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मध्य रेल की अतिरिक्त विशेष गाड़ियाँ

अतिरिक्त उत्सव विशेष गाड़ियाँ और बनारस
उत्सव विशेष गाडी द्वि-साप्ताहिक के बजाय प्रतिदिन चलेगी

मध्य रेल्वे अतिरिक्त विशेष उत्सव ट्रेन चलाएगा। यात्रिओंकी बढ़ती माँग को देखते अपनी 02167/68 लोकमान्य तिलक टर्मिनस बनारस को द्विसाप्ताहिक के बजाए प्रतिदिन चलाया जाएगा।

१) लोकमान्य टिळक टर्मिनस – गोरखपूर विशेष साप्ताहिक उत्सव गाड़ी

01079 विशेष उत्सव दि. 12 से 26 नवम्बर के बीच चलेगी। लोकमान्य टिळक टर्मिनस से हर गुरुवार को चलेगी और गोरखपूर तिसरे दिन पोहोचेगी।

01080 विशेष उत्सव गाड़ी दि. 14 से 28 नवम्बर तक गोरखपूर से हर शनिवार को चलेगी और दुसरे दिन लोकमान्य टिळक टर्मिनस को पोहोचेगी।

ठहराव : हरदा और भोपाल में नही रुकेगी, बचे सभी टाइमिंग्ज 11079/11080 के समान रहेंगे।

संरचना : १ द्वितीय वातानुकूलित, ४ तृतीय वातानुकूलित, १२ शयनयान, ३ द्वितीय आसन श्रेणी

लोकमान्य टिळक टर्मिनस – बनारस (मंडुआडीह) विशेष उत्सव गाडी ही द्वि-साप्ताहिकके बजाय प्रतिदिन चलेगी।

02167 विशेष उत्सव दि. 10 से 30 नवम्बर के बीच लोकमान्य टिळक टर्मिनस से प्रतिदिन चलेगी और बनारस (मंडुआडीह) को दूसरे दिन पोहोचेगी।

02168 विशेष उत्सव दि. 11 नवम्बर से 1 दिसम्बर तक बनारस (मंडुआडीह) से प्रतिदिन चलेगी और दुसरे दिन लोकमान्य टिळक टर्मिनस को पोहोचेगी।

सभी स्टापेजेस और समयसारणी याथवत रहेंगी।

आरक्षण : 01079/80 संपूर्णतः आरक्षित विशेष उत्सव गाड़ी के विशेष शुल्क के साथ, आरक्षण दि. 9 नवम्बर से शुरू होगा और 02167 उत्सव विशेष गाडीके बढ़े दिनोंके फेरोंके लिए आरक्षण 08 नवम्बर से सभी आरक्षण केंद्र पर और http://www.irctc.co.in. इस वेबसाइटपर शुरू होगा।

केवल कन्फर्म / RAC टिकट धारी ही इन गाड़ियोंमे यात्रा कर सकते है, साथ ही सभी यात्रिओंसे अनुरोध है की सभी संक्रमण सम्बंधित नियमोंका पालन अनिवार्य रूप से करेंगे।

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बेंगालुरु नई दिल्ली बेंगालुरु कर्णाटक एक्सप्रेस होगी LHB

06527/28 बेंगालुरु नई दिल्ली बेंगालुरु कर्णाटक एक्सप्रेस पहले हो अपना सुपरफास्ट वाला नम्बर 12627/28 बदल चुकी है और अब अपने 25 ICF कोच की जगह 22 LHB कोच के साथ दिनांक 10 नवम्बर से चलाई जाएगी।

इन नए बदलावोंके के साथ यात्रीगण को कुछ बातें भी समझ आना जरूरी है। परंपरागत ICF कोचेस में 2- SLR/SLRD, 1 WCB – पेंट्री कार, 1FAC – 1 वातानुकूलित प्रथम श्रेणी, 2 ACCW – 2 वातानुकूलित टू टियर, 3 ACCN – 3 वातानुकूलित थ्री टियर, 13 GSCN – 13 द्वितीय श्रेणी स्लिपर, 2 GS – दो द्वितीय श्रेणी जनरल और 1 VPH – पार्सल वैन ऐसे कुल 25 कोच लगाए जा रहे थे। अब 10 तारीख से गाड़ी LHB कोच से सुसज्जित हो रही है तो बदलाव इस प्रकार रहेगा, 2 LWLRRM – 2 एसएलआर गार्ड कोच के साथ, 1 LWCBAC – एक वातानुकूलित पेंट्री कार, 2 LWACCW – दो वातानुकूलित टू टियर, 3 LWACCN – तीन वातानुकूलित थ्री टियर, 12 LWSCN – बारह स्लिपर, 2 LS – दो सेकन्ड क्लास जनरल कुल कोच संख्या 22

अब इसमें समझिए 1 स्लिपर, 1 वातानुकूलित प्रथम श्रेणी और 1 पार्सल वैन कम किया गया है। LHB स्लिपर की तो यात्री आसन क्षमता पुराने कोचेस से 10% ज्यादा होने से स्लिपर श्रेणी में कोई कटौती नही हुई है मगर प्रथम श्रेणी वातानुकूलित कट जानेसे VIP यात्रियोंको परेशानी होगी और महत्वपूर्ण पार्सल वैन न होने से पार्सल लदान का बड़ा नुकसान होने वाला है। कर्णाटक एक्सप्रेस की पार्सल वैन हमेशा फूल बुक रहती थी। हालाँकि 5 फरवरी से और बदलाव किया जाना है, उसमे एक वातानुकूलित टू टियर निकाल कर पार्सल वैन जोड़ी जानेवाली है। लेकिन 4 महीने तक कर्णाटक एक्सप्रेस बगैर पार्सल वैन से चलाई जाएगी और फरवरी से वातानुकूलित प्रथम श्रेणी के साथ साथ 1 वातानुकूलित टू टियर का कोच भी घटा दिया जाएगा।

यही सारी कथा 02657/58 चेन्नई बेंगालुरु चेन्नई मेल के साथ भी होगी क्योंकि इसका रेल कर्णाटक एक्सप्रेस से लिंक याने जुड़ा है।

कुल मिलाकर बात यह है, कर्णाटक एक्सप्रेस और चेन्नई बेंगालुरु मेल में VIP यात्रिओंकी आसन व्यवस्था घटा दी गयी है। यकीन न हो तो साथ वाला परीपत्रक भी देख लीजिएगा।

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और कितने शाहीन बाग?

शाहीन बाग आंदोलन याद है?

दिल्ली वाला शाहीन बाग! जो 100 दिनोंसे ज्यादा दिन चला था। तमाम दिल्लीवासियों को इस प्रदर्शन ने एक विविक्षित एरिया को, भरेपूरे बहते ट्रैफिक को बन्द कर लम्बे रास्ते से घूम कर जाने के लिए मजबूर कर दिया।

अब याद कीजिए, पंजाब किसान धरना। और याद कीजिए गुर्जर आंदोलन। समझ आ रही है कुछ समानताएं? आज लाखो रेल यात्री, रेल मार्ग रोके जाने से परेशान है। गाड़ियाँ सैकड़ों किलोमीटर घूम घुमा कर ले जायी जा रही। शासन, प्रशासन, आम जनता, पीड़ित यात्री सब मौन है।

भयंकर मौन! डरावना मौन!!

किस आंदोलन के क्या उद्देश्य थे, कौन आंदोलनकारी थे? किसने क्या हासिल कर लिया? यह सब बातें अलाहिदा रखिए, पीस कौन रहा है? पंजाब की जनता। हजारों लाखों यात्री। सैकड़ों उद्यमी।

क्या चल रहा है?

दिल्ली की सडकोंपर का शाहीनबाग पंजाब की पटरियों पर बस गया है। गुर्जर आंदोलन ने भी रेल पटरियों पर बसेरा कर लिया है। वहीं खाका है, मार्ग अवरूद्ध करने का।

शाहीनबाग में सड़कें थी यहाँपर रेल की पटरियाँ है। तब भी आन्दोलन चलता रहा, लोग तकतें रहे, प्रशासन हतबल सा देखता रहा और इधर भी वही….

यह शाहीन बाग ही तो है…..

रेल पटरियों वाला शाहीनबाग।

बताइए, और कहाँ कहाँ शाहीनबाग बनाए जा रहे है? अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए कोई विरोध नही। किसान हो, गुर्जर हो या कोई और आपके साथ सभी की सहानुभूति है, लेकिन आम जनता को नुकसान पोहोंचाना सरासर गलत और गाड़ियाँ रोके जाना अतिदुखदाई है।

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पूर्व मध्य (ECR) रेल की 5 जोड़ी प्रतिदिन त्यौहार विशेष गाड़ियाँ

पूर्व मध्य रेल ने दिवाली पर्व पर यात्रिओंकी मांग देखते हुए 5 जोड़ी त्यौहार विशेष गाड़ियाँ जिसमे गंगादामोदर, पालामाऊ, सिंगरौली लिंक, जानकी, साऊथ बिहार और जनशताब्दी गाड़ियाँ 10 नवम्बर से रोजाना चलाने की तैयारी की है। यह सभी गाड़ियाँ पुर्णतयः आरक्षित आसन व्यवस्थाओंके साथ और सीमित अवधि तक चलाई जाएगी।

1: 03329/30 धनबाद पटना धनबाद गंगा दामोदर प्रतिदिन त्योहार विशेष, 13329/30 के समयसारणी एवं ठहराव की तरह

2: 03347/48 बरकाकाना पटना बरकाकाना पालामाऊ प्रतिदिन त्योहार विशेष, 13347/48 के समयसारणी एवं ठहराव की तरह

3: 03349/50 सिंगरौली पटना सिंगरौली लिंक प्रतिदिन त्योहार विशेष, 23347/48 के समयसारणी एवं ठहराव की तरह

4: 05284/83 जयनगर मनिहारी जयनगर जानकी प्रतिदिन त्योहार विशेष, 15284/83 के समयसारणी एवं ठहराव की तरह

5: 03287/88 राजेंद्रनगर दुर्ग राजेंद्रनगर साऊथ बिहार प्रतिदिन त्योहार विशेष, 13287/88 के समयसारणी एवं ठहराव की तरह

6: 02363/64 पटना रांची पटना जनशताब्दी प्रतिदिन त्योहार विशेष, 12365/66 के समयसारणी एवं ठहराव की तरह

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पंजाब, हरियाणा रेल रोको : कुछ तस्वीरें। करे कोई भरे कोई

24 सितम्बरसे चला आ रहा पंजाब राज्य का किसान रेल रोको, आज भी जारी है। बीते 40 दिनोंमें रडे विभाग का करीबन 1200 करोड़ रुपयोंका नुकसान हुवा है, 2225 मालगाड़ियाँ और करीबन 1250 यात्री गाड़ियाँ नही चलने से यह नुकसान हुवा है।

यह तो रेल प्रशासन की गाड़ियाँ न चलने से मिलने वाले राजस्व का घाटा है, लेकिन बन्द पड़े उद्योगों, कारखानों का नुकसान, किसानोंके फलों, सब्जियोंका नुकसान, मज़दूरोंका रोजगार डूबना और सबसे बड़ा नुकसान तो पंजाब, हरियाणा जैसे उद्यमी राज्योंकी की साँख बिगड़ना यह है।

अपनी मांगोंके लिए धरना, प्रदर्शन और विरोध करना जनतंत्र में हर कोई का हक है, लेकिन ऐसे प्रदर्शनोंसे प्रदेश का, जनता का कितना नुकसान हो रहा है, क्या यह देखना लाज़मी नही? ऐसे ही रेल ट्रैफिक दिल्ली से आगे नही बढ़ रहा था की पंजाब धरने के साथ साथ राजस्थान, हरियाणा का गुर्जर आन्दोलन भी 1 नवम्बर से शुरू हो गया है। गरीबी में आटा गीला, अब गाड़ियाँ दिल्ली तक भी जाने में मुश्किलात आ गयी। गाड़ियाँ इधर, उधर घूमते घुमाते ले जाई जा रही है।

गाड़ियाँ ठप्प की जा रही है, रेल प्रशासन हतबल है। जनता, यात्री, उद्यमी सारे परेशान है और प्रशासन की ओर ताक रहे है। क्या यह जनतंत्र है, या उसका विडम्बन है? कौन लेगा इस घाटे की जिम्मेदारी, किस तरह बन्द किए जाएंगे ऐसे रेल रोको? मुसीबत तो आम जनता की होती है। न प्रदर्शनकारी मानने को तैयार न प्रशासन कार्रवाई के लिए सजग। जनता का व्यक्तीगत नुकसान तो होता ही है, और जो राजस्व डूबता है, सार्वजनिक सम्पत्तियां बरबाद होती है करदाताओंके पैसे से वह अलग।

गुर्जर आन्दोलन

उपरोक्त तस्वीरे रेलपोस्ट, इंडियाटाइम्स, आजतक के सौजन्यता से।