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झूठे वरिष्ठ नागरिक रियायत पर कैसे कसेगी नकैल!

आजकल अखबारोंमें झूठे वरिष्ठ नागरिक रियायती टिकट लेकर यात्रा करते हुए यात्री धाराए गए ऐसी खबरें आ रही है। रोज 8-10 मामले धराए जा रहे है।

दरअसल वरिष्ठ नागरिक का रियायती टिकट बुक करते समय यात्री की उम्र दर्ज करनी होती है, और टिकट बन जाता है। आगे यह निवेदन दिया होता है, यात्री को अपने वरिष्ठता का प्रमाण यात्रा के दौरान साथ रखना है और चेकिंग स्टाफ़ को माँग किए जानेपर चेक कराने हेतु प्रस्तुत करना है। उम्र का प्रमाण केवल मूल स्वरूप में होना आवश्यक है, फोटोकॉपी नही चलेगी। उम्र के प्रमाण हेतु हर वह शासकीय कागजात ग्राह्य है, जिसमे जन्मतारिख वर्ष, माह और दिनांक स्वरूप में हो। इसमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, ड्यूटी कार्ड, वोटर कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट, राशनकार्ड आदि। इन प्रमाणपत्रों में कई ऐसे प्रमाणपत्र है जिनमे जन्मतारिख और आपकी पहचान साथ ही है तो कई में किसी एक ही चीज का प्रमाण है, जैसे राशनकार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट ऐसे में आपका फोटो ID भी मौजूद होना आवश्यक होगा। अतः पहचान और जन्मतारिख दोनों हो ऐसे प्रमाणपत्र साथ रखेंगे तो बेहतर होगा।

अब तकलीफ यह है, कुछ लोग रेल प्रशासन द्वारा दी गयी इस रियायत का गैरकानूनी तरीकेसे उपयोग करते है। रेलवे, वरिष्ठ नागरिकों को न सिर्फ किराए में रियायत देती है, बल्कि उनके लिए अलग से कोटा भी आरक्षित रखती है, और लोअर बर्थ भी देती है। जब यात्रिओंको जनरल कोटे में टिकट नही मिलता तो कुछ असामाजिक तत्व, एजेंट्स वरिष्ठ नागरिकों के आरक्षित कोटे में इन लोगोंके झूठी उम्र डालकर टिकट दिलवा देते है। चूँकि टिकट बुक करते समय किसी प्रमाणपत्र को चिन्हित किए जाने की आवश्यकता न होने से, केवल यात्री की विवेकबुद्धि पर ही टिकट बुक हो जाता है। बादमे यात्रा के दौरान उम्र का प्रमाण न होने से यह लोग धाराए जाते है।

रेल प्रशासन को चाहिए की बुकिंग करते वक्त ही यात्री को अपनी उम्र के प्रमाणपत्र का नम्बर और प्रकार चिन्हित करना आवश्यक हो और वहीं प्रमाणपत्र आरक्षण चार्ट में भी छपे और चेकिंग के दौरान प्रस्तुत किया जाए। अन्यथा दण्ड किए जाने का प्रावधान निश्चित किया जाए। इससे यात्री को बुकिंग करते वक्त ही अहसास हो जाएगा की उसे उसका पहचानपत्र, जिसमे उम्र भी चिन्हित है, यात्रा के दौरान अपने साथ रखना है।

यह बात है, की ऐसा करने के लिए रेल प्रशासन को अपने आरक्षण प्रणाली में कुछ बदलाव करना पड़ेगा। साथ ही उपयुक्त रियायती टिकट लेने वालोंको भी थोड़ी परेशानी होगी, नही तो उनकी टिकट कोई भी फौरन बुक कर देता था। अब जब प्रमाणपत्र साथ रखके बुकिंग करनी होगी तो तकलीफ हो सकती है। लेकिन इससे गैरकानूनी रूप से रियायतोंका फायदा चट करने वालोंपर निश्चित ही नकैल कसी जाएगी।

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देवलाली – मुजफ्फरपुर – देवलाली किसान रेल के फेरे बढ़े।

00107/08 देवलाली मुजफ्फरपुर के बीच चलने वाली किसान रेल के फेरे साप्ताहिक से बढ़ाकर द्विसाप्ताहिक किए जा रहे है। दिनांक 25 अगस्त से यह गाड़ी हर मंगलवार और शुक्रवार को देवलाली से रवाना होगी वही मुजफ्फरपुर से दिनांक 27 अगस्त से हर गुरुवार और शनिवार को देवलाली के लिए निकलेगी।

मध्य रेलवे ने किसानोंकी सुविधा के लिए इस गाड़ी को उस्मानाबाद जिले के संगोळा से मनमाड़ के बीच एक लिंक पार्सल गाड़ी भी शुरू कर दी है। जिसका नम्बर 00109/10 ऐसा है। 00109 संगोळा से हर मंगलवार और शुक्रवार को सुबह 8:00 बजे निकल के शाम 18:30 बजे मनमाड़ पोहोंचती है। यह किसान पार्सल लिंक सांगोळा से निकल कर पंढरपुर, कुरदुवाड़ी, दौंड, अहमदनगर, बेलापुर होते हुए मनमाड़ आती है। कुल 10 पार्सल वैन और 1 ब्रेक वैन की यह गाड़ी जिसमे 8 पार्सल वैन सांगोळा से मनमाड़ के लिए चलती है, और पुणे से 2 पार्सल वैन आकर दौंड में इस लिंक से जोड़ी जाती है। याने सांगोळा – पुणे दौंड – मनमाड़, देवलाली से मुजफ्फरपुर ऐसी 2 लिंक की मुख्य किसान रेल चल रही है।

इस टाइमटेबल वाली किसान रेल को, किसानोंसे बढ़िया प्रतिक्रिया मिली है, हर फेरे में भेजे जाने वाले माल में वृद्धि ही हो रही है। अनार जैसे फल, गोभी, सिमला मिर्च, हरी मिर्च, अदरक, नीम्बू जैसी खराब होने वाली सब्जियां 1-2 दिन में मुजफ्फरपुर तक पोहोंच जाती है। किसानोंके उत्पाद को नए मार्केट मिले है, इससे किसान बहोत खुश है।

फ़िलहाल प्रयोग के तौर पर 1 माह चलनेवाली यह किसान रेल अब अच्छे से निकल पड़ी है, अभी हफ्ते में 1 दिन से बढ़ कर 2 दिन हुई है। किसानोंको माँग पर, रेल प्रशासन इसे रेग्युलर भी कर सकती है।

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जल्द ही मिलेगी खुशखबर, शुरू होंगे दो नए मार्ग।

जी मित्रों, खुशखबर ही तो है। जब जबलपुर – गोंदिया बड़ी लाइन और छिंदवाड़ा – नागपुर बड़ी लाइन रेल नेटवर्क में अपना काम शुरू कर देंगी।

छिंदवाड़ा – नागपुर और जबलपुर – गोंदिया दोनों रेल मार्गोंके चौड़ीकरण याने गेज कन्वर्शन का काम पूरा हो चुका है साथ ही इन मार्गोंका सुरक्षा निरीक्षण भी हाल ही में सम्प्पन्न हुवा। यदि सब कुछ यथायोग्य रहा तो बहोत जल्द यह दोनों रेल मार्ग राष्ट्र की सेवा में सभी तरह की गाड़ियोंके लिए खोल दिए जाएंगे।

जबलपुर – गोंदिया रेल मार्ग भारत के उत्तर – दक्षिण रेल यात्रा का महत्वपूर्ण अंग साबित होने वाला है। वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज से जो गाड़ियाँ चेन्नई, बेंगालुरु और सुदूर दक्षिण भारत मे जाती है, वह जबलपुर, इटारसी, नागपुर, वर्धा, बल्हारशाह होकर आगे जाती है। अब जबलपुर – गोंदिया रेल मार्ग बनने से यह गाड़ियाँ इटारसी, नागपुर, वर्धा बाईपास करके सीधे जबलपुर, गोंदिया, बल्हारशाह निकल जाएगी और जिसमे उनके करीबन 300 किलोमीटर के अंतर की कमी आएगी साथ ही समय और ईंधन की बचत भी होगी।

आप मैप के जरिए इस मार्ग का निरीक्षण कर सकते है, मैप में विद्यमान मार्ग भी नजर आ रहा है।

छिंदवाड़ा – नागपुर बड़ी लाइन
जबलपुर – नैनपुर – बालाघाट – गोंदिया बड़ी लाइन
वर्तमान जबलपुर – बल्हारशाह मार्ग और
जबलपुर – बल्हारशाह नया मार्ग

मैप साभार : indiarailinfo.com

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आप महाराष्ट्र के भीतर ही भीतर रेल यात्रा नही कर सकते। जारी है, निर्बंध।

आप की महाराष्ट्र के किसी छोटे बड़े शहर में फैक्ट्री है, अपने उत्पाद की बिक्री के लिए मुम्बई, पुणे, नागपुर जैसे बड़े शहर में या महाराष्ट्र के ही किसी शहर के मार्केट में ले जाना चाहते है। जी बेशक जाइए, लेकिन सड़क मार्ग से, राज्य परिवहन से, बस से। अपनी गाड़ी या किराए पर ली गाड़ी से जाएंगे तो ई-पास निकालना आवश्यक है। और हाँ, रेल भलेही आपके राज्य में, आपके गाँव से इन शहरोंमें जाती हो लेकिन रेल यात्रा का बिल्कुल मत सोचिए, क्योंकि आज भी राज्य शासन के इस पर बन्धन जारी है।

महाराष्ट्र राज्य अंतर्गत रेल यात्रा को महाराष्ट्रवासियों को मनाही है। राज्य शासन ने रेल प्रशासन की टिकट बुकिंग व्यवस्था को हिदायत देकर ऐसे निर्बंध डाल रखे है, की आप महाराष्ट्र के किसी भी शहर से महाराष्ट्र के अंतर्गत रेल टिकट बुक नही करा सकते, न ही यात्रा करने का सोच सकते है।

रेल टिकट बुकिंग की आज की स्थिति, टिकट है मुम्बई से नागपुर

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने राज्यशासनों, जिला प्रशासनों की ओरसे जारी, इस तरह के निर्बंधोंपर बड़ी गंभीरता से दखल ली है और आज राज्योंके मुख्य सचिवोंके नाम एक ट्वीट किया है, जिस मे सभी राज्य शासन को आवाहन किया है, राज्यान्तरिक और अन्तर्राज्यीय यातायात के सभी निर्बंध खोल दिए जाने चाहिए, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को बाधा पोहचती हो। आशा है, राज्य शासन इस आवाहन पर यथायोग्य प्रतिक्रिया दे और अपनी ओर से जारी निर्बंधोपर उचित निर्णय ले। साथ मे, गृह मंत्रालय की ओरसे जारी ट्वीट और पत्र जो की अनलॉक -3 दिनांक 29 जुलाई 2020 को जारी किया गया है वह भी देख लीजिए।

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‘परख’ रेलवे का आधुनिक निरीक्षण यान।

अभी तक निरीक्षण यान के लिए एक विशेष गाड़ी के तौर पर नियोजन किया जाता था। एक लोको और उससे जुड़ा अफसरों का निरीक्षण यान, जरूरत रही तो सम्बंधित कर्मचारियोंके लिए और डिब्बे।

चेन्नई के पैरामबुर स्थित ‘इंटेग्रल कोच फैक्ट्री’ ICF ने नया आधुनिक, सारी जरूरी सुविधायुक्त और विशेष याने सेल्फ प्रोपेल्ड लोको समाहित वाला निरीक्षण यान बनाया है, जिसका नाम है “परख”

यह “परख” कैसे दिखता है, आपको दिखाते है।