Wash your hands, without touching tap.
हमारे रेलवे स्टाफ़ द्वारा , नल को हाथ लगाये बिना हाथ ऐसे धोये जा सकते हैं इसकी तकनीक बनाई है।
Wash your hands, without touching tap.
हमारे रेलवे स्टाफ़ द्वारा , नल को हाथ लगाये बिना हाथ ऐसे धोये जा सकते हैं इसकी तकनीक बनाई है।
शादी ब्याह का सीजन था, तो किसी की छुटियोंमें घूमने की प्लानिंग। सब धरी की धरी रह गयी। बच्चे और बच्चोंकी मम्मियाँ अलग कान खा रही, हमारी तो धुपकाले की छुट्टियाँ ही गोल हो गयी। इतनी परेशानियाँ कम थी की टिकट कैंसिल कराने का झमेला अलग ही दिमाग की दही कर रहा है।
भाईयों, परेशान होने की कौनो जरूरत नाही, हम हियां तोहार वास्ते ही बइठे रहल। हाँ जी, हम आपको सारी बाते समझा देते है, की क्या करना होगा अपनी टिकटोंका रिफण्ड के लिए।
देखिए सबसे पहले यदि आपकी ई टिकट है तो आप बिलकुल ही बिल्कुल चिंतामुक्त हो जाइए। गाड़ी कैंसिल होगी तो अपने आप ही आपका सारा पैसा आपने जिस अकाउंट से टिकट बनवाया था उसमें जमा कर दिया जाएगा। क्योंकी ई टिकट का लेनदेन डिजिटल होता है, आपका अकाउंट IRCTC के पास है। इधर गाड़ी कैंसिल हुई और 2-4 दिनोंमें आपका रिफण्ड खातोंमें जमा। बस आपको यह करना है खुद ई टिकट को कैंसिल नही करना है। जो आप करने का प्रयत्न करोगे तो कैंसलेशन चार्जेस लग जाएंगे। जब गाड़ियाँ तो रद्द की ही गयी है, तो रिफण्ड भी अपने आप आने दे, समझे?
अब रही PRS टिकट की बात। इसमें भी आप को अपने यात्रा की तारीख तक इंतजार करना है। उसके बाद 139 रेलवे पूछताछ नम्बर पर अपने आरक्षण फॉर्म भरते वक्त जो फोन नम्बर दर्ज करवाया था उसी नम्बर से डायल करें। जैसे जैसे आपको हिदायतें मिलेंगी वैसा कीजिए। IRCTC की ओरसे आपको PNR पूछा जाएगा और ट्रेन नम्बर भी पूछा जाएगा। उसके बाद आपके मोबाइल पर एक ओटीपी ( वन टाइम पासवर्ड ) आएगा जिसे आपको IRCTC को बताना होगा। बस हो गया। आपको मैसेज आ जायेगा की आपकी टिकट कैसल हो चुकी है आपको काउन्टर पर जाकर रिफण्ड का पैसा ले लीजिए।
139 पर SMS के जरिए भी टिकट कैंसलेशन होतया है। अपने वहीं मोबाइल नम्बर से जो आरक्षण फॉर्म में दर्ज है, आपको 139 को SMS करना है। अंग्रेजी के कैपिटल लेटर्स में CANCEL एक स्पेस अपना PNR नम्बर एक स्पेस अपना गाड़ी नम्बर लिखिए और भेज दीजिए। फौरन आपको एक ओटीपी आएगा, उसे भी कैपिटल में OTP एक स्पेस जो ओटीपी आया है उसे लिखेंगे और भेज दीजिए। जबाब में आपको टिकट कैंसिल का मैसेज आ जाएगा। बस उसे काउन्टर पर दिखाए और अपना रिफण्ड का पैसा ले लीजिए। ध्यान रहे, 14 तारीख तक की रद्द गाड़ियोंका पैसा रिफण्ड लेने के लिए लम्बी अवधि दे दी गयी है। अपनी यात्रा की तिथि से 3 माह तक आप अपना रिफण्ड ले सकते है तो वहाँ जाकर भीड़ करने की बिल्कुल भी जरूरत नही है। इत्मिनान से जाइये और आराम से अपना पैसा रिफण्ड ले लीजिए। रेलवे की ओर से रद्द की गई गाड़ियोंमे कोई भी रद्दीकरण शुल्क नही कटेगा, पूरा की पूरा पैसा वापिस होगा।
एक TDR भी पद्धति है। TDR याने टिकट डिपॉजिट रिसीट। इसके लिए आपको आरक्षण ऑफिस जाना होगा। वहाँपर आपको आपका टिकट देख कर TDR दर्ज कराने कहा जाएगा और एक फॉर्म दिया जाएगा। यह वही TDR फॉर्म है। इसको गाड़ी नम्बर, PNR नम्बर वगैरा लिख कर वाणिज्य स्टेशन मास्टर के पास स्टैम्प करा के सम्बंधित CCM याने झोन के मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक को भेजना होगा। उसके बाद आपको आपके रिफण्ड की मनी रिसीट मिलेगी जो काउन्टर पर कैश की जा सकेगी।
दिनांक 21 मार्च की आधी रात से याने रेलवे समयानुसार 22 मार्च की 0.00 से सारी गाड़ियाँ बन्द की जा रही थी। उससे पहले जो मेल एक्सप्रेस अपनी यात्रा के लिए चल पड़ी थी, उसे अपने गन्तव्य तक जाना था, अपनी यात्रा पूरी करनी ही थी।
कोई गाड़ी 22 को तो कोई गाड़ी 23 तारीख तक अपनी यात्रा पूरी कर करा के रेलवे के यार्डों में लम्बी छुट्टी पर चली गयी। लेकिन एक गाड़ी थी जो चलती जा रही थी और चलती ही जा रही थी।
यह गाड़ी थी, देश की सबसे लंबी चलनेवाली गाड़ी विवेक एक्सप्रेस। 15906 डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी के लिए चलने वाली विवेक एक्सप्रेस। दिनांक 21, शनिवार को रात 11 बजे डिब्रूगढ़ से चली यह गाड़ी अपनी 4205 किलोमीटर की रेल यात्रा, 60 स्टेशनोके स्टोपेजेस लेते हुए आज दिनांक 25 को सुबह 9.36 को रेग्युलर समय 9:55 से पहले ही पहुंच गई।
इस बन्द के दौरान भी रेलवे प्रशासन अपने वादे के अनुसार, जो भी गाड़ियाँ रास्ते मे चल पड़ी थी, उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचाने के लिए कटिबद्ध था। अपनी पूरी यात्रा के दौरान इस गाड़ीमे यात्रिओंकी उपस्थिति लगभग 50% थी और बिना किसी तकलीफ या परेशानी के, यात्रिओंने अपना रेल सफर सुरक्षितता के साथ पूरा किया।



जी हाँ, यह बिल्कुल सच है। देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई, फ़िल्मनगरी मुम्बई, मायानगरी मुम्बई 24 x 7 चलती, नही जी दौड़ते रहती है। लेकिन वक्त का तकाज़ा, समय की माँग को भी जानती है। सारे लोग जो घड़ी के काँटोंके साथ रेस लगाए रहते है आज अपने अपने घरोंमें रुके है। जानते है, यह वक्त यही सही है। जब दौड़ना होगा, फिर से निकल पड़ेंगे। जल्द ही फिर से घड़ी के रेस का बिगुल बजेगा, 6:57 की दादर पों करेगी, गार्ड ऑलराइट बोलेगा और फिर वही रोटी और वही पेट। दौड़ पड़ेंगे।










इन दिनों, जब हर व्यक्ति को प्रशासन जी तोड़ आग्रह कर रहा है, घर पर रहे, सुरक्षित रहे, अपनी सामाजिक गतिविधियों को सीमित रखे। मगर हम भारतीय बहोत इम्पेशन्ट है, बेसब्रे, अधीर और बेताब है, हमे हर वो परिणाम चाहे वह हमारे हित मे भी है या नही जल्द चाहिए होता है।
कोविड 19 का संक्रमण फैल रहा है। हर वह देश जो इसकी गिरफ्त में है उसकी खबरे हम टीवी, इंटरनेट पर देख रहे है। इतने लोग संक्रमित हो गए, इतने लोग मारे गए। हमारे देश के आंकड़े इकाई से दुहाई और अब तिहाई में पोहोंच गए है। इस संक्रमण का कोई टिका या दवा दुनियाभर में किसी देश के पास नही है। ऐसी स्थिति में केवल इससे बचाव करने की संकल्पना सभी लोगोंने अपनायी है।
कितना आसान है अपने आप को इस संक्रमण से बचाना, बस अपने आप को घर मे ही रखना है, व्यक्तिगत जनसम्पर्क से दूर रहना है। आप के लिए टीवी चल रहा है, इंटरनेट चल रहा है, खबरें आप तक पोहोंच रही है, व्यक्तिगत सम्पर्क छोड़ दिया तो बाकी सब फोन पर बातचीत, वीडियो कॉलिंग, अपने सारे आर्थिक व्यवहार सब आप घर बैठे कर पा रहे हो। फिर क्या दिक्कत है, क्यो आतुर, अधीर और इम्पेशन्ट है हम लोग?
यह आज की, अभी की, इस आपदा की बात नही, हम भारतीय लोग हमेशा ही बेसब्रों की तरह ही व्यवहार करते है। कतार लगाना चाहे वह टिकट विन्डो हो, गाड़ी में चढ़ना हो, किसी काम के लिए रुकना हो हमें किसी भी जगह अपनी बारी आने का इंतज़ार करना मंजूर ही नही रहता। हर किसी को ऐसा लगता है की उसका समय बेहद कीमती है। जैसे उसे रुकना पड़ा तो उसका सारा संसार ही रुक जाएगा।
क्या आपने किसी देश मे भक्ति करने के लिए VIP एंट्री ऐसी परिभाषा या व्यवस्था कहीं देखी या सुनी है? हम अधिरोंके, बेसब्रोंके देश में है बड़ी बड़ी जगहोंपर ऐसी व्यवस्थाएं है। क्योंकी हम बेसब्र है, आतुर है। हम खड़ा रहना ही नही चहाते, इंतजार करना कतई मंजूर नही फिर चाहे वह इशभक्ति ही क्यों न हो।
इस बेसब्री को और भी नाम है, उत्सुकता, आतुरता। किसी भी परिणाम को पाने या जानने के लिए उत्सुक, आतुर, बेसब्र होना तब योग्य और अच्छा माना जाता है जब आपने उसके लिए योग्य प्रयत्न, परिश्रम किए हो। एफर्टलेस इम्पेशंट होना, बिना परिश्रम के, योग्य प्रयत्नोके अपने परिणाम जानने के लिए, फल प्राप्त करने के लिए आतुर होने को बेसब्रे होना कहांतक ठीक है?
इस बेसब्री में, अतिउत्साही पन में हम लोग बेपरवाह भी हो जाते है। व्यवस्थासे विद्रोह कर बैठते है। सामाजिक भावनाओं को असन्तुलित कर देते है। होड़ मचा कर क्या पा लेंगे? यह समझना चाहिए हर चीज को पूर्णत्व तक पहुंचने के लिए निर्धारित वक्त लगता है। धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय। संत कबीर की रचना है। वे कहते है, हर चीज का वक्त है, माली हर रोज पौधे मे पानी देता है, पर जब ऋतू आएगी तभी परिणाम मिलेंगे।
मित्रों, हर चीज के लिए वक्त होता है, जिसे हम रोजमर्रा में वेटिंग टाइम कहते है। तो परिणामप्राप्ति के लिए वेट कीजिए, सब्र कीजिए, अपना पेशन्स बढ़ाइए, और बेसब्री बढ़ ही रही है तो उसे योग्य दिशामे प्रयत्न करने के लिए बढ़ाइए। परिश्रम करने के लिए बढ़ाइए।
कहते है न, सब्र का फल मीठा होता है।