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दमरे SCR की प्रस्तवित 31 जोड़ी गाड़ियाँ

17233/34 सिकन्दराबाद शिरपुर कागज़ नगर सिकन्दराबाद भाग्यनगर प्रतिदिन

12740/39 सिकन्दराबाद विशाखापत्तनम सिकन्दराबाद गरीबरथ प्रतिदिन

12735/36 सिकन्दराबाद विशाखापत्तनम सिकन्दराबाद गरीबरथ त्रिसाप्ताहिक

17023/24 सिकन्दराबाद करनूल सिटी सिकन्दराबाद तुंगभद्रा प्रतिदिन

17021/22 हैदराबाद वास्को हैदराबाद साप्ताहिक

17011/12 हैदराबाद शिरपुर कागज़ नगर हैदराबाद इन्टरसिटी

17027/28 हैदराबाद करनूल सिटी हैदराबाद हुन्ड्री प्रतिदिन

17010/09 हैदराबाद बीदर हैदराबाद इन्टरसिटी प्रतिदिन

17013/14 हैदराबाद हड़पसर (पुणे) हैदराबाद त्रिसाप्ताहिक

12713/14 विजयवाड़ा सिकन्दराबाद विजयवाड़ा सातवाहन प्रतिदिन

17241/42 नरसापुर निदादावोलु नरसापुर प्रतिदिन

17237/38 बित्रागुंटा चेन्नई सेंट्रल बित्रागुंटा सप्ताह में 5 दिन

17207/08 विजयवाड़ा साईं नगर शिर्डी विजयवाड़ा साप्ताहिक

12743/44 गुडूर विजयवाड़ा गुडूर विक्रम सिम्हापुरी अमरावती प्रतिदिन

12747/48 नरसापुर धर्मावरम नरसापुर प्रतिदिन

22705/06 तिरुपति जम्मूतवी तिरुपति हमसफ़र साप्ताहिक

17407/08 तिरुपति मन्नारगुड़ी तिरुपति पामाणि त्रिसाप्ताहिक

17413/14 तिरुपति पुड्डुचेरी तिरुपति साप्ताहिक

17417/18 तिरुपति साईं नगर शिर्डी तिरुपति साप्ताहिक

17419/20 तिरुपति वास्को तिरुपति साप्ताहिक

17615/16 काचेगुड़ा मदुराई काचेगुड़ा साप्ताहिक

17239/40 गुण्टूर विशाखापट्टनम गुण्टूर सिम्हाण्डरी प्रतिदिन

12747/48 गुण्टूर विकाराबाद गुण्टूर पलनाड प्रतिदिन

17252/51 गुण्टूर काचेगुड़ा गुण्टूर प्रतिदिन

12767/68 हुजुर साहिब नान्देड सांतरागाछी हुजुर साहिब नान्देड साप्ताहिक

17619/20 औरंगाबाद हुजुर साहिब नान्देड औरंगाबाद साप्ताहिक

17621/22 हुजुर साहिब नान्देड रेनिगुंटा हुजुर साहिब नान्देड साप्ताहिक

12753/54 हुजुर साहिब नान्देड हज़रत निजामुद्दीन हुजुर साहिब नान्देड मराठवाड़ा सम्पर्क क्रान्ति साप्ताहिक

17623/24 हुजुर साहिब नान्देड श्रीगंगानगर हुजुर साहिब नान्देड साप्ताहिक

17409/10 आदिलाबाद हुजुर साहिब नान्देड आदिलाबाद प्रतिदिन

16203/04 चेन्नई सेंट्रल तिरुपति चेन्नई सेंट्रल प्रतिदिन

यात्रीगण कृपया यह बात ध्यान दे, यह गाड़ियाँ प्रस्तवित है, द म रेल ने रेल बोर्ड से शुरू करने के लिए प्रस्ताव रखा है। जल्द ही शुरू की जाने की भी सम्भावना है, लेकिन जब गाड़ियाँ शुरू की जाएगी इनके परिचालन और गाड़ी क्रमांक में बदलाव किया जा सकता और उसके लिए अलगसे परीपत्रक भी निकाला जाएगा। आगे की सूचना हम अवश्य ही आपके लिए लेकर आयेंगे।

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01045/46 कोल्हापुर धनबाद कोल्हापुर दीक्षाभूमि स्पेशल का अमूलचूल परिवर्तन

कोल्हापुर से धनबाद के बीच पुणे, मनमाड़, औरंगाबाद, परभणी होकर चलनेवाली दीक्षाभूमि नियमित मार्ग को बदल कोल्हापुर, मिरज, पंढरपुर, कुरडुवाडी, लातूर, परभणी होकर चलेंगी। परभणी से आगे अपने नियमित मार्ग नागपुर, जबलपुर, प्रयागराज, गया होते हुए धनबाद पोहोचेगी। इस मार्ग परिवर्तन से गाड़ी के परिचालन समय मे जबरदस्त 8 घंटे की कमी होगी। इस नए मार्ग से चलने से पुणे, अहमदनगर, मनमाड़, औरंगाबाद जैसे स्टेशनोंकी गया, धनबाद सम्पर्कता टूट गयी है। वही नए स्टेशन पंढरपुर, कुरडुवाडी, लातूर यह इस गाड़ी के नक्शेपर आ गए है।

01045 दीक्षाभूमि कोल्हापुर से 19 फ़रवरी से हर शुक्रवार को निकलेगी और 21 रविवार को धनबाद पोहोचेंगी। वापसीमे 01046 धनबाद से 22 फ़रवरी से हर सोमवार को निकल, 24 बुधवार को कोल्हापुर पोहोचेंगी।

उपरोक्त परीपत्रक में 02280 हावडा पुणे आज़ाद हिन्द प्रतिदिन स्पेशल के हावडा से झारसुगुड़ा के बीच समय का संशोधन भी सम्मिलित है, यात्रीगण से निवेदन है, कृपया उसपर भी ध्यान देवे।

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माँगे तो अनगिनत, मगर प्रभावी सुझावों की कमी!

रेलवे के लिए शायद ही कोई ऐसा पल होता होगा, जिसमे किसी यात्री या संघठन की कोई माँग न होती हो। स्टापेजेस से लेकर नई गाड़ियोंके लिए एक से बढ़कर एक माँग तैयार ही रहती है। कई यात्री संगठन तो रेल गाड़ी के मार्ग परिवर्तन, एक्सटेंशन के लिए आन्दोलनोंकी हद तक उत्साहित रहते है। क्या अपनी मांगों, जरूरतोंसे इतर जाकर रेलवे की उत्पादकता बढ़े ऐसा सुझाव कहीं नजर क्यों नही आता?

रेल प्रशासन जब भी किसी गाड़ी में स्टापेजेस बढ़ाती/घटाती है तो उसके पीछे खर्च का कारण बताती है, जो की कुछ लाख रुपयोंमें होता है। यात्री ठहराव का मतलब उक्त स्टेशनपर यात्री सुविधा, रखरखाव, उसके लिए संसाधन, कर्मचारी आदी मूलभूत सुविधाओंका भी विस्तार का विचार करना होता है। यही बात नई गाड़ी शुरू करना या गाड़ी को विस्तारित करने के बाबत में भी लागू होता है। गाड़ी बढाना, स्टापेजेस बढाना केवल इतना मात्र नही होता, आगे उनके परिचालन विभाग के कर्मियोंके, जैसे लोको पायलट, गार्ड, स्टेशनकर्मी, मेंटेनेंस स्टाफ़ आदि के व्यवस्थापन का भी यथायोग्य नियोजन करना होता है। यह सारी चीजें उस खर्च में सम्मिलित होती है।

आजकल रेल प्रशासन झीरो टाइमटेबल पर काम कर रही है। इसमें कई स्टापेजेस छोड़े जाने का नियोजन है। यह व्यवस्था गाड़ियोंकी न सिर्फ गति बढ़ाएगी बल्कि रेल व्यवस्थापन के खर्च में कमी भी ले आएगी। इसके बदले में रेलवे उक्त स्टेशनोंका अभ्यास कर, माँगोंके अनुसार मेमू गाड़ियाँ चलाने की व्यवस्था करने की सोच रही है। मेमू गाड़ियाँ ग़ैरउपनगरिय क्षेत्रोंमें चलाई जानेवाली उपनगरीय गाड़ियोंके समान होती है। जिनका पीकअप स्पीड ज्यादा होता है और रखरखाव कम। छोटे अन्तरोंमें यह गाड़ियाँ बेहद उपयुक्त साबित होती है। फिलहाल इनके ट्रेनसेट कम है और जरूरत के हिसाब से तेजी से उत्पादन बढाया जा रहा है।

रेल प्रशासन ने हाल ही बजट में संसाधनोपर 95 प्रतिशत से ज्यादा का निर्धारण किया है। इसमें समर्पित मालगाड़ियोंके गलियारोंके लिए बड़ा प्रस्ताव है, साथ ही व्यस्ततम मार्गोंका तीसरी, चौथी लाइन का निर्माण भी सम्मिलित है। यह प्रस्तवित संसाधन जब हकीकत के धरातल पर कार्य शुरू कर देंगे तब ग़ैरउपनगरिय मेमू गाड़ियोंके लिए जगह ही जगह उपलब्ध हो जाएगी। मुख्य मार्ग की लम्बी दूरी की गाड़ियाँ सीधी चलाने में कोई बाधा या रुकावट नही रहेगी और यात्रिओंकी माँग की भी यथोचित पूर्तता की जा सकेगी। आज यह सारी बाते स्वप्नवत है, लेकिन जिस तरह कार्य चलाया जा रहा है, तस्वीरें जल्द ही बदलने वाली है।

यात्रिओंको यह समझना चाहिए, स्टेशनोंके व्यवस्थापन का निजीकरण कर के यात्री सुविधाओंको कितना उन्नत बनाया जा रहा है। किसी जमाने मे बड़े से बड़े जंक्शनपर लिफ्ट, एस्कलेटर, बैट्रिचलित गाड़ियोंकी बात तो छोड़िए रैम्प तक नही होते थे, जो आज लगभग हर मेल/एक्सप्रेस के ठहराव वाले स्टेशनोंपर मिल रहे है। गाड़ियोंके द्वितीय श्रेणी के डिब्बों तक मे मोबाईल चार्जिंग पॉइंट दिए जा रहे है। स्टेशन साफसुथरे, सुन्दर और आकर्षक हो रहे है। क्या यह व्यापक बदलाव नही है?

सिर्फ गाड़ियोंके स्टापेजेस बढाना, विस्तार करना, नई गाड़ियोंके प्रस्ताव रखना इसके अलावा भी रेलवे को सुझाव की आवश्यकता है, जिनसे उसकी उत्पादकता बढ़े। रेलवे पार्सल ऑफिस को जनोपयोगी, ग्राहकोंपयोगी बनाना, पार्सल कर्मियोंकी निपुणता बढाना ताकी वह ग्राहक को यथयोग्य उत्तर दे सके। रेलवे बहोत सारे काम ऑनलाईन जर रही है। ऐसे में मैन्युयल काम को घटाकर भी अपनी उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिल रही है।

आखिर में, हमारा देश इतना बड़ा और जनसंख्या इतनी अधिक है, की कोई भी ट्रेन बढ़े या स्टापेजेस बढ़े वहाँपर ट्रैफिक तो मिलनी ही है। खैर जनसंख्या ज्यादा होना इसको हम कमी नही, हमारे देश का बलस्थान मानते है और रेलवे भी उसी सोचपर अपनी कार्यशैली को आगे बढ़ाती है। जरूरत एक बेहतर सोच की है, सेवा का बेहतर मूल्य चुकाने की है।

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मध्य रेलवे की हबीबगंज एक्सप्रेस, लश्कर एक्सप्रेस शुरू होने जा रही है और एर्नाकुलम दुरन्तो, इन्दौर इन्टरसिटी, नन्दादेवी और पुणे दर्शन एक्सप्रेस यह 4 जोड़ी गाड़ियोंके बदले परिचालन

02284/83 हज़रत निजामुद्दीन एर्नाकुलम हज़रत निजामुद्दीन साप्ताहिक दुरन्तो, निजामुद्दीन से 20 और एर्नाकुलम से 21 फरवरी से शुरू हो रही है।

02402/01 देहरादून कोटा देहरादून नन्दा देवी वातानुकूलित प्रतिदिन, दोनों ओरसे दिनांक 16 फरवरी से शुरू होगी।

02416/15 नई दिल्ली इन्दौर नई दिल्ली ओवरनाइट इन्टरसिटी दिनांक 16 से दोनों ओरसे प्रतिदिन शुरू हो रही है।

02494/93 हज़रत निजामुद्दीन पुणे हज़रत निजामुद्दीन साप्ताहिक दर्शन स्पेशल, दिनांक 19 से निजामुद्दीन से और पुणे से 21 फ़रवरी से चल पड़ेगी।

मध्य रेल की दो साप्ताहिक गाड़ियाँ शुरू होने जा रही है, लोकमान्य तिलक टर्मिनस से आग्रा कैंट लश्कर एक्सप्रेस और हबीबगंज एक्सप्रेस

02161/62 लोकमान्य तिलक टर्मिनस आग्रा कैंट लोकमान्य तिलक टर्मिनस लश्कर साप्ताहिक स्पेशल, लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 19 और आग्रा कैंट से 20 फरवरी को चलना शुरू हो जाएगी। 02162 आग्रा लोकमान्य तिलक टर्मिनस लश्कर स्पेशल के समय मे भारी बदलाव है।

02153/54 लोकमान्य तिलक टर्मिनस हबीबगंज लोकमान्य तिलक टर्मिनस साप्ताहिक स्पेशल, लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 18 और हबीबगंज से 19 फरवरी को चलना शुरू हो जाएगी।

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जितने गाड़ियोंके प्रकार, उतनी ही ज्यादा संख्यामे किराया तालिका

क्या आप जानते है, भारतीय रेलवे कितनी तरह की यात्री गाड़ियाँ चलाता है? हाँ हाँ, अभी के वक्त की बात छोड़िए, अभी तो स्पेशल और महास्पेशल ☺️ याने त्यौहार स्पेशल ऐसे दो ही प्रकार की गाड़ियाँ चल रही है।

भारतीय रेलवे में पहले मेल/एक्सप्रेस और सवारी ऐसी केवल दो ही प्रकार की गाड़ियाँ चलती थी और किराया तालिका केवल एक होती थी जिसमे मेल/एक्सप्रेस और सवारी गाड़ियोंके विभिन्न वर्गोंके किराए की सूची रहती थी।

यथावकाश वर्ग बढ़े, स्लिपर, वातानुकूलित और फिर व्यस्त काल, लीन पीरियड याने कम भीड़ वाला समय इस तरह वर्गीकरण होता गया। मगर जब जब नए नए अलग अलग प्रदेशोंसे रेल मंत्री आते गए, अपनी अपनी छाप छोड़ने के लिए नए नए प्रकार की गाड़ियाँ शुरू करते गए। सबसे पहले रेल मंत्री मधु दण्डवते के काल मे सुपरफास्ट गाड़ियोंका अवतरण हुवा। गाड़ियाँ वहीं, डिब्बे वहीं फर्क यह की स्टापेजेस कम किए गए। यहाँतक ठीक था, किराया तालिका में सुपरफास्ट चार्ज अलग से जोडा जा सकता था, अलगसे किराया तालिका की जरूरत नही थी।

फिर आयी राजधानी एक्सप्रेस। इसकी संकल्पना यह थी, देश की राजधानी से राज्योंका तेज और आरामदायक सम्पर्क। पूर्णतयः वातानुकूलित, 500-500 किलोमीटर तक स्टापेजेस नही, गाड़ी के अंदर यात्री को बेडिंग, खानपान की उत्तम व्यवस्था, किरायोंमे सभी सम्मिलित। ऐसे में किराया तालिका अलग बनना स्वाभाविक ही था। अब मेल/एक्सप्रेस/सवारी की एक और राजधानी गाड़ियोंकी दूसरी ऐसी दो किराया तालिका बनी। हाँ! एक ओर विशेषता यह थी, की किराए स्टेशन से स्टेशन तक याने पॉइंट टू पॉइंट बेसिस पर तय किए जाने थे।

फिर राजधानी के तर्ज पर शताब्दी एक्सप्रेस का ईज़ाद हुवा। संकल्पना राज्य की राजधानी से सम्पर्क और वह भी एक ही दिन में जानाआना, याने इन्टरसिटी, वातानुकूलित, आरामदायक, यह भी पैंट्री कार खानपान सहित। फिर एक नई किराया तालिका।

फिर समाजवादी सोच के राजनैतिक रेल मंत्रालय में पधारे और उन्होंने आम जनता के लिए कई सारी विविध प्रकार की गाड़ियोंका अविष्कार किया। हर नई गाड़ी के लिए आम जनता को सामने रखा जाने लगा। शताब्दी के संकल्पना के मद्देनजर “जनशताब्दी” लायी गयी। जी हाँ इसकी भी अलग किराया तालिका बनी, भाई, आम जनता के लिए विशेष मगर मेल/एक्सप्रेस से थोड़ा ज्यादा और शताब्दी से कम।

रेल मंत्री लालू यादव तो “गरीबरथ” ही ले आए। क्यों भई, गरीब भी वातानुकूलित रेल गाड़ी से यात्रा करना चाहिए तो उसके लिए सामान्य वातानुकूलित थ्री टियर स्लिपर में बदलाव करके, साइड मिडल बर्थ बढ़ाकर किराए कम कर गरीबोंको भी मौका दिया गया, गौरतलब यह है, गरीबरथ में वाकई गरीब यात्री होते है? संशोधन का विषय है। एक अलग प्रकार की “युवा” एक्सप्रेस भी चल रही है, हालाँकि पूरे भारतीय रेल पर केवल 2 युवा एक्सप्रेस है। ☺️ हाँ, यहाँपर दोनों प्रकार में, किराया तालिका और अलगसे बढ़ी।

फिर नीतीशकुमार आए, इनका भी समाजवाद की तरफ झुकाव था अतः द्वितीय श्रेणी सिटिंग की अलग से गाड़ी लायी गयी “अंत्योदय एक्सप्रेस” इसका किराया भी अलग तालिका से चलता है। राजधानी एक्सप्रेस की तर्जपर “सम्पर्कक्रान्ति एक्सप्रेस” चली, जिस राज्य की सम्पर्क क्रान्ति केवल उसी राज्य में रुकेगी और राज्य के बाहर निकलते ही सीधे देश की राजधानी दिल्ली को जाकर खत्म होगी। लेकिन समय चलते और कुछ यात्रिओंकी माँग तो कही खाली चलना इन गाड़ियोंकी संकल्पना को बदला दिया और इनके स्टापेजेस बढ़ने लगे, एक्सटेंशन भी दिल्ली से आगे किए गए। हालांकि जैसे “जनसाधारण एक्सप्रेस” चली थी, उसी प्रकार इनकी भी कोई अलग किराया तालिका नही थी।

ममता दीदी रेल मंत्रालय में आई तो उन्होंने भी अपनी छाप के लिए “नॉनस्टॉप दुरन्तो” गाड़ियोंका अविष्कार लाया। यह “दुरन्तो” शायद हिन्दी के “तुरन्त” का बंगाली रूप है। जो भी है, मगर रेलवे में एक अलग किराया तालिका जरूर बना गया।

फिर आए प्रभु, सुरेश प्रभु। इन्होंने “हमसफ़र” सम्पूर्ण वातानुकूलित गाड़ी, “तेजस” सम्पूर्ण वातानुकूलित इन्टरसिटी, “उदय” सम्पूर्ण वातानुकूलित डबलडेकर इन्टरसिटी, ऐसी अलग अलग किराया तालिका वाली नयी नयी गाड़ियाँ यात्रिओंके लिए तैयार कर दी।

अब हम मुख्य विषयपर आते है, क्या मकसद होना चाहिए इस तरह की अलग अलग किरायोंके दरों से चलाई जानेवाली गाड़ियोंका? क्या वाकई यात्रिओंके लिए यह अलग अलग पर्याय है?

यदि पर्याय का दृष्टिकोण देखें तो नही! यात्रिओंके लिए इतनी पर्याप्त मात्रा में गाड़ियाँ नही है की वह अपनी पसंद नापसंद चुने, शायद इसीलिए गरीबरथ में सिर्फ गरीब यात्री ही नही रहते, अपितु कई उच्च वर्ग के लोग भी इन गाड़ियोंमे यात्रा करते है। वैसे ही हमसफ़र, राजधानी, शताब्दी, तेजस यह भी गाड़ियाँ केवल उच्च वर्ग की ही मिल्कियत नही है, जरूरतन बहोत सारे यात्री इन गाड़ियोंमे यात्रा करते देखे जा सकते है। तो फिर इतने प्रकार की गाड़ियाँ, इतने अलग अलग किराए इसका क्या औचित्य है?

बिल्कुल सही कारण है, नियमित वातानुकूलित/ ग़ैरवातानुकूलित किरायोंसे अधिक की उगाही करना है तो गाड़ियोंको वर्गीकृत करना जरूरी है। राजधानी, शताब्दी, हमसफ़र, दुरन्तो, जनशताब्दी, गरीबरथ, युवा, उदय, तेजस, वन्देभारत, अन्त्योदय यह भिन्न भिन्न प्रकार इसी लिए यात्रिओंके लिए लाए गए है। नियमित किराया तालिका से अलग किराया लेना है। एक गरीबरथ छोड़ा तो बाकी सभी गाड़ियोंका किराया नियमित किरायोंसे ज्यादा ही है।

हम माननीय रेल मंत्रीजी और सभी यात्रियों, लोकप्रतिनिधियोंका इस बातपर ध्यान आकर्षित करना चाहते है, गाड़ियोंके इतने प्रकार की यात्रिओंको वाकई में जरूरत नही है। आज भी हमारे देश मे रेल सेवा के लिए आम जनता के पास कोई भी सदृढ़, सुरक्षित, किफायती, आरामदायक विकल्प नही है। ऐसी स्थिति में रेल प्रशासन यात्रिओंको पर्याय तो उपलब्ध नही करा रही और ना ही यात्रिओंको ललचाने के लिए इसकी जरूरत है। किराए बढ़ाने की वाकई जरूरत है, और यही बात आम यात्रियों और उनके जनप्रतिनिधियों को अच्छेसे समझने की आवश्यकता है, न की ऐसी तरह तरह की गाड़ियाँ और उनके दसों प्रकार के किराया तालिकाओंकी। बात कड़वी तो है, मगर खरी खरी है