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कैसे हो रेलवे के पार्सल ऑफिस

इस लॉक डाउन अवधिमें 22 मार्च से रेलवे की सभी यात्री गाड़ियाँ बन्द थी। कुछ याने 30 राजधानी स्पेशल गाड़ियाँ 12 मई तो 200 मेल एक्सप्रेस गाड़ियाँ 1 जून से स्पेशल ट्रेन्स के तौर पर चलाई गई। यज्ञपि यात्री गाड़ियाँ बन्द थी, मगर मालगाड़ियाँ तो चल रही थी और साथ साथ रेलवे ने लोकप्रिय एक्सप्रेस के समयोंपर लगभग सभी मुख्य मार्गोंपर पार्सल स्पेशल गाड़ियाँ चलाना शुरू किया।

इन पार्सल गाड़ियोंको बड़ी उस्फूर्त प्रतिक्रिया मिली, व्यापारियों, उद्यमियों ने इन पार्सल गाड़ियोंसे माल लदवाना, आगे भिजवाना शुरू किया। चूँकि यह टाइम्टेबल्ड पार्सल व्यवस्था थी तो व्यापारियों के बीच खासी लोकप्रिय हुयी। जो महीने, दो महीने की अवधि के लिए चलाई जाने वाली सारी पार्सल गाड़ियाँ अब 31 दिसम्बर तक एक्सटेंड कर दी गयी है। पार्सल गाड़ियोंको मिली जबरदस्त प्रतिक्रियाओंसे प्रेरित होकर रेलवे ने अपनी पहले से घोषित की गई किसान रेल को भी तुरत फुरत में पटरी पर चला दी। यह भी किसान कम पार्सल गाड़ी की लदान दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। हफ्ते में एक दिन चलाई जाने वाली गाड़ी को बढ़ाकर दो दिन किया गया है और तो और ऐसी और भी किसान रेल अलग अलग मार्गोंपर चल पड़ी है या जल्द ही चलने वाली है।

अब हमारे मुख्य विषय पर आते है, पार्सल ऑफिस। जनरल पार्सल बुकिंग्ज के लिए सुबह 10 से शाम 17 तक चलने वाला, किसी भी प्रकार की सम्पर्क ( फोन ) व्यवस्था न रहनेवाला और कस्टमर को कतई फ्रेंडली न लगने वाला रेलवे का पार्सल ऑफिस। जिनको अपने पार्सल बुक कराने होते है, वह पहले तो बेचारे खाली हाथ आ कर इनक़्वायरी कर जाते है (क्योंकि फोन से पूछने की व्यवस्था नही) ‘भाई, फलाँ गांव को, फलाँ सामान भिजवाना है। क्या करना होगा?’ वहाँ के बाबू उनपर दो चार सवाल दागते है, पार्सल या लगेज? कस्टमर बगलें झांकने लगता है, उस बेचारे को कोई बताए, क्या फर्क है? जब इन दो व्यवस्थाओंका मूलभूत फर्क समझ आता है, तो आगे बुकिंग प्रोसीजर, पैकिंग कंडीशन्स इसके नियम भी समझाए जाते है।

इन सब के बीच वहाँपर कोई रहमोदिगर ऐसा मिल जाता है, जो रेलवे की कानूनी अगम्यता तो अपनी देसी सुलभता में तब्दील कर आए ग्राहक को यह आश्वस्त करता है, भैया, आप ले आओ हम सब करा देंगे। दरअसल वहाँपर कुछ लोग कार्टिंग एजेंट के तौर पर पार्सल मूवमेंट्स का काम करते है। जिनके हमाल आए हुए ग्राहक की मदत करने सामने आ जाते है। ग्राहक भी बेचारा छोटा सहारा पाकर संतोष की साँस लेता है की कुछ काम चल पड़ा है। कुछ इस तरह का वातावरण आमतौर पर पार्सल ऑफिसेस में रहता है। वैसे यह तो पार्सल बुक कराने का प्रोसीजर हुवा है। उचित गाड़ी में माल चढ़ जाए इसका एक अलग ही चैप्टर है, खैर हम वहाँ तक नही जाएंगे।

हम चाहते है, रेलवे पार्सल जब 24 घंटे चलता है तो जनरल बुकिंग्ज 10 से 17 क्यों? पूरी राउण्ड द क्लॉक याने 24 घंटे क्यों नही?

पार्सल में जनसम्पर्क होने के लिए व्यवस्था क्यों नही? जिस तरह रेल के किराए के चार्ट्स टिकट बुकिंग् खिड़की के पास लगे होते है, पूरे तो नही लग सकते मगर जाड़े जाड़े में तो लगाए जा सकते है ना?

बीच मे रेलवे पार्सल में बारकोडिंग स्टिकर्स की व्यबस्था थी, जो अब कई जगह कभी शुरू कभी बन्द रहती है, जिसे मुस्तैदी से जारी रखा जाए। उससे पार्सल के हर मुव्हमेंट का जैसे बुक हुवा, गाड़ी में चढ़ा, गन्तव्य पर उतरा, गन्तव्य स्टेशन के आउट वर्ड ऑफिस में डिलेवरी हेतु पोहोंच गया यह सब ऑटोमेटिक sms के जरिए बुकिंग करनेवाले ग्राहक और पार्सल पाने वाले दोनोंको मिलती है।

यदि पार्सल इस तरह से बदल जाए और ग्राहकाभिमुख हो जाए तो रेलवे की पार्सल व्यवस्था को पूरे देश मे कोई तोड़ न मिलेगी।

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भुसावल मंडल रेल प्रबंधक की व्हर्च्युअल प्रेस मिट।

आज भुसावल रेलवे मन्डल प्रबंधक की प्रेस मिट आभासी याने व्हर्च्युअल, व्हिडियो कॉन्फ्रेंस सम्पन्न हुई। हमारे प्रतिनिधि उदय जोशी ने वृतांत पेश किया है। यज्ञपि यह मीटिंग कोविड संक्रमणों के चलते भुसावल विभाग ने की गई व्यवस्थाओंके विषयपर पर थी, मगर मण्डल रेल प्रबंधक विनय गुप्ता इन्होंने पत्रकारोंकी विविध जिज्ञासाओं को उत्तर देकर उनका समाधान किया।

कोविड संक्रमण की तैयारी में भुसावल मण्डल ने 24 डिब्बे कण्टेन्मेंट के हिसाब से एकदम तैयार रखे थे और डिवीजन के तहत जितने भी जिला कार्यक्षेत्र आते है, उनके जिलाधिकारीयोंसे सीधे संपर्क बनाए रखा था। रेलवे अस्पताल में विशेष कोविड कक्ष स्थापित किया गया और मरीजोंकी यथायोग्य देखभाल की जा रही है।

इतर प्रश्नोंमें, खण्डवा – मथेला – सनावद जिसका चौड़ीकरण हो चुका है केवल 7 किलोमीटर का खण्डवा मथेला खण्ड और खण्डवा यार्ड का इंटरलॉकिंग बाकी है। यह सारा कार्य दिसम्बर 2021 तक सम्पन्न हो जाएगा जिसमे खण्डवा प्लेटफॉर्म्स और भुसावल ओंकारेश्वर कनेक्टिविटी भी मिल जाएगी ऐसा आश्वासन प्रबंधक की ओरसे मिला।

भुसावल – दानकुनी DFC ट्रैक का DPR बनाने का काम भी जल्द शुरू होगा, प्रोजेक्ट की अभी अभी घोषणा हुई है। भुसावल डेवलपमेंट में पुराना पादचारी पुल का काम जारी है, इसी वर्ष के आखिर में पूरा किया जा सकता है। एक RUB जो की स्थानीय प्रशासन के नियोजन से पूर्ण होगा, रेल प्रशासन की ओरसे अंडर ब्लॉक्स तैयार है।

एक विशेष जानकारी इन प्रश्नोत्तर में मिली वह ये की मनमाड़ अंकाई मार्ग का दोहरीकरण लगभग तैयार है और साथ ही पानेवाड़ी – अंकाई और समिट – अंकाई का ब्लॉक मार्ग जो की गुड्स ट्रैफिक के लिए इस्तेमाल होगा विचाराधीन है। वैसे तमाम रेल यात्रियोंका एक ही प्रश्न है, आखिर रेल गाड़ियाँ शुरू कब होने जा रही है, उसे भी उत्तर मिला, जैसे ही परिस्थितियाँ नियमित हो जाएगी, गाड़ियोंकी यात्री सेवाएं भी नियमित हो जाएगी।

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छिंदवाड़ा – नागपुर लाइन का विद्युतीकरण

छिंदवाड़ा नागपुर लाइन का चौड़ीकरण पूरा हुवा है, इस पूरी लाइन में भिमालगोंदी – भण्डारकुण्ड खण्ड का सुरक्षा निरीक्षण कल ही सम्पन्न किया गया। यह 18 किलोमीटर का सेक्शन था। जल्द ही इस खंड पर गाड़ियाँ शुरू की जा सकेगी।इससे छिंदवाड़ा वासियोंकी बरसों पुरानी माँग पूरी हो रही है।

जबलपुर गोंदिया मार्ग भी हुवा तैयार
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झूठे वरिष्ठ नागरिक रियायत पर कैसे कसेगी नकैल!

आजकल अखबारोंमें झूठे वरिष्ठ नागरिक रियायती टिकट लेकर यात्रा करते हुए यात्री धाराए गए ऐसी खबरें आ रही है। रोज 8-10 मामले धराए जा रहे है।

दरअसल वरिष्ठ नागरिक का रियायती टिकट बुक करते समय यात्री की उम्र दर्ज करनी होती है, और टिकट बन जाता है। आगे यह निवेदन दिया होता है, यात्री को अपने वरिष्ठता का प्रमाण यात्रा के दौरान साथ रखना है और चेकिंग स्टाफ़ को माँग किए जानेपर चेक कराने हेतु प्रस्तुत करना है। उम्र का प्रमाण केवल मूल स्वरूप में होना आवश्यक है, फोटोकॉपी नही चलेगी। उम्र के प्रमाण हेतु हर वह शासकीय कागजात ग्राह्य है, जिसमे जन्मतारिख वर्ष, माह और दिनांक स्वरूप में हो। इसमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, ड्यूटी कार्ड, वोटर कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट, राशनकार्ड आदि। इन प्रमाणपत्रों में कई ऐसे प्रमाणपत्र है जिनमे जन्मतारिख और आपकी पहचान साथ ही है तो कई में किसी एक ही चीज का प्रमाण है, जैसे राशनकार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट ऐसे में आपका फोटो ID भी मौजूद होना आवश्यक होगा। अतः पहचान और जन्मतारिख दोनों हो ऐसे प्रमाणपत्र साथ रखेंगे तो बेहतर होगा।

अब तकलीफ यह है, कुछ लोग रेल प्रशासन द्वारा दी गयी इस रियायत का गैरकानूनी तरीकेसे उपयोग करते है। रेलवे, वरिष्ठ नागरिकों को न सिर्फ किराए में रियायत देती है, बल्कि उनके लिए अलग से कोटा भी आरक्षित रखती है, और लोअर बर्थ भी देती है। जब यात्रिओंको जनरल कोटे में टिकट नही मिलता तो कुछ असामाजिक तत्व, एजेंट्स वरिष्ठ नागरिकों के आरक्षित कोटे में इन लोगोंके झूठी उम्र डालकर टिकट दिलवा देते है। चूँकि टिकट बुक करते समय किसी प्रमाणपत्र को चिन्हित किए जाने की आवश्यकता न होने से, केवल यात्री की विवेकबुद्धि पर ही टिकट बुक हो जाता है। बादमे यात्रा के दौरान उम्र का प्रमाण न होने से यह लोग धाराए जाते है।

रेल प्रशासन को चाहिए की बुकिंग करते वक्त ही यात्री को अपनी उम्र के प्रमाणपत्र का नम्बर और प्रकार चिन्हित करना आवश्यक हो और वहीं प्रमाणपत्र आरक्षण चार्ट में भी छपे और चेकिंग के दौरान प्रस्तुत किया जाए। अन्यथा दण्ड किए जाने का प्रावधान निश्चित किया जाए। इससे यात्री को बुकिंग करते वक्त ही अहसास हो जाएगा की उसे उसका पहचानपत्र, जिसमे उम्र भी चिन्हित है, यात्रा के दौरान अपने साथ रखना है।

यह बात है, की ऐसा करने के लिए रेल प्रशासन को अपने आरक्षण प्रणाली में कुछ बदलाव करना पड़ेगा। साथ ही उपयुक्त रियायती टिकट लेने वालोंको भी थोड़ी परेशानी होगी, नही तो उनकी टिकट कोई भी फौरन बुक कर देता था। अब जब प्रमाणपत्र साथ रखके बुकिंग करनी होगी तो तकलीफ हो सकती है। लेकिन इससे गैरकानूनी रूप से रियायतोंका फायदा चट करने वालोंपर निश्चित ही नकैल कसी जाएगी।

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देवलाली – मुजफ्फरपुर – देवलाली किसान रेल के फेरे बढ़े।

00107/08 देवलाली मुजफ्फरपुर के बीच चलने वाली किसान रेल के फेरे साप्ताहिक से बढ़ाकर द्विसाप्ताहिक किए जा रहे है। दिनांक 25 अगस्त से यह गाड़ी हर मंगलवार और शुक्रवार को देवलाली से रवाना होगी वही मुजफ्फरपुर से दिनांक 27 अगस्त से हर गुरुवार और शनिवार को देवलाली के लिए निकलेगी।

मध्य रेलवे ने किसानोंकी सुविधा के लिए इस गाड़ी को उस्मानाबाद जिले के संगोळा से मनमाड़ के बीच एक लिंक पार्सल गाड़ी भी शुरू कर दी है। जिसका नम्बर 00109/10 ऐसा है। 00109 संगोळा से हर मंगलवार और शुक्रवार को सुबह 8:00 बजे निकल के शाम 18:30 बजे मनमाड़ पोहोंचती है। यह किसान पार्सल लिंक सांगोळा से निकल कर पंढरपुर, कुरदुवाड़ी, दौंड, अहमदनगर, बेलापुर होते हुए मनमाड़ आती है। कुल 10 पार्सल वैन और 1 ब्रेक वैन की यह गाड़ी जिसमे 8 पार्सल वैन सांगोळा से मनमाड़ के लिए चलती है, और पुणे से 2 पार्सल वैन आकर दौंड में इस लिंक से जोड़ी जाती है। याने सांगोळा – पुणे दौंड – मनमाड़, देवलाली से मुजफ्फरपुर ऐसी 2 लिंक की मुख्य किसान रेल चल रही है।

इस टाइमटेबल वाली किसान रेल को, किसानोंसे बढ़िया प्रतिक्रिया मिली है, हर फेरे में भेजे जाने वाले माल में वृद्धि ही हो रही है। अनार जैसे फल, गोभी, सिमला मिर्च, हरी मिर्च, अदरक, नीम्बू जैसी खराब होने वाली सब्जियां 1-2 दिन में मुजफ्फरपुर तक पोहोंच जाती है। किसानोंके उत्पाद को नए मार्केट मिले है, इससे किसान बहोत खुश है।

फ़िलहाल प्रयोग के तौर पर 1 माह चलनेवाली यह किसान रेल अब अच्छे से निकल पड़ी है, अभी हफ्ते में 1 दिन से बढ़ कर 2 दिन हुई है। किसानोंको माँग पर, रेल प्रशासन इसे रेग्युलर भी कर सकती है।