Uncategorised

अरे! यह क्या? कैंसल्ड?

पश्चिम रेलवे रतलाम मण्डल में आखिर यह चल क्या रहा है? डॉ आंबेडकर नगर महू – सनावद के गेज रूपांतरण में सर्वे सर्वे वाला खेल अचानक निविदाएं बुलाना, निविदाएं रदद् करना कैसा हो गया?

अभी अभी तो इस क्षेत्र में लोगोंके चेहरोंपर मुस्कान लौटी थी की नर्मदाजी पर रेल पुलिया का टेण्डर निकला है, और आज क्या देखते है की वह टेण्डर ‘कैंसल्ड’ दिखा रहा है?

इस क्षेत्र के लोग, रेल अधिकारियोंके इन बाजीगरीयोंसे बिल्कुल ही उकता गए है और जिस तरह इंदौर के ताई, भूतपूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन बोल गईं थी की उनकी नजरोंके सामने शायद ही यह गेज कन्वर्शन पूरा होगा, उसी तरह आम जनता भी सोचने लग गयी है। कहाँ एक वह हुकुम देने वाले होळकर और 3-4 वर्षोंमें गाड़ी चलवा देने वाले ब्रिटिश और कहाँ यह आज के रेल इंजीनियर और उनके राजनीति वाले आका?

अरे भाई, आपसे नही हो पा रहा तो पुरानी गेज पर छोटी गाड़ियाँ ही चलवा दीजिये और नही तो यह घोषित कर दीजिए की न आपसे सर्वे हो रहे न ही पुल और सुरंगे। या यह कह दीजिये की आप नही चाहते की इस क्षेत्र से बड़ी लाइन हो, सीधी गाड़ियाँ चले और क्षेत्र का विकास हो।

Uncategorised

दिल्ली जयपुर दिल्ली सैनिक एक्सप्रेस 12 मई से प्रतिदिन

14021/22 दिल्ली सराय रोहिल्ला जयपुर के बीच त्रिसाप्ताहिक रूप में चलनेवाली सैनिक एक्सप्रेस 12 मई से प्रतिदिन चलना शुरू कर देगी। यह गाड़ी टर्मिनल बदलाव के साथ, दिल्ली सराय रोहिल्ला की जगह दिल्ली जंक्शन से अपनी सेवा शुरू करेगी। यात्रीगण कृपया ध्यान दीजिए, समयसारणी में भी बदलाव किया गया है। खुशखबरी और भी है, 20409/10 दिल्ली बठिण्डा दिल्ली इस नई प्रतिदिन सेवा की। उसकी समयसारणी आने को हे, जिसे लेकर हम जल्द ही आएंगे।

Uncategorised

मध्य रेल के मुम्बई मण्डल में छह स्टेशनोंका प्लेटफार्म टिकट दर आजसे 23 मई तक पांच गुना बढाया गया

मध्य रेलवे के जनसम्पर्क अधिकारी, ट्वीट किए गए परिपत्रक में कहते है, मध्य रेल के मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, दादर, ठाणे, पनवेल,कल्याण एवं लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशनोंके प्लेटफार्म टिकटोंके दर ₹10/- से बढ़ाकर ₹50/- कर दिए गए है। यह अस्थायी बढोतरी आज दिनांक 09 से 23 मई याने पन्द्रह दिनोंके लिए की गई है।

दरअसल परिपत्रक दो पृष्ठ का और तमाम कलम और क़ानूनोवाला हे, मगर मुख्य बात हम यहांपर आपके लिए दे रहे है,

मध्य रेल प्रशासन का यह मानना है, प्लेटफॉर्म्स टिकटोंकी बिक्री बढ़ी है, रेल प्लेटफॉर्म्स पर यात्रिओंको छोड़ने अन्य लोग जिन्हें रेल यात्रा नही करनी है, बहुतायत में आ रहे है और स्टेशनोंपर भीड़ बढ़ा रहे है। दूसरी बात इससे जोड़ी गयी वह है, गाड़ी की चेन पुलिंग, याने यात्री को कोई असुविधा हो तो वह अपनी यात्रा के दौरान अलार्म चेन खींच कर गाड़ी को रोक सकता है। यह देखा गया है, की इस अलार्म चेन को खींचकर गाड़ी रोके जाने की सुरक्षात्मक सुविधा को यात्री या असामाजिक तत्व दुरुपयोग कर रहे है। अतः स्टेशनपर भीड़ कम हो, बिनावजह लोग स्टेशनपर न आये, आने के लिए हतोत्साहित हो इस लिए यह प्लेटफार्म टिकटोंके दर बढाने का रेल प्रशासन का निर्णय आया है।

प्लेटफार्म टिकट की बिक्री बढ़ने की तस्वीर का एक अलग पहलू हम आपके सामने लाते है। जितने भी स्टेशनोंके प्लेटफार्म टिकट दर बढाये गए है, यह मध्य रेल मुम्बई क्षेत्र के प्रमुख स्टेशन्स है जहाँसे भारत के उत्तरी, पूर्वी भागोंमें हर रोज बहुत सारी गाड़ियाँ चलती है। फ़िलहाल द्वितीय श्रेणी टिकट बन्द है, आरक्षित टिकटें मिल नही रही तो बड़ी आसानी से समझा जा सकता है, की जिस यात्री को रेल यात्रा करनी है और उसके पास टिकट नही है तो वह किस तरह स्टेशन के दायरे में प्रवेश कर रहा है? और तय है, की मई आखिर तक यह भीड़ छँटते चली जानी है, क्योंकि इसके बाद रिवर्स, वापसी यात्राएँ चल पड़ेंगी।

रेल प्रशासन के इस निर्णय में कोई संदेह नही, की अनावश्यक यात्री भीड़ प्लेटफार्म से कम हो जाएगी, असलियत में जिन्हें रेल यात्रा न करनी हो वह प्लेटफॉर्म्स पर नही आएंगे मगर उनका क्या जो बिनाटिकट रेल यात्रा करने के लिए मजबूर है? क्या रेल प्रशासन सिर्फ प्लेटफॉर्म्स की भीड़ देख रहा है और उन्हीको काबू करने का प्रयत्न कर रहा है? क्या उन्हें उन गाड़ियोंके आरक्षित द्वितीय श्रेणी और स्लीपर कोचों में क्षमता से दुगुने भरे यात्री बिल्कुल ही दिखाई नही देते? मान्यवर, प्लेटफार्म टिकटोंकी कीमतें अतिरिक्त रूपमे बढाने के साथ साथ कुछ अतिरिक्त गाड़ियाँ चलवा देने का विचार करते तो यात्री आपको दिल से दुवा देते।

Uncategorised

WCR प म रेल के पिपरिया के पास मालगाड़ी बेपटरी; गाड़ियाँ बेसमय हो रही है।

यात्रीगण कृपया प म रेल का निम्नलिखित परिपत्रक देखे, रेलवे हेल्पलाइन से सलाह ले और फिर अपनी रेल यात्रा का नियोजन करें।

Uncategorised

कब शुरु करेंगे बची रेल गाड़ियाँ?

संक्रमण काल मे भारतीय रेल ने तमाम गाड़ियाँ बन्द कर दी थी, जिन्हें एक-एक कर चलवा दिया। भलेही स्वरूप बदला हो, किराया बढ़ गया हो मगर गाड़ियाँ चल पड़ी।

मध्य रेल के भुसावल मण्डल में स्थानीय यात्रिओंके प्रति बड़ी अनास्था है। वजह है, मध्य रेलवे का मुख्य मार्ग होना और बहुतायत में लम्बी दूरी की गाड़ियोंका चलना। मगर क्या यह कारण उचित हो सकता है, जो स्थानीय सवारी गाड़ियाँ बन्द की गई है, फिरसे न चलवाने की? आज भुसावल – देवलाली भुसावल शटल, भुसावल वर्धा भुसावल सवारी, भुसावल नागपुर भुसावल सवारी, भुसावल पुणे के बीच चलनेवाली हुतात्मा एक्सप्रेस, भुसावल नागपुर वाया खण्डवा दादाधाम एक्सप्रेस, शालीमार लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस और अन्य कई साप्ताहिक गाड़ियाँ अब भी बन्द स्थिति में है।

संक्रमण काबू में किये जाने के बाद जीवन चल पड़ा है, रोजगार पर लोग निकल पड़े है। रोजमर्रा की दौडधूप बढ़ गयी है, ऐसी अवस्था मे स्थानीय लोगोंको उचित गाड़ियाँ उपलब्ध न हो तो? आम रेल यात्री जो रोज रेल यात्रा करता है, कभी नही चाहता की गैरकानूनी तरीकेसे उसे आरक्षित गाड़ियोंमे यात्रा करनी पड़े या छुपते छुपाते अपनी जान जोखिम में डालकर रोजगार पर पहुंचना पड़े। क्या स्थानीय मण्डल रेल अधिकारियोंको, राजनेताओंको यह दिखाई नही देता या वह अन्जान बने रहना चाहते है?

हर रोज तकरीबन एक भी दिन ऐसा नही जाता की ट्विटर पर भुसावल मण्डल व्यवस्थापक ने आरक्षित यात्रिओंकी अनावश्यक, गैरकानूनी भीड़ की शिकायत पर खेद जाहिर न किया हो, माफी न मांगी हो। यह देखना अतिदुखद है, एक उच्च अधिकारी अपने अव्यवस्था के लिए क्षमा तो मांग सकता है मगर यात्रिओंकी उचित व्यवस्था नही कर सकता। यह किस प्रकार की मजबूरी है?

ठीक यही बात स्थानीय राजनेताओंपर भी लागू होती है। रेल अधिकारियों की क्या समस्या है, क्यों वह स्थानीय गाड़ियाँ चलवाने में असमर्थता बरत रहे है, कहाँ गाड़ियाँ अटक रही या अटकाई जा रही है यह जानना, समझना और उसका अपने स्तर पर निराकरण करना क्या यह जिम्मेदारी इन लोगोंकी नही है? यात्री मजबूर है, क्योंकी जून महीने के अंत तक सभी मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे साधारण टिकटें नही मिलेंगी। साधारण टिकटों वाली गाड़ियाँ एक्का दुक्का चलाई जा रही है जो बिल्कुल ही पर्याप्त नही है। एक तरफ गाड़ियोंकी कमी, दूसरी तरफ आरक्षित टिकट उपलब्ध नही यात्री बेचारा क्या करें?

रेल प्रशासन के पास आरक्षित यात्री की शिकायत पहुंचे तो वह जांच और सुरक्षा दल को भिड़ा देते है। ऐसे में यात्री किसी अनहोनी घटना का शिकार होता है, क्या तब प्रशासन, राजनेता अपनी आँखें खोलेंगे?