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उत्तर पश्चिम रेलवे की 34 गाड़ियाँ शुरू और 16 गाड़ियोंके फेरे बढ़ेंगे, मध्य रेल की मुम्बई दुरान्तो, पश्चिम रेल की 7 साप्ताहिक और पश्चिम मध्य रेल की शताब्दी भी भरेगी फ़र्राटा

जैसे जैसे संक्रमण काल के निर्बंध घटाए जा रहे है, भारतीय रेल के हरेक क्षेत्रीय कार्यालय अपने क्षेत्र से गाड़ियाँ शुरू कर रहे है। उपरे NWR निम्नलिखित सुचि अनुसार गाड़ियाँ शुरू करने, उनके फेरे बढाने जा रही है।

साथ ही खुशखबर नागपुर के यात्रिओंके लिए, उनकी लोकप्रिय मुम्बई दुरान्तो फिर से सेवा में रुजुवात कर रही है।

सीएसएमटी-नागपुर दुरंतो स्पेशल ट्रेन की सेवा बहाल
रेलवे ने निम्मलिखित स्पेशल ट्रेनों की सेवा को पुनः बहाल करने का निर्णय लिया है ,विवरण निम्नानुसार है:-
1.ट्रेन संख्या 02189 सीएसएमटी-नागपुर दुरंतो स्पेशल छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से दिनांक 16.6.2021 से अगले सुचना तक प्रतिदिन रवाना होगी ।
ट्रेन संख्या 02190 नागपुर -सीएसएमटी दुरंतो स्पेशल नागपुर से दिनांक 15.6.2021 से अगले सुचना तक प्रतिदिन रवाना होगी ।

नोट: इन ट्रेनों के रूट, समय और ठहराव (स्टॉपेज) में कोई बदलाव नहीं है।
विस्तृत ठहराव और समय की जानकारी के लिए कृपया http://www.enquiry.indianrail.gov.in देखें या एनटीईएस ऐप डाउनलोड करें।
इन स्पेशल ट्रेनों में केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को ही यात्रा करने की अनुमति है।
यात्रियों को बोर्डिंग, यात्रा और गंतव्य पर COVID19 से संबंधित सभी मानदंडों, एसओपी का पालन करने की सलाह दी जाती है।

पश्चिम रेलवे

पश्चिम मध्य रेलवे

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इन्दौर : बातें कुछ दबी दबी

प्रिय मित्रों, रेल दुनिया से आप भली भाँति परिचित है। हम हमेशा प्रयत्न करते है की आपको रेल्वेज की अद्यतन जानकारी मिलती रहे। यात्रिओंको रेलवे से क्या अपेक्षाएं रहती है यह हम अच्छे से जानते है। समयसारणी में बदलाव, नई गाड़ियाँ, मार्ग परिवर्तन, किरायोंमे और उनसे सम्बन्धित नियमोंमे बदलाव भी यात्रिओंको रेलवे ख़बरोंकी ओर आकृष्ट करता है। साथ ही साथ किसी विशेष घटना या किसी शहर विशेष की ताजा जानकारी भी यात्रिओंको चाहिए रहती है। आज हम इन्दौर की बात करते है।

हाल ही में पश्चिम रेलवे ने रतलाम मण्डल की इन्दौर से चलने वाली गाड़ियोंमे भारी बदलाव के प्रस्ताव दिए। इन्दौर से लिंगमपल्ली (हैदराबाद) और इन्दौर से पुरी के बीच साप्ताहिक हमसफ़र चला करती है। इन्दौर से लिंगमपल्ली हमसफर रतलाम, वडोदरा, सूरत, पनवेल, पुणे, सोलापुर, कलबुर्गी होकर लिंगमपल्ली को पोहोंचती थी जिसका सम्पूर्ण मार्ग परिवर्तन कर के भोपाल, इटारसी, नागपुर, बल्हारशाह, काजीपेट होकर लिंगमपल्ली का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया। ऐसा प्रस्ताव देखते ही रतलामवासियों और इन्दौरियों का माथा ठनका। “यह मार्ग परिवर्तन है या गाड़ी को पदभ्रष्ट किया जा रहा है?” इन्दौर से सोलापुर, कलबुर्गी की सम्पर्कता कराने वाली यह एकमेव गाड़ी थी।

इन्दौर पूरी साप्ताहिक हमसफ़र में मामूली सा ही बदलाव प्रस्तावित है। गाड़ी को उज्जैन होकर घुमाया गया है मगर यह भी इन्दौर के रेल प्रेमियोंको बड़ा नागवार गुजर रहा है। उज्जैन को पूरी की कनेक्टिविटी की आवश्यकता नही वहाँ से पहले ही दो जोड़ी गाड़ी पुरी के लिए उपलब्ध है। हालाँकि तीसरी और गाड़ी मिल जाए इसमें उज्जैनवासी तो खुश ही है। कहा जाता है, उज्जैन सांसद फिरोजिया जी ने इसके लिए व्यूहरचना की थी। इन्दौर से पुरी चलनेवाली गाड़ी कोई इन्दौर से पूर्ण क्षमता से भरती नही, इसीलिए इसे उज्जैन की ओर से ले जाना पड़ रहा है ऐसी उज्जैन वासियोंकी दलील है। तो इन्दौर की यात्री सक्षमता पर सवाल खड़े किए जाने से इन्दौरिए आहत है। इन्दौर पुरी साप्ताहिक की बजाए 2-3 दिन भी चले तो इन्दौर से यात्री मिलेंगे ऐसे इन्दौर के रेल प्रेमियोंका मानना है।

प्रस्तावों पर छिड़ी दो शहरों के बीच, रेल प्रेमियोंकी नोंकझोंक से समन्वय कम और छींटाकशी ज्यादा हो रही है। वैसे यह समस्या इन्दौर शहर और उसकी अधूरी अधूरी सी रेल निर्माण व्यवस्था को उजागर करती है। मीटर गेज काल मे इन्दौर जंक्शन से राजस्थान से आंध्रप्रदेश के बीच गाड़ियाँ सीधी चलती थी। एक तरफ रतलाम तो दूजी ओर खण्डवा मगर मीटर गेज लाइनें गेज परिवर्तन के लिए बन्द क्या हुए इन्दौर एकान्तवास में चला गया। यहाँ गाड़ियाँ आती और जाती है सीधी नही चलती अर्थात इन्दौर टर्मिनल जैसा स्टेशन बन गया है।

रतलाम मण्डल की शोभा इन्दौर शहर से है। हालाँकि रतलाम पश्चिम रेलवे की मुम्बई दिल्ली प्रीमियम मार्ग का बड़ा जंक्शन स्टेशन है, मगर मुख्य शहर इन्दौर का रेलवे के मुख्य मार्ग से कोई वास्ता नही। एक तरफ इन्दौर से रतलाम जंक्शन की दूरी बड़नगर होकर 120 किलोमीटर है तो उज्जैन जंक्शन की दूरी 80 किलोमीटर है। इन दो मुख्य जंक्शन्स के बीच इन्दौर फंस गया है। गाड़ियाँ जब आजूबाजू से निकलने लगे तो इन्दौर की छटपटाहट बढ़ जाती है। उसे अपनी यात्री सक्षमता की दुहाई देनी पड़ती है।

महू सनावद जुड़ जावे तो फिर राजस्थान – तेलंगाना सम्पर्कता बहाल हो जाएगी। मात्र इतना ही नही, इन्दौर से मुम्बई, पुणे, मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र का निकटतम मार्ग भुसावल होकर निकलेगा और इन्दौर जैसे मेगा सिटी को अपनी मेगा सम्पर्कता के सामने ऐसी मार्ग परिवर्तन जैसी छोटी छोटी बातें बहुत मामूली लगेगी। यह बात और है की इन्दौर के जानेमाने, नए पुराने राजकीय आखाड़े के दिग्गज परिस्थितियों के आगे अपनी हतबलता, हताशा जाहिर करते नजर आते है।

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पश्चिम रेलवे की नई गाड़ियोंके, बान्द्रा बरौनी, उधना छपरा के प्रस्ताव

पश्चिम रेलवे से आज और कुछ पेज मीले है, जिसमे नई गाड़ियोंके प्रस्ताव है। हम समझते है, की यह प्रस्ताव है और ज्यादा विस्तारपूर्वक या पूर्ण नही है, मगर जितना जानकारी उपलब्ध हुई है आपके सामने प्रस्तुत है।

बान्द्रा टर्मिनस बरौनी बांद्रा टर्मिनस साप्ताहिक हमसफर विशेष बात, निम्नलिखित पत्रक में यह गाड़ी बताया गया है कि यह गाड़ी विरार उधना के बजाय उधना जलगांव होकर क्यों चल रही है। हमारी पिछले लेख में हमने उधना जलगांव मार्ग के निम्नतम उपयोग की बात कही थी। इस मार्ग का उपयोग केवल 74% ही किया जा रहा है। समयसारणी प्रस्तावित ही है, जब गाड़ियाँ पटरी पर आएगी तब और बदलाव हो सकते है।

उधना छपरा उधना साप्ताहिक वाया जलगांव, प्रयागराज छिंवकी, वाराणसी, बलिया

निम्नलिखित उधना जलगांव खण्ड पर चलनेवाली 23 गाड़ियाँ, जिनको स्पीड अप कर के मध्य रेल के जलगांव को हैंड ओवर किया जा रहा है। इसका मतलब यह है, की इन गाड़ियोंके समय मे बहुतेरे बदलाव होने है, बस इंतजार नियमित समयसारणी का है। गाड़ियोंके नाम के आगे परे के हँडींग ओवर स्टेशन पालधी का वर्तमान समय, प्रस्तावित समय, बचत किया गया समय और कारण इस तरह दिया गया है।

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पश्चिम रेलवे का यात्रिओंको सुखद धक्का, उधना पुणे उधना नई द्विसाप्ताहिक, इन्दौर लिंगमपल्ली 300 किलोमीटर शार्ट रूट से चलेगी और बहुत कुछ….

पश्चिम रेलवे ने एक परीपत्रक जारी किया है। पहले आप देख लीजिए फिर आगे बात करते है।

उपरोक्त पृष्ठ पर पश्चिम रेलवे की नई गाड़ी सूरत/उधना पुणे उधना/सूरत द्विसाप्ताहिक की बात की गई है। यह गाड़ी सूरत/उधना से प्रत्येक मंगलवार, शनिवार को दोपहर 12:15 को निकल नन्दूरबार, अमलनेर, जलगाँव, मनमाड़ दौंड होकर बुधवार, रविवार को प्रातः 3:00 बजे पुणे को पहुचेगी। वापसीमे बुधवार, रविवार को प्रातः 5:00 बजे पुणे से निकल उसी रात 21:00 बजे उधना/सूरत पहुचेंगी।

अमलनेर, नन्दूरबार के यात्रिओंकी वर्षोँपुरानी पुणे कनेक्टिविटी यूँ पूर्ण होगी। गाड़ी उधना या सूरत से चलेगी यह अभी तय होना बाकी है, मगर उससे विशेष परेशानी की बात नही। यह गाड़ी सूरत अमरावती सूरत त्रिसाप्ताहिक के रैक से लिंक कर के चलाई जाएगी। सूरत अमरावती सूरत के प्रतिदिन चलने की आस यहाँपर स्थगित हो जाती है।

इन्दौर लिंगमपल्ली इन्दौर हमसफर साप्ताहिक को रतलाम, वडोदरा, सूरत, पनवेल, पुणे, सोलापुर, कलबुर्गी मार्ग से हटाकर उज्जैन, भोपाल, इटारसी, नागपुर, बल्हारशहा होकर लिंगमपल्ली चलाया जाना बेहद आश्चर्यजनक है। इन्दौर, रतलाम की सोलापुर, गुलबर्गा से सम्पर्कता कायम रखनेवाली एकमेव गाड़ी अब पारम्परिक निकटतम मार्ग से चलेगी। हालाँकि इस मार्ग से चलने में गाड़ी का रन 300 किलोमीटर से घट रहा है जिसका किरायोंमे कमी का फायदा यात्रिओंको मिलेगा।

अगली गाड़ी है, इन्दौर पूरी इन्दौर साप्ताहिक हमसफर। इस गाड़ी को मक्सी के बजाय उज्जैन होकर ले जाया जा रहा है। बधाई हो उज्जैनवासियों, आपको पूरी धाम के लिए एक और गाड़ी मिल गयी है। कहीं यह वलसाड़ पूरी वलसाड़ की पुर्तता तो नही? शून्याधारित समयसारणी में वलसाड़ पूरी वलसाड़ गाड़ी का मार्ग परिवर्तन होने जा रहा है। यह गाड़ी वलसाड़ से इटारसी तक भुसावल होकर निकलने वाली है।

अगली गाड़ी है 12959/60 दादर भुज दादर द्विसाप्ताहिक। इसे चाँदलोडिया खोडीयार के बजाय होकर साबरमती खोडीयार होकर निकाला जाएगा। इससे यात्रिओंको कोई विशेष फर्क नही पड़ेगा केवल पश्चिम रेलवे का नया दोहरीकरण मार्ग है तो परिचालन में सहूलियत रहेगी।

पश्चिम रेलवे का नया मार्ग महेसाणा – पाटण – भीलड़ी पर गाड़ियोंका परिचालन मोड़ा जा रहा है। इसमें 14803/04 भगत की कोठी अहमदाबाद भगत की कोठी साप्ताहिक को इस मार्ग से चलाया जाएगा। समय का व्यापक बदलाव हो रहा है। गाड़ी गन्तव्योंपर जल्द पहुंचेंगी। साथ ही डीसा, पालनपुर, सिद्धपुर और उंझा यह स्टापेजेस जाकर पाटण यह एक स्टापेज अस्तित्व में आ जाएगा। साथ ही गाड़ी को सुपरफास्ट का दर्जा भी दीया जाएगा।

इसी मार्ग परिवर्तन की दूसरी गाड़ी है 14806/05 बाड़मेर यशवंतपुर बाड़मेर साप्ताहिक वातानुकूलित एक्सप्रेस। डीसा, पालनपुर, सिद्धपुर और उंझा यह स्टापेजेस जाकर पाटण यह एक स्टापेज अस्तित्व में आ जाएगा। दोनों दिशाओंमें क्रमशः 40 मिनट और 2 घंटे 10 मिनट की बचत हो रही है।

तीसरी गाड़ी है 12489/90 बीकानेर दादर बीकानेर द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस पालनपुर स्टापेजेस जाकर पाटण यह एक स्टापेज अस्तित्व में आ जाएगा।

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जलगाँव – भुसावल तीसरी रेल लाइन का सुरक्षा निरीक्षण कल होगा

जलगाँव – भुसावल के बीच तीसरी और चौथी लाइन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का एक भाग याने तीसरी लाइन का सुरक्षा परीक्षण कल 11 जून को होने जा रहा है। 25 किलोमीटर के इस खण्ड में भादली से भुसावल के बीच तीसरी लाइन पर पहलेही गाड़ियाँ शुरू हो चुकी है। कल जलगाँव से भादली और भादली यार्ड का निरीक्षण हो कर सम्भवतः जलगाँव से भुसावल तक तीसरी लाइन पर गाड़ियाँ चलना शुरू हो जाएगी। यह प्रोजेक्ट इतना महत्वपूर्ण क्यों है इस पर बात करते है।

दरअसल जलगाँव जंक्शन पर पश्चिम रेलवे के उधना से डबल लाइन, मुम्बई – भुसावल डबल मेन लाइन से जुड़ती है। यदि भुसावल से किसी गाड़ी को पश्चिम रेलवे के ट्रैक पर जाना है तो मुम्बई की ओर जानेवाली मुख्य लाइनोंपर ब्लॉक लग जाता था और वही परे से आने वाली गाड़ियोंको भी जलगाँव के मुख्य मार्ग पर आने के लिए घंटो इंतजार करना पड़ता था। जब यह प्रोजेक्ट डिजाइन हुवा तो उसमे परे की उधना – जलगाँव दोहरी लाइन को समर्पित तरीकेसे हवाई क्रॉसिंग कर के भुसावल जंक्शन तक लाया गया।

तरसोद फ्लैग स्टेशन एरिया में निर्माणाधीन रेल ओवर रेल क्रॉसिंग ब्रिज (अब यह दोनों लाइनोंपर ब्रिज का निर्माण पूरा हो चुका है।) photo courtesy Piyush S. @RailfanPiyush indiarailinfo

अब आप भुसावल स्टेशनपर इसकी तैयारी देखिए। हमने दो दृश्य यहाँपर रखे है। पहले दृश्य में एकदम दायीं ओर नवनिर्मित प्लेटफार्म नम्बर 1 और 2 दिख रहे है। यह दोनोंही प्लेटफार्म इन तीसरी, चौथी लाइन से सीधे कनेक्ट है। यही व्यवस्था जलगाँव में भी की गई है, वहाँपर 4 एवं 5 नम्बर के प्लेटफार्म उधना डबलिंग लाइन से सीधे जुड़े है। यानी उधना से भुसावल तक सीधा समर्पित गलियारा बनकर तैयार। अब आगे उधना में प्लेटफार्म नम्बर 4 एवं 5 का निर्माण लगभग पूर्णत्व की ओर है।

भुसावल स्टेशन का सम्पूर्ण दृश्य (photo courtesy : central railway)
भुसावल स्टेशन का मानक दृश्य रेलपोस्ट से साभार

अब थोड़ा गहराई से समझते है। बान्द्रा से भुसावल अंतर है 574 किलोमीटर उधना बाइपास, भेस्तान चलठान होकर और मध्य रेल के मुम्बई से है 445 किलोमीटर। हालांकि यह अन्तर 130 किलोमीटर ज्यादा है, मगर पश्चिम रेलवे के मार्ग में कोई घाट नही है और आपात स्थितियों में यह मार्ग उपयुक्त है। याद कीजिए ऑक्सीजन स्पेशल गाड़ियाँ इसी मार्ग से निकली थी। पश्चिम रेलवे का मुम्बई दिल्ली मार्ग प्रीमियम ट्रंक मार्ग है। बहुतसी राजधानी, दुरान्तो गाड़ियोंका यही मार्ग है। इस मार्ग की अवस्था क्षमता से डेढ़ से दो गुनी गाड़ियाँ उसपर चलाई जा रही है। वहीं उधना से जलगाँव नवनिर्मित दोहरीकरण युक्त अत्याधुनिक, तेज गति वाला मार्ग अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग नही कर पा रहा है और उसकी वजह जलगाँव में बननेवाला ब्लॉक ही था। अब तीसरी लाइन पर गाड़ियाँ दौड़ने लग जाएगी तो समस्या खत्म और ज्यादा से ज्यादा एक वर्ष में चौथा मार्ग भी रेलवे के हाथों सुपुर्द हो जाएगा।

कुल मिलाकर यह समझिए, पश्चिम रेलवे अपनी बहुत सी गाड़ियाँ इस मार्ग पर शुरू कर देगी। उधना एक बड़ा टर्मिनल बन कर उभरेगा। सूरत भुसावल के बीच सीधी मेमू गाड़ियाँ चलेगी। यह सब इस समर्पित जलगाँव भुसावल तीसरी, चौथी लाइन के गलियारे से सम्भव होने जा रहा है।