खण्डवा – आकोट – अकोला गेज कन्वर्शन, नागपुर – छिंदवाड़ा, गोंदिया – जबलपुर गेज कन्वर्शन और पुणे – मिरज – कोल्हापुर दोहरीकरण यह सारे प्रोजेक्ट समझने के लिए मैप्स काफी सहायता करते है। आज हमने हमारे पाठकोंके लिए प्रोजेक्ट मैप प्रस्तुत किए है।
खण्डवा मथेला लूप
इस मैप में देख सकते है, किस तरह इटारसी की ओरसे आनेवाली कोल गुड्स गाड़ियाँ बिना खण्डवा आए सनावद के रास्ते मुड़ जाएगी। मथेला से निमाड़खेड़ी अंतर 58km का है। यह पूरी मथेला – निमाड़खेड़ी – खरगोन लाइन NTPC पॉवर प्लान्ट के लिए बनाई गई है। इस लाइन का उपयोग यात्री यातायात के लिए खण्डवा – मथेला – सनावद ऐसा करना हो तो खण्डवा से मथेला जो की मात्र 7km है वहाँपर लोको की दिशा बदलना होगा और तभी गाड़ी सनावद की ओर बढ़ेगी या फिर MEMU चलाई जा सकती है तो लोको की शंटिंग की जगह लोको पायलट, गार्ड अपनी कैबिन बदलेंगे और गाड़ी आगे बढ़ेगी। आपको याद दिला दे निमड़खेड़ी – सनावद गेज कन्वर्शन अपने पूर्णत्व की ओर है।
उपरोक्त मैप में पूरा त्रिकोण भुसावल – खण्डवा – अकोला दिखाई देता है। जिसमे खण्डवा से रतनपुर और आकोट से अकोला लाइन का गेज कन्वर्शन जारी है ऐसे मालूम होता है। अंबेडकर नगर महू से बलवाड़ा गेज कन्वर्शन प्रोजेक्ट वन जमीनोंके कारण कितना घूम के जा रहा है।
नागपुर – छिंदवाड़ा गेज कन्वर्शन
नागपुर – छिंदवाड़ा
नागपुर से भिमालगोंदी और छिंदवाड़ा से भण्डारकुण्ड गेज कन्वर्शन हो चुका है, दोनों ओरसे गाड़ियाँ भी चल रही है। बस भिमालगोंदी से भण्डारकुण्ड का CRS सुरक्षा निरीक्षण होना बाकी है। जो शायद मार्च में हो जाएगा। यह निरीक्षण होने के बाद नागपुर – छिंदवाड़ा सीधी गाड़ियोंका शुरू कराने का मार्ग खुल जाएगा। मैप में गोंदिया – जबलपुर गेज कन्वर्शन की स्थिति भी देख सकते है। इस मार्ग का भी छोटासा समनापुर – नैनपुर के बीच का सेक्शन बाकी रह गया है। इस मार्ग की जल्द ही शुरू किए जाने की सम्भावना है।
पुणे – मिरज – कोल्हापुर दोहरीकरण
पुणे – मिरज दोहरीकरण
इस मैप में आप पुणे – मिरज दोहरीकरण देख सकते है। विशेष ध्यान दौंड – बारामती इकहरी लाइन, लोनन्द – फलटण लाइन और फलटण बारामती प्रपोज्ड लाइन के मैप पे दीजिएगा। यह लाइन पुणे बाईपास करके सीधे मिरज के लिए निकल के जा रही है। साथही कोंकण रेलवे का स्टेशन सावंतवाड़ी से कोल्हापुर प्रपोज्ड लिंक प्रोजेक्ट भी दिखाई दे रहा है।
उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में प्रि नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग कार्य के लिए हज़रत निजामुद्दीन – पलवल मार्ग पर फरीदाबाद स्टेशन पर रेल ब्लॉक लिया जा रहा है। फरीदाबाद स्टेशनपर चौथी रेल लाइन का यह तकनीकी कार्य है। यह ब्लॉक 02 मार्च तक चलना है।
यह बात निश्चित है, हज़रत निजामुद्दीन – पलवल मार्ग पर ब्लॉक लिया जाना याने बहोत सारी गाड़ियोंके शेड्यूल का अस्तव्यस्त होना। मित्रों, काफी लंबी लिस्ट है, यदि आपको इस मार्ग पर रेल यात्रा करनी हो तो निम्नलिखित परिपत्रक को ध्यानसे देख ले। आने वाले 02 मार्च तक कई गाड़ियाँ रद्द / आँशिंक रद्द / परावर्तित या रेग्युलेट रहेंगी।
उपरोक्त खबर अपने सभी मित्रों और रिश्तेदारों को भी दें, ताकी किसी को रेल यात्रा में परेशानी न हो।
कोटा के सुजीत स्वामी ने माहिती अधिकार ( right to information act ) के तहत रेलवे से रद्द किए जानेवाले टिकीटोंकी जानकारी मंगाई। रेलवे ने जानकारी देते हुए यह बताया की जनवरी 2017 से लेकर जनवरी 2020 तक गत तीन वर्षोंमें रेलवे ने प्रतिक्षासूची के यात्रिओंसे करीबन 9000 करोड़ रुपये की आय अर्जित की है। साढ़े नौ सौ करोड़ लोगोंने अपने प्रतिक्षासूची के PRS वाले टिकट रद्द नही करवाए जिससे 4335 करोड़ रुपए और 4684 करोड़ रुपए, यात्रिओंके टिकट ऑनलाईन थे जो अपने आप रद्द हो गए उससे रेलवे ने यह कमाई की है।
इन दोनों टिकट लेने के तरीके में करीबन 75% टिकट स्लिपर क्लास के थे, दूसरा क्रमांक थ्री टायर AC का है। वही रद्दीकरण में 90% प्रतिक्षासूची के टिकट एक क्लास के थे। इन तीन वर्षोंमें 145 करोड़ ऑनलाइन टिकट तो 74 करोड़ टिकट PRS से आबंटित किए गए। *जाहिर सी बात है, जो 74 करोड़ प्रतिक्षासूची वाले टिकट PRS से जारी हुए है, उनमें से शायद ही 5-10 प्रतिशत टिकट रद्द किए होंगे और जो भी PRS टिकट रद्द किए गए होंगे उसमे भी करीबन 90% टिकट AC क्लास के होंगे।
क्या रेल प्रशासन इन आँकड़ोंसे कुछ संज्ञान लेगी? यह सारे प्रतिक्षासूची, स्लीपरों वाले टिकटधारी अनाधिकृत यात्री अपने टिकट लिए अधिकृत यात्रिओंके साथ, स्लिपर डब्बोंमे घुस कर यात्रा करते रहते है। जो एक सुरक्षित यात्रा के हिसाब से न सिर्फ यात्रिओंके लिए बल्कि रेल परिचालन के लिए भी बेहद खतरनाक हो सकता है।
किसी 80 यात्री की क्षमता के डिब्बे में 150-200 यात्री यात्रा करते है और वही जनरल सेकन्ड क्लास में 100 यात्री की क्षमता वाले डिब्बे में 300 से 400 लोग यात्रा करते है। यहाँ तक कि एमिनिटीज, मेंटेनेंस, सिक्युरिटी और चेकिंग स्टाफ़ भी अपना काम नही कर पाता।
यह कैसी हालात बना रख्खी है रेल प्रशासन ने भारतीय रेलोंकी? क्यों नही बन्द किए जाते प्रतिक्षासूची के टिकट? 700 – 800 प्रतिक्षासूची के टिकट जारी करने में कैसा लॉजिक है? रेल प्रशासन को इसका जवाब देना होगा।