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यह कैसा ‘मिशन बिगिन अगेन’

जबसे हमारे देश मे लम्बे लॉक डाउन के बाद अनलॉक प्रकिया को शुरू किया गया है, महाराष्ट्र राज्य शासन ने भी ‘ मिशन बिगिन अगेन’ नामक अनलॉक अभियान शुरू किया है। मार्केट, दुकान, शॉप्स, शॉपिंग मॉल खुलवाना, व्यापार उद्योग व्यवसायोंको शुरू करना, प्रदेश की उतरी हुई अर्थव्यवस्था को फिरसे पटरी पर लाना यह अनलॉक करने का या यूं कहिए मिशन बिगिन अगेन का मूल उद्देश्य है।

हमारा भी मूल उद्देश्य रेल सम्बंधित जानकारी आप लोगोंतक पोहोचाना यही है, और हम सहजता से पटरी नही छोड़ते। आज भी हम वहीं कर रहे है। राज्य शासन ने ‘ मिशन बिगिन अगेन’ का कार्यक्रम तो शुरू कर दिया मगर व्यापारी अपनी जगह से हिल ही नही पाएगा तो मिशन बिगिन होगा कैसे? आज उद्योग, व्यापार, व्यवसायोंको आगे बढाने के लिए छोटे छोटे व्यापारियों को बड़े मार्केट से माल लाने शहर जाना ही पड़ता है। जब तक वह 4 होलसेल दुकानों पर जाकर मोलभाव नही जानेगा व्यापार कैसे कर पाएगा?

महाराष्ट्र में गांव स्तर, तहसील स्तर और जिला स्तर के बाद मुम्बई, पुणे, औरंगाबाद, नासिक, नागपुर ऐसे बड़े शहर आते है जहा से छोटे व्यापारी अपना माल बुलवाते है या अपने उद्योंगों, कारखानोंसे बने माल के लिए बाजारपेठ ढूंढते है। अब राज्य शासनने राज्यअंतर्गत रेल यात्रा को मनाही कर रखी है और रेलवे ही एक ऐसा यातायात का साधन है जो किफायती, तेज गतिवाला और सर्वथा उपयुक्त है।

कोई भी व्यापार, व्यवसायी एक दिन में आ जा कर अपनी जरूरत के काम निबटाकर अपने व्यवसाय को गति दे सकता है। रेल यात्रा की मनाही को चलते, सड़क मार्ग से जाना कतई किफायती नही है। आगे ही व्यापार क्षेत्र में मंदी चली आ रही है, वैसे में सड़क मार्ग स अपना खुद का वाहन लेकर मार्केट तलाशना काफी महंगा पड़ता है। यह राज्य शासन की योजना ‘मिशन बिगिन अगेन’ के लिए सबसे बड़ी बाधा है।

सम्पूर्ण देश मे महाराष्ट्र के अलावा, किसी भी राज्य ने इस तरह का अपने ही राज्य में रेल द्वारा यात्रा करने से रोकने का मार्ग नही अपनाया है। बल्की कई राज्य तो रेलवे से अनुरोध कर के अपने राज्योंके लिए इण्टरसिटी विशेष गाड़ियोंकी व्यवस्था करवा रहे है, ताकि राज्योंके नागरिक अपना उद्योग व्यवसाय सुचारू तरीकेसे चला सके।

हम एक बार फिर राज्य शासन से अनुरोध करते है, अपनी रेल प्रशासन को राज्यान्तर्गत टिकट बुकिंग्ज को लेकर दी गयी कार्रवाई पर पुनर्विचार करें। राज्य के समझदार नागरिक मास्क, सैनीटाइजर और सोशल डिस्टेन्सिंग की सारी हिदायतें पाल कर अपनी और अपने सहयात्रियों की सारी सुरक्षा को ध्यान में रखकर रेल यात्रा कर सकते है।

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यह है मध्य रेल की गणपति स्पेशल्स का हाल

गत वर्षोंसे यह रिवाज है, की विशेष गाड़ियोंकी घोषणा कमसे कम 1 माह पहले ही हो जाती है। इस बार राज्य सरकार और रेल प्रशासन का तालमेल बैठा ही नही और जिस दिन गाड़ियाँ चालू होनी थी उसके महज 1 दिन पहले गाड़ियोंकी घोषणा की गई।

पहले ही संक्रमण के हालात उसमे यात्रिओंको कोरंटाइन किए जाने का सताए जानेवाला डर। सारे गणेशोत्सव के लिए घर जानेवाले यात्री सड़क मार्ग से 8/10 पहले ही गाँवोंके तरफ निकल लिए। सबसे बड़ी तकलीफ़ यह थी, राज्य शासन का नियम, जिसमे राज्यान्तर्गत रेल यात्रा करने की रेलवे सिस्टम द्वारा ही मनाही कराई गई थी।

ऐसे में कोई कैसे सोच लेता, की विशेष गाड़ियाँ चलाई जाएगी और उसमे राज्य के भीतर ही भीतर रेल यात्रा की अनुमति भी रहेगी? बस। इतना धैर्य, इतना इंतजार गाँव जाने वाले क्यों कर करेंगे? सारा देश साक्षी है, उत्तरी, पूर्वी भारत के श्रमिक गाँव की ओर जाने के लिए कैसे कैसे तरिकोंसे बड़े शहरोंसे अपने आशियानोंको, रोजीरोटी को छोड़कर निकल गए थे। फिर क्या पूर्वी भारत के लोग और क्या कोंकनवासी? जिसका मन गाँव की तरफ दौड़ गया वह किसीके मानें नही मानता।

कुल मिलाकर नतीजे सामने है, देख लीजिए।

कोंकण स्पेशल की, गाड़ी चलाने के वक्त की बुकिंग्ज की स्थिति
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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का मुम्बई हावड़ा वाला भाग भुसावल – दानकुनी ऐसा होगा।

रेलवे का महत्वाकांक्षी प्रकल्प, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दो प्रोजेक्ट्स EDFC लुधियाना से दानकुनी 1856 किलोमीटर और WDFC दादरी से मुम्बई के JNPT 1504 किलोमीटर पर ज़ोरोंसे काम शुरू है। दिसम्बर 2021 तक यह दोनोंही प्रोजेक्ट लगभग पूरे किए जाने की संभावनाएं है। इन रेलवे कोरिडोर बन जाने से दिल्ली – हावड़ा, दिल्ली मुम्बई के बीच मालगाड़ियोंके चलाए जाने के लिए एक स्वतंत्र व्यवस्था हो जाएगी। साथ ही वर्तमान व्यवस्थाओंके के लिए अतिरिक्त मार्ग भी उपलब्ध हो जाएगा। बहोत ही अत्याधुनिक एवं उन्नत तरीकेसे बनाया गया यह मार्ग भारत के लिए विकास के नए मार्ग खोलने वाला साबित होने वाला है यह बात तय है।

इन दो DFC मार्गोंके अलावा और 4 फ्रेट कॉरिडोर लाइनोंपर काम किया जाने वाला है। वह है, ईस्ट कोस्ट कॉरिडोर – खड़गपुर से विजयवाडा, ईस्ट वेस्ट सब कॉरिडोर (i) – भुसावल से दानकुनी, ईस्ट वेस्ट सब कॉरिडोर (ii) – राजखरस्वन से अंदाल, नार्थ साउथ कॉरिडोर – विजयवाड़ा से इटारसी। हाल ही में रेल मंत्रालय और DFC कम्पनी के बिच एक समझौता तय हुवा है की उपरोक्त मार्गोंपर DFC, भारतीय रेल को अपनी गाड़ियाँ चलाने देगी।

उपरोक्त कॉरिडोर में जो ईस्ट वेस्ट सब कॉरिडोर (i) है वह भुसावल, वर्धा, नागपुर, राजखरस्वन, खड़गपुर, उलुबेरिया से दानकुनी जिसका कुल किलोमीटर 1645 है, जिसे आगे भुसावल से मुम्बई की ओर WDFC ट्रैक को पालघर में जोड़ा जाएगा। यह प्रोजेक्ट भुसावल के लिए बहोत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।

गत 5 वर्षोंसे भुसावल में रेलवे के प्रोजेक्ट्स के आश्वासन ही बरस रहे है। पहले LHB कोचेस का ओवर हाउलिंग यार्ड बनाए जाने का आश्वासन मिला था। लम्बी चौड़ी जगह इसके लिए तैयार रखी गयी, बादमे पता लगता है, यह प्रोजेक्ट नागपुर शिफ्ट हो गया है। उसके बाद चर्चा चली मेमू यार्ड बनाए जाने की लेकिन वह प्रोजेक्ट भी पिछले प्रोजेक्ट की तरह हवा हो गया। कहाँ गया इसका भी पता नही लग पाया। खैर, यह DFC कॉरिडोर के प्रोजेक्ट की घोषणा स्थायी लग रही है, DPR का अप्रूवल मिल चुका है और उसका काम शुरू होने को है।

इस प्रोजेक्ट से भुसावलवासियोंको बहोत उम्मीदें है। वैसे भी भुसावल शहर में से एशियन 4+2 हाइवे जा रहा है, बिजली निर्माण केंद्र है, बारामाह पानी लाने वाली ताप्ती मैय्या है। कंटेनर डिपो है, हतनुर डैम है, शेलगाँव डैम निर्माणाधीन है याने पानी की कोई किल्लत नही। MIDC की बड़ी जगह प्रोजेक्ट्स के लिए खाली पड़ी है। रेलवे की खुद की बड़ी खाली जमीनें किसी बड़े प्रोजेक्ट के आने का इंतजार कर रही है। व्यवस्थाएं सारी है, बस किसी की पारखी नजरें इनायत हों इसका इंतजार है।

EWSDFC कॉरिडोर की वजह से यहाँपर बड़े वेयर हाउसेस, ट्रांसपोर्ट हब बनाए जाने की संभावना लग रही है। बड़े इंडस्ट्रियल हब इन्दौर, औरंगाबाद, नाशिक जैसे, भुसावल से मात्र 200/300 किलोमीटर की रेंज में है। आशा है, यह प्रोजेक्ट जल्द से जल्द शुरू हो और भुसावल का नाम देशभर में रौशन हो।

मंजूरी का पत्र
प्रोजेक्ट मैप
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मध्य और पश्चिम रेलवे की गणपति स्पेशलपर कोंकण के यात्रिओंकी बेहद ठंडी प्रतिक्रिया

मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे ने जिस उत्साह से कोंकण रेलवे पर 172 और 12 स्पेशल गाड़ियाँ दिनांक 15 से 5 सितंबर तक चलाई है, उसके बिल्कुल विपरीत प्रतिक्रियाए कोंकण की ओर जानेवाले यात्रिओंमें है।

कल दिनांक 15 को मुम्बई से सावंतवाड़ी के लिए 2 स्पेशल्स और लोकमान्य तिलक टर्मिनस से कुडाळ और रत्नागिरी के लिए एक एक स्पेशल गाड़ी छोड़ी गई। कहा जा रहा है, सभी चारों गाड़ीयोंकी हालत यह थी, की किसी भी गाड़ी में 50 से अधिक यात्री नही थे। गाड़ियाँ खाली खाली ही, यात्रिओंके बगैर रवाना हुई।

ऐसा क्यों हुवा, जब हजारोंकी संख्या में कोंकण वासी गणेशोत्सव के लिए मुम्बई की ओरसे अपने गाँव मे उत्सव, पूजा के लिए जाते है? इसका प्रमुख कारण है, देरी। इन स्पेशल्स की घोषणा करने में कई गयी डावाँडोल निर्णय की वजह। रेलवे कई दिनोंसे राज्य शासन के सम्पर्क में थी। पत्राचार भी किए गए, लेकिन सामनेसे कोई प्रतिक्रियाही नही। चूँकि कोंकण क्षेत्र में यात्रिओंकी आवाजाही पर देखरेख रखनेवाली यंत्रणा की कोई व्यववस्था नही थी। अतः कार्यक्रम परवान चढ़ ही नही पा रहा था। एक तरफ महाराष्ट्र शासन ने महाराष्ट्रवासियों को राज्य अंतर्गत रेल यात्रा करने पर रेल प्रशासन को कह टिकट बुकिंग सिस्टम द्वारा ही बन्दी करवा रखी थी और यह सारी गाड़ियाँ राज्य अंतर्गत ही चलनी थी।

कोंकण की ओर यात्रा करनेवाले यात्रिओंमें यह भावना प्रबल थी, जब पूरे राज्य मे किसी को राज्य अंतर्गत रेल यात्रा नही करने दी जा रही तो कोंकण रेल भी शायद ही खुले। दूसरा परनेम टनल बन्द होने से कोंकण रेल मार्गसे चलनेवाली सीधी गाड़ियाँ भी 20/22 तारीख तक पुणे, मिरज, मडगांव मार्ग से घुमा दी गई थी।

जब सीधी गाड़ियाँ बन्द है, राज्य शासन विशेष गाड़ियोंको लेकर कोई फैसला नही कर पा रही है तो सहज है की यात्री जिसको अपने गांव जाना है, बेचारा कब तक इंतजार करें? आगे गांव पोहोंचकर 14 दिन क्वारनटाईंन भी किए जाने की अवस्था को झेलना था अतः बहुतांश कोंकनवासियों ने सड़क मार्ग से अपनी अपनी गाड़ियोंकी व्यवस्था की ओर गांव की ओर निकल लिए।

इधर जब रेलवे को राज्य शासन की ओरसे हरी झंडी मिली तब तक तो ” चिड़िया चुग गयी खेत” वाली स्थितियाँ हो गयी थी। अंततः मुम्बई की ओरसे कोंकण की दिशामे चलने वाली तमाम स्पेशल गाड़ियाँ खाली ही दौड़ लगा रही है। बचे हुए दिनोंकी गाड़ियोंके बुकिंग्ज में भी कुछ जोर दिखाई नही दे रहा है।

लचर नीतियोंके चलते ट्रेनोंका हाल बेहाल हो रहा है और रेलवे को बढ़ते घाटे में और थोड़ा अधिक घाटा उठाने के लिए मजबूर होना है।

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क्या महाराष्ट्र के लिए कोंकण अलग राज्य है?

रेल प्रशासन ने आज 15 अगस्त से 5 सितंबर तक गणपति विशेष गाड़ियोंकी घोषणा की है। इन गाड़ियोंकी टिकट बुकिंग्ज आज ही से आरक्षण केंद्रों और आईआरसीटीसी के माध्यम से की जाएगी।

तमाम महाराष्ट्रवासियों मन मे एक ही सवाल है, क्या महाराष्ट्र से कोंकण में जाना किसी अलग राज्य में जाने के जैसा है? इस प्रश्न का कारण है, महाराष्ट्र शासन की राज्यअन्तर्गत रेल यात्रा करने की नीति। जबसे रेल प्रशासन ने संक्रमण के चलते अपनी सारी टाइम्टेबल्ड, रेग्युलर यात्री गाड़ियाँ रद्द कर देशभर में केवल 230 विशेष गाड़ियोंके जरिए यात्री रेल सुविधा जारी रखी है, तब से महाराष्ट्र शासन ने अपने राज्य के भीतर ही भीतर रेल यात्रा टिकट बुक नही किए जाएंगे ऐसी व्यवस्था रेलवे से करवाई थी। वहींपर राज्य से किसी दूसरे राज्य में जाने या किसी दूसरे राज्य से महाराष्ट्र में आने के लिए रेल टिकट बुक कराने में कोई बाधा नही है।

आज भी सैकड़ो जरूरतमंद महाराष्ट्रवासियों को किसी पड़ोसी राज्य से अपनी रेल यात्रा शुरू या समाप्त करनी पड़ रही है। उदाहरण के लिए जलगाँव से मुम्बई, पुणे रेल से जाना हो तो यात्री बुरहानपुर से मुम्बई या पुणे का टिकट बुक करा के वहीं से यात्रा कर रहे है। गौरतलब यह है, की आज से जो गणपति विशेष गाड़ियाँ शुरू की गई है, सारी गाड़ियाँ महाराष्ट्र के अंतर्गत ही चलाई जानी है और इनके टिकट सहजतासे उपलब्ध है। यह कैसी नीति है?

सारे महाराष्ट्रवासियों के मन मे रह रह कर एक ही प्रश्न उठ रहा है, क्या कोंकण महाराष्ट्र राज्यका भाग नही है? फिर यह अलग नीति क्यों? कोंकण प्रभाग में जाने के लिए मुम्बई से रेल टिकट दिया जा सकता है तो मराठवाड़ा, खान्देश, विदर्भ, पश्चिम महाराष्ट्रवासियों को रेल यात्रा की सहुलियित क्यों नही दी जा रही है।

आज देश का प्रत्येक नागरिक इस संक्रमण में क्या एहतियात बरतनी चाहिए यह भलीभाँति जानता है और उसका कड़ाई से पालन भी कर रहा है। हमारी महाराष्ट्र शासन से आग्रहपूर्वक अनुरोध है, कृपया समस्त महाराष्ट्र की जनता के लिए भी रेल यात्रा की बुकिंग्ज खोल दी जाए ताकि मजबूर जनता को महंगे सड़क परिवाहन से यात्रा करनेसे छुटकारा मिले। विगत 2-3 महीनोंसे सैकड़ों मरीज, व्यापारी, व्यवसायिक इस बंधन में पिसे जा रहे है। यदि उपरोक्त बन्धन शिथिल किया जाता है तो सारे महाराष्ट्रके अंतर्गत रेलसे यात्रा करने के जरूरतमंद यात्री प्रदेश शासन के आभारी रहेंगे।