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आईआरसीटीसी का नया टिकट बुकिंग ऐप: अपेक्षानुरूप या अपेक्षाभंग?

हाल ही में भारतीय रेल ने अपनी आरक्षित टिकट बुकिंग की अधिकृत वेबसाइट और ऐप में कुछ सुधारणाए की, कलेवर बदला, बुकिंग्ज की गति और क्षमता को बढ़ाया।

गाड़ियोंके नाम, नम्बर, यात्रा की तारीख, जगह की उपलब्धि अब काफी साफ और बड़े, बोल्ड अक्षरोंमें आती है। रिजर्वेशन करते वक्त साइट की बेहतर स्पीड की वजह से ऐप बफरिंग से मुक्ति मिली है। खाली जगहोंका ऑप्शन नया डला है, जिससे जिन गाड़ियोंमे जगह उपलब्ध है, सामने आ जाती है। जो नाम सुरक्षित किए गए है, वह बुकिंग्ज के वक्त सीधे उपलब्ध रहते है। इतर सुविधाओंकी बुकिंग्ज जैसे खानपान, रिटायरिंग रूम्स वगैरह की बुकिंग्ज भी उसी स्थानपर ऐप में उपलब्ध कराई गई है। रेल कर्मियोंके आरक्षण बुकिंग्ज अब ऐप, वेबसाइट से हो सकेगी जो पहले इसके जरिए नही की जा सकती थी। लेकिन इन सबमे सिवाय साफ और बड़े अक्षरोंके कोई और नवीनता नजर नही आई, उल्टे पहले ऐप की कई सुविधाओंको गायब कर दिया गया है।

यह जितना भी सुधार किया गया है, वह तकनीकी रूपसे भलेही उन्नत एवं गतिमान किए गए हो, रेल पास बुकिंग्ज की सुविधा जोड़ी गयी हो, लेकिन यात्रिओंकी अपेक्षाएं कुछ और भी थी। इसके पूर्व जो फीचर्स ऐप में थे, जिनमे सिलेक्टेड डेट के साथ गाड़ियोंके अगले छह फेरोंके रिजर्वेशन स्टेटस दिखाई देते थे जो ऐप मोडिफिकेशन में गायब कर दिए गए। इसके साथ ही किसी एक सिलेक्टेड डेट की ही गाड़ियाँ दिखाई देती है, किसी अन्य दिनोंकी गाड़ियाँ अब डैश बोर्ड से नदारद है “अन्य दीनोंकी गाड़ियाँ उपलब्ध नही” ऐसा डैश बोर्ड पर लिखा होता है, हो सकता है की कोई और अपडेट आनेवाली हो। पहले ऐप में डैश बोर्ड से ही आरक्षण के कोटे की कैटेगरी याने जनरल, तत्काल, लेडीज ई. चुनते आती थी, जिसे डैश बोर्ड के बाहर कर दिया गया है। यदि आपको अलग अलग कोटे तलाशने है तो हर बार बैक जाकर कोटा बदलना होगा।

नए ऐप और वेबसाइट में गाड़ी सिलेक्ट करने के साथ ही सिलेक्टेड गाडीके समयसारणी के साथ उनके कोटा पर्टीक्युलर भी जोड़े जाने चाहिए यह हमारी काफी पुरानी माँग थी। जैसे 02656 चेन्नई अहमदाबाद नवजीवन एक्सप्रेस में चेन्नई से अहमदाबाद तक टिकट लेंगे तो GNWL, और अगले स्टेशन गुडूर से टिकट लेओंगे तो PQWL उसी प्रकार उदाहरण के लिए 01040 गोंदिया कोल्हापुर महाराष्ट्र एक्सप्रेस में गोंदिया से लेकर इतवारी तक से नागपुर से कोल्हापुर तक किसी भी स्टेशन का टिकट देखेंगे तो GNWL कोटे में मिलेगा। इतवारी के बाद नागपुर कोटा शुरू होता है तो नागपुर से आगे कोल्हापुर तक किसी भी स्टेशन के टिकट RLWL कोटे में मिलेगा, वही हाल आगे भुसावल के कोटे में भी है। कहने का तात्पर्य यह है यदि गाड़ियोंके समयसारणी के साथ कोटा इंडिकेटर एड किए जाते है तो न सिर्फ यात्रिओंकी सुविधा बढ़ेगी बल्कि रेलवे के राजस्व में भी काफी इज़ाफा होगा।

कुल मिलाकर आईआरसीटीसी वेबसाइट और ऐप का अपग्रेडेशन यात्रिओंकी अपेक्षा तो पूर्ण करता ही नही बल्कि और ज्यादा निराश कर देता है। PRS टिकट, जिसमे कर्मचारी लगते है, स्टेशनरी लगती है, रेलवे की मशीनरी, जगह ई. का इस्तेमाल किया जाता है, उसपर कोई सर्विस चार्ज नही पर ई टिकट जो व्यक्ति खुद और अपनी खुद की स्टेशनरी वह भी जरूरी लगे तो इस्तेमाल करता है उस पर सर्विस चार्ज लगाया जाता है। इस तरह का व्यवहार देखने से ऐसा लगता है रेल प्रशासन को ईश्वर सद्बुद्धि दे न तो कमसे कम व्यवहार बुद्धि तो भी जरूर दे ऐसी कामना है।

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कुछ महत्वपूर्ण गाड़ियाँ शुरू होने जा रही है…

06079/80 चेन्नई सेंट्रल बेंगालुरु चेन्नई सेंट्रल प्रतिदिन दिनांक 04 जनवरीसे शुरू होगी।

06081/72 चेन्नई सेंट्रल मैसूरु चेन्नई सेंट्रल शताब्दी वाया बेंगालुरु 04 जनवरीसे सप्ताह में 6 दिन शुरु होने जा रही है।

02063/64 पुरी यशवंतपुर पूरी गरीबरथ साप्ताहिक 15/16 जनवरीसे शुरू की जा रही है।

02085/86 सम्बलपुर हुजूर साहिब नान्देड सम्बलपुर त्रिसाप्ताहिक गाड़ी 15/16 जनवरीसे शुरू की जा रही है।

02088/87 पुरी हावडा पुरी प्रतिदिन 01 जनवरीसे यात्री सेवाओं में हाजिर हो चुकी है।

08561/62 विशाखापत्तनम काचेगुड़ा विशाखापट्टनम प्रतिदिन दिनांक 10/11 से शुरू की जा रही है।

08519/20 विशाखापट्टनम लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशाखापट्टनम प्रतिदिन दिनांक 12 जनवरीसे शुरू होने जा रही है।

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अलविदा 2020, स्वागतम 2021!

2020 यह वर्ष हर किसी को, किसी न किसी मायनोंमें याद रहेगा। महामारी के इस वर्ष ने किसी को, अपने के बिछड़ने का दर्द दिया है तो किसी का रोजगार छीना है। रेलवे का चक्का बन्द तो अब इतिहास के पन्नों का एक स्थायी अध्याय है। इस अध्याय में कैसे रेलवे ठप्प रही, कामगारों का गाँव की तरफ पैदल ही निकल पड़ना, रेलवे की इन लोगोंके लिए अपने कर्मचारियोंके साथ, सेवा की नैतिक जिम्मेदारी का एहसास रखते हुए, श्रमिक गाड़ियोंका संचालन किया, रास्तेमें श्रमिकोंके खानपान की व्यवस्था करना, किसी को शायद ही भुलाए देगा।

इस वर्ष, रेल परिवहन में ही क्या, देश के हरेक सामाजिक जीवन मे भारी उथलपुथल रही। रेलवे स्टेशनोंमें, आनेजाने पर पाबन्दियाँ लग गयी। महामारी के पहले रेल प्रशासन ने गाड़ियोंमे यात्रिओंकी प्रतिक्षासूची पूर्णतयः समाप्त कीये जाने की योजना का ख़ाका तैयार होने की घोषणा की थी लेकिन हाय रे दुर्भाग्य! प्रतिक्षासूची के यात्री की तो यात्रा कीए जाने की उम्मीद ही धरी रह गयी। पहले तो गाड़ियाँ ही बन्द रही, और शुरू हुई तो आज भी केवल आरक्षित यात्रिओंके लिए ही चल रही है।

द्वितीय श्रेणी टिकट की खिड़कियोंके पट ऐसे बन्द हुए की खुलने का नाम ही नही ले रहे है और ना ही आसपास के दिनोंमें इनके खुलने के कोई आसार दिखाई दे रहे है। मासिक/ त्रिमासिक पास धारकोंके पास निकले पड़े है, लेकिन पता नही गाड़ियोंमे यह वैध कब होंगे? यह लोग बेचारे सड़क मार्ग के धक्के खा रहे है। यह कष्ट केवल शारारिक नही, अपितु मानसिक और आर्थिक भी है। जितना ज्यादा लॉक डाउन ने आमजन को हलकान किया है, उतना ही हैरान रेलवे के इस निर्बंधवाले अनलॉक ने रेल यात्रिओंको किया है। आज भी स्थानिक रेल यात्रिओंको सवारी गाड़ियोंका, द्वितीय श्रेणी टिकटोंका और सीजन पास की वैधता के “अनलॉक” किए जाने का इंतजार है।

झीरो बेस, शून्याधारित समयसारणी के नाम पर रेलवे की ओरसे जो कवायदें चलाई जा रही है, उससे आम यात्रिओंको यह समझ ही नही आ रहा की कौनसी रेल गाड़ियाँ नियमित है, कौनसी त्यौहार विशेष? वैसे हमारे देश मे पूरे वर्षभर त्यौहार चलते ही रहते है, तो क्या रेलवे अपनी आधी से ज्यादा गाड़ियाँ इसी तरह त्यौहार त्यौहार करते चलाने वाली है? दिक्कत यहाँतक ही नही है, इनका किराया नियमित किरायोंसे कई ज्यादा है। हर महीने इनको सीमित रूपसे विस्तारित किया जाता है, अग्रिम आरक्षण का समय नही मिल पाता, कभी भी किसी भी गाड़ी का समय, टर्मिनल्स, मार्ग, स्टापेजेस अत्यंत अल्प अवधि की सूचनाओंपर बदले जा रहे है। यात्रिओंमें इस झीरो बेस टाइमिंग्ज की सूचनाएं अब बेस लैस टाइमिंग्ज के नाम से प्रचलित हो रही है।

इस महामारी का वर्ष और उसके हादसोंको भुलाकर रेल यात्री, प्रशासन से वही अपनी वर्षोंसे लम्बित आशाओं और अपेक्षाओंकी पूर्ति में प्रतीक्षारत है। आज भी उपनगरीय गाड़ियोंका यात्री बैठने की छोड़िए सुरक्षित खड़े होकर ही मिल जाए ऐसी यात्रा कीए जाने की अपेक्षा कर रहा है। छोटे छोटे स्टेशन नई कनेक्टिविटी की आशा छोड़ अपनी पुरानी गाड़ियोंके स्टापेजेस बचे रहे इसकी अपेक्षा कर रहे है, बड़े बड़े जंक्शन बाइपास ट्रैक, नए सैटेलाइट टर्मिनल्स के चलते कई गाड़ियाँ खोते चले जा रहे है, कन्जेशन का यह उपचार बड़ा ही भयंकर है। क्या जंक्शनोंपर, गाड़ियोंके कन्जेशन, भीड़, जमावड़े का उपाय इस तरह से करना ठीक है?

प्रश्न कई है, उपाय अनुत्तरित है। रेलवे हम भारतीयों के तन मन में रची बसी है, हमारी यातायात का प्रमुख साधन है। प्रशासन उसे चाहे किसी तरह चलाए, लोग उसमे ढलने, निभाने का प्रयास करते ही रहते है। रेलवे अपनी गाड़ियोंको नियमित करके चलाए, विशेष करके चलाए या त्यौहार विशेष कर चलाए, यात्री जाने के सदा ही तैयार है। आगे निजी गाड़ियाँ आनेवाली है, पूर्णतयः वातानुकूलित गाड़ियोंकी भी खबरें सुनने में है। यात्री कहता है, हम तैयार है। यात्री यह ट्वेन्टी ट्वेंटी वाला वर्ष खेल और झेल चुका है और आने वाले 2030 के नैशनल रेल प्लान तक के लिए भी मानसिकता बना चुका है। आशाएं, अपेक्षाएं तो चलती ही रहेगी।

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5 जोड़ी गाड़ियाँ पुर्व तटिय रेलवे (ECoR) की शुरू की जा रही है।

1: 02882/81 भुबनेश्वर पुणे भुबनेश्वर वाया विजयवाड़ा, सिकन्दराबाद साप्ताहिक

2: 02007/08 विशाखापट्टनम चेन्नई सेंट्रल विशाखापट्टनम साप्ताहिक

3: 02071/72 भुबनेश्वर तिरुपति भुबनेश्वर साप्ताहिक

4: 08503/04 विशाखापट्टनम साइनगर शिर्डी विशाखापट्टनम साप्ताहिक वाया विजयवाड़ा, सिकन्दराबाद, नान्देड, मनमाड़

08567/68 विशाखापट्टनम कोल्लम विशाखापट्टनम साप्ताहिक वाया विजयवाड़ा, रेनिगुंटा, कोयम्बटूर, एर्नाकुलम