Uncategorised

मध्य रेल: भुसावल मण्डल में रेलवे का पॉवर ट्रैफिक ब्लॉक

भुसावल भादली के बीच स्टील प्लेट गर्डर आरओबी लाँचिंग के कार्य हेतु, रेलवे का पॉवर-ट्रॅफिक ब्लॉक
लिया जा रहा है। दिनांक 03.03.2021 को भुसावल भादली के बीच किलोमीटर मार्क 441/29-31 पर विशेष पॉवर ब्लॉक और ट्रॅफिक ब्लॉक लिया जा रहा है। इस ब्लॉक के चलते निम्नलिखित गाड़ियोंके परिचालन बाधित रहेंगे।

*दिनांक 03.03.2021 2.30 घंटे अप, डाऊन और थर्ड लाईन इन पर सुबह 10:30 से दोपहर 13:00 बजे तक ब्लॉक रहेगा।

*अप ट्रैक पर गाड़ियोंके समय मे कोई बदलाव नही।

*डाउन ट्रैक –

1) गाडी क्रमांक 02833 डाउन अहमदाबाद हावडा विशेष जलगाव स्टेशन में 2 घंटे रोकी जाएगी।

2) गाडी क्रमांक 09483 अहमदाबाद बरौनी विशेष डाऊन पाळधी स्टेशन में 2 घण्टे रोकी जाएगी।

3) गाडी क्रमांक 02259 डाऊन मुंबई-हावडा विशेष शिरसोली स्टेशन में 50 मिनिट रोकी जाएगी।

4) गाडी क्रमांक 02779 डाऊन वास्को निजामुद्दीन विशेष म्हसावद स्टेशन में 45 मिनिट रोकी जाएगी।

यात्रीगण से निवेदन है, कृपया रेल ट्रैफिक ब्लॉक की तारीख एवं समय का ध्यान रखे और अपनी रेल यात्रा का नियोजन करें।

भुसावल मंडल
दिनांक 01.03.2021
PR-2021/03/01

Uncategorised

‘असुविधा के लिए खेद है ‘

आजकल हमारी भारतीय रेल हाईटेक फीचर्स याने उच्च तंत्रज्ञान का उपयोग कर रही है। तमाम रेल गाड़ियाँ स्पेशल याने विशेष श्रेणी में चलाई जा रही है। कोई भी यात्री गाड़ी का पब्लिक टाइमटेबल छपा नही है। एक परीपत्रक जारी किया जाता है, अखबारोंमें खबर दी जाती है, फलाँ गाड़ी फलाँ क्रमांक से चलेगी। इसकी यह समयसारणी रहेगी। अब यात्री देखें और समझे की उसके बोर्डिंग स्टेशनपर कब आएगी, कहाँ रुकेगी और गन्तव्य पर कब पोहोचेंगी अथवा हाई टेक बन जाए, मोबाइल पर ऍप डाउन लोड करें और अपनी गाड़ी की समयसारणी समझ ले।

रेल प्रशासन कहता है, जो भी कोई बदलाव होता है, हम हमारे डेटा बेस से सभी यात्रिओंके मोबाईल फोन पर sms लघु संदेश भेज उन्हें सूचित और सचेत कर देते है की आपकी गाड़ी में यह बदलाव किया गया है। अब यह गाड़ी आपके स्टेशन से इस समयपर चलेगी। पर क्या रेल प्रशासन यह जानती है, उनके बुकिंग बाबू आरक्षण करते वक्त मोबाइल नम्बर फीड ही नही करते? ऐसी स्थिति में यात्री को कोई मैसेज नही मिलता और न ही रेल प्रशासन इसकी कोई जिम्मेदारी लेगी।

उपरोक्त ट्वीट देखिए, यात्री कह रहा है, उसकी गाड़ी समय से पहले ही छूट गयी और रेल प्रशासन कहता है, हमने यात्रिओंको बल्क लघु संदेश द्वारा सूचित किया था और आगे यह भी कहते है, असुविधा के लिए खेद है। अब कहाँ गड़बड़ झाला है, यह तो वह यात्री और उसका टिकट बुकिंग क्लर्क ही जाने। उसे sms मिला या नही यह भी पता नही। हाँ यदि वह स्मार्ट यात्री होता तो उसका टिकट ऑनलाइन बुकिंगवाला होता जिसमे मोबाईल नम्बर डालना आवश्यक है तब तो उसे sms बराबर भेजा गया होता और उसे पढ़ कर वह अपनी गाड़ी भी छूटने न देता।

लेकिन सबसे बड़ी तकलीफ यह विशेष श्रेणी की गाड़ियोंकी है। इन विशेष श्रेणी याने स्पेशल गाड़ियों का मतलब समझते है आप? यह गाड़ियाँ शॉर्ट नोटिस पर बन्द की जा सकती है, शॉर्ट टर्मिनेट, शॉर्ट ओरिजिनेट, रूट डायवर्शन की जा सकती है। फेरे कम या ज्यादा का बदलाव भी किया जा सकता है। कुल मिलाकर इन गाड़ियोंका परिवहन रेल प्रशासन के हाथोंमें उनकी जरूरत और समय की माँग पर आधारित है। यह सब इस संक्रमण काल को देखते हुए की गई आपातकालीन व्यवस्था है। किसी भी समय जरूरत के अनुसार बदलाव किए जा सकते है और शायद इसीलिए इनकी स्थायी नियमित समयसारणी या गाड़ियोंका नियमितीकरण नही किया जा रहा है।

यात्रीगण यात्रा करने से पूर्व हमेशा अपनी गाड़ी की जानकारी रेलवे की हेल्पलाइन 139 से ले सकते है। रेलवे के पूछताछ केंद्र, NTES ऍप या रेलवे की अधिकृत वेबसाइट की जानकारी पर ही विश्वास करें और उनकी सूचनाओंपर ही अपनी यात्रा का नियोजन करें।

Uncategorised

अहमदनगर औरंगाबाद रेल मार्ग का सर्वे शुरू होगा 01 मार्च से

मध्य रेलवे के अहमदनगर स्टेशन से औरंगाबाद के लिए नई ब्रॉड गेज लाईन बिछाने हेतु सर्वेक्षण किए जाने के आदेश 2018/19 में दिए गए थे। वही सर्वेक्षण का कल से शुरू किया जा रहा है।

सड़क मार्ग से औरंगाबाद अहमदनगर पुणे के बीच भारी संख्या में यात्रिओं और माल का परिवहन होता है। लगभग हर 30 मिनट से औरंगाबाद से पुणे के लिए राज्य परिवहन की वातानुकूलित शिवशाही बस पुणे के लिए निकलती है और इस मार्ग पर ट्रैवल बसों की तो गिनती ही नही। फोर लेन सड़क मार्ग को प्रशासन ने छह लेन में बढाने का प्रस्ताव भी मन्जूर कर दिया है। ऐसी स्थिति में अब रेलवे मार्ग के लिए भी सर्वेक्षण किया जाना इस क्षेत्र के लिए बड़ी अच्छी खबर है।

पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह मार्ग काफी व्यस्त होता है। औरंगाबाद की जगप्रसिद्ध अजन्ता, एलोरा गुफाएँ, घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, शनि शिंगणापुर, भगवान दत्त का स्थान देवगढ़ और शिर्डी के लिए इस मार्ग पर काफी ट्रैफिक रहती है।

सर्वेक्षक, मुम्बई से निकल औरंगाबाद और ज़िले से सड़क मार्ग से जाते हुए गंगापुर, नेवासा, शनि शिंगणापुर, अहमदनगर और आगे अहमदनगर जिले से होते हुए मनमाड़ इस प्रकार सर्वेक्षण करेंगे। इस बीच यह लोग औरंगाबाद, अहमदनगर के जिला मुख्यालयों, मण्डल रेलवे के स्थानिक अधिकारियों, जिला उद्योग केंद्र, अनाज मण्डी समितियाँ, रेलवे स्टेशन अफसर, बस डिपो अधिकारी, ट्रांसपोर्टर आदि लोगोंसे मिलकर रेलवे ट्रैफिक की संभावनाएं जानेंगे।

Uncategorised

चौंक गए? यह वही यात्रिओंसे खचाखच भर भर चलनेवाली सवारी गाड़ियाँ है।

दाहोद नागदा विशेष मेमू

संक्रमण काल के अनलॉक व्यवस्था में भारतीय रेल यात्रिओंकी मांग के चलते कई गाड़ियाँ “विशेष” का टैग लगाकर चला रहा है। कुछ गिनेचुने क्षेत्र छोड़ दिए तो अन्य सभी रेल क्षेत्रोंमें सारी गाड़ियाँ आरक्षण आसन व्यवस्थाओंके के साथ चलाई जा रही है। इन गाड़ियोंमे केवल कन्फर्म हुए आरक्षित टिकटधारी यात्रिओंको ही यात्रा करने की अनुमति है। यदि आपका टिकट प्रतिक्षासूची में रह जाता है, तो यात्रा करने की अनुमति आपको नही मिलेगी। यहाँतक की आपको टिकट के बिना रेलवे प्लेटफार्म पर भी एन्ट्री नही है।

लम्बी दूरी की गाड़ियाँ आरक्षित हो, यह तो ठीक है क्योंकी लम्बा सफर करनेवाले रेल यात्री आरामदायक और सुनिश्चित आसन व्यवस्था के साथ यात्रा करना चाहते है मगर 100-200 किलोमीटर की छोटी सी और “इन्ट्रा डे” रेल यात्रा हो, पास के शहर मे रोजगार हेतु रोज का जानाआना हो तो कैसा आरक्षण? द्वितीय श्रेणी का टिकट हाथोंहाथ लिए और चल पड़े। प्रतिदिन के यात्री तो मासिक पास ही बनवा लेते है। पश्चिम रेलवे ने अपने क्षेत्र में डेमू/मेमू/सवारी गाड़ियाँ चलवा तो दी है, मगर सारी आरक्षित गाड़ियाँ है। अग्रिम आरक्षण करें बगैर आप इनमें यात्रा नही कर सकते। ऐसी स्थितियोंमे आम यात्रिओंको क्या दिक्कत होती है, क्यों यह गाड़ियाँ खाली चल रही है यह समझते है।

सवारी गाड़ियोंमे में सामान्यत: ऐसेे नजारे देखने को नहीं मिलते हैं। उपरोक्त तस्वीर शनिवार को प्लेटफाॅर्म नं. 5 पर खड़ी दाहोद नागदा मेंमू एक्सप्रेस की है। ट्रेन के कोच इस तरह खाली थे। संक्रमण के बढ़ते मामलाें के कारण लोग सफर करने से बच रहे हैं, वहीं, इस कदर खाली गाड़ियोंका, आरक्षित रहना भी एक प्रमुख कारण है। आम तौर पर सवारी गाड़ियाँ से मजदूर वर्ग, छोटे गांव के यात्री ही सफर करते है। इन लोगोंका कोई पूर्व नियोजन नही रहता की वह अग्रिम आरक्षण कर रेल यात्रा करें। जब उन्हें काम या रोजगार पर निकलना पड़ता है, तभी वह अपनी यात्रा करने का साधन भी खोजते है। ऐसी हालातों में रेलवे के नियमोंनुसार आरक्षण चार्ट छप चुका होता है, टिकट बुकिंग बन्द हो जाती है, और गाड़ी खाली ही रह जाती है।

रेल प्रशासन की अग्रिम आरक्षण बुकिंग यात्रा करने से पहले या तो PRS खिड़की या ऑनलाइन ऍप/वेबसाइट से ली जा सकती है। ऍप और वेबसाइट से निम्न वर्ग के यात्रिओंका कोई वास्ता नही होता और जै उनके स्मार्ट फोन में उन्होंने डलवा भी लिया तो ऑनलाइन पेमेन्टकी दिक्कतें होती है। PRS खिड़की पर जाने का वक्त उनके पास नही होता। तब क्या किया जा सकता है?

रेल प्रशासन एक तो इन गाड़ियोंको अनारक्षित व्यवस्थाओंके के साथ चलाना चाहिए और यदि इसी तरीके मतलब आरक्षित ही चलाना चाहती है तो कमसे कम इनके प्रत्येक स्टापेजेस पर गाड़ी छूटने के समय से पहले तक टिकट मिलते रहने की व्यवस्था चलती रहे। यह नही की शुरवाती स्टेशनपर पूरे सफर का ही चार्ट बन गया हो और एक बार चार्ट बन जाए तो बीच वाले किसी भी स्टेशन से टिकट लेना हो तो जबाब मिले,” चार्ट प्रिपेयर्ड, चार्ट निकल चुका है, ट्रेन डिपॉर्टेड”

Uncategorised

लिंक एक्सप्रेस की उपयुक्तता को रेल प्रशासन कैसे नकार सकती है

एक बार फिर लिंक एक्सप्रेस गाड़ियोंका जिन्न बोतल से बाहर आने को है। हाल ही में SCR द म रेल ने हैदराबाद/तिरुपति से वास्को के लिए एक विशेष गाड़ी की घोषणा की। इसमें मुख्य गाड़ी 07419/20 तिरुपति वास्को स्पेशल है और हैदराबाद से 07021/22 क्रमांक से 10 कोच की गाड़ी गुंटकल तक आकर मुख्य तिरुपति वास्को में जुड़ेगी। यह पुरानी लिंक एक्सप्रेस की ही संकल्पना है।

यह लिंक एक्सप्रेस वाली संकल्पना ब्रांच लाइन के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनोंको मुख्य मार्गपर चलने वाली गाड़ियोंसे जोड़ते है। कई बार ऐसा होता है, ब्रांच लाइन के स्टेशनोंकी गाड़ियोंकी मांग तो होती है, मगर एक पूर्ण गाड़ी भरे इतने यात्रिओंकी नही, ऐसी स्थिति में भारतीय रेल के ब्रिटिशकाल से ही लिंक एक्सप्रेस या लिंक कोचेस चलाने की व्यवस्था चल निकली। कमसे कम 50 लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ ब्रांच लाइनके छोटे बड़े स्टेशनोंके यात्रिओंको प्रतिदिन सेवाएं दिए जा रही थी, जिसे रेल प्रशासन ने अपने शून्याधारित टाइमटेबल के नियोजन में समाप्त किए जाने की घोषणा कर दी।

यह लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ कितनी उपयुक्त है, इनकी सूची देखकर आप जान जाएंगे। इन्दौर – उज्जैन – भोपाल जयपुर लिंक, हावडा जोधपुर – बीकानेर लिंक, गौहाटी – बाड़मेर बीकानेर लिंक, दिल्ली सराय रोहिल्ला जोधपुर बीकानेर लिंक, निजामुद्दीन वास्को हुब्बाली लिंक, हावडा पोरबंदर ओखा लिंक, खजुराहो वाराणसी लिंक, झांसी इन्दौर लिंक, मानिकपुर खजुराहो निजामुद्दीन लिंक, राधिकापुर आनन्द विहार लिंक, तूतीकोरिन कोयम्बटूर लिंक, मदुराई चंडीगढ़ लिंक, सियालदाह हल्दीबाड़ी लिंक, सहरसा राजेंद्रनगर लिंक, वाराणसी शक्तिनगर लिंक, पटना सिंगरौली लिंक, दिल्ली सराय रोहिल्ला कोटद्वार मसूरी लिंक, शक्तिनगर टनकपुर त्रिवेणी लिंक, भगत की कोठी रामनगर कार्बेट पार्क लिंक, दिल्ली रामनगर लिंक, डिब्रूगढ़ दरभंगा अवध असम लिंक, टाटा कटिहार लिंक, मन्दसौर मेरठ लिंक, बरवाडीह बरेली लिंक इत्यादि इसके अलावा लिंक कोचेस भी चलते थे जिनकी सूची यहाँपर देना मुमकिन नही। लेकिन एक उदाहरण मुम्बई से चंद्रपुर, बल्हारशहा कोच का है। यह 4-5 कोच मुम्बई नागपुर सेवाग्राम से वर्धा आकर बल्हारशहा सवारी में लगते है। इस तरह चंद्रपुर, बल्हारशहा के यात्री सीधे मुम्बई की यात्रा प्रतिदिन उपलब्ध है। इसके ऐवज में क्या रेल प्रशासन इन्हें प्रतिदिन मुम्बई के लिए एक पूरी गाड़ी चलवा सकती है?

रेल प्रशासन का तर्क यह है, एक तो आधुनिक LHB कोचेस से गाड़ियाँ चलने से तकनीकी कारणोंके चलते उन गाड़ियोंमे लिंक एक्सप्रेस के डिब्बे जोड़ना, निकालना मुमकिन नही है। दूसरा जंक्शन स्टेशन जहाँपर लिंक एक्सप्रेस की जोड़ की जाती है, गाड़ी का समय जाया होता है। लाइनें ब्लॉक होती है और साथमे कर्मचारी वर्ग भी ज्यादा रखना पड़ता है। इनके ऐवज में रेलवे ब्रांच लाइनके स्टेशन से सीधी गाड़ियोंकी पेशकश करती है और ऐसी कई सीधी गाड़ियोंकी घोषणा भी उन्होंने कर दी है।

अब यात्रिओंकी परेशानी भी समझिए, जो लिंक एक्सप्रेस प्रतिदिन चलती थी वहाँपर द्विसाप्ताहिक या त्रिसाप्ताहिक गाड़ियोंपर उन्हें सन्तुष्ट होना पड़ रहा है। गाड़ियोंके फेरे कम किए जाने से प्रतिदिन की सम्पर्कता पर बड़ा असर हुवा है, जिस दिन यात्रा करना हो यदि उस दिन गाड़ी न हो तो कहीं दूसरे स्टेशन जाकर गाड़ी पकड़नी पड़ेगी। कहीं कहीं तो ऐसे पर्याय भी नही दिए गए है। जैसे मन्दसौर मेरठ लिंक के एवज में मंदसौर के यात्री को कोटा तक अलग गाड़ी और कोटा से सीधी ट्रेन में यात्रा करनी होगी।

एक तरफ सारी लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ रेल प्रशासन रद्द करने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर द म रेल के कार्यक्षेत्र में लिंक एक्सप्रेस की घोषणा की जाती है। ऐसी स्थितियोंमे जहाँपर लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ रद्द की गई है, वहांके रेल यात्री आहत हुए है। उन्हें रेल प्रशासन के भेदभावपूर्ण व्यवहार से बड़ी ठेस पहुंची है। वह चाहते है, उनके लिए भी लिंक एक्सप्रेस फिर से चलाई जाए या सक्षम पर्याय उपलब्ध कराया जाए।