जयनगर टाटानगर साप्ताहिक वाया आसनसोल, जसीडीह, झाझा, भागलपुर, बरौनी, दरभंगा

भाँजपुर पुरी भाँजपुर साप्ताहिक वाया बारिपडा, रूपसा, भद्रख, जाजपुर क्योंझर रोड, कटक, भुबनेश्वर, खुर्दा रोड

मेमू गाड़ियाँ

आद्रा बोकारो स्टील सिटी आद्रा प्रतिदिन मेमू

बोकारो स्टील सिटी टाटानगर बोकारो स्टील सिटी वाया मुरी, चांदिल प्रतिदिन मेमू

टाटानगर राउरकेला टाटानगर प्रतिदिन मेमू

राउरकेला बिमित्रापुर राउरकेला प्रतिदिन मेमू

हटिया राउरकेला हटिया प्रतिदिन मेमू

राँची बोडाग्राम राँची प्रतिदिन 3 जोड़ी मेमू

रूपसा बांगरीपोसी रूपसा प्रतिदिन 3 जोड़ी मेमू

बांकुड़ा सोनामुखी बांकुड़ा प्रतिदिन/सप्ताह में 5 दिन मेमू

पुरुलिया – आद्रा – बांकुड़ा – गारबेटा के बीच 3 जोड़ी प्रतिदिन मेमू

खड़गपुर झाड़ग्राम खड़गपुर सप्ताह में 6 दिन मेमू

मिदनापुर दिघा मिदनापुर प्रतिदिन emu

पानसकुरा हल्दिया पानसकुरा प्रतिदिन emu

गाड़ियोंका विस्तार

12222/21 हावडा पुणे हावडा द्विसाप्ताहिक दुरान्तो का पुणे से आगे मडगाँव तक विस्तार

18640/39 राँची आरा राँची साप्ताहिक एक्सप्रेस का फेरे बढ़कर त्रिसाप्ताहिक करना और आरा से आगे बक्सर या छपरा तक विस्तार करना

13307/08 धनबाद फिरोजपुर धनबाद गंगा सतलज प्रतिदिन एक्सप्रेस का राजाबेरा होते हुए राँची तक विस्तार करना

18611/12 राँची बनारस (मंडुआडीह) राँची सप्ताह में 4 दिन चलनेवाली एक्सप्रेस को साप्ताहिक रूपसे बनारस से आगे देहरादून तक विस्तार करना

18183/84 टाटानगर दानापुर टाटानगर प्रतिदिन एक्सप्रेस का दानापुर से आगे बक्सर तक विस्तार करना

फेरे बढाना, गन्तव्य में बदलाव आदि मांगे

18007/08 शालीमार भाँजपुर शालीमार त्रिसाप्ताहिक सिमलीपाल एक्सप्रेस के सप्ताह में 4 दिन करना

12847/48 हावडा दिघा हावडा वातानुकूलित प्रतिदिन एक्सप्रेस में 4 कोच स्लिपर क्लास के लगवाना

18007/08 सिमलीपाल एक्सप्रेस को शालीमार की जगह सांतरागाछी से भाँजपुर के बीच चलाना।

12887/88 हावडा पुरी हावडा साप्ताहिक को हावडा की जगह शालीमार पुरी के बीच चलाना।

12895/96 हावडा पुरी हावडा साप्ताहिक को हावडा की जगह शालीमार पुरी के बीच चलाना।

12881/82 हावडा पुरी हावडा द्विसाप्ताहिक गरीबरथ को हावडा की जगह शालीमार पुरी के बीच चलाना।

22803/04 हावडा सम्बलपुर हावडा साप्ताहिक को हावड़ा की जगह शालीमार सम्बलपुर के बीच चलाना।

18047/48 हावडा वास्को हावडा सप्ताह में 4 दिन चलनेवाली अमरावती एक्सप्रेस को हावडा की जगह शालीमार वास्को के बीच चलाना।

12867/68 हावडा पुड्डुचेरी हावडा साप्ताहिक को हावडा की जगह शालीमार पुड्डुचेरी के बीच चलाना।

12152/51 हावडा लोकमान्य तिलक टर्मिनस हावडा द्विसाप्ताहिक समरसता एक्सप्रेस को हावडा की जगह शालीमार लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच चलाना।

ठहराव स्टापेजेस की मांग

हावडा की ओर जानेवाली, हावडा में समाप्त होने वाली दस गाड़ियोंको सांतरागाछी स्टेशनपर ठहराव का प्रस्ताव है।

यात्रीगण कृपया ध्यान दीजिए, उपरोक्त सारे प्रस्ताव द पु रेल SER की ओरसे टाइमटेबल कमिटी की मीटिंग में चर्चा कर रेलवे बोर्ड के सामने रखे गए है। इन प्रस्तावोंपर रेलवे बोर्ड का निर्णय होता है, तभी कोई कार्यवाही होती है।

साभार : http://www.indiarailinfo.com

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रायपुर – टिटलागढ़ के बीच लम्बा रेल ब्लॉक, बहुतसी गाड़ियाँ रहेंगी रद्द

रेल्वे प्रशासन द्वारा रायपुर मण्डलमे दोहरीकरण और विद्युतीकरण का कार्य, नॉन इंटरलॉकिंग,पॉवर ब्लॉक यार्ड रिमॉडलिंग का कार्य रायपूर – टीटलागड किया जा रहा है। इस कार्य के चलते भुसावल मण्डलसे गुजरने वाली निम्नलिखित गाड़ियाँ रद्द रहेंगी।

02857  विशाखापटनम लोकमान्य टिळक टर्मिनस विशेष  दिनांक 25.07 2021 और 01.08.2021 विशाखापट्टनन से नही चलेगी।

02858 लोकमान्य टिळक टर्मिनस विशाखापटनम विशेष दिनांक 27.07 2021 और 03.08.2021 को लोकमान्य तिलक टर्मिनस से नही चलेगी।

02827 पुरी सुरत विशेष दिनांक 25.07 2021 और 01.08.2021 पूरी से नही चलेगी।

02828 सुरत पुरी विशेष दिनांक 27.07 2021 और 03.08.2021 सूरत से नही चलेगी।

09494 पुरी गांधीधाम विशेष दिनांक 26.07 2021 और 02.08.2021 पुरी से नही चलेगी।

09493 गांधीधाम पुरी विशेष दिनांक 30.07 2021 आणि 06.08.2021 गाँधीधाम से नही चलेगी।

02145 लोकमान्य टिळक टर्मिनस पुरी विशेष
दिनांक 25.07 2021 और 01.08.2021 लोकमान्य तिलक टर्मिनस से नही चलेगी।

02146 पुरी लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशेष दिनांक 27.07 2021 और 03.08.2021 पुरी से नही चलेगी।

दिनांक 25 जुलाई को अहमदाबाद से पुरी के लिए चलनेवाली 02844 विशेष गाड़ी 3 घंटे देरी से अहमदाबाद से रवाना की जाएगी।

यात्रीगण से निवेदन है, की इस मार्ग पर चलनेवाली गाड़ियोंसे रेल यात्रा करनी हो तो कृपया रेलवे की अधिकृत वेबसाइट, ऍप या हेल्पलाइन से जानकारी लेकर ही अपनी यात्रा का नियोजन करे।

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रेलवे की निजी ट्रेनोंके 3 क्लस्टर, जिनकी निविदाएं कल खोली गई।

कल एक खबर मीडिया में आयी थी, की निजी गाड़ियोंकी निविदाएं खोली गई। 29 रेल मार्ग, 40 रैक और करीबन 7200 करोड़ की लागत। खबर संक्षिप्त ही थी, मगर अनुमान लगाया जाता है तो यह मुम्बई का क्लस्टर नम्बर 2 और दिल्ली के नम्बर 1 और 2 ऐसे कुल तीन क्लस्टर की 29 जोड़ी गाड़ियाँ और शुरवात में निर्धारित की गई निवेश की राशी 7000 करोड़ इससे यही तीनों क्लस्टर समझ आते है। इनमें कौनसे मार्ग, कौनसी गाड़ियोंके लिए आवेदन आया है यह समझने के लिए हमें पहले क्लस्टरों में शामिल मार्ग, गाड़ियाँ देखना होगा।

मुम्बई क्लस्टर – 2

दिल्ली क्लस्टर – 1

दिल्ली क्लस्टर – 2

अब आप आसानी से समझ सकते है, कौनसी निजी गाड़ियाँ आने वाले दिनों में शुरू की जा सकती है।