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रेलवे के ऐसे क्लिप, कई बार देखो तो भी मन नही भरता।

दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की यह क्लिप अलग अलग अंदाज में कई बार सामने आती है। आज फिर से वह 3 आंकड़े वाली ट्रैक की व्हिडियो आप के लिए प्रस्तुत है। बहोत सुन्दर, बहोत मजेदार। जिसने भी रिकॉर्ड की है, अपलोड की है हम उनका आभार प्रगट करते हुए हमारे सभी रेलवे के चाहने वालोंके के लिए यहाँपर प्रस्तुत कर रहे है।

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महाराष्ट्र में राज्यान्तर्गत, ज़िलोंके बाहर राज्य परिवहन की बसेस शुरू

महाराष्ट्र का ‘मिशन बिगिन अगेन फेज 6’ के तहत दिनांक 20 अगस्त से राज्य परिवहन मंडल की बसेस शुरू की जा रही है। यह बसेस किसी एक जिले से दूसरे जिले में जा सकेगी।

गौरतलब यह है, इस बसेस में यात्रा करनेवाले यात्री को ई-पास निकालने की आवश्यकता नही वही निजी वाहन से जिलेसे बाहर यात्रा करनी हो तो ई-पास निकालना अत्यावश्यक है। साथ ही अभी तक राज्यान्तर्गत रेल यात्रा के लिए अनुमति भी प्रदान नही की गई है

अभी भी रेलवे से, महाराष्ट्रवासियों को राज्यान्तर्गत यात्रा करने के लिये टिकट बुकिंग्ज पर रिस्ट्रिक्शन्स उसी तरह जारी है।

राज्य शासन का परिपत्र

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स्पेशल गाड़ियोंका मार्ग परिवर्तन

प्रयागराज – फाफामऊ रेल मार्ग के दोहरीकरण का नॉन इंटरलॉकिंग कार्य शुरू किया गया है, अतः निम्नलिखित गाड़ियाँ अपने नियोजित मार्ग के अलावा दूसरे मार्ग पर परावर्तित की जा रही है।

परीपत्रक ध्यान से देखे और दिन, मार्ग परिवर्तन समझ ले।

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यह कैसा ‘मिशन बिगिन अगेन’

जबसे हमारे देश मे लम्बे लॉक डाउन के बाद अनलॉक प्रकिया को शुरू किया गया है, महाराष्ट्र राज्य शासन ने भी ‘ मिशन बिगिन अगेन’ नामक अनलॉक अभियान शुरू किया है। मार्केट, दुकान, शॉप्स, शॉपिंग मॉल खुलवाना, व्यापार उद्योग व्यवसायोंको शुरू करना, प्रदेश की उतरी हुई अर्थव्यवस्था को फिरसे पटरी पर लाना यह अनलॉक करने का या यूं कहिए मिशन बिगिन अगेन का मूल उद्देश्य है।

हमारा भी मूल उद्देश्य रेल सम्बंधित जानकारी आप लोगोंतक पोहोचाना यही है, और हम सहजता से पटरी नही छोड़ते। आज भी हम वहीं कर रहे है। राज्य शासन ने ‘ मिशन बिगिन अगेन’ का कार्यक्रम तो शुरू कर दिया मगर व्यापारी अपनी जगह से हिल ही नही पाएगा तो मिशन बिगिन होगा कैसे? आज उद्योग, व्यापार, व्यवसायोंको आगे बढाने के लिए छोटे छोटे व्यापारियों को बड़े मार्केट से माल लाने शहर जाना ही पड़ता है। जब तक वह 4 होलसेल दुकानों पर जाकर मोलभाव नही जानेगा व्यापार कैसे कर पाएगा?

महाराष्ट्र में गांव स्तर, तहसील स्तर और जिला स्तर के बाद मुम्बई, पुणे, औरंगाबाद, नासिक, नागपुर ऐसे बड़े शहर आते है जहा से छोटे व्यापारी अपना माल बुलवाते है या अपने उद्योंगों, कारखानोंसे बने माल के लिए बाजारपेठ ढूंढते है। अब राज्य शासनने राज्यअंतर्गत रेल यात्रा को मनाही कर रखी है और रेलवे ही एक ऐसा यातायात का साधन है जो किफायती, तेज गतिवाला और सर्वथा उपयुक्त है।

कोई भी व्यापार, व्यवसायी एक दिन में आ जा कर अपनी जरूरत के काम निबटाकर अपने व्यवसाय को गति दे सकता है। रेल यात्रा की मनाही को चलते, सड़क मार्ग से जाना कतई किफायती नही है। आगे ही व्यापार क्षेत्र में मंदी चली आ रही है, वैसे में सड़क मार्ग स अपना खुद का वाहन लेकर मार्केट तलाशना काफी महंगा पड़ता है। यह राज्य शासन की योजना ‘मिशन बिगिन अगेन’ के लिए सबसे बड़ी बाधा है।

सम्पूर्ण देश मे महाराष्ट्र के अलावा, किसी भी राज्य ने इस तरह का अपने ही राज्य में रेल द्वारा यात्रा करने से रोकने का मार्ग नही अपनाया है। बल्की कई राज्य तो रेलवे से अनुरोध कर के अपने राज्योंके लिए इण्टरसिटी विशेष गाड़ियोंकी व्यवस्था करवा रहे है, ताकि राज्योंके नागरिक अपना उद्योग व्यवसाय सुचारू तरीकेसे चला सके।

हम एक बार फिर राज्य शासन से अनुरोध करते है, अपनी रेल प्रशासन को राज्यान्तर्गत टिकट बुकिंग्ज को लेकर दी गयी कार्रवाई पर पुनर्विचार करें। राज्य के समझदार नागरिक मास्क, सैनीटाइजर और सोशल डिस्टेन्सिंग की सारी हिदायतें पाल कर अपनी और अपने सहयात्रियों की सारी सुरक्षा को ध्यान में रखकर रेल यात्रा कर सकते है।

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यह है मध्य रेल की गणपति स्पेशल्स का हाल

गत वर्षोंसे यह रिवाज है, की विशेष गाड़ियोंकी घोषणा कमसे कम 1 माह पहले ही हो जाती है। इस बार राज्य सरकार और रेल प्रशासन का तालमेल बैठा ही नही और जिस दिन गाड़ियाँ चालू होनी थी उसके महज 1 दिन पहले गाड़ियोंकी घोषणा की गई।

पहले ही संक्रमण के हालात उसमे यात्रिओंको कोरंटाइन किए जाने का सताए जानेवाला डर। सारे गणेशोत्सव के लिए घर जानेवाले यात्री सड़क मार्ग से 8/10 पहले ही गाँवोंके तरफ निकल लिए। सबसे बड़ी तकलीफ़ यह थी, राज्य शासन का नियम, जिसमे राज्यान्तर्गत रेल यात्रा करने की रेलवे सिस्टम द्वारा ही मनाही कराई गई थी।

ऐसे में कोई कैसे सोच लेता, की विशेष गाड़ियाँ चलाई जाएगी और उसमे राज्य के भीतर ही भीतर रेल यात्रा की अनुमति भी रहेगी? बस। इतना धैर्य, इतना इंतजार गाँव जाने वाले क्यों कर करेंगे? सारा देश साक्षी है, उत्तरी, पूर्वी भारत के श्रमिक गाँव की ओर जाने के लिए कैसे कैसे तरिकोंसे बड़े शहरोंसे अपने आशियानोंको, रोजीरोटी को छोड़कर निकल गए थे। फिर क्या पूर्वी भारत के लोग और क्या कोंकनवासी? जिसका मन गाँव की तरफ दौड़ गया वह किसीके मानें नही मानता।

कुल मिलाकर नतीजे सामने है, देख लीजिए।

कोंकण स्पेशल की, गाड़ी चलाने के वक्त की बुकिंग्ज की स्थिति