आन्दोलन की तीव्रता को देखते हुए रेल प्रशासन ने सुरक्षात्मक रुख अपनाया है। बीते 2 दिनोंमें रेलवे संसाधनोंपर आंदोलनकारियों कहर टूट पड़ा है, मगर यात्रिओंकी भी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूर्व मध्य रेल में दिन की गाड़ियोंका परिचालन बन्द किया गया है। देश के अनेक भागोंमें तकरीबन 350 गाड़ियाँ नही चलाई गई। पूर्व मध्य रेलवे में रद्द गाड़ियोंका परिपत्रक जारी किया है।
पुणे दानापुर, लोकमान्य तिलक टर्मिनस से जयनगर, पाटलिपुत्र और पटना की गाड़ियाँ रद्द की गई
जिन संक्रमण काल मे रेल कर्मियोंने अपने जान हथेली पर रख देशवासियों के राशन की आपूर्ति की, उन्हें अपने घरोंतक पहुंचाया, आज उन सारी बातोंको भुलाकर देश के कई भागोंमें आंदोलनकारियोंने रेल गाड़ियाँ फूँकी है, रेलवे स्टेशनोंपर लूटपाट मचाई है। इतना ही नही रेल यात्रिओंके जान माल की तक इन आन्दोलनकारियोंने परवाह नही की। कल और आज रेल गाड़ियोंके जलते डिब्बे, आँसू बहाते, अपने जान को बचाने इधर उधर भागते यात्रिओंको देखकर मन व्यथित हो जाता है। रेल आपकी अपनी सम्पत्ति है, कोई भला कैसे अपने ही घरोंमें आग लगा सकता है?
रेल विभाग के पास ऐसे ही संसाधनों की कमी है। युद्धस्तर पर कोचों का, लोको और मेमू गाड़ियोंका निर्माण किया जा रहा है। बिहार के दानापुर मण्डल मे डीआरएम प्रभात कुमार के कथनानुसार, कम से कम 50 कोच, सात इंजन क्षतिग्रस्त हो गए। जले हुए डिब्बों के लिए 90 करोड़ रुपये, लोकोमोटिव इंजन के लिए 61 करोड़ रुपये, वाणिज्यिक संसाधन के लिए 7 करोड़ रुपये और सिग्नलिंग प्रणाली में 5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि पार्सल कार्यालय के पास 50 से अधिक दोपहिया वाहन जलाए गए। ठीक इसी तरह लखीसराय और अन्य जगहोंपर भी आगजनी की घटनाएं हुई है। सिकंदराबाद स्टेशन पर एक गाड़ी की तोड़फोड़ का वीडियो कई न्यूजचैनलों पर दिखाया गया है। ऐसे दृश्य और वीडियो है की आम आदमी बेहद विचलित हो सकता है।
Kreately.in की सौजन्यता से
इन्ही आंदोलन के चलते आज सैकड़ों गाड़ियाँ रद्द, आँशिक रद्द या मार्ग बदल कर चलानी पड़ रही है। हमने कल भी यात्रिओंसे निवेदन किया था और आने वाले कुछ दिनोंतक कह रहे है, अपनी रेल यात्रा का नियोजन रेल हेल्पलाइन 139 की सहायता लेकर करें। गाड़ियाँ रद्द किए जाने के कारण नियमित गाड़ियोंका परिचालन अस्ताव्यस्त होता है और उनका रैक शेयरिंग भी गड़बड़ा जाता है।
यात्रीगण से निवेदन है, बिहार, तेलंगाना में उक्त विरोध का रेल यातायात पर गहरा असर पड़ा है। कृपया रेलवे हेल्पलाइन 139 पर पूछताछ कर अपनी रेल यात्रा का नियोजन करें।
द म रेल SCR के नान्देड़ मण्डल ने जालना – साई नगर शिर्डी और जालना – नागरसोल के बीच विशेष गाड़ियाँ पुनर्स्थापित करने का निर्णय लिया है।
07491/92 जालना साई नगर शिर्डी जालना यह विशेष अनारक्षित गाड़ी दिनांक 20 जून से दोनोंही दिशासे प्रत्येक सोमवार, मंगलवार एवं गुरुवार को चलेगी।
07493 जालना – नागरसोल अनारक्षित विशेष दिनांक 22 जून से प्रत्येक बुधवार एवं शुक्रवार को चलेगी तो वापसी में 07494 नागरसोल – जालना अनारक्षित विशेष दिनांक 22 जून से प्रत्येक बुधवार, शुक्रवार एवं रविवार को चलेगी।
07497 जालना – नागरसोल साप्ताहिक अनारक्षित विशेष दिनांक 26 जून से केवल रविवार को ही चलेगी। समयसारणी के लिए निम्नलिखित परिपत्रक देखें।
07491/92 जालना साई नगर शिर्डी जालना विशेष अनारक्षित गाड़ी दिनांक 20 जून से दोनोंही दिशासे प्रत्येक सोमवार, मंगलवार एवं गुरुवार को चलेगी।
07493 जालना – नागरसोल अनारक्षित विशेष दिनांक 22 जून से प्रत्येक बुधवार एवं शुक्रवार को चलेगी तो वापसी में 07494 नागरसोल – जालना अनारक्षित विशेष दिनांक 22 जून से प्रत्येक बुधवार, शुक्रवार एवं रविवार को चलेगी।
07497 जालना – नागरसोल साप्ताहिक अनारक्षित विशेष दिनांक 26 जून से केवल रविवार को ही चलेगी।
मित्रों, जिस तरह संचार क्रांति हुई है, लगभग हर किसी के पास सोशल मीडिया अकाउंट है। दिन के चौबीसों घंटे मोबाइल पर बिताने वाले लोग भी आप को बड़े आसानी से मिल जाएंगे। अब होता यूँ है, साधन तो दाम चुकाकर मिल जाएगा, खरीद लोगे मगर प्रतिभा कौन बाज़ारोंमें मिलेगी? साधन का सदुपयोग उसके साथ नही मिलता है और ना ही उसका कोई ट्रेनिंग सेंटर है। हम लोग कहीं से कोई मेसेज प्राप्त करते है और दो बटन दबाकर उसे फटाफट अपने मित्रोंको भेजने का “अतुलनीय कौशल” सामाजिक जीवन मे दिखाते है।
इससे होता क्या है? आपने यह बात तो सुनी ही होगी, एक झूठ सौ बार कानोंपर पड़े तो “सच” लगने लगता है। अच्छे अच्छे समझदार असमंजस में पड़ जाते है, की कहीं हम तो गलत नही? आम आदमी का मीडिया पर बहुत विश्वास होता है और क्यों न हो? अब तक अर्थात बीते 10, 15 वर्षोँपहले तक प्रिंट मीडिया में अखबार, साप्ताहिक, मासिक मैगजीन अपना दायित्व बख़ूबी निभा रहे थे। किसी भी खबर को जाँच, परख कर ही छापा जाता था। मगर जब से “ब्रेकिंग न्यूज” का सैटेलाइट टीवी का दौर आया, दिन के चौबीसों घण्टे कुछ न कुछ “ब्रेक” आता ही रहता है। कितना और किस हद तक ब्रेकिंग? कोई सीमा ही नही। उसके आगे की आवृत्ती यह सोशल मीडिया है।
‘सोशल मीडिया’ वह आग है जो पानी मे भी लगा दो तो पेट्रोल का इफेक्ट निर्माण कर सकती है। चेन रिएक्शन की तरह फैलती है, बस जनहित से जुड़ी बात होना चाहिए। आप निम्नलिखित खबर देखिए। बीते आठ दिनोंसे भारतीय रेल, वरिष्ठ नागरिक रियायत पहली जुलाई से शुरू कर देगी यह मैसेज आग की तरह फैलाया जा रहा है। खोखली, झूटी प्रसिद्धि पाने के लिए यूट्यूबर या अन्य सोशल मीडिया के माध्यमोंका उपयोग करनेवाले इसे जमकर उछाल रहे थे। इस तरह के मैसेज हर महीने, दो महीनोंमें उछाले जाते है, अपनी TRP बढाने के लिए।
एक फर्जी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है की भारतीय रेलवे 1 जुलाई, 2022 से वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायतें फिर से शुरू करेगा।
▶️ @RailMinIndia अर्थात भारतीय रेल मंत्रालय द्वारा ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है
▶️ भारतीय रेलवे वर्तमान में केवल दिव्यांगजनों, रोगियों और छात्रों को ही रियायतें प्रदान कर रहा है।
मित्रों, जो काम सरकारी यंत्रणाओं को करना पड़ता है, या किसी को सामने आकर कहना पड़ता है की यह “फेक न्यूज” है तो का हमारे मीडिया व्यूव्हर, सोशल मीडिया यूजर इतने अज्ञानी तो नही है की उनके हाथ मे इतनी बड़ी ताकत है, उसे जानते न होंगे। वह खुद बड़ी आसानी से फैक्ट चेक कर सकते है। खबर सही है या गलत यह जांच आसानी से कर सकते है, फिर भी बिना जाने, समझे परखे उसे “फॉरवर्ड” करने में अपनी होशियारी क्यों खपाते है?
प्रत्येक सोशल मीडिया यूजर को अपना महत्व, अपनी शक्ति का ज्ञान होना जरूरी है। आपके हाथ का फोन कोई मामूली डिवाइस नही है। वह एक ऐसी अमोघ शक्ति है जिससे आप ऐसी कई फालतू मूर्ख बनाने वाली ख़बरोंको को रोक कर उसे जिसने आपको भेजा है उसे वहीं के वहीं लौटा सकते है। कहिए, किसे बनाये जा रहे हो, यह कोई अधिकृत खबर नही है।
हमेशा सिर्फ रेलवे ही नही, कोई भी खबर की असलियत समझे बिना उसे अन्य लोगोंको मत भेजिए। आज तो कुछ लोग आपको ख़बरोंका स्रोत समझ लेंगे मगर जब उन्हें पता चलेगा की आप बड़ी आसानी से मूर्ख बन इस तरह की ख़बरोंके झांसे में आ जाते है तो आगे आपकी पोस्ट सीधे “बिन” में जाती जाएगी और आपका सोशल मीडिया स्टेटस भी बेमानी बनकर रह जायेगा। अतः जानकार बने, अधिकृत वेबसाइट, घोषणाओंपर ही विश्वास करें।