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1 डीसेम्बर पासून खालील गाड्यांचे भुसावळ विभागातील स्टापेजेस रद्द झालेले आहेत.

उदय जोशी यांज कडून –

भुसावळ मंडल मधील विशेष गाड़ी च्या थांब्यामध्ये बदल

रेलवे प्रशासन कडून सुरु करण्यात आलेली विशेष गाड़ी यांच्या थांबा मध्ये बदल करण्यात आला आहे . हा बदल भुसावल मंडळांमध्ये लागू राहील . तो बदल पुढीलप्रमाणे,

1) गाडी क्रमांक 01071 डाऊन लोकमान्य टिळक वाराणसी विशेष गाडी ही दिनांक 01.12.2020 पासून लासलगाव, नांदगाव,नेपानगर या स्टेशन वर थांबणार नाही.

2) गाडी क्रमांक 01093/02193 डाऊन मुंबई वाराणसी ही गाडी दिनांक 01.12.2020 पासून नांदगाव,रावेर, नेपानगर स्टेशन वर थांबणार नाही.

3) गाडी क्रमांक 03202 डाऊन लोकमान्य टिळक टर्मिनस पटना विशेष गाडी ही दिनांक 06.12.2020 पासून देवळाली,लासलगाव,नांदगाव,नेपानगर या स्टेशन वर थांबणार नाही.

4) गाडी क्रमांक 01077 डाऊन पुणे जम्मू तावी विशेष गाडी ही दिनांक 01.12.2020 पासून नांदगाव या स्टेशनवर थांबणार नाही.

5) गाडी क्रमांक 01039 डाऊन कोल्हापूर गोंदिया विशेष गाडी ही दिनांक 01.12.2020 पासून जलंब या स्टेशनवर थांबणार नाही.

6) गाडी क्रमांक 01418/02042 अप नागपूर-पुणे विशेष गाडी ही दिनांक 01.12.2020 पासून चाळीसगाव या स्टेशनवर थांबणार नाही.

7) गाडी क्रमांक 02223 डाऊन पुणे अजनी विशेष गाडी ही दिनांक 01.12.2020 पासून नांदुरा या स्टेशनवर थांबणार नाही.

वरील सर्व बदलांची सर्व संबंधितांनी कृपया नोंद घ्यावी.
भुसावल मंडल
दिनांक – 05.12.2020

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अंधेर नगरी चौपट राजा … यात्री गाड़ियाँ सैंकड़ों, समयसारणी कोई नही!

युद्ध के क्षेत्र में हजारों सैनिक एक नियोजनबद्ध तरीके से अपनी चाल चलते है क्योंकि उनका मुखिया, सेनापति रणनीति के तहत उनको आदेश दे कर चलाता रहता है और यह सेनापति ना हो तो सारी सेना का नियोजन ढह जाता है। भारतीय रेल की हालिया स्थिति कुछ इसी तरह की है।

यात्री गाड़ियाँ शुरू होकर सैकड़ोंसे से हजारोंकी संख्या में पहुंच गई लेकिन स्थायी समयसारणी है ही नही। देश के लगभग सारे क्षेत्रोंमें यात्री गाड़ियाँ चल पड़ी है मगर यात्रिओंको यदि अपनी रेल यात्रा का नियोजन करना है तो उसे कागज पेन लेकर रेलवे की वेबसाइट को खंगालना पड़ेगा और इसके बावजूद जब तक वह अपनी यात्रा शुरू न कर दे तब तक भरोसा नही की कब रेल प्रशासन एक परीपत्रक जारी कर उसका समय या परिचालन में बदलाव कर दे।

दुनिया मे चौथी बड़ी भारतीय रेल, इस संक्रमण काल मे एक अभूतपूर्व दौर से गुजर रही है। पहले दो ढाई महीने यात्री गाड़ियाँ बन्द थी फिर धीरे धीरे विशेष गाड़ियोंके नाम पर कुछ गाड़ियोंको शुरू किया गया। फिर त्यौहार विशेष गाड़ियोंके नाम पर और कुछ गाड़ियाँ चलने लगी। यहाँतक तो काफी कुछ ठीक था पुराने गाड़ियोंके नम्बर्स में शुरवाती आंकड़े की जगह ज़ीरो लग कर यह गाड़ियाँ अपने नियोजित शेड्यूल्स में ही चल रही थी। रेल प्रशासन भले ही इनको स्पेशल कह चला रही थी, यात्री उन्हें पुराने नामोंसे समझकर, उसकी पुरानी समयसारणी के हिसाब से अपनी यात्रा का नियोजन कर रहा था।

बीच मे ही रेल प्रशासन का ज़ीरो बेस टाइमिंग्ज लागू करने का प्रयोग शुरू हो गया। गाड़ियोंके क्रमांक अलग होने लग गए, उनके टर्मिनल्स बदलने लगे, समयसारणी में 2 घंटे से लेकर 12-12 घण्टों तक बदलाव आने लगे और यह सारा परिपत्रकोंके सहारे बिना किसी समयसारणी के चलाया जा रहा है। समयसारणी यह यात्री और रेल प्रशासन के बीच सेतु का काम करती है। यात्री को जब भी रेल यात्रा करनी है तो वह समय सारणी देखता है, और अपनी यात्रा का नियोजन करता है। समयसारणी के बगैर गाड़ियोंकी स्थिति ऐसी है कि बिना सेनापति के सैन्य। आम यात्रिओंको समझ ही नही आता कौनसी गाड़ियाँ चल रही है, उनके नम्बर्स क्या है, कब कहाँ पोहोचेंगी, कनेक्टिंग दूसरी गाड़ी कैसे मिलेगी। भला वेबसाइट या मीडियामे आनेवाले परीपत्रक को देख नियोजन करें तो आए दिन रेल प्रशासन की ओर से बदलाव किए जा रहे। हाल ही में मुम्बई वाराणसी मुम्बई महानगरी का उदाहरण लीजिए। 11093/94 का नम्बर 01093/94 चल रहा था, समयसारणी भी पहलेवाली ही थी। अचानक एक परीपत्रक आता है, गाड़ी का समय बदला जा रहा है, फिर परीपत्रक आता है फलाँ तारीख से गाड़ी का नम्बर 02193/94 हो रहा है और गाड़ी सुपरफास्ट श्रेणी में चलेगी। अब आप वेबसाइट देखोगे तो गाडीका समय तो बदल गया लेकिन नम्बर अभी भी 01093/94 ही है। तो 02193/94 नम्बर का क्या हुवा और सुपरफास्ट स्टेटस का क्या?

08401/02 पूरी ओखा पूरी एक्सप्रेस का समय बदल गया, यह गाड़ी अपने नियोजित समयसारणी से अब करीबन 4-6 घण्टे पहले चलेगी। यात्री इस पेशोपेश में है, वह क्या करें? रेल प्रशासन कहती है, उन्होंने सभी आरक्षित यात्रिओंको sms भेज समय बदलाव सूचित किया है। यात्री कहता है, उसे कोई sms नही मिला। ऐसी स्थितियों कई यात्रिओंके साथ आ रही है, उनकी गाड़ियाँ, उनको लिए बगैर छूट रही है। बहोत असमंजस भरी परिस्थितियाँ है।

रेलवे को चाहिए, भले ही सोशल मीडिया में दे या अपने वेबसाइट पर दे लेकिन जितनी गाड़ियाँ चलाई जा रही है उन्हें एक जगह अनुसूचित करें और उसी हिसाब से गाड़ियाँ चलाए। यह जरूरी नही की गाड़ियों की भरमार हो, सारी गाड़ियाँ चलनी चाहिए, मगर जो भी चल रही है उनकी जानकारी सूचीबद्ध होना नितांत आवश्यक है। नही तो “अंधेर नगरी चौपट राजा, टका सेर भाजी टका सेर खाजा” ऐसी स्थिति रेल, उसके कर्मचारी और उसमे यात्रा करनेवाले यात्रिओंकी बनकर रह जाएगी।

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हावडा अहमदाबाद हावडा, सिकन्दराबाद बीकानेर सिकन्दराबाद, हैदराबाद जयपुर हैदराबाद वाया भुसावल समयोंमे किया गया बदलाव

02833/34 हावडा अहमदाबाद हावडा विशेष गाड़ी में समयोंका बदलाव

02789/90 सिकन्दराबाद हिसार सिकन्दराबाद विशेष एक्सप्रेस अब बदले हुए गाड़ी क्रमांक के साथ सुपरफास्ट श्रेणी और समयोंमे भी बदलाव

07020/07019 हैदराबाद जयपुर हैदराबाद वाया मनमाड़, भुसावल विशेष गाड़ी के समयोंमे मामूली बदलाव

02976/75 जयपुर मैसूरु जयपुर विशेष समय बदलाव

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पुणेकर, और पुणे के रेल यात्री कृपया अपनी गाड़ियोंके समय परिवर्तन पर ध्यान दे।

02149/50 पुणे दानापुर पुणे स्पेशल में समय बदला गया है, साथ ही त्यौहार विशेष गाड़ियोंका भी अवधि बढाया गया है।

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गाड़ियोंके समय परिवर्तन पर नया पेंच : दैनिक यात्रिओंमें परेशानी

इस संक्रमण काल मे भारतीय रेल्वेमे सिर्फ दो प्रकार की यात्री गाड़ियाँ चल रही है, एक नियमित विशेष गाड़ियाँ और दूसरी त्यौहार विशेष गाड़ियाँ। जिसमे 1 दिसम्बर से जो भी नियमित विशेष गाड़ियाँ चलाई जा रही है, उनमें से कई गाड़ियोंके परिचालन में समयोंका व्यापक परिवर्तन किया गया है। यह सभी लॉन्ग डिस्टेन्स याने लम्बी दूरी की यात्री गाड़ियाँ है।

पहले हम यह समझ लेते है, की समय परिवर्तन करने के उद्देश्य क्या है। रेल प्रशासन ने अपने बरसों पुराने समयसारणी के ढांचे को अमूलचूल बदलाव के लिए शून्याधारित समयसारणी लाने का फैसला लिया। इसके लिए तमाम यात्री गाड़ियोंका परिचालन बन्द याने ज़ीरो होना बेहद जरूरी था, जो उन्हें इस संक्रमण काल मे संयोगवश मिल गया। गाड़ियाँ अपने पेरेंट ज़ोन के स्टेशनसे निकल गन्तव्यपर पोहोंचने के बाद 10-12 घंटे पड़ी रहती थी और बाद में वापसी यात्रा के लिए निकलती थी। इस 10-12 घंटे के समय को लाय ओवर पीरियड कहते है। जब गाड़ियाँ आधुनिक LHB कोचेस से चलने लगी है, तो सेकेंडरी मेंटेनेंस जो इस लाय ओवर पीरियड में किया जाता था, वह काफी कम समय मे हो जाता है, या यूं कहिए की ज्यादा जरूरत नही है। अतः यह समय मे कटौती कर गाड़ियाँ गन्तव्योंसे जल्द लौटने का प्रयोग इस व्यवस्था में किया गया। गाड़ियोंके समय मे 4,6,8 घंटे तक का बदलाव सम्भव हुवा। गाड़ियोंके लोंको रिवर्सल, लिंक कोच शंटिंग्ज हेतुपूर्वक बन्द किए गए। इससे जंक्शनोंपर गाड़ियोंके रुकने के समय मे काफी कटौती हुई। लाइनोंकी, रेल कर्मचारियों की अनावश्यक ब्लॉकिंग बन्द हुई। गाड़ियोंके परिचालन में स्पीड मेंटेन हुवा। उपरोक्त सभी कारणोंसे यात्री गाड़ियोंके पुराने समयसारणी में बदलाव आना वाज़िब था।

ऐसे व्यापक बदलाव से लम्बी दूरी की रेल यात्रा करनेवाले यात्रिओंका फायदा होता है, मगर शार्ट डिस्टेन्स ट्रैवेलर्स बड़ा परेशान हो जाता है। घंटे, आधे घंटे के बदलाव से ज्यादा फर्क नही पड़ता लेकिन सुबह की गाड़ी शाम में या शाम की गाड़ी सुबह हो जाए या 2 से 4 घंटे आगे पीछे हो जाए तो उनके रोजगार पर, नौकरीपर पोहोंचने के समय मे गड़बड़ हो जाती है। हालाँकि यह भी कुछ ही दिन की परेशानी होती है। चूँकि इनका यात्रा का अवधि बहोत थोड़ा होने से, नए शेड्यूल्स के हिसाब से किसी दूसरी गाड़ी पर यह लोग शिफ्ट हो जाते है और फिर से रोज का सफर चल पड़ता है।

यह एक स्थानीय सांसद का जनरल मैनेजर मध्य रेलवे को भेजा गया पत्र है, जो सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहा है। कोल्हापुर गोंदिया महाराष्ट्र एक्सप्रेस बदलाव के बाद पुराने समय से करीबन 60 से 90 मिनट पहले चलेगी, जिसे अपने पुराने समयसे चलाने की स्थानीय लोंगोंकी माँग को आगे बढ़ाया गया है।

ताजा स्थिति यह है, की किसी भी यात्री को बिना आरक्षण के रेल गाड़ियोंमे यात्रा करने की अनुमति नही है। इसलिए शार्ट डिस्टेन्स ट्रैवलर या डेली ट्रैवल करनेवाले MST धारक रेल गाड़ियोंसे दूरी बनाए रखे है, रेल गाड़ियोंमे यात्रा नही कर रहे है। फिलहाल कोई भी यात्री गाड़ी नियमित या स्थायी नही की गई है, जितनी भी गाड़ियाँ चलाई जा रही है वह विशेष, स्पेशल श्रेणियोंमे चल रही है, और भी बदलाव, परिवर्तन किए जा सकते है। अभी सवारी गाड़ियाँ, मेमू, डेमू गाड़ियाँ भी शुरू नही है। अतः जानकारोंका कहना है, जब तक रेल प्रशासन के द्वारा पुर्णतयः समयसारणी जारी नही हो जाती तब तक इन विशेष गाड़ियोंके बदलावोंपर किसी तरह का समर्थन या प्रतिरोध करना अभी उचित नही।