
जबलपुर मुम्बई जबलपुर गरीब रथ भी शुरू


लोकमान्य टिळक टर्मिनस – प्रयागराज दुरंतो विशेष (द्वि साप्ताहिक)
02293 दुरंतो विशेष लोकमान्य टिळक टर्मिनस से हर सोमवार और शुक्रवार को दिनांक 02.10.2020 से शाम 17:25 को निकलेगी और प्रयागराज दूसरे दिन दोपहर 12:45 को पोहोचेगी। वापसी में 02294 दुरंतो स्पेशल प्रयागराज से हर मंगलवार और शनिवार 03.10.2020 से शाम 19:20 को छूटेगी और अगले दिन लोकमान्य टिळक टर्मिनस को दोपहर 14:55 को पोहोचेगी।
स्टापेजेस : यह दोनोंही गाड़ियाँ जाते और आते समय इगतपुरी में नही रुकेंगी, बाकी सारे स्टॉपेजेस नियमित गाडी क्रमांक 12293/12294 के अनुसार रहेंगे।
संरचनाः एक फर्स्ट एसी, तीन एसी – 2 टायर, तेरा एसी – 3 टायर
2: लोकमान्य टिळक टर्मिनस – प्रयागराज तुलसी विशेष (द्वि- साप्ताहिक )
02129 लोकमान्य टिळक टर्मिनस हर मंगलवार और रविवार दिनांक 04.10.2020 सुबह 05:23 को निकलेगी और अगले दिन प्रयागराज सुबह 08:50 को पोहोचएगी।
02130 तुलसी विशेष एक्सप्रेस प्रयागराज से हर सोमवार और बुधवार दिनांक 05.10.2020 से शाम 18:30 को खुलेगी और अगले दिन, शाम में 21:30 को लोकमान्य टिळक टर्मिनस पोहोचाएगी।
ठहराव : नियमित गाडी क्रमांक 22129/22130 के अनुसार सारे स्टापेजेस रहेंगे केवल ईगतपुरी एवं निवारी के स्टापेजेस रद्द किए गए है।
संरचनाः एक एसी – 2 टायर, चार एसी-3 टायर, 12 स्लीपर क्लास, 3 द्वितीय श्रेणी सिटिंग।
आरक्षण: 02293 दुरंतो विशेष गाडीकी बुकिंग आज से याने 01 अक्तूबर से एवं 02129 तुलसी विशेष ट्रेन की बुकिंग सभी आरक्षण केंद्रपर और आईआरसीटीसी की वेबसाइटवर शुरू होगी।
केन्द्रच्या “अनलॉक – 5” च्या सूचनां पाठोपाठ महाराष्ट्र राज्य शासनानेही आपल्या मिशन बिगिन अगेन च्या सूचना जाहिर केल्यात.
राज्यान्तर्गत प्रवासी रेलवे गाड्या तसेच पुणे सबर्बन सेवा तत्काळ सुरु करण्यात येतील असे आश्वासन याद्वारे मिळाले आहे. आजपासून जवळ जवळ दोन आठवड़े बऱ्याच स्पर्धा आणि प्रवेश परीक्षा राज्यात सुरु होत आहे. त्या अनुषांगाने आता मध्य रेलवे ने पुढाकार घेवून पुणे – लोनावला, पुणे – दौंड, बारामती लोकल्स लवकर सुरु कराव्यात. तसेच मुम्बई – नागपुर मार्ग अगदी रिकामा पडलेला आहे. या मार्गावर केवल एक लाम्ब पल्याची हावडा मुम्बई मेल सुरु आहे. ही गाड़ी ही आठवड्यात केवळ 3 दिवस धावत आहे. या मार्गावरील मुम्बई गोंदिया विदर्भ एक्सप्रेस, मुम्बई नागपुर सेवाग्राम एक्सप्रेस सुरु करण्याची अपेक्षा आहे.
राज्यातील इतर गाड्या मुम्बई जालना जनशताब्दी, मुम्बई नान्देड देवगिरी, तपोवन एक्सप्रेस, मुम्बई सोलापुर सिध्देश्वर एक्सप्रेस, मुम्बई – पुणे दरम्यान इंद्रायणी, प्रगति, डेक्कन क्वीन, डेक्कन एक्सप्रेस, तसेच मुम्बई – कोल्हापुर मार्गावरील महालक्ष्मी, सह्याद्रि एक्सप्रेस सुरु करण्यात याव्या. मुम्बई सावंतवाड़ी, रत्नागिरी साठी तुतारी एक्सप्रेस ही रात्रकालीन गाड़ी सुरु करण्यात आलेली आहे, परंतु या मार्गावरील दिवसकालीन गाड्या जनशताब्दी, मांडोवी एक्सप्रेस सुरु केल्या गेल्यात तर प्रवाश्यान्ना अतिशय सोईचे होणार आहे. तसेच नागपुर – नान्देड मार्गावरील नंदीग्राम, नागपुर – बल्हारशाह पैसेन्जर, अकोला – नान्देड मार्गावरील पैसेन्जर सुरु केल्यात तर या मार्गावरील प्रवासी सुद्धा त्यांच्या जिल्ह्यातील मुख्यलयांना जोडले जातील.
राज्यान्तर्गत रेलवे च्या प्रवासी सेवा तत्काळ सुरु करण्याच्या निर्णयाने सर्व विद्यार्थी, व्यापारी, व्यवसायिक आणि रोज अप डाउन करणारे प्रवासी आनंदुन गेलेले आहेत. राज्यातील सर्व थरातून या निर्णयावर माननीय मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे यांचे हार्दिक आभार व्यक्त केले जात आहेत.

01464 जबलपुर सोमनाथ वाया इटारसी होकर, स्पेशल दिनांक 03 अक्तूबर से हर सप्ताह मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शनिवार और रविवार को जबलपुर से चलेगी। वापसी में 01463 सोमनाथ जबलपुर वाया इटारसी होकर, स्पेशल सोमनाथ से दिनांक 04 से हर सप्ताह मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और रविवार को सोमनाथ से निकलेगी।
यह गाड़ी सिहोर, परबति, कालापीपल, शुजालपुर, आकोदिया, काली सिंध, बेरछा, मकसी, तारना रोड, खाचरोद, मेघनगर, दाहोद, गोधरा, देरोल, आणंद, नडियाद, मेहमदाबाद खेड़ा रोड, चाँदलोडिया, वीरमगाम, थान, वांकानेर, भक्तिनगर, वीरपुर, जेतलसर, जूनागढ़, केशोद, मालिया हटिना इन स्टेशनोपर नही रुकेगी।
कुल मिलाकर यह है की पश्चिम मध्य रेल के सारे स्टापेजेस बराबर रहेंगे तो पश्चिम रेल के उज्जैन, नागदा, रतलाम, छायापुरी, मणिनगर, अहमदाबाद, सुरेंद्रनगर, राजकोट, वेरावळ, सोमनाथ बरकरार रहेंगे।
01066 जबलपुर सोमनाथ स्पेशल द्विसाप्ताहिक वाया कटनी, बीना होकर दिनांक 02 अक्तूबर से हर सोमवार और शुक्रवार को निकलेगी तो वापसी में 01465 सोमनाथ जबलपुर स्पेशल द्विसाप्ताहिक वाया बीना कटनी होकर 05 अक्तूबर से हर सोमवार और शनिवार को निकलेगी।
यह गाड़ी सिहोर, परबति, कालापीपल, शुजालपुर, आकोदिया, काली सिंध, बेरछा, मकसी, तारना रोड, खाचरोद, मेघनगर, दाहोद, गोधरा, देरोल, आणंद, नडियाद, मेहमदाबाद खेड़ा रोड, चाँदलोडिया, वीरमगाम, थान, वांकानेर, भक्तिनगर, वीरपुर, जेतलसर, जूनागढ़, केशोद, मालिया हटिना इन स्टेशनोपर नही रुकेगी।
कुल मिलाकर यह है की पश्चिम मध्य रेल के सारे स्टापेजेस बराबर रहेंगे तो पश्चिम रेल के उज्जैन, नागदा, रतलाम, छायापुरी, मणिनगर, अहमदाबाद, सुरेंद्रनगर, राजकोट, वेरावळ, सोमनाथ बरकरार रहेंगे।
यात्रीगण कृपया स्टापेजेस की कटौती को ध्यान में रखे सोमनाथ एक्सप्रेस के संत हिरदाराम नगर से लेकर सोमनाथ के बीच बहोत सारे नियमित स्टापेजेस रद्द कर दिए गए है।
निम्नलिखित समयसारणी परीपत्रक भी देख लीजिए।





रेलवे की समयसारणी, क्या आप ने कभी पढ़ी है? अब आप बोलेंगे, समयसारणी भी कोई पढ़ने की चीज है, वह कोई नॉवेल या साहित्य थोड़े ही है जो उसे पढ़ेंगे? वह तो बस रेफरेन्स के लिए ठीक है, और आजकल तो ऑन लाइन चेक कर लीजिए काम हो जाता है।
मित्रों, आपको सुनकर आश्चर्य होगा, कई लोग रेलवे की समयसारणी देखते हुए घंटो बिता सकते है। गाड़ियाँ कैसे चलती है, एवरेज स्पीड क्या है, कहांपर लूज टाइमिंग्ज दिए गए है, कौनसी ट्रेन दूसरी गाड़ी को ओवरटेक कर रही है, बड़ा ही मजेसे समय कटता है। खैर! हम व्यर्थ ही हमारे सम्भाषण को लूप लाइन में लेकर चले गए। हमारा कहना है, आज कल के रेल गाड़ियोंकी एक्सटेंशन की माँग वाले ट्रेंड पर। जिसे देखो वह अपने चहेते स्टेशनपर गाड़ियोंको खींचने की बात करते दिखाई देता है। क्या यात्री संगठन और क्या सांसद, सभी लोग बड़े आसानी से फलाँ गाड़ी को हमारे स्टेशन तक विस्तारित करने की माँग पत्र रेल प्रशासन को थामते रहते है। रेल प्रशासन भी बड़ी आसानी से लम्बी लम्बी गाड़ियोंको और थोड़ा, और थोड़ा खींचकर उनकी पहलेसे ही लम्बी यात्रा को और लम्बी करते रहता है।
यह जो गाड़ियाँ खींचने का पैटर्न है, इससे जंक्शनोंका महत्व कम कम होते जा रहा है। पहले यात्री लोग ब्रांच लाइनोंसे जंक्शन स्टेशन तक आ कर मुख्य मार्ग की गाड़ियोंमे अपनी आगे की यात्रा करते थे। अब यह जंक्शन, ब्रांच लाइन, मैन लाइन वाली संकल्पना रह ही नही गयी है। कोई एक गाड़ी कई ब्रांच लाइनोंसे गुजर कर बीच मे मैन लाइनपर आती है, फिर किसी ब्रांच लाइन के स्टेशनपर जाकर समाप्त हो जाती है। यह स्वरूप लोकप्रिय तो है लेकिन रेलवे की मुख्य संकल्पना को बाधित करने वाला है, तभी जब रेलवे ने अपनी समयसारणी को ज़ीरो बेस पर लाकर पुनर्रचित करने की सोची तो सबसे पहले उन्होंने लिंक एक्सप्रेस बन्द कर दी, फिर लम्बी दूर की मन्दगति से चलनेवाली एक्सप्रेस को समयसारणी के बाहर किया, किसी एक विभाग से दूसरे विभाग में याने इन्टरडीविजनल सवारी गाड़ियोंको किसी एक ही डिवीजन तक सीमित करने का काम किया।
यात्री संगठन और गाड़ियोंका विस्तार मांगनेवाले राजनियकोंको यह बात समझ लेना चाहिए, आप जितनी गाड़ियोंकी दूरी उसका चालान विस्तार करके लम्बी खींचते चले जाओगे उतनी ही उनकी एवरेज स्पीड गिरते चली जाएगी, लूज टाइमिंग्ज बढ़ेंगे, यात्रिओंके संख्या में असमानता आयेंगी। उदाहरण के लिए कोल्हापुर गोंदिया महाराष्ट्र एक्सप्रेस लीजिए, इसमें कितने यात्री एंड टू एंड यात्रा करते होंगे? वैसे ही हावडा से श्रीगंगानगर तक 114 स्टापेजेस लेने वाली तूफान एक्सप्रेस, बांद्रा से देहरादून के बीच 98 स्टापेजेस, मुम्बई से फ़िरोजपुर के बीच 94 स्टापेजेस वाली इन गाड़ियोंमे भी शायद ही कोई एंड टू एंड चलनेवाले यात्री रहते होंगे। ऐसे कई उदाहरण ढूंढे जा सकते है।
इस पर इलाज यह है, यात्रिओंने कनेक्टिंग ट्रेन्स की मांग रखनी चाहिए। कनेक्टिंग ट्रेन्स याने किसी एक मार्ग से दूसरे मार्ग के सिरे तक जाने वाली गाड़ी। इसका उदाहरण ऐसा होगा, भोपाल स्टेशन ग्रांट ट्रंक मार्ग का बड़ा स्टेशन है और इसके आसपास पश्चिम रेलवे की कई ब्रांच लाइन आती है। उज्जैन, इन्दौर, रतलाम, नागदा इन स्टेशनोंको नागपुर, रायपुर, दक्षिण के, पूर्व के बड़े स्टेशनोंसे सीधी गाड़ियाँ न के बराबर है। ऐसे में रतलाम से उज्जैन होते हुए या इन्दौर होते हुए भोपाल तक मुख्य मार्ग की प्रीमियम गाड़ियोंसे कनेक्टिंग ट्रेन्स मिल जाए तो यहांके यात्रिओंकी बहोत सारी समस्या खत्म हो जाएगी। एक साप्ताहिक वलसाड पूरी ट्रेन को हाल ही में घूमते घुमाते जाने के बजाए सीधे मार्ग से चलाने का रेल प्रशासन के निर्णय पर आपत्ति उठाए जा रही है, लेकिन यह गाड़ी के बजाए यदि कोई कनेक्टिंग ट्रेन नागपुर तक मिल जाए तो पूरी जाने के लिए ढेर ऑप्शन यहां के यात्रिओंको मिलेंगे।
यह ठीक हब एंड स्पोक की परिभाषा है। इसके फायदे यह है, की कनेक्टिंग ट्रेनें न सिर्फ रोजाना बल्कि दिन में 2,3,4 फेरोंवाली भी हो सकती है, जब कि लम्बी दूरी की गाड़ी साप्ताहिक या द्विसाप्ताहिक ही मिल पाएगी। दूसरा डेली या ज्यादा फेरोंके चलते, कनेक्टिंग जंक्शन तक जगह की कोई परेशानी नही। तीसरा जैसे ही आप हब पर पोहोंच रहे हो आपको ट्रेन्स के ढेरों ऑप्शन मिल सकते है और ट्रेन्स ही क्यों सड़क मार्ग या हवाई मार्ग भी आपके लिए खुले है।
यह हब एन्ड स्पोक संकल्पना न सिर्फ रेलवे के सुनियोजन के लिए बल्कि आम यात्रिओंके अविरत सेवाओंके लिए भी बेहद कारगर है। यात्री संगठनोंको यह बात यदि पल्ले पड़ती है तो वह बजाय लम्बी लम्बी नई ट्रेनों की मांगों और पुरानी गाड़ियोंके बेवजह मार्गविस्तारोंके पीछे पड़े, छोटी छोटी कनेक्टिंग इण्टरसिटी, मेमू ट्रेन्स की ही मांग करेंगे। और हमारा दावा है की इस तरह की उनकी मांग प्रशासन की ओरसे, बड़ी आसानी से स्वीकृत भी हो सकती है।