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दक्षिण पश्चिम रेलवे के हुबली डिवीजन में रेल ब्लॉक।

दक्षिण पश्चिम रेलवे के हुबली डिवीजन में 31 जनवरीसे 8 फरवरी तक प्रि एन आई वर्क के लिए और एन आई वर्क 9 फरवरी से 12 फरवरी तक, बिक़दकट्टी, गदग, कनगिहल और हरलापुर जो कि गदग होसपेट मार्ग पर है रेल ब्लॉक लिया जा रहे है। इस बीच कुछ गाड़ियाँ रद्द / आंशिक रद्द / डाईवर्ट की जा रही है। कृपया परिपत्रक देखे।

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न रहेगी वेटिंग लिस्ट, न होगा कोई यात्री परेशान – 2

कल, परसों इसी शीर्षक से हमारा आर्टीकल प्रकाशित हुवा था, आज उसी के बारे में बात कर रहे है इसीलिए इसको पार्ट 2 शीर्षक दिया गया है।

मित्रों, कल के आर्टीकल पर हमें बहोत सारी प्रतिक्रियाएँ मिली। किसी ने फ़ेवर किया, पसंद किया। किसी ने और अलग अलग सुझाव दिए, किसी को बुकिंग्स में नो रूम का डर सता रहा था तो कोई बोल रहा था इससे जनरल टिकट लेकर यात्री स्लिपर में ही चलेंगे, परेशानी और बढ़ेगी। लेकिन एक बात सभी को मंजूर थी, स्लिपर क्लास की मौजुदा स्थितियों में सुधार होना जरूरी है।

हमेशा रेल यात्रा करने वाले हमारे मित्र ने कहा, चार्टिंग के पश्चात वेटिंग लिस्ट स्टेटस वाले टिकट पर से कैंसलेशन चार्जेस जीरो कर देने चाहिए, याने उनको फुल रिफण्ड देने होना। उसके पीछे उनका यह लॉजिक था की उससे लोग अपना वेटिंग स्टेटस वाला टिकट रद्द कर के रिफड़ ले लेंगे और जबरन यात्रा नही करेंगे। हो सकता है शायद ऐसा भी सही हो, लेकिन इससे लम्बी वेटिंग लिस्ट पर कोई असर नही होगा बल्कि लोग और उत्साह से चाहे जिस नम्बर का वेटिंग टिकट मिलें लेने में सुस्ती नहीं करेंगे। हमारा जो उद्देश्य है, वेटिंग लिस्ट ही नही रहेंगी तो इसकी रिफण्ड या क्लर्केज याने कैंसलेशन चार्जेस पर चर्चा का कोई विषय नही।

दूसरा, जनरल टिकट लेकर स्लिपर में यात्रा करने वाले यात्री बढ़ेंगे तो इस सिचुएशन में वह यात्री गाड़ी में चल रहे चेकिंग स्टाफ़ से बिना इजाज़त यदि आरक्षित कोचेस में यात्रा करते पाया जाए तो पूर्णतया अनाधिकृत होगा और दण्डित किए जानेका अधिकारी होगा। वैसे भी TTE से इजाज़त तभी मिलेगी जब कोई जगह खाली होगी, क्योंकी TTE कभी किसीको कहीं पर भी एडजस्ट नही करते है और ना ही किसीको किसी दूसरे का बर्थ अलॉट करते है।

अब बात रेवेन्यू लॉस की करते है, वेटिंग लिस्ट बन्द किए जाने पर रेलवे के पास जो 120 दिन पहले से अतिरिक्त धन जमा होता है या इन टिकटोंके कैंसलेशन चार्जेस के जरिए जो 60 – 60 रुपयों का धन इकठठा होता है वह भी बन्द हो जाएंगा। रेवेन्यू, राजस्व का बड़ा नुकसान होगा। एक बड़े फण्ड में कटौती दिखाई देगी। तो इसका इलाज इस प्रकार होगा की जो कन्फ़र्म टिकट 120 दिनोंसे निकाल लिए जाते है उनका कैंसलेशन चार्ज नो रिफण्ड से लेकर 25 % रिफंड तक तय किया जा सकता है।

इसे यूँ देखिए, एडवान्स कन्फर्म्ड टिकटों के कैसलेशन पर तत्काल बुकिंग शरू होने के पहले तक कैंसल करने पर 25 % रिफण्ड, और तत्काल बुकिंग शुरू होने के बाद किसी भी कन्फ़र्म टिकट को कैंसलेशन पर कोई रिफण्ड नही मिलेगा। यह बिल्कुल एअरवेज टिकिटिंग के जैसा ही है, जिसमे कई फ़्लाइट नो रिफण्ड रहती है। इससे बोगस, अनाधिकृत एडवान्स टिकट बुकिंग पर नकैल कसेगी। इसके बाद जो हर क्लासेस में रियायतें रेल प्रशासन के द्वारा प्रदान की गयी है, उन पर भी प्रशासन ने पुनरावलोकन करना चाहिए। चूँकि रेल प्रशासन हर टिकट पर नीचे एक लाइन छापती है ” इस टिकट के किरायोंमे रेलवे आपसे एवरेज में सिर्फ 57 % वसूल रही है” याने कोई यात्री पूरा किराया चुका भी रहा है तो भी रेलवे के किराएके 43% सब्सिडी में वह टिकट उसे मिला है। तो इसका मतलब यही है, आपको अपनी कन्सेशन पॉलिसीज पर रिव्ह्यू करना जरूरी है। एक तरफ प्रशासन कन्सेशन दिए जा रहा है तो दूसरी तरफ रियायत धारकोंको आवाहन करता है, आप अपनी रियायत पूर्ण छोड़ दीजिए या 50% छोड़ दीजिए। याने यात्रियोंकी सदविवेक बुद्धि पर इस विषय को छोड़ दिया जाता है की उसे कितनी रियायत लेनी है। जबकी फुल्ली पेड़ टिकट भी 43% सब्सिडाइज्ड है।

रेल प्रशासन ने कुछ गाड़ियाँ ऐसी चलाई है, जिसमे कोई रियायत नही मिलती। जैसे गरीब रथ एक्सप्रेस और सवारी गाड़ियाँ जो की पहले ही रियायती किरायोंकी गाड़ीयाँ है।अब हमसफ़र एक्सप्रेस बचती है जिसमे यात्री को किरायोंमे कोई रियायत नही है। आनेवाले दिनोंमें नई गाड़ियाँ जो की प्राइवेट पार्टीज चलाएंगी जैसे लखनऊ तेजस और अहमदाबाद तेजस उसमे भी किसी तरह की कोई रियायत नही रहेंगी। और जो भी नई गाड़ियाँ शुरू की जा रही है या तो वह प्राइवेट गाड़ियाँ है या हमसफ़र एक्सप्रेस गाड़ियाँ है। इसका मतलब यात्रिओंने समझना चाहिए की रेल किरायोंपर रियायतोंका कितना बोझ है, प्रशासन उस पर किस तरह गाड़ियोंको प्राइवेट पार्टीज को ओपरेटिंग करवाकर या हमसफ़र एक्सप्रेस शुरू करवा कर निज़ात पाने की कोशिश कर रही है।

यात्रिओंकी अपेक्षाएं भी कुछ कम नही रहती, जरा आप अपने टिकट को देखिए तो, कितने सब्सिडी में आपका टिकट है। आये दिन डिब्बेमे चार्जिंग पॉइंट काम नही कर रहा है इतनी तक शिकायत ट्वीटर के जरिए ठेठ रेल मंत्री को, यात्री कर देते है। हाल ही में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश महोदय की ख़बर पढ़ने में आयी, इन्होंने रेलवे से अपील की है, अपने दरवाजे बड़े करे, ताकी यात्री आसानीसे चढ़ उतर सके। हम सोचते है, यात्रिओंको अनुशाषित होने की जरूरत है। रेलवे ने अपने दरवाजोंपर एंट्री / एग्जिट ऐसी मार्किंग की थी, लेकिन यात्री है की मानते नही।

आज रेलवे जितना किफ़ायती यातायात साधन शायद ही कहीं उपलब्ध होगा। ट्विटर के जरिए जबाबदेही भी बढ़ गयी है। जगह जगह सुरक्षा बल के जवान तैनात रहते है। CCTV लगे है, अब तो गाड़ियोंमे भी लगाए जाने है। रेल्वे अपनी सुविधाओंमें, साफ सुथरे और सुरक्षित होने में नया मापदंड कायम करने जा रही है। और क्या चाहिए, बस यात्री भी सहयोग करें। अनुशासन, स्वच्छता का पालन करे। भारतीय रेल हमारी राष्ट्रीय सम्पत्ति है, आइए इसे राष्ट्र का गौरव बनाए।

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ख़बर राजस्थान से

भीलड़ी – जसाली स्टेशनोंके बीच रेल ब्लॉक की वजह से कुछ गाड़ियाँ रद्द / डाइवर्ट या रेग्युलेट रहेगी।

परिपत्रक
कोई रेलवे स्टेशन किस तरह सुन्दर तरीकेसे सजाया जा सकता है। : प्रेषक हंसराज साता
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मंकिहिल / कर्जत रेल ब्लॉक फिरसे 7 फरवरी तक बढ़ा।

अभी काम चल रहा है, 11026 / 11025 पुणे भुसावल पुणे हुतात्मा एक्सप्रेस डायवर्ट होकर दौंड बाईपास, अहमदनगर, होते हुए मनमाड़ और भुसावल चलेगी। 11029 /11030 कोल्हापुर मुम्बई कोल्हापुर कोयना एक्सप्रेस पुणे और कोल्हापुर के बीच चलेगी। बाकी पैसेंजर गाड़ियाँ रद्द की गई है।

New notification, just viewed

@RailwaySeva @Central_Railway
1.Train no 11030 KOP-CSMT KOYNA EXP leaving from KOP from 29.01.2020 to 02.02.2020 is cancelled.
2.Train no 11029 CSMT-kop KOYNA EXP leaving from KOP from 29.01.2020 to 02.02.2020 is cancelled.

परिपत्रक देख लें –

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न रहेगी वेटिंग लिस्ट न होगा कोई यात्री परेशान।

रेल यात्रा में चाहे किसी श्रेणी में यात्रा करले, चाहे आपकी टिकट कन्फर्म हो परेशानी आपका साथ नही छोड़ती और खास करके स्लिपर क्लास के यात्री तो मनही मन मे यह तय कर लेते है, आगेसे वातानुकूलित डिब्बों में ही यात्रा करेंगे या जनरल टिकट लेकर उनके डिब्बे में बैठे अतिरिक्त यात्रिओंकी तरह।

मित्रों, स्लिपर डिब्बोंमें अतिरिक्त यात्रिओंकी समस्या, शिकायत हर रोज, पूरे भारतीय रेलपर, किसी न किसी गाडीके यात्री की तस्विरोंके साथ ट्वीटर पर आपको देखने मिल जाएगी। भला ट्वीटर पर क्यूँ? आप के साथ भी कई बार घटित होती होगी, यह अलग बात है कभी आप आरक्षित टिकट के साथ होते हो तो कभी वेटिंग लिस्ट या कभी कभार जनरल टिकट के साथ कम दूरी की यात्रा कर रहे होते हो।

इसका मतलब यह है, की हर सूरत में स्लीपर क्लास का यात्री परेशान ही रहता है। उसकीही कन्फर्म सीट पर उसे एडजस्ट होकर यात्रा करनी पड़ती है। कोई यात्री रिकवेस्ट करके उससे एडजस्ट करवाता है तो कोई स्टाफ़ हूँ ऐसा बोलकर, तो कभी कोई महिला, सीनियर सिटीझन तो एक एक स्टॉप के अपडाउन वाले MST धारक दिन की यात्रा में यह ड्रामा चलता है तो रात में स्लिपर डिब्बेकी धर्मशाला बन जाती है। पैर तक धरने की जगह नही। आप अपनी बर्थ से उठकर टॉयलेट तक नही जा सकते ऐसी हालत डिब्बे की रहती है।

यात्रिओंकी ऐसी हालत देख कर एक तरफ गुस्सा आता है तो एक तरफ 48 – 60 घंटे तक ऐसी ही मजबूर हालात में यात्रा करने वाले यात्रिओंके लिए दुख भी होता है। क्या यह लोग वाकई ऐसी अवस्था के हकदार है? क्या इनके पास पैसे नही, जो इस तरह जमीन पर, बर्थ के बीचमे, नीचे, टायलेट के पास दरवार्जोंके पास, बेसिन के नीचे लेट के, बैठ के, खड़े खड़े या कभी किसी सोये यात्री के पैरोंमें बैठकर अपना सफर तय करते है?

नही साहब, कतई नही। इन्होंने भी उतने ही रुपए चुकाए है जितने की आपने। बस फर्क यह है की आप के पास कन्फर्म टिकट है और इनके पास वेटिंग लिस्ट टिकट। वेटिंग टिकट वह भी कितना? किसका 200 तो किसका 400 तो किसका 600। जी हाँ, इतने वेटिंग लिस्ट नम्बर के टिकट रेलवे इनको थमा देती है। जहाँ पहले 10 वेटिंग नम्बर कन्फर्म में तब्दील नही होते, कैसे इनके वेटिंग टिकट कन्फर्म हो जाएंगे? कैसे मिल जाएंगी इनको बर्थ? क्या इन यात्रिओंको बर्थ की जरूरत समझ नही आती? ना, इसके पीछे का लॉजिक हम आपको बताते है, देखिए जाना तो हर हालात में है। तो क्या करे? PRS से, वहीं भाई, अपनी आरक्षण खिड़की से पेपर वाला टिकट लेलो, चाहे वह कितना ही वेटिंग क्यों न हो, यह टिकट अपने आप रद्द नही होता, भले ही चार्ट बन जाए और फिर भी स्टेटस वेटिंग ही रह जाए। याने गाड़ी के आरक्षित डिब्बे में चढ़ने का एक सबल कारण आपको मिल गया। जब तैयारी हर सूरत में जाने की है तो क्या सीट मिले या ना मिले? गाँव तो पोहोंच ही जायेंगे।

हमने आज तक वेटिंग लिस्ट के PRS टिकट बन्द करके उसे E – टिकट देने के बारे में दलीलें दी। लेकिन इससे आगे जाके हम यह कहते है, रेल प्रशासन यह बिन ब्याज के पैसे इकठ्ठा करना छोड़ दे। बन्द ही करदे वेटिंग लिस्ट और बन्द कर दें इस तरह 600 – 600 वेटिंग लिस्ट टिकट जारी करना। बेहद शर्म की बात है, इन्हीं यात्रिओंको पेनल्टी ठोंककर लाखों – करोड़ों के टारगेट रेलवे अचीव किए ऐसा बोलकर अपनी शाबाशी बटोरती है, अपने स्टाफ को अवार्ड्स देती है।

4 – 4 महीने पहले से यात्री वेटिंग लिस्ट का टिकट ले लेता है, यात्रा के दिन, चार्टिंग होने के बाद उसका टिकट वेटिंग ही रहता है और बिना रिफण्ड लिए वह यात्री जमीन पर बैठ कर, रेलवे की शान में कसीदें पढतें अपनी यात्रा करता है। और तो और कैसल भी करें तो रेल प्रशासन 60 रुपए क्लर्केज तो काट ही लेगी, फिर और दूसरी कोई उम्मीद भी नही की किसी ओर व्यवस्था से वह गांव पोहोंच सकें। तो क्यों भला वह अपना टिकट कैसल करेगा?

आज रेलवे खुदको हर मायने में एअरपोर्ट लाइक लाउन्ज, एअरपोर्ट लाइक एंट्रेंस एन्ड एग्जिट करने पर तुली है, जरूर कीजिए। मगर साहब, बुकिंग भी एअरवेज लाइक कीजिए न! बन्द कर दीजिए वेटिंग लिस्ट टिकट देना। RAC तो आप चला ही रहे है, सब्र कर लीजिए उतने ही धन पर। जैसे ही RAC की लिमिट खत्म होती है, तूरन्त “नो रूम” लगा दीजिए, बन्दा आप ही दूसरी व्यवस्था करेगा, नही तो रोज चेक करेगा, यदि कोई टिकट रद्द होती है तो फिर खुलेगी RAC, हट जाएगी “नो रूम” वाली तख्ती। कमसे कम जितनी डिब्बे की क्षमता है उतने ही लोग डिब्बेमे रहेंगे इसकी रेल प्रशासन के पास तो गारंटी रहेगी न? क्योंकि एक्स्ट्रा टिकट ही जारी नही किए गए रहेंगे।

हमारी रेल प्रशासन से पूर्ण विनम्रता से प्रार्थना है, अब वक्त आ गया है की आप यह अतिरिक्त धन इकट्ठा करना बंद करें और सिर्फ RAC तक ही टिकट जारी करें ताकि रेलवे के यात्री राहत की साँस ले।