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पश्चिम रेलवे की दीपावली, छट पूजा विशेष गाड़ियाँ

27 सितम्बर 2024, शुक्रवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, दशमी, विक्रम संवत 2081

09013/14 उधना छपरा उधना साप्ताहिक TOD विशेष (9-9 फेरे) वाया सुरत, वडोदरा, रतलाम, उज्जैन, सन्त हिरदाराम नगर, बीना, कटनी मुरवाड़ा, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिंवकी, मिर्जापुर, वाराणसी, औड़िहार, बलिया

09027/28 बान्द्रा टर्मिनस मालदा टाउन बान्द्रा साप्ताहिक TOD विशेष (9-9 फेरे) वाया सुरत, वडोदरा, रतलाम, नागदा, कोटा, सवाई माधोपुर, बयाना, आगरा फोर्ट, टूण्डला, कानपुर, ऐशबाग, बाराबंकी, गोण्डा, गोरखपुर, पनियाहवा, नरकटियागंज, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बरौनी, कियूल, जमालपुर

09031/32 बान्द्रा टर्मिनस गोरखपुर / गोरखपुर डहाणू रोड साप्ताहिक TOD विशेष (9-9 फेरे) वाया सुरत, वडोदरा, रतलाम, उज्जैन, सन्त हिरदाराम नगर, बीना, झाँसी, कानपुर, लखनऊ, गोण्डा, बस्ती

09457/57 अहमदाबाद दानापुर अहमदाबाद साप्ताहिक TOD विशेष (8-8 फेरे) वाया आणंद, छायापुरी, रतलाम, उज्जैन, मक्सी, रुठियाई, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, इटावा, गोविन्दपुरी, फतेहपुर, प्रयागराज जंक्शन, मिर्जापुर, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर, आरा

09421/22 साबरमती सीतामढ़ी साबरमती साप्ताहिक TOD विशेष (9-9 फेरे) वाया मेहसाणा, पालनपुर, अबु रोड, मारवाड़ जंक्शन, अजमेर, जयपुर, बांदीकुई, भरतपुर, आगरा फोर्ट, टूण्डला, कानपुर, लखनऊ, बाराबंकी, गोण्डा, गोरखपुर, पनियाहवा, नरकटियागंज, रक्सौल

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पातालपानी – कालाकुण्ड; पश्चिम रेलवे की हैरिटेज ट्रेन : अमित जलधारी

26 सितम्बर 2024, गुरुवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2081

हमारे प्रिय मित्र एवं सांध्य दैनिक अग्निबाण के संवाददाता श्री अमित जलधारी जी का यह सुन्दर एवं समर्पक लेख भारतीय रेल के मासिक पत्रिका (सितम्बर 2024) में छपा है। आप भी इस लेख का आनन्द लीजिए,

भारतीय रेल मासिक पत्रिका के सौजन्य से..

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पुश-पुल राजधानी अब भुसावल भी रुकेगी!

26 सितम्बर 2024, गुरुवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2081

आज रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव का रावेर सांसद रक्षा खडसे को भेजा गया पत्र वायरल हुवा है।

पत्र में सांसद की, भुसावल एवं क्षेत्र के अन्य दो शहरों में गाड़ियोंके स्टोपेजेस को अनुमति प्रदान करने की बात बधाई के साथ लिखी गई है।

22221/22 छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – हजरत निजामुद्दीन के बीच प्रतिदिन परिचालित मध्य रेल की बहुचर्चित पुश-पुल राजधानी को भुसावल स्टोपेजेस प्रदान किया गया है। इस स्टोपेज को लेकर भुसावल वासी बहुत आशावादी थे। जब से इस गाड़ी का शुभारंभ हुवा तब से इस गाड़ी को भुसावल स्टोपेज की मांग उठी थी। गौरतलब यह है, इस गाड़ी का परिचालनिक दल अर्थात लोको पायलट एवं ट्रेन मैनेजर भी भुसावल से जलगाँव जाकर गाड़ी की सेवा में सादर होता था। यह इस स्टोपेज के बाद भुसावल से ही होने लग जाएगा। ज्ञात रहे, भुसावल यह मध्य रेल का महत्वपूर्ण मण्डल मुख्यालय है और एशिया का द्वितीय क्रम का सबसे बड़ा रेल यार्ड है।

इस के साथ ही 12113/14 पुणे नागपुर पुणे गरीबरथ त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस को नांदुरा एवं 22117/18 पुणे अमरावती पुणे साप्ताहिक एक्सप्रेस को मलकापुर स्टोपेज को अनुमति दी गई है।

उक्त सन्दर्भ में रेल विभाग की कार्रवाई यथावकाश पूर्ण होकर, यह सभी स्टोपेजेस की सूचना यात्रिओंके लिए भुसावल मण्डल मुख्यालय जारी करेगा।

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मध्य रेल ने ग्यारह जोड़ी विशेष गाड़ियोंके परिचालन अवधी में विस्तार किया; अब दिसम्बर अंत तक चलेगी।

24 सितम्बर 2024, मंगलवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2081

मध्य रेल मुख्यालय ने अपनी ग्यारह जोड़ी विशेष गाड़ियोंकी सेवा अवधी में विस्तार किया है। यह सभी गाड़ियाँ फिलहाल चल रही है और दिसम्बर 2024 के अंत तक अपनी उसी समयसारणी के अनुसार चलती रहेगी।

कृपया निम्नलिखित परिपत्रक देखें,

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प्रभु, आखिर कब बरसोगे?

23 सितम्बर 2024, सोमवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2081

प्रथमदृष्टया भिन्न भिन्न प्रकार के ऐसे काम अपने देश मे हो रहे, जिन्हें आतंकवादी गतिविधियाँ करार दिया जा सकता है। कुछ भी गैर कृत्य ख़बरों में आया फौरन उसे ‘जिहाद’ का नाम जोड़कर देश के जनमत को समझा दिया जाता है, ‘हाँ, वही है जो आप के जहन में चल रहा है।’

लव, थूक, रेल कोई भी शब्द लीजिए आगे जिहाद जोड़ लीजिए और मान लीजिए की वही है और उन्हें प्रशासन पकड़ लेगा। मन बड़ा असहज होता है, आखिर चल क्या रहा है?

आए दिन रेल ट्रैक पर कॉन्क्रीट ब्लॉक, लोहे के टुकड़े, पत्थर मिल रहे है। गैस सिलेंडर मिला और हद हो गई, की बारूद भी मिला। हम चाहते तो, मीडिया में आई इन वारदातों की तस्वीरें यहाँ जोड़ सकते थे, लेकिन समझते है की इससे आम जनता में उद्विग्नता ही बढ़ेगी। प्रशासन यह खोजबीन में लगी है, इन वारदातों के पीछे कौन है और सोशल मीडिया, इसे रेल जिहाद का नाम देकर अलग समझाईशें सादर करते जा रहा है।

रेल हमारे भारतीयोंके जीवन का अभिन्न अंग है, हमारी यातायात का प्रमुख हिस्सा है और इस तरह इसके परिचालन में कोई बारबार बाधा, विघ्न ला रहा है तो यह बहुत भयावह, डरावनी स्थिति है। आज देशभर में, हर रोज, हजारों रेल गाड़ियोंके जरिए लाखों, करोड़ों लोग यात्रा कर रहे है। करोड़ों के मूल्य का मालवाहन किया जा रहा है। इस तरह रेल यातायात में शंका उत्पन्न की जाएगी तो यह बड़ी गम्भीर स्थिति है।

एक सर्वसाधारण बात है, गुनहगारी की जड़ अवैधता से उत्पन्न होती है। जमीनोंके अवैध कब्ज़े, अतिक्रमण, अवैध व्यवसाय यहॉं से असंवैधानिक कार्योंकी शुरवात होती है।

आप देशभर में कहीं भी देख लीजिए, सभी सार्वजनिक स्थानोंपर आपको हर तरह की अवैधता दिखाई देंगी। इसमे अतिक्रमण, अवैध व्यवसाय, अवैध विक्रेता, भिखारी ई. शामिल है। रेलवे परिसर इन सार्वजनिक क्षेत्र में अवैधता के लिए अग्रस्थान पर है।

रेल पटरी के आजूबाजू की जगह झुग्गी-झोपड़ी से पटी पड़ी है।

रेलवे स्टेशनों, रेल परिसर में आपको हर तरह के अतिक्रमण, अवैध कार्यकलाप रोजाना होते नजर आएंगे।

रेलवे स्टेशनों के बाहर वैध सम्पत्ति की कीमत लाखों करोड़ो में है मगर वही अतिक्रमित ठेले वाला महज 100, 200 रुपए रोज देकर बड़ी शान से अपने व्यवसाय, व्यापार चला रहा है।

रेलवे स्टेशन पर अपनी व्यवसायिक इकाई लगानी है, तो कई पापड़ बेलने पड़ेंगे, प्रशासन से लाइसेंस लेना, अन्न प्रशासन से सामग्री वैध करवाना इत्यादि और वहीं अवैध विक्रेता चलती ट्रेनोमे, बिना किसी लाइसेंस, वैध प्रमाणपत्र के चाय, नाश्ता, खाना यात्रिओंको खिलाकर धड़ल्ले से अपना पैसा बना रहे है। यहॉं न रेल प्रशासन कोई कार्रवाई कर रहा है न कोई स्थानिक प्रशासन इन्हें हटक रहा है।

जब ऐसी स्थितियाँ देखते है, तब सोचने में मजबूर हो जाते है, आखिर प्रशासन कहाँ है? रेल गाड़ियोंमे धड़ल्ले से अवैध विक्रेता अपना व्यवसाय कर हजारों रुपए कमा रहे है, यात्रिओंके आरोग्य से खिलवाड़ कर रहे है। कोई यात्री अवैध विक्रेता से चाय, नाश्ता, खाना कहा कर बीमार हुवा तो क्या रेल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से हाथ झटक लेगा?

शहरोंमें पटरियों के निकट बनी अवैध बस्तियों से यह सारे अवैध कामकाज होते है। रेल प्रशासन के पास उनकी खुद की प्रोटेक्शन फोर्स है, बड़ा दल-बल है और प्रशासन यदि कड़ाई अपनाए तो सारे रेल परिक्षेत्र में यत्किंचित भी अवैध कामकाज नही किए जा सकते। स्थानीय प्रशासन को भी सार्वजनिक स्थानों के अतिक्रमण को कड़ाई से निपटने की आवश्यकता है। जिम्मेदारीयाँ सुनिश्चित की जानी चाहिए और निर्वाहन न हो तो कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

देश की जनता अब समझने और मान लेने के मूड में नही रह पाएगी। लोग अब कड़ी कार्रवाई का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे है।