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रीवा – आनंदविहार – रीवा डेली स्पेशल 25 सितंबर से शुरू हो रही है।

पश्चिम मध्य रेलवे के रीवा, सतना की लोकप्रिय गाड़ी रीवा आनंदविहार रीवा एक्सप्रेस दिनांक 25/26 से शुरू की जा रही है। संक्रमण काल मे सारी गाड़ियाँ बन्द किए जाने के बाद रेल प्रशासन ने धीरे धीरे यात्रिओंकी माँगोंपर गाड़ियाँ शुरू की है। रीवा और सतना के यात्रिओंमें दिल्ली की ओवरनाइट कनेक्टिविटी देने वाली यह गाड़ी खासी लोकप्रिय है। इस स्पेशल श्रेणी की कैटेगरी में अग्रिम आरक्षण लेकर ही यात्रा की जा सकती है। यात्रिओंसे रेल प्रशासन का निवेदन है, केवल कन्फर्म और RAC आरक्षण टिकट धारी यात्री ही इन विशेष (स्पेशल) गाड़ियोंमे यात्रा कर सकते है। प्रतिक्षासूची या द्वितीय श्रेणीके यात्रीयोंको को रेल यात्रा करने की अनुमति नही है।

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कोटा – नागदा के बीच चलेगी डेली इण्टरसिटी स्पेशल

09801/09802 नागदा कोटा नागदा डेली इण्टरसिटी स्पेशल दिनांक 23 से कोटा से शुरू की जा रही है। इस गाड़ी में 9 सेकन्ड सिटिंग, 3 सेकन्ड क्लास चेयर कार और 2 SLR ऐसे कुल 14 कोचेस रहेंगे। यह गाड़ी कोटासे सुबह 7:30 को चल कर नागदा 11:35 पर पोहोचेगी, वापसी में नागदा से 15:00 को निकल शाम 19:00 को कोटा पोहोंच जाएगी। कोटा से नागदा के बीच, यह गाड़ी डाकनिया तालाब, दारा, मोरक, रामगंज मण्डी, भवानी मण्डी, शामगढ़, सुवासरसवा, चाऊ महालाँ, विक्रमगड अलोट, माहिदपुर रोड़ और नागदा पर रुकेगी।

गौरतलब यह है, नागदा से केवल 45 किलोमीटर पर पश्चिम रेलवे का विभागीय मुख्यालय रतलाम जंक्शन है। यह गाड़ी कोटा – नागदा के बीच चलाने के बजाय रतलाम तक आसानी से लाई जा सकती थी। रतलाम के यात्रिओंकी मांग भी थी लेकिन रेल प्रशासन ने इन मांगोंको बिल्कुल ही नजरअंदाज कर दिया। रतलाम के यात्रिओंकी कई मांगे है, इस संक्रमण काल मे, रतलाम – इन्दौर के बीच कोई भी सेवा नही चल रही है, अतः रतलाम – महू वाया बड़नगर डेली शटल सेवा के चारों फेरे जल्द शुरू किए जाए।

रतलाम पश्चिम रेलवे का एक महत्वपूर्ण विभागीय मुख्यालय होते हुए भी देश से चौतरफा सम्पर्क के मामलोनमे काफी उपेक्षित है। देश मे कहीं भी जाना है तो रतलाम वासियोंको आसपास के जंक्शन्स की ओर रुख करना पड़ता है। कोई ट्रेन्स है भी तो वह सप्ताहिक ट्रेनें है। ऐसी अवस्था मे रतलाम यदि रेलवे का विभागीय मुख्यालय होने का क्या लाभ? यहांकी जनता में पश्चिम रेलवे की बेदखली रवैय्ये प्रति घनघोर निराशा है। तमाम यात्री संगठन अपने माँगोंकी फेहरिस्त लेकर सांसदों, मंत्रीगणों और अफ़सरोंतक गुहार लगाते रहे है लेकिन हमेशा की तरह उनकी माँगोंपर क्वचित ही सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा रहा है। इन्दौर के सांसद, रतलामवासियोंकी माँगोंकी लिस्ट, अजमेर इन्दौर वाया रतलाम और जयपुर तिरुपति वाया रतलाम, इन्दौर की मांग रेलमंत्री तक पहुंचाए है। वैसे रतलामवासियोंकी गाड़ियोंकी मांग काफी लम्बी और लम्बित है। आशा है, इन्दौर सांसद के ही जरिए हो, लेकिन रतलाम की कुछ तो मांगे आगे बढ़े।

कोटा – नागदा – कोटा इण्टरसिटी की समयसारणी
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आखिर कब चलेगी ट्रेन, महू – खण्डवा – अकोला खण्ड पर

“जस्टिस डिलेड, जस्टिस डीनाइड” ऐसी अंग्रेजी में कहावत है। इसका मतलब है, न्याय में देरी याने न्याय नकारना। हालाँकि हम जो बात कर रहे है वह जस्टिस याने न्यायालय वाले न्याय की नही है मगर अन्याय की तो निश्चित ही है।

सन 2008 मे रेल प्रशासन ने रतलाम – अकोला इस 472 कीलोमिटर मिटर गेज लाइन को ब्रॉड गेज में कन्वर्ट करने की घोषणा की। दरअसल यह पूरे मीनाक्षी एक्सप्रेस रूट याने जयपुर – काचेगुड़ा जो की 1469 किलोमीटर वाला यात्रिओंमें बेहद लोकप्रिय, उत्तर दक्षिण रेल कॉरिडोर था, उसका हिस्सा था। इस 1469 किलोमीटर में से 805 किलोमीटर भाग जयपुर से अजमेर, चित्तौड़गढ़, होते हुए रतलाम तक और अकोला से पूर्णा होते हुए काचेगुड़ा तक गेज कन्वर्शन कर दिया गया। रतलाम से महू का भी गेज कन्वर्शन हो गया और कुछ 45 किलोमीटर हिस्सा आकोट से अकोला का हाल ही में हुवा है। बस अटका यही है, महू से सनावद और खण्डवा से आकोट वाला खण्ड। अब आप पूछेंगे सनावद से खण्डवा वाला हिस्से का क्या तो भाईसाहब वह भी हिस्सा अंशतः याने निमादखेड़ी से मथेला के बीच कन्वर्ट हो गया है। यह मथेला स्टेशन खण्डवा – इटारसी मेन लाइन के बीच का, खण्डवा से 8-10 किलोमीटर पर का स्टेशन है। इसमें भी खास बात यह है की खण्डवा से इतने पास होने के बावजूद यह स्टेशन खंडवासे सनावद लाइन के लिए सीधे कनेक्ट नही है। आपको बता दूं, इस खंड कन्वर्शन का सारा श्रेय NTPC की सेलडा विद्युत परियोजना को जाता है।

यह उपेक्षा भरा दृश्य हाल ही का, खण्डवा स्टेशन के मीटर गेज प्लेटफॉर्म्स 4 एवं 5 का है। साभार : मनोज सोनी, खण्डवा

ऐसे इस पूरे मार्ग का गेज कन्वर्शन का इतिहास एवं आंकड़े यहां उधृत करना यह हमारा आजका विषय नही है। यह सब आप इंटरनेट पर खंगाल सकते है। हम आपको यह बताने का प्रयत्न कर रहे है, की जब गेज कन्वर्शन घोषित किया 2008 में लेकिन गाड़ियाँ तो शनै शनै रतलाम से लेकर अकोला तक, एक एक खण्ड में मीटर गेज की गाड़ियाँ बन्द होते गयी। पटरियां उखड़ गयी। स्टेशन उजाड़ हो गए। मार्ग पर के हजारों, लाखों लोगोंकी कनेक्टिविटी छीन गयी, इन रेल मार्ग के भरोसे जिनके व्यापार व्यवसाय चल रहे थे वह उजड़ गए। कई कई वर्ष बीत गए इन लोगों ने रेल गाड़ी की आवाज नही सुनी। क्या यह सब उचित है?

ड्युअल गेज का उत्कृष्ट उदाहरण, यह तस्विर बांग्लादेश रेलवे की है, लेकिन हमारे देश मे भी ऐसे प्रयोग किए गए है।
साभार : raildwar.com

जब अकोला से काचेगुड़ा का गेज कन्वर्शन हुवा या मनमाड़ से पूर्णा का गेज कन्वर्शन हुवा तो सारी पटरियां उखाड़ कर काम किया गया? नही। वहाँपर ड्युअल गेज स्लीपर्स डाले गए और मीटर गेज की गाड़ियाँ चलती रही। रेल ट्रैफिक कभी भी पूरी तरह से बन्द नही किया गया। जब कभी बन्द किया गया तो वह किन्ही तांत्रिक कारणोंसे बन्द किया गया था, जैसे इंटरलॉकिंग वर्क्स के लिए। तो महू – खण्डवा – आकोट – अकोला खण्ड पर यह व्यवस्था क्यों नही की गई? क्यों यहांके यात्रिओंको रेल सम्पर्कसे वंचित रखा गया? और कितने वर्ष रेल गाड़ियोंका इंतजार करना है इस मार्ग के लोगोंको, क्या कोई बता सकता है?

आप हमारे लेख के शीर्षक के बारे में सोचते होंगे, तमाम गाड़ियाँ बन्द है, गिनीचुनी चल रही है। साहब, आज गिनती की चल रही है, कुछ वक्त की बात है, जल्द ही सारी चल पड़ेगी। सारी क्या, और नयी निजी ट्रेन्स, बुलेट ट्रेन्स, मैगालेव ट्रेन्स कई तरह की गाडियाँ भारत मे चलने वाली है, मगर उपरोक्त रेल खण्ड का क्या होगा, कब होगा, कैसे होगा यह तो अनुत्तरित ही है।

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कन्सेप्ट से परे है, रेलवे की क्लोन गाड़ियाँ

हाल ही में रेलवे ने 20 क्लोन गाड़ियाँ चलाने की घोषणा की, जिनकी रिजर्वेशन टिकट बुकिंग्ज दिनांक 19 सितंबर याने कल से शुरू हो गयी।

एक तरफ रेल प्रशासन कहती है, यह क्लोन ट्रेन्स है। मुख्य गाड़ियोंकी वेटिंग लिस्ट क्लियर की जाएगी, लेकिन यहाँ तो छपरा – सूरत एक्सप्रेस के यह हाल है, मुख्य गाड़ी तापी गंगा एक्सप्रेस में बेतहाशा वेटिंग लिस्ट है साथ ही क्लोन गाड़ियोंमे अलग वेटिंग लिस्ट लग गयी है। गौरतलब यह है, बेचारे आम यात्री ने ही गलत सोच लिया की क्लोन ट्रेन याने मुख्य गाड़ी की वेटिंग लिस्ट उसकी क्लोन गाड़ी में कन्फर्म की जाएगी। हालांकि दक्षिण मध्य रेलवे ने उनकी सिकन्दराबाद दानापुर एक्सप्रेस के क्लोन के परीपत्रक में इस प्रक़ार की घोषणा भी की थी।

दक्षिण मध्य रेल का सिकन्दराबाद दानापुर क्लोन एक्सप्रेस का परीपत्रक, जरा इसके साइलेंट फीचर्स वाले पार्ट को गौर से पढ़िएगा।

लेकिन यह नजरिया सिर्फ दक्षिण मध्य रेल के परीपत्रक में ही दिखाई दिया, न तो रेल बोर्ड ने ऐसा कोई आश्वासन वेटिंग लिस्ट के यात्रिओंको दिया था और न ही किसी अन्य क्षेत्रीय रेल ने और अब जब बुकिंग्ज शुरू हो गयी है तो दक्षिण रेलवे की हमसफ़र क्लोन की भी टिकट बुकिंग अलग से ही हो रही है।

रेल यात्री और प्रतीक्षा सूची वाले यात्रिओं सुन लीजिए और समझ भी लीजिए, आप को किसी मुगालते मे रहने की जरूरत नही है, क्लोन यह सिर्फ उनके स्टेशनोंके नाम और मार्ग के लिए ही क्लोन है, बाकी न तो उसके किराए और न ही स्टापेजेस किसी मायने में क्लोन है। यह तो रेलवे द्वारा चलाई गई अतिरिक्त गाड़ी ही है अब आप उसे अपनी सुविधा समझे या रेलवे की कमाई का और एक तरीका।

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रेलवे लाएगा ज़ीरो बेस टाइम्टेबलिंग में “हब्ज एन्ड स्पोक्स” पद्धति

आज लोकसभा में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर देते हुए कहा। गौरतलब यह है, सारे रेल यात्री ज़ीरो बेस टाइम टेबल के बड़े झटकोंसे अभी उबरे ही नही है, की अब यह सोच में डूब गए, भई ये ‘हब्ज और स्पोक्स’ और क्या है?

मित्रों, इसमे घबराने वाली कोई बात नही है, टाइम टेबल बनाते वक्त रेलवे अपने इंफ्रास्ट्रक्चर याने बुनियादी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जरूरी बदलाव करने पर जोर देती है। अब यह बुनियादी व्यवस्था क्या है, तो रेलवे के बड़े जंक्शन्स। जहाँपर रेलवे की गाड़ियोंकी यथायोग्य साफसफाई, रखरखाव होगा, गाड़ियोके कोचेस में पानी भरा जाएगा, इलेक्ट्रिकल, इंजीनियरिंग मेंटेनेन्स किया जा सकेगा, अमेनिटी और ऑपरेटिंग स्टाफ अपनी ड्यूटी बदलने के लिए मौजूद रहेगा और सबसे मुख्य बात वहाँसे अलग अलग जगहोंपर जाने के लिए मार्ग बदलेंगे। तो ऐसे जंक्शन्स हुए हब।

ऐसे जंक्शनपर से जो मार्ग निकलेंगे वह हुए स्पोक्स। उदाहरण के लिए लीजिए रतलाम जंक्शन। रतलाम जंक्शन पर उपरोक्त मेंटेनेन्स की सुविधाएं मौजूद है। यह स्टेशन पश्चिम रेलवे की मुम्बई – दिल्ली मैन लाइन पर मौजूद है, यहांसे चित्तौड़गढ़, अजमेर के लिए एक ब्रांच लाइन, उज्जैन, इन्दौर के लिए एक ब्रांच लाइन। इसी तरह भुसावल, इटारसी, नागपुर, झांसी ऐसे स्टेशन्स हब माने जाएंगे और इन स्टेशनोंसे जो ब्रांच लाइनें निकलेंगी वह स्पोक्स।

अब इस व्यवस्था में लम्बी दूरी की, मैन लाइन की गाड़ियाँ तो सीधी चलेगी, जिनके लिए कोई समस्या नही लेकिन कुछ कम दूरी की 200 से 500 किलोमीटर तक की गाड़ियोंके लिए यह पद्धति लागू की जा सकती है। जैसे भुसावल से मुम्बई, सूरत, इटारसी, नागपुर की ओर जिनकी दूरी 300 से 500 किलोमीटर है, कम अंतर वाली गाड़ियाँ जिनमे इंटरसिटी एक्सप्रेस, डेमू, मेमू ट्रेन्स चलाई जा सकेगी जो की स्पोक्स मार्ग की गाड़ियाँ रहेगी। या इस तरह भुसावल से निकल कर अकोला होते हुए नान्देड, बडनेरा होते हुए अमरावती, खण्डवा होते हुए सनावद, महू, इन्दौर, या मनमाड़ होते हुए पुणे, औरंगाबाद, नासिक इस तरह।

यह ‘हब’ स्टेशन पर किसी ब्रांच लाइन के स्टेशनोंसे आकर यात्री अपनी एक गाड़ी छोड़कर दूसरी गाड़ी पकड़ेगा और अपनी अगली यात्रा पूरी करेगा। जैसे सूरत से भुसावल आकर आगे अकोला होते हुए नान्देड जाना है। कुल मिलाकर यह पुराने ब्रिटिशकालीन मैन लाइन, ब्रांच लाइन ढांचे वाला पैटर्न लग रहा है। फर्क यह है, की उस व्यवस्था में ब्रांच लाइन की गाड़ियाँ किसी दो जंक्शन्स के बीच ही चलती थी और इसमें लम्बी दुरियोंकी गाड़ियोंके अतिरिक्त ब्रांच लाइनोंपर कम अंतर की मेमू, इंटरसिटी गाड़ियाँ भी चलेगी। इसमें एक विशेष बात यह की छोटी छोटी दुरियोंकी गाड़ियाँ चलाने या उनके मैनेजमेंट में रेल प्रशासन पर ज्यादा दबाव नही पड़ता है।

दरअसल ज़ीरो बेस टाइम टेबल में गाड़ियोंकी, स्टापेजेस रद्द की खबरें सुन सुन हैरान हुए रेल यात्रियों और प्रेमियों के लिए आशा की एक नई किरण है। उद्यान आभा एक्सप्रेस या फिरोजपुर एक्सप्रेस जैसी कम एवरेज स्पीड से चलनेवाली गाड़ियोंको रद्द करके उनकी जगह छोटे छोटे अंतर की दो हब के बीच चलने वाली मेमू या इण्टरसिटी एक्सप्रेस चलेगी तो उसका फायदा निश्चित ही यात्रिओंको मिलेगा साथ ही रेल प्रशासन का भी, कम स्पीड की लम्बी दूरी की गाड़ियोंको चलाने का दबाव खत्म होगा।

कहा जा रहा है, जीरो बेस टाइम्टेबलिंग में दस हजार स्टापेजेस और पाँच सौ नियमित गाड़ियाँ रद्द की जाने वाली है तो जाहिर सी बात है, की इस तमाम रद्दीकरण से होनेवाले यात्रिओंके नुकसान की भरपाई इस “हब्ज एंड स्पोक्स” के माध्यम से पूरी हो सकती है।