20 फरवरी 2025, गुरुवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2081
मित्रों, आज हम आपका ध्यान एक बेहद अहम बात की ओर खींचना चाहते है, यात्री रेल गाड़ियोंके कोचेस में स्वच्छता गृह के ऊपर पानी की टँकी होती है, जिसमे जगह जगह वॉटरिंग अर्थात जल भरण होता है, वह कितना स्वास्थ्यकारक अवस्था मे भरा जाता है। यात्री गाड़ियोंके कूड़े-कचरे की क्या परिणीति होती है, यह तो हम सब लोग अमूमन समझते है। ग़ैरवातानुकूलित कोचों की खिड़कियों, दरवाजों से यात्री ऐसे ही कूड़ा उछाल देते है और वातानुकूलित कोच से उसके सफाई कर्मी। यह बात और है, रेल प्रशासन हर कोच में डस्ट बिन लगाए रखती है, जिसकी परवाह यात्री करें भी मगर सफाई कर्मी तो बिल्कुल ही चलती गाड़ी से फेंकने में विश्वास करते है। चलिए, मुख्य मुद्दे पर लौटते है। निम्नलिखित तस्वीरों को देखिए,
यह तस्वीरें पश्चिम रेल के मुख्यालय, मुम्बई के बांद्रा टर्मिनस स्टेशन की है। यहाँपर प रे की कई गाड़ियाँ टर्मिनेट होती है, अपनी यात्रा प्रारम्भ करती है। यहाँ से चलनेवाली प्रत्येक यात्री गाड़ी में वॉटरिंग किया जाता है। भई, वॉटरिंग किए जानेवाला जल भले ही अत्यंत शुद्ध हो, उन्नत शुद्धिकरण संयंत्र से इन नलियों में पहुँचता हो मगर नलियोंके रखरखाव की स्थिति देखिए, उसपर गौर कीजिए। क्या यह दृश्य देखने के बाद आप इस मानसिकता में रह पाएंगे की इस पानी से कुल्ला भी कर सकें?
मित्रों, यह सिर्फ बान्द्रा टर्मिनस की नहीं, अमूमन प्रत्येक वॉटरिंग स्टेशन की स्थिति हो सकती है। इन बिकट और अत्यंत अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में रेल कर्मी या अन्य अस्थाई ठेके पर काम करनेवाले व्यक्ति जल भरण का काम करते है और यही जल रेल के द्वितीय श्रेणी नए दीनदयालु कोच में लगे वॉटर फिल्टर्स द्वारा पीने के लिए भी उपलब्ध है। यह अलग बात है, की कई दीनदयालु कोच के वॉटर फिल्टर्स अब नदारद है।
कुल मिलाकर यह कह सकते है, जो चीजें हम देखते नही, सोचते समझते नही वह कितनी अजीबोगरीब और असहनीय हो सकती है। रेल विभाग के हर बड़े जंक्शन पर कचरा व्यवस्थापन किया जाता है। गाड़ियोंकी साफसफाई के ठेके दिए रहते है। वातानुकूलित, ग़ैरवातानुकूलित कोचों, पेंट्रीकार के डस्ट बिन खाली किए जाते है। फिर भी स्टेशनोंपर, पटरियों पर, कचरा, कूड़ा, गन्दगी हो ही रही है। अब यह कहना सहज है, इस बेतरतीब कूड़े-कचरे और गन्दगी के लिए जिम्मेदार उन रेलोंमें यात्रा करनेवाले यात्री भी है, जो अपना कचरा युँ ही खिड़कियों से उछाल देते है और वह सफाई कर्मी भी जिन्हे कोच सफाई का जिम्मा सौंपा गया है और बजाए कूड़ेदान में कचरा भर कर स्टेशन ऑथोरिटी के सौंपे, चलती गाड़ी से बाहर ढकेल देते है।
20 फरवरी 2025, गुरुवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2081
निम्नलिखित सूची है, अलग अलग क्षेत्रिय रेल्वेज के TOD विशेष गाड़ियोंकी जो अब रद्द की जाएगी। यात्रीगण कृपया JCO तिथि, गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशन से चलने की तिथि पर ध्यान दीजिएगा।
यह गाड़ियाँ है, जो प्रयागराज जंक्शन एवं प्रयागराज छिंवकी से गुजरती है, जिन्हें घोषित तिथिनुसार रद्द किया जा रहा है।
यह गाड़ियाँ है, जो प्रयागराज जंक्शन पर लोको रिवर्सल होता है, जिन्हें घोषित तिथिनुसार रद्द किया जा रहा है।
अलग अलग क्षेत्रिय रेल्वेज के TOD विशेष गाड़ियाँ, जिन्हें भारतीय रेल की समयसारणी में स्थान मिला है, अब रद्द की जाएगी। यात्रीगण कृपया JCO तिथि, गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशन से चलने की तिथि पर ध्यान दीजिएगा।
निम्नलिखित नियमित गाड़ियाँ जिन्हें मेला अवधि में प्रयागराज जंक्शन होकर नही चलाया जाएगा।
18 फरवरी 2025, मंगलवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2081
महाकुम्भ प्रयागराज में अनेक विशेष गाड़ियाँ चलाई जा रही है मगर इससे नियमित चलनेवाली गाड़ियोंपर बुरा असर पड़ रहा है। गाड़ियोंका रखरखाव एवं परिचालनिक स्टाफ की कमी के चलते अनेक नियमित गाड़ियोंको या तो पूर्णतः रद्द किया गया है या फिर उनका मार्ग परिवर्तन किया जा रहा है। यह बदलाव दिनांक 18 से 28 फरवरी तक रखा जाएगा।
महाकुंभ मेला 2025 के दौरान भुसावल मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का रद्दीकरण
उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज मंडल में महाकुंभमेला-2025 के चलते भुसावल मण्डल से होकर गुजरने वाली निम्नलिखित यात्री गाड़ियाँ अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेंगी।
1) गाड़ी संख्या 19045 सूरत – छपरा ताप्ती गंगा एक्सप्रेस दिनांक 19 फरवरी 2025 से 27 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
2) गाड़ी संख्या 19046 छपरा – सूरत ताप्ती गंगा एक्सप्रेस दिनांक 21 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
3) गाड़ी संख्या 19483 अहमदाबाद – बरौनी एक्सप्रेस दिनांक 18 फरवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
4) गाड़ी संख्या 19435 अहमदाबाद – आसनसोल एक्सप्रेस दिनांक 20 फरवरी 2025 और 27 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
5) गाड़ी संख्या 01025 दादर – बलिया त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस विशेष दिनांक 18 फरवरी 2025 से 27 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
6) गाड़ी संख्या 01026 बलिया – दादर त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस विशेष दिनांक 21 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
7) गाड़ी संख्या 01027 दादर – गोरखपुर एक्सप्रेस विशेष दिनांक 18 फरवरी 2025 से 27 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
8) गाड़ी संख्या 01028 गोरखपुर – दादर एक्सप्रेस विशेष दिनांक 20 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
9) गाड़ी संख्या 11055 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – गोरखपुर एक्सप्रेस दिनांक 18 फरवरी 2025 से 27 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
10) गाड़ी संख्या 11056 गोरखपुर – लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस दिनांक 21 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
11) गाड़ी संख्या 11059 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – छपरा एक्सप्रेस दिनांक 18 फरवरी 2025 से 27 फरवरी 2025 तक अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।
12) गाड़ी संख्या 11060 छपरा – लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस दिनांक 20 फरवरी 2025 को अपने प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी
महाकुंभ मेला 2025 के दौरान भुसावल मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन
रेलवे प्रशासन ने महाकुंभ मेला 2025 के मद्देनजर भुसावल मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। मार्ग परिवर्तन की जानकारी निम्नानुसार है –
अपनी निर्धारित मार्ग के बजाय प्रयागराज छिवकी से गुजरने वाली ट्रेनें
गाड़ी संख्या 11061 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – जयनगर पवन एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक टर्मिनस से प्रस्थान करने वाली दिनांक – 18.02.2025 से 28.02.2025 तक।
गाड़ी संख्या 11062 जयनगर – लोकमान्य तिलक टर्मिनस पवन एक्सप्रेस, जयनगर से प्रस्थान करने वाली दिनांक 18.02.2025 से 27.02.2025 तक।
गाड़ी संख्या 11033 पुणे – दरभंगा एक्सप्रेस, पुणे से प्रस्थान करने वाली – 19.02.2025 और 26.02.2025।
गाड़ी संख्या 11034 दरभंगा – पुणे एक्सप्रेस, दरभंगा से प्रस्थान करने वाली दिनांक 21.02.2025 और 28.02.2025 को
इन गाड़ियों को प्रयागराज जंक्शन की जगह, प्रयागराज छिवकी स्टेशन पर अस्थायी ठहराव प्रदान किया गया है।
अपनी निर्धारित मार्ग के बजाय कानपुर, लखनऊ मार्ग से गुजरने वाली गाड़ियाँ
गाड़ी संख्या 11071 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – वाराणसी कामायनी एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक। यह ट्रेन अपने निर्धारित मार्ग के बजाय बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, जौनपुर होते हुए वाराणसी पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 11072 वाराणसी – लोकमान्य तिलक टर्मिनस कामायनी एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक यह ट्रेन जौनपुर, लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, बीना होते हुए लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 22129 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – अयोध्या कैंट एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025, 23.02.2025 और 25.02.2025। यह ट्रेन वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ होते हुए अयोध्या कैंट पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 22130 अयोध्या कैंट – लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 19.02.2025, 24.02.2025 और 26.02.2025 को यह ट्रेन लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी होते हुए लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 12167 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – बनारस एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक। यह ट्रेन इटारसी, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, उन्नाव होते हुए बनारस पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 12168 बनारस – लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक। यह ट्रेन उन्नाव, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, बीना, इटारसी होते हुए लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 22177 मुंबई – वाराणसी एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक। यह ट्रेन इटारसी, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, उन्नाव होते हुए बनारस पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 22178 वाराणसी – मुंबई एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक यह ट्रेन उन्नाव, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, बीना, इटारसी होते हुए मुंबई पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 22104 अयोध्या कैंट – लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 और 25.02.2025 को यह ट्रेन लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, बीना होते हुए लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 22103 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – अयोध्या कैंट एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 24.02.2025 को यह ट्रेन बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ होते हुए अयोध्या कैंट पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 15017 लोकमान्य तिलक टर्मिनस – गोरखपुर काशी एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 27.02.2025 तक। यह ट्रेन इटारसी, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, माँ बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़, जंघई होते हुए गोरखपुर पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 15018 गोरखपुर – लोकमान्य तिलक टर्मिनस काशी एक्सप्रेस, यात्रा दिनांक – 18.02.2025 से 28.02.2025 तक। यह ट्रेन जंघई, माँ बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़, लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, बीना, इटारसी होते हुए लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी।
यात्रियों से अनुरोध है कि वे अपनी यात्रा योजना बनाते समय उपरोक्त मार्ग परिवर्तन का ध्यान रखें। अधिक जानकारी के लिए यात्री संबंधित रेलवे हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। असुविधा से बचने के लिए रेलवे द्वारा अधिकृत रेलवे पूछताछ सेवा NTES/139 से गाड़ी की सही स्थिति की जानकारी पता करके तदनुसार यात्रा प्रारम्भ करें।
16 फरवरी 2025, रविवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2081
कल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुवा। रेलवे स्टेशन पर हुई यात्रिओंकी भगदड़ में करीबन 18 मौते और 10 गम्भीर रूप से घायल हुए है। बताया जा रहा है, प्लेटफार्म क्रमांक 14 पर नामित गाड़ी का प्लेटफार्म बदलकर 16 किया गया, ऐसी उद्घोषणा की गई और यात्रिओंकी भगदड़ मच गई। प्लेटफार्म बदलाव के चलते भगदड़ में यात्रिओंकी जान जाने के ऐसे मामले पहले ही भारतीय रेल के इतिहास में दर्ज है, फिर भी इस तरह के हादसे हो रहे है। कितनी दुर्भाग्यपूर्ण बात है!
प्रत्येक दुर्घटना के पीछे कहीं न कही अनुशासनहीनता यह कारण होता है। यहाँपर हर स्तर पर अनुशासनहीनता दिखाई देती है। रेल यात्रिओंमें अनुशासन की कमी होना यह सहज बात है। यह लोग प्रोफेशनल या भीड़ व्यवस्थापन में अनुभवी नही होते है। लेकिन रेल कर्मियोंका क्या, और वह भी देश की राजधानी का शहर, जहाँ भारतीय रेल का मुख्यालय रेल बोर्ड है, मण्डल और क्षेत्रीय कार्यालय है। तमाम आधुनिक सुविधाए है, दल, बल है जिससे हर आपदाओं से निपटने की क्षमता होनी चाहिए?
रेल विभाग ने इस हादसे की जाँच के लिए उच्चस्तरीय समिति की घोषणा कर दी है। जाँच होती रहेगी, तथ्य सामने आएंगे भी। लेकिन खुली आँखों से दिखाई देती है, लापरवाही और नाकारापन। उसका इलाज़ कब होगा?
किस तरह किसी एक ही प्लेटफार्म पर क्षमता से ज्यादा यात्री प्रवेश कर जाते है? किस तरह मिस-अनाउंसमेंट की जाती है? जहाँ सैंकड़ों CCTV कैमेरे लगे हो, और यात्री नियंत्रित नही किए जा सकते? आखिर किस तरह का व्यवस्थापन है?
हाल ही में, हमने प्रयागराज जंक्शन पर रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर बात कही थी। वहाँपर चप्पे चप्पे पर यात्री सुरक्षा हेतु रेल सुरक्षा बल के जवान तैनात है। यात्रिओंको बेहतरीन तरीक़े से नियंत्रित कर प्लेटफार्म पर छोड़ा जाता है। चौबीस घण्टे गाड़ियोंकी सटीक उद्घोषणा की जा रही है। गाड़ी आने के संकेत के साथ, अमूमन गाड़ी के प्लेटफार्म पर पहुँचने से 30 मिनट पहले, यात्रिओंको प्लेटफार्म पर जाने की सूचना दी जाती है। प्लेटफार्म पर भी गाड़ी प्लेटफार्म पर आकर रुकने तक सुरक्षा बल के जवान प्लेटफार्म के किनारोंपर खड़े रहते है, ताकि यात्री कहीं पटरी पर न गिरे। माना की भीड़ का केंद्र प्रयागराज है, मगर व्यवस्थापन में इतनी कुशलता तो होनी चाहिए कि बदलते हालातों को भाँप सके!
रेल विभाग सुरक्षा साधनों से परिपूर्ण रहता है। प्रत्येक स्टेशनोंके ‘फुटफॉल’ अर्थात यात्रिओंकी आवाजाही के आँकड़े इनके रिकॉर्ड में है। तदनुसार रेलवे स्टेशनोंपर बंदोबस्त भी मुहैया किया जाता है। उन्नत तकनीकों द्वारा भीड़ का आभास भी पता किया जा सकता है। स्टेशनोंके आहाते से ही प्लेटफार्म की भीड़ को नियंत्रित किए जाने की आवश्यक प्रतिक्रिया ‘फीडबैक’ ली जा सकती है। इतनी अद्यतन व्यवस्थाओंके बावजूद इस तरह के हादसे होना यह बड़ी लापरवाही को उजागर करता है।
यह प्रजातन्त्र है। यहाँपर प्रतिनिधित्व पर कामकाज चलता है। जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है, सरकारें बनती है। सरकार फिर प्रत्येक विभाग के लिए मंत्री के तौर पर अपना प्रतिनिधि बनाती है जो सम्बंधित विभाग से जनता के हितों के अनुसार काम करवाता है। क्या हमारा प्रतिनिधि अपना काम सम्बंधित विभाग से यथायोग्य तरीके से करवा पा रहा है? मित्रों, बड़ा गहन प्रश्न है।
15 फरवरी 2025, शनिवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2081
हाल ही में आम बजट के साथ रेल बजट का आवंटन भी घोषित हुवा। दो लाख पचपन हजार करोड़ रुपए का आवंटन, रोजाना तकरीबन 11 लाख से ज्यादा की यात्री संख्या मगर अलग बजट घोषणा बन्द कर केवल निधि की ही घोषणा की जाती है। पहले रेल बजट जब अलग से सादर किया जाता था, कई घोषणाए आम जनता की सुनने मिलती थी। नई गाड़ियाँ, नए रेल मार्ग, नए रेल सुधार इत्यादि। अब नई गाड़ियाँ और सारे सुधार केवल परिपत्रकों से घोषित किए जाते है। रेल बजट जानने, समझने का सारा खुमार काफ़ूर हो गया।
रेल बजट निधि आवंटित होने के बाद सदन में एक विपक्षी सांसद ने भारतीय रेल की कुछ सांख्यिकी और हक़ीकत पेश की। आइए, समझते है।
* रेल बजट में वर्ष 2009 से 2014 के बाद करीबन 5 गुना इज़ाफा हुवा। * रेल में यात्रिओंकी हालात गम्भीर, देश की प्रमुख यातायात का साधन, अब केवल मजबूरी की यातायात का साधन बन कर रह गई है भारतीय रेल। * निरन्तर घटती रफ़्तार और बढ़ता किराया। चीन, जापान की सबसे धीमी ट्रेन भी भारत की सबसे तेज ट्रेन से अधिक तेज दौड़ती है। * देश की नैशनल कैरियर, भारतीय रेल धीमी रहेंगी तो देश के विकास की गति भी धीमी ही रहेगी। * वर्ष 2013/14 में औसत किराया 32पैसा/km था जो वर्ष 2021/22 में 66पैसा/km हो गया। * एक जमाने मे लग्ज़री समझे जाने वाले वातानुकूलित थ्री, टू टियर भी आजकल सामान्य श्रेणी की तरह हो गए है। कोई भी यात्री एडजस्टमेंट का तमगा गले मे लटकाए आरक्षित यात्री से सटकर बैठ जाता है, कहता है, थोड़ा एडजस्ट कर लीजिए, एक स्टेशन ही तो जाना है। * बेडरोल में हाइजीन, स्वच्छता मिलना मुश्किल, महीने में केवल एक बार धुलते है कम्बल * प्लेटफार्म की चाय, नाश्ता, खाना अत्यंत अभिरुचि हीन। * भीड़ के समय, विशेष गाड़ियाँ चलती तो है, मगर केवल उसे ही नसीब होती है, जो दिनरात टिकटोंकी बुकिंग पर नजरें गड़ाए रख सकता है। अर्थात भरपूर मिसमैनेजमेंट है, इन गाड़ियोंके परिचालन में। * रेल टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC पर रजिस्ट्रेशन करने से लेकर टिकट बुक करने तक सारी प्रोसीजर एक गहन तपस्या है। एखाद बार किसी तपस्या का फल मोक्ष मिल सकता है, पर IRCTC का तत्काल टिकट मिलना मुश्किल। * जब अधिकृत ब्रेंड का पेयजल नामित किया गया हो तो नकली या हीन दर्जे के पेयजल, फुड पैकेट्स किस तरह बेचे जा सकते है? * वरिष्ठ नागरिक किराया रियायत किसी न किसी रियायती दर पर दोबारा शुरू की जानी चाहिये। * भेड़ बकरी की तरह, आलू की बोरियोंसे लदे रेल यात्री कोच। साधारण यात्री का कोई मोल नही। * उचित मेंटेनेंस के अभाव का कारण दिया गया 75% दुर्घटनाओं में। जबकि मेंटेनेंस के नाम पर अचानक ही अनेकों नियमित गाड़ियाँ रद्द कर दी जाती है।
बड़ा लम्बा बयान था और हर तरह से हक़ीकत बयान की जा रही थी।
रेल विभाग में समग्र बदलाव की जरूरत है। चाहे वह टिकट बुकिंग हो, आरक्षण प्रणाली हो या रेल परिचालन हो। रेल विभाग ने एक बार शून्याधारित समयसारणी की घोषणा की तो थी, मगर पता नही परिचालन में व्यापक सुधार नही हो पाया।
आज रेल परिचालन में 200 km प्रति घण्टा गति क्षमता वाली LHB गाड़ियाँ पटरी पर लाई जा रही है, मगर रेल के बुनियादी संसाधन यथावत होने से इनकी औसत गति बढ़ ही नही पा रही है। एक तेज गति की वन्देभारत गाड़ी यदि रेल सिस्टम में जोड़ी गई तो कमसे कम 10 जोड़ी गाड़ियोंकी समयसारणी हिलती है। यह भीषण त्रासदी है। रेल नेटवर्क, स्टेशन नेटवर्क अद्यतन होना बेहद जरूरी है।
एक तरफ यात्रिओंकी गाड़ियोंको लेकर माँग भी बेतहाशा बढ़ रही है, दूसरी तरफ नियमित गाड़ियोंमे यात्री सुरक्षित और सुकून महसूस कर सके ऐसी हालत बिल्कुल नही है। टिकट जाँच दस्ते बढ़ गए है मगर जुर्माना देकर भी यात्री बड़े खुशी से यात्रा करना पसन्द कर रहे है। अर्थात दण्ड की रकम भी उसे दण्ड जैसे नही लगती है, इतनी मामूली है।
रेल कर्मियों का, यात्री के प्रति सेवा भाव कहीं न कही गुम हो चुका है। चूँकि पूरे गाड़ी में यात्री सुविधा हेतु नियुक्त TTE टिकट परीक्षक दो या तीन ही होते है, जो कई बार स्लिपर कोच में यात्री व्यवस्था देखने पहुँच ही नही पाते।
कुल मिलाकर टका सेर भाजी टका सेर खाजा वाली गती है। न किराया उचित मूल्य में बढ़ेगा न ही सुविधाएं चाकचौबंद हो पाएगी।