यह नान्देड डिवीजन का आदिलाबाद रेलवे स्टेशन है। बस, देखते ही बरबस जुबाँ से वाह वाह निकल पड़ता है।



यह नान्देड डिवीजन का आदिलाबाद रेलवे स्टेशन है। बस, देखते ही बरबस जुबाँ से वाह वाह निकल पड़ता है।



नीलगिरी माउंटन रेलवे ने 20 वर्षोंके लंबे अंतराल के बाद आज अपने स्टीम पॉवर को पटरी पर उतारा। मेट्टूपलायम – उदग्मण्डलं छोटी लाइनपर कुन्नूर से ऊटी के लिए यह सफर था।


वन्देभारत, गतिमान जैसी सेमी हाईस्पीड गाड़ियाँ चलने लगी, कई सारी गाड़ियोंके डिब्बे अत्याधुनिक LHB कोचेस में तब्दील कर लिए गए, पूरे भारत मे रेलवे स्टेशनोंका रूप ऐसे बदल रहा है की ऐसे लगेगा, कहीं आप विदेशोंमें तो नही घूम रहे? किसी ने नही सोचा होगा की छोटे छोटे शहरोंके स्टेशनोंपर भी रैम्प होंगे, लिफ्ट और एस्कलेटर लगेंगे। शारारिकरूपसे अक्षम यात्रिओंके लिए बैटरी चलित गाड़ियाँ चलेगी जो यात्रिओंको रेलवे के आहातेसे ठेठ रेलगाडी के डिब्बेतक पोहोंचा देगी। वातानुकूलित प्रतीक्षालय बनाए जा रहे है। एयरपोर्ट जैसे लॉन्ज, यात्रिकक्ष बनाए जा रहे है।
यह सब तो बहोत जोरदार है, अकल्पनीय है। लेकिन कैग के रिपोर्टस का क्या? रेलवे को सौ रुपैय्या कमाने, साढ़े अठ्ठयन्वे रुपये लागत लग रही है। अब यह बात सभी जानते है की यह नैशनल कैरियर है और पैसा कमाना ही सिर्फ इसका उद्देश्य नही है, देश के नागरिकोंकी सेवा करना कर्तव्य है, कई सबर्बन सेवाएं, सवारी गाड़ियाँ, द्वितीय श्रेणी की टिकटें रेलवे को घाटा लगवा रही है। कर्मचारियोंके वेतनोंपर, पेंशनोंपर अर्जित धन का बड़ा हिस्सा खर्च हो रहा है।
हर चीज अपनी जगहपर सही है। कर्मचारी को सांतवें वेतन आयोग की तहत बम्पर वेतन मिल रहा है। पेंशनर्स की पेंशनें बढ़ी है। रेलवे के बुनियादी सुविधाओंमें जबरदस्त काम चल रहा है। फिर तकलीफ कहाँ है? तकलीफ़ है सब्सिडाइज्ड किरायोंमे। आज भी हर टिकट पर रेलवे लिखती है, आपके किराए का 43 % हिस्सा वहन किया जा रहा है। क्या है यह सब? सबर्बन गाड़ियोंके किराए, सवारी गाड़ियोंके किराए, द्वितीय श्रेणींके मेल एक्सप्रेस के किराए, मंथली सीजन टिकट के किराए यह इतने रियायती क्यों है? आज 25 km की मंथली सीजन पास मात्र 185 रुपए में आती है, याने लगभग 6 रुपया प्रतिदिन और दो फेरे, एक बार जाना और एक बार का आना। केवल 3 रुपए एक फेरे के। जो 185 रुपए में 25 km रोज अपडाउन करता है वह यात्री भी स्टेशनपर अपनी गाड़ी पार्क करनेके 450 रुपये महिनेके देता है। याने उसको खुदको महसूस होता है वह कितने कम पैसे में अपनी रोज की यात्रा कर रहा है। सवारी गाड़ी का किराया 25km के लिए 10 रुपया, 100 km के 25 रुपया, मेल एक्सप्रेस 25km के 30 रुपया, 100 km के लिए 45 रुपया। इन किरायोंकी तुलना आप स्टेट ट्रांसपोर्ट या लोकल ट्रांसपोर्ट से करोगे तो, भाइयों यहांपर 50 पैसेसे भी कम रेट है और जैसे जैसे अंतर बढ़ता है वैसे वैसे यह प्रति किलोमीटर का रेट और घटते चलता है।
दूसरी तकलीफ है, रेलवे के खाली पड़ी लैण्ड, जमीनोंकी। इसका भरपूर कमर्शियल उपयोग किया जा सकता है। न सिर्फ जमीन बल्कि रेलवे विश्रामालयों, प्रतीक्षालयों, फूड स्टॉलोंका भी वाणिज्यिक रूपांतरण शीघ्रतासे होने की जरूरत है। आज भी कई वर्षोंसे रेलवे के बुकस्टालोंका मल्टी फंक्शनल स्टॉलोंमें रूपांतरण लटका पड़ा है। माना की IRCTC और RLDA इसमें काम कर रही है लेकिन इसमें भी तेजी लाने की जरूरत है। आज BSNL का उदाहरण सामने है, बड़े बड़े दफ्तर, बड़ी सरकारी जमीनें, ढेरों कर्मचारिओंकी के चलते यह कम्पनी अपने आप की हाथी जैसी आवाढव्यता से बेहाल हो चुकी है।
आगे सुनने में आ रहा है, रेलवे अपने किरायोंमे 1 फरवरी से 5 पैसे से लेकर 40 पैसे तक की किरायोंमे वृद्धि करने जा रही है, जिसमे मिनिमम किरायोंका क्या रेट रहेगा इसका विवरण नही है, रेलवे कर्मचारिओंकी सेवा सुविधा पास का डिजिटलाइजेशन होने जा रहा है, ताकी केवल एक पास का एक ही बार उपयोग हो। यह तो ठीक है लेकिन जेबोंमे यूनियन का कार्ड फँसाकर, अपने आप को जबरन रेल कर्मचारी साबित करते कई बन्दे मुफ़्त में रेलोंमें यहाँ वहाँ घूमते है। जहाँ 20 वेंडरोंकी पास होती है वहाँ प्लेटफॉर्मोंपर 50-60 बन्दे धंदा करते मिल जाएंगे। इस तरह रेलवे के राजस्व में छेद करने वाले कई प्रकार दिखाई देते है।
यह तो सिर्फ कमर्शियल विभाग है, इसके अलावा रेलवे में कई विभाग है जो अपने विभागोंमें रेलवे के राजस्व का शोषण कर अपना जीवन सीधा कर रहे है। इन सब पर नकैल कसने, लगाम लगाने की सख्त जरूरत है। गौरतलब यह है की यज्ञपि सिर्फ मुनाफ़ा कमाने के खातिर नही लेकिन अस्तित्व सदा रखने के लिए तो सजग रहना, सुधारणाए करना बेहद जरूरी है।
मुम्बईसे, अहमदाबाद से राजस्थान की ओर आने और जाने वाली सदा लोकप्रिय गाड़ियोंमे अतिरिक्त कोचेस लगाए जा रहे है। यात्री कृपया लाभ ले।

” आँखे तरस गयी बाबूजी, बीसियों साल बीत गए रेलगाड़ी की आवाज सुने” समनापुर, लामटा मार्गपर अक्सर सुनाई देनेवाली बात है। तकरीबन यही हाल इन सभी छोटी लाइनवाले, गेज कन्वर्शन कार्य के सुस्ती पीड़ित लोगोंके है।
नागपुर इलाके में कई मार्ग छोटी लाइनसे बड़ी लाइन में तब्दील होने जा रहे है। नागपुर – छिन्दवाड़ा – नैनपुर बड़ी लाइन, गोंदिया – बालाघाट – जबलपुर बड़ी लाइन, अकोला – आकोट – खंडवा – सनावद – इंदौर बड़ी लाइन इन प्रोजेक्ट्स के ताजा हालचाल जान लेते है। चूँकि यह सारे प्रोजेक्ट्स उन जगहोंकी चलती हुई छोटी लाइन बन्द करके शुरू किए गए है और छोटी लाइनोंको को भी बन्द होकर 18 से 20 वर्षोँका लम्बा अवधी बीत चुका है। इन लाइनोंसे जुड़ी सारी जनता हर रोज़ नई खुशखबर का इंतजार करते रहती है की आखिर वह कौनसा दिन आएगा और यह स्टेशन बड़े नेटवर्कसे जुड़ेंगे।
नागपुर – छिन्दवाड़ा – नैनपुर

इस गेज कन्वर्शन प्रोजेक्ट में, नागपुर – छिन्दवाड़ा लाइन पूरी हो चुकी है बस CRS इंस्पेक्शन ही बाकी रह गया है। ताजा जानकारी यह है कि किसी छोटेसे रिटेनिंग वॉल के अधूरे काम की वजह से 13 दिसम्बर को होनेवाला CRS टल गया है और जनता को जनवरी अंत तक इंतजार करना होगा।
वैसे यह पूरा नागपुर – छिन्दवाड़ा – नैनपुर – मण्डला और छिन्दवाड़ा – गाडरवाड़ा – सागर – बान्दा ऐसा लम्बा और बडा प्रोजेक्ट है जो की उत्तर – दक्षिण रेग्युलर रेल कॉरिडोर बीना – भोपाल – इटारसी – नागपुर को पर्यायी बन सकता है। इसमें नागपुर छिन्दवाड़ा लगभग बन चुका है और छिन्दवाड़ा – सिवनी – नैनपुर मार्ग में से छिन्दवाड़ा – चौराई मार्ग पर बड़ी पटरी डलना शुरू हो गया है। छिन्दवाड़ा गाडरवाड़ा सागर बान्दा मार्ग का सर्वेक्षण कराने की मंजूरी हाल ही आ गयी है।
गोंदिया – बालाघाट – नैनपुर – जबलपुर

1996 -97 में मंजूरी मिल चुका 229km यह प्रोजेक्ट जो उस वक्त 511 करोड़ की परियोजना थी अब बढ़कर 1750 करोड़ की बन चुकी है। इस पूर्ण प्रोजेक्ट में जबलपुर से नैनपुर और गोंदियासे समनापुर तक दोनों छोर से बड़ी लाइन की सवारी गाड़ियाँ चल रही है। केवल नैनपुर – समनापुर सेक्शन जो की 52km का है, वन विभाग की अनुमति के चलते विलंबित हो रहा है उसमें नैनपुर – लामटा 36km का CRS 13 दिसम्बर को होने जा रहा है और बचे 16km लामटा – समनापुर का काम मार्च 2020 तक पूरा होकर यह पूर्ण प्रोजेक्ट जबलपुर – गोंदिया बड़ी लाइन, रेलवे नेटवर्क पर यात्रिओंको सेवा देने के लिए तैयार हो जाएगा।
अकोला – आकोट – खंडवा – सनावद – इंदौर


इस प्रोजेक्ट में अकोला – आकोट 45km का मार्ग बड़ी लाइन में बदल चुका है, छिटपुट काम बाकी है। उसके बाद जल्दही CRS निरीक्षण करवाकर मार्च 2020 तक आकोट अकोला गाड़ी शुरू हो सकती है। दूसरा खांडवा स्टेशन का यार्ड रिमॉडलिंग का टेण्डर निकल चुका है, इसका काम भी जल्दही शुरू हो जाएगा। इस दरम्यान खण्डवा – इटारसी मुख्य रेल मार्ग में मथेला स्टेशन से निमाड़खेड़ी, NTPC खरगोन का सेल्दा पॉवर प्रोजेक्ट के लिए 54km की बड़ी लाइन पूर्ण हो चुकी है, कुछ मालगाड़ियाँ भी इस मार्ग पर ट्रायल बेसिस पर चलाई गई है। जहाँ तक अंदाजा है खण्डवा – सनावद मार्ग पर भी मार्च 2020 यही डेडलाइन रहेगी, और इस मार्ग पर भी बड़ी लाइनकी गाड़ियाँ हमे जल्द ही देखने मिल सकती है। आगे ओम्कारेश्वर रोड़ स्टेशन बड़ा और भव्य बनने जा रहा है, जिसपर फिलहाल मीटर गेज की 3 जोड़ी, छोटी गाड़ी डॉ आंबेडकर नगर तक चलायी जा रही है।
Map courtesy: indiarailinfo