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कठिन राह रेलवे की…

मार्च महीने से गाड़ियाँ बन्द कर दी जिन्हें अंशतः खोला गया। पहले 12 मई 30 राजधानीयोंके और 1 जून से कुछ 200 मेल एक्सप्रेस गाड़ियोंके जरिए। यात्रिओंका उत्साह देखते कर्नाटक, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने अपने राज्य में इंटरसिटी गाड़ियाँ भी शुरू करवाई।

लेकिन अब रेलवे की राह बिकट हो रही है। एक एक राज्य अपने राज्योंमें रेल गाड़ियाँ चलाने पर प्रतिबंध लगाते जा रहे है। ओडिशा ने अपने राज्य की तीन जोड़ी इंटरसिटी गाड़ियोंको कल याने 09 से लेकर 31 जुलाई तक रद्द किए जाने की घोषणा करवा दी है। तो उधर बंगाल ने 12809/10 मुम्बई हावड़ा मेल और 12833/34 अहमदाबाद हावड़ा एक्सप्रेस रोजाना चलनेवाली गाड़ियोंके चक्के सप्ताह में एक बार ऐसे सीमित करवा दिए है। 12303/04 हावड़ा नई दिल्ली स्पेशल पटना होकर और 12381/82 हावड़ा नई दिल्ली स्पेशल धनबाद होकर 11 जुलाईसे रोजाना चलनेवाली गाड़ियोंको साप्ताहिक सप्ताह में केवल एक दिन ऐसे आगे सूचना दिए जाने तक चलाने की घोषणा की है।

निम्नलिखित परिपत्रकों को ध्यान से पढ़ लीजिए और सेवाओंके दिन भी समझ लीजिएगा। उक्त गाड़ियाँ अब केवल साप्ताहिक ही चलेगी और इंटरसिटी गाड़ियाँ रद्द की जा रही है।

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ज़ीरो बेस टाइमटेबल के इम्पैक्ट

जब से ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग की बातें शुरू हुई है, उसके वजह से होने वाले परिणाम परिपत्रकोंके स्वरूप में नजर आने लगे है। कहीं गाड़ियाँ रद्द हो रही है तो कहीं कोई गाड़ियोंकी फ्रीक्वेंसी घटाई जा रही है। उत्तर पश्चिम रेलवे में पहले ही गाड़ियाँ कम चलती है। उसमें जो लिंक एक्सप्रेस के रूप में रोजाना सम्पर्कता बनी रहती थी वह भी सप्ताह में 2 दिन, 4 दिन ऐसे होने वाली है। विस्तार से जानने के लिए हम रेल बोर्ड का उत्तर पश्चिम रेलवे के लिए यह परीपत्रक देखते है।

12307/08 और 22307/08 यह गाड़ियाँ है हावड़ा जोधपुर / बीकानेर एक्सप्रेस। पहले यह समझ लेते है कि यह गाड़ियाँ कैसे चलती थी। हावड़ा से जोधपुर और बीकानेर के लिए रोजाना चलने वाली एक्सप्रेस मेड़ता रोड स्टेशन तक आ कर के कुछ कोचेस के साथ 22307 और 22308 बीकानेर लिंक एक्सप्रेस बन कर बीकानेर निकल जाती थी और बचे कोचेस हावड़ा जोधपुर एक्सप्रेस बन जोधपुर जाते थे। याने लिंक एक्सप्रेस के जरिए दो गन्तव्योंके लिए रोजाना सम्पर्कता बनी रहती थी।

अब नई व्यवस्था में लिंक एक्सप्रेस बन्द की जा रही है। मेड़ता रोड स्टेशन पर कोई शंटिंग, कोच निकलना, जोड़ना नही होगा। 12307/08 यह गाड़ी हावड़ा जोधपुर एक्सप्रेस बनी रहेगी और सप्ताह में 5 दिन चलेगी। एक अलग गाड़ी 22307/08 हावड़ा बीकानेर एक्सप्रेस सप्ताह में 2 दिन चलेगी। याने दोनों गन्तव्योंके रोजाना वाला सम्पर्क खत्म। हावड़ा से जोधपुर जाना है तो 5 दिन और बीकानेर के लिए 2 दिन। गाड़ी हावड़ा से मेड़ता रोड तक रोजाना रहेगी मगर अलग अलग नम्बरसे। ऐसा करने के पीछे रेल प्रशासन का उद्देश्य यूँ है की मेड़ता रोड स्टेशन पर जो समय शंटिंग करने में जाया हो रहा है, वह बचेगा। मैन पॉवर, 2 लाइनोंकी ब्लॉकिंग बचेगी।

इसी तरह 15631/32 गौहाटी बाड़मेर / बीकानेर एक्सप्रेस की 25631/32 मेड़ता रोड बीकानेर लिंक भी बन्द कर सप्ताह में दो दिन गौहाटी से इन दोनों गन्तव्योंके लिए चलने वाली गाड़ियोंको दो अलग अलग गाड़ियोंमे साप्ताहिक स्वरूप में लाया जा रहा है। फिर से वहीं की यह दोनों गाड़ियाँ अलग अलग नम्बर्स के साथ सप्ताह में 2 दिन मेड़ता रोड तक आएगी। और भी इसी तरह की लिंक एक्सप्रेस 12463/64 दिल्ली सराय रोहिल्ला जोधपुर / बीकानेर एक्सप्रेस और उसकी लिंक 22463 / 63 मेड़ता रोड से बीकानेर लिंक एक्सप्रेस और 14659/60 दिल्ली जैसलमेर मालिनी एक्सप्रेस और उसकी लिंक 14661/62 जोधपुर बाड़मेर एक्सप्रेस रोजाना की जगह सप्ताह 4 दिन और 3 दिन ऐसे अलग अलग गाड़ियाँ बन जाएगी।

ठीक है, रेल प्रशासन की सोच है। लेकिन हम चाहते है इस तरह की व्यवस्था में यात्री को सभी श्रेणियोमे और कंप्यूटराइज्ड ई-टिकट में, थ्रू टिकट टेलिस्कोपिक किराया दरोंसे मिलते रहना चाहिए। उदाहरण के लिए किसी यात्री को हावड़ा से बीकानेर जाना है और उस दिन सिर्फ हावड़ा जोधपुर गाड़ी ही चलती है तो उसका आरक्षण हावड़ा से मेड़ता रोड तक रहेगा और आगे मेड़ता रोड से बीकानेर तक सारे किराए टिकट के पहले भाग में वसूले गए रहेंगे दूसरे भाग में किराया ‘0’ रहेगा और केवल मेड़ता रोड़ से बीकानेर तक यात्रा की अथॉरिटी रहेगी। किराया हावड़ा से बीकानेर इकठ्ठा ले लिया जाएगा। यह व्यवस्था, जो की अभी सिर्फ गैर वातानुकूलित श्रेणियोमे और केवल PRS टिकिटिंग प्रणाली में ही मिल रही है। इससे यात्री को केवल गाड़ी मेड़ता रोड़ स्टेशन पर बदलना है। जगह या पुनः आरक्षण करने की परेशानी नही रहेगी।

इसी तरह की लिंक एक्सप्रेस वाली प्रॉब्लम उत्तर रेलवे में भी है। गाड़ी है 14887/88 बाड़मेर कालका एक्सप्रेस और उसकी लिंक 24887/88 बाड़मेर हृषिकेश लिंक एक्सप्रेस इन गाड़ियोंका शंटिंग अम्बाला जंक्शन पर होता है।

पश्चिम रेलवे पर अलग परेशानी है। वहाँपर गाड़ियोंके गन्तव्योंको शार्ट टर्मिनेट याने मेन लाइन के स्टेशन तक नही लाया जा रहा और पहले ही खत्म किया जा रहा है।

79445/54 वांकानेर राजकोट डेमू को मोरबी तक ही चलाना याने वांकानेर – मोरबी डेमू रहेगी।

69118 दाहोद वडोदरा मेमू को दाहोद से गोधरा के बीच और 69189 आणंद दाहोद मेमू को गोधरा दाहोद के बीच ही चलाया जाएगा।

19269/70 पोरबंदर मुझफ़रपुर पोरबंदर एक्सप्रेस को निर्धारित मार्ग वीरमगाम, अहमदाबाद, महेसाणा की जगह वीरमगाम, चाँदलोडिया, मेहसाणा रास्ते से चलाया जाएगा। इसमें अहमदाबाद स्टेशन स्किप किया जा रहा है।

12267/68 मुम्बई सेंट्रल राजकोट मुम्बई सेंट्रल दुरन्तो एक्सप्रेस को जामनगर तक बढ़ाया जानेवाला था जिसे अब हापा तक ही बढ़ाया जाएगा।

59477/59476 पाटण मेहसाणा पाटण पैसेंजर की जगह 59477/59478 मेहसाणा पाटण मेहसाणा पैसेंजर जोड़ी को रद्द किया जाएगा।

12929/30 बलसाड़ दाहोद बलसाड़ इंटरसिटी एक्सप्रेस को दाहोद – गोधरा के बीच रद्द करने के बजाय अब वडोदरा – दाहोद के बीच रद्द किया जा रहा है। यानी यह गाड़ी वडोदरा – बलसाड़- वडोदरा इंटरसिटी एक्सप्रेस रह जाएगी।

19019/19020 बांद्रा फ़िरोजपुर बांद्रा एक्सप्रेस का मार्ग रतलाम – चित्तौड़गढ़ – चन्देरिया – कोटा ऐसे बदला जा रहा है। पहले यह गाड़ी रतलाम – नागदा – कोटा ऐसे मेन लाइन से चलती थी।

इस गाड़ी का मार्ग बदलने की वजह शायद इसकी 29019/29020 मंदसौर नीमच लिंक एक्सप्रेस का बन्द किया जाना है।

मित्रों, जीरो बेस टाइमटेबलिंग के इंपैक्ट, परिणाम और बहोत से आने वाले है। जैसे जैसे परीपत्रक जारी होंगे हम आपको उनसे अवगत कराते रहेंगे।

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रेलवे का झीरो बेस टाइमटेबल, कैसा असर होनेवाला है आपके रेलयात्रामें ?

मित्रों, जुलाई माह सभी रेल यात्री को पता होता है, रेलवे टाइमटेबल नया आएगा। टाइमिंग्ज बदलेंगे। न सिर्फ यात्री बल्कि रेल कर्मचारियों और रेल फैन्स के लिए भी यह बड़ी उत्सुकता का विषय रहता है। आप मे से कइयोंको शायद पता नहीं पर लोग टाइमटेबल के अभ्यास में घंटो बिता सकते है।

इस बार रेलवे अपने टाइमटेबल को ज़ीरो बेस बनाने जा रही है। अब आप के मन मे यह उत्सुकता जागृत हुई होगी कि यह ज़ीरो बेस टाइमटेबल याने क्या? तो उसका मतलब यह है कि टाइमटेबल की सारी ट्रेन्स को ज़ीरो कर के एक एक गाड़ी की, उनके शेड्यूल की पुनर्रचना करना। जो भी गाड़ियाँ बहुत ज्यादा स्टापेजेस लेती है या जिनको यात्रिओंका रिस्पॉन्स कम है उनको टाइमटेबल से हटाना याने उनका चलन बन्द करना। तेज गाड़ियाँ चलाने के लिए ज्यादा जगह बनाना ताकी गाड़ियाँ बिना रुके लम्बे अन्तर तक चलती रहे। निजी गाड़ियाँ चलाने के पीछे भी यही कारण है।

एक एक ज़ोन इस झीरो बेस टाइमटेबलिंग पर काम कर रहा है। हाल ही में हमने पश्चिम और दक्षिण रेलवे के परीपत्रक की जानकारी आपको दी थी। इन झोन ने अपनी कई सवारी गाड़ियाँ रद्द कर दी है और साथ ही मेन लाइनपर चलनेवाली कुछ ऐसी एक्सप्रेस गाड़ियाँ भी रद्द की है जो बहुत अधिक स्टापेजेस लेती थी और जिनके स्टार्टिंग पॉइंट से एन्ड पॉइंट तक चलने में एवरेज स्पीड काफी कम था। आपको ज्ञात होगा मध्य रेलवे पर भी कई ऐसी एक्सप्रेस और सुपरफास्ट गाड़ियाँ भी है जिनके हर 25 किलोमीटर पर स्टापेजेस है। महाराष्ट्र एक्सप्रेस, सेवाग्राम एक्सप्रेस, संहयाद्री एक्सप्रेस यह कुछ उदाहरण है।

अब इस जीरो बेस टाइमटेबल के असर देखते है। यदि आप किसी छोटे गांव या शहर में रहते हो, यज्ञपि आप के गांव में रेलवे स्टेशन है, दिनभर में दो चार सवारी गाड़ी या एखाद एक्सप्रेस रुकती हो फिर भी आपके गांव में गाड़ी अब शायद ही रुकेगी। क्योंकि सभी पैसेंजर गाड़ियोंको एक्सप्रेस में बदला जा रहा है। पैसेंजर जैसी एक्सप्रेस / सुपरफास्ट एक्सप्रेस को या तो बन्द किया जा रहा है या फिर उनके स्टापेजेस रद्द कर उन्हें एक्सप्रेस की परिभाषा में लाया जा रहा है।

हो सकता है, की अब आपको हवाई जहाज की यात्रा करने के लिए जिस तरह कुछ किलोमीटर की यात्रा कर एयरपोर्ट पर जा कर अपनी यात्रा शुरू करनी पड़ती है, उसी तरह अब किसी ओर रेलवे जंक्शन पर ट्रेन की सवारी करने जाना होगा। या ऐसा भी हो सकता है की भले ही आप जिला मुख्यालय के स्टेशनपर रहते हो पर आपका रेलवे स्टेशन किसी ओर गांव 5-50 किलोमीटर दूर से आपको उपयोग में लाना पड़े। जी हाँ मित्रों, हम जलगाँव, पाचोरा, चालीसगांव, नांदगांव, नासिक इधर मलकापुर, नांदुरा, शेगांव, अकोला, बुराहनपुर, खण्डवा, हरदा जैसे स्टेशन्स की बात कर रहे है। इन स्टेशनोंपर भी एक्सप्रेस गाड़ियोंके स्टापेजेस रद्द किए जा सकते है।

एक बात हम आपको बताना चाहते है, यह ज़ीरो बेस टाइमटेबल के शुरुआती झटके रहेंगे। जैसे जैसे गाड़ियाँ अपने रूटीन में आते जाएगी वैसे स्टापेजेस में भी बदल हो सकते है और जो जो सवारी गाड़ियाँ बन्द हो रही है उनकी जगहोपर इंटरसिटी एक्सप्रेस, डेमू, मेमू या सबर्बन गाड़ियाँ जरूरत के हिसाब से शुरू की जा सकती है। अब आप इस बात की चिंता छोड़ दीजिए कि कोई गाड़ी आपके स्टेशन को स्किप करती जा रही है। यदि आपको उसी गाड़ी से यात्रा करनी है तो उसे अपने पास के किसी ऐसे स्टेशन से पकड़ेंगे जहाँ वह रुक रही हो।

हमारी रेल प्रशासन से भी यह गुजारिश है, EFT एक्स्ट्रा फेयर टिकट प्रणाली जारी रखे और हो सके तो उसे कम्प्यूटराइज भी कर लें। ताकी छोटे स्टेशनोंसे सफर करनेवाले या गाड़ी बदल कर यात्रा करने वाले यात्रिओंको लम्बी दूरी की रेल यात्रा करने का ‘टेलिस्कोपिक किराए’ का फायदा और सहूलियत दोनोंही मिले।

वैसे भी इस महामारी ने हमको काफी कुछ पाठ पढ़ाए है। ज्यादा जरूरी न हो तो लोग आजकल यात्रा टाल देते है। कई रेल गाड़ियाँ बन्द होने की वजह से यात्री अपनी रेल यात्रा के लिए दूर दूर से जहाँ ट्रेन सेवा उपलब्ध है, वहाँ जाकर अपनी यात्रा का प्रारंभ कर रहे या वहाँ गाड़ी छोड़ रहे है। ऐसे में आशा है, ज़ीरो बेस टाइमटेबलिंग से रेल यात्रिओंको ज्यादा परेशानी नही होना चाहिए।

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रेलवे तैयार कर रही है कमाऊ पूत

आप भारतीय संयुक्त परिवार से है तो कमाऊं पूत इस शब्द की परिभाषा से भलीभाँति परिचित होंगे। किसी परिवार में एक से ज्यादा बेटे होते है, उनमेसे एक बेटा धन कमाने में अव्वल होता है जो भर भर के कमाई घर लाता है तो उसकी पूरे परिवार में पूछपरख बड़े अच्छे तरीके से होती है। उसे कमाऊ पूत कहते है।

अब आप सोच रहे होंगे हमारे रेल्वेवाले ब्लॉग में यह कौनसी सामाजिक कहानी शुरू हो गयी? भाईसाहब, यह किसी कहानी का हिस्सा नही, तमाम दुनिया का किस्सा है, हक़ीकत है। जो कमाता है, उसीका रौब चलता है। भारतीय रेलवे ने जब निजी गाड़ियाँ चलाने की बात कर ही दी है, तो आपको बताते है की कैसे यह गाड़ियाँ कमाऊ पूत बनने वाली है और कैसे बाकी रेग्युलर गाड़ियोंसे इनकी प्रायॉरिटी, तवज्जों ज्यादा रहने वाली है।

इससे पहले की हम इनके कमाई की बाजु देखे, इनको पटरी पर आने से पहले ही रेलवे को क्या क्या देना है, इनको पटरी पर उतारने के पीछे रेल प्रशासन की मंशा क्या है, यह देखते है।

भारतीय रेलवे के 68000 किलोमीटर मार्ग पर वर्ष 2018-19 में करीबन 9 करोड़ प्रतीक्षा सूची वाले यात्री अपनी यात्रा नही कर पाए और उन्हें अपनी टिकट रद्द करनी पड़ी। गाड़ियोंमे जगह की कमी के चलते यह सब हुवा। कई सारे यात्रिओंको हवाई सफर या रोडवेज से यात्रा करनी पड़ी। हालाँकि इसके और भी कारण हो सकते है, लेकिन रेल प्रशासन ऐसा सोचती है, यदि उनके पास अधिक गति, ज्यादा आरामदायक और सूटेबल टाइमिंग्ज वाली गाड़ियाँ रहती तो यात्रिओंकी पहली पसंद रेलवे ही रहती। यह सब हक़ीकत में लाने के लिए रेलवे खुद इतना धन अपने व्यवस्था में डाले इससे बेहतर है की निजी क्षेत्र को लीज पर अपनी व्यवस्था के साथ तुरंत ही गाड़ियाँ शुरू करवा दे।

रेल प्रशासन के पास जो मार्ग याने पटरियां उपलब्ध है वह तो पहले से ही अपनी ट्रैफिक क्षमता से सवा और डेढ़ गुना काम कर रही है। लेकिन DFC के कॉरिडोर वर्ष 2021 से उपलब्ध होनेवाले है और उसीको मद्देनजर रखते हुए रेल्वेज ने यह कदम उठाने की सोची है। उन्नत इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा इस तरीकेसे लिया जा सकता है।

अब निजी ट्रेनोके ऑपरेटर यात्रिओंको किस तरह चार्ज कर सकते है और रेल प्रशासन किन चिजोंमे अपना हिस्सा ले सकेगी यह देखते है। 1) यात्री टिकट पर छपा किराया, 2) यात्री को पसंदीदा सीट के लिए अतिरिक्त प्रीमियम, यात्री का अतिरिक्त लगेज, पार्सल का लदान 3) अतिरिक्त सेवाएं जैसे खानपान, बेडिंग या वाईफ़ाई से इंटरनेट सुविधा 4) विज्ञापन, ब्रांडिंग या नामकरण सुविधा इसके बाद स्टेशन के इस्तेमाल किए जाने के शुल्क, और लगाए जाने वाले राजस्व भी हिसाब में शामिल रहेंगे।

इन निजी ट्रेन संचालन के लिए करीबन 100 से ज्यादा स्टेशन्स निर्धारित किए गए है और उन्हें 12 क्लस्टर और हर क्लस्टर में करीबन 12 जोड़ी गाड़ियाँ में विभाजित किया गया है। ऑपरेटर को चाहिए कि वह हर एक क्लस्टर के लिए अलग से अर्जी दाखिल करे। रेल प्रशासन निजी ऑपरेटर को यह सहूलियत देगी की उसके दिए गए समय के 60 मिनिट के दायरे में अपनी उन्ही स्टेशनोंके बीच चलनेवाली कोई ट्रेन नही चलाएगी।

निजी ऑपरेटर को चाहिए कि उसकी ट्रेन उन स्टेशनोंके बीच चलाई जाने वाली सबसे तेज ट्रेन हो। निजी ट्रेन में कमसे कम 16 डिब्बे होना जरूरी होगा और ज्यादा से ज्यादा उस मार्ग पर चलने वाली रेल प्रशासन की ट्रेनों जितने डिब्बे वह जोड़ सकता है। निजी संचालक अपनी गाड़ियोंकी देखभाल खुद करेगा जिसके लिए सारे टेक्नीशियन भी उसीके रहेंगे। इसके लिए लगने वाली जगह, मेंटेनेंस एरिया या डिपो रेल प्रशासन उपलब्ध कराएगा।

निजी गाड़ियोंके क्रू याने लोको पायलट और गार्ड रेलवे के कर्मचारी ही रहेंगे। यदि निजी संचालकोंको अपनी गाड़ी ऑपरेट करवाने के लिए इनको अलगसे ट्रेनिंग देनी पड़े तो उसकी व्यवस्था भी करनी होगी। निजी गाड़ियोंके चल स्टॉक भारतीय रेलवे के सुरक्षा मानकोंके अनुसार ही रहना चाहिए।

निजी संचालकोंके साथ रेल प्रशासन का करार जारी होने की तारीख से 35 वर्ष का रहेगा।

निजी गाड़ियोंको चलाने की गति अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित की गई है।

निजी संचालकोंको अपनी गाड़ियोंका किराया तय करने की सहूलियत दी जाती है।

निजी संचालकोंको रेल प्रशासन के हाउलेज चार्ज याने ढुलाई खर्च और एनर्जी यूज चार्जेस अलग से देना होगा।

निजी संचालक यदि किसी सेवा देने में चूक करता है तो जुर्माने के लिए बाध्य रहेगा यह बात रेल प्रशासन के लिए भी निजी संचालक के हित मे लागू रहेगी।

निजी संचालक अपनी टिकट बुकिंग के लिए रेल्वेज की विद्यमान आरक्षण बुकिंग प्रणाली का उपयोग करेगा।

निजी संचालक अपना चल स्टॉक याने लोको इंजिन और डिब्बे अपनी पसंद के अनुसार जहाँ से चाहे ला सकता है, बशर्ते वह भारतीय रेल के शर्तो और मानकों के अनुसार हो।

आशा है, आप भारतीय रेल पर निजी कम्पनियोंको अपनी गाड़ियाँ चलाने देने का उद्देश्य और मंशा समझ चुके होंगे। DFC कॉरिडोर उपलब्ध होने के बाद रेलवे के पास अतिरिक्त मार्ग हाजिर रहेगा जिस पर तीव्र गतिसे गाड़ियाँ चलाई जा सकती है। निजी कम्पनियोंको लीज पर गाड़ियाँ चलाने का अवसर देकर भारतीय रेल अपने स्टाफ़ को भी आंतरराष्ट्रीय दर्जे पर ले जाना चाहती है। विदेशी चल स्टॉक यहाँपर न सिर्फ ऑपरेट करेगी बल्कि उनका मेटेनन्स भी यहीं करेगी उससे रोजगार का और उन्नत तकनीक का सृजन होगा।

यात्रिओंको इंटरनेशनल क्वालिटी की बेहतर सेवा और तेज गति के रेल गाड़ियों से परिचय होगा। इससे भविष्य में भारतीय रेल और उनके यात्रिओंको फायदा ही होगा हाँ यात्रा करने के लिए प्रीमियम किराया चुकाने की तैयारी भी करनी होगी।

रही बात रेग्युलर गाड़ियोंकी तो यात्रिओंको इसमें जो गाड़ियाँ कम होने का डर लग रहा है वह वाजिब है। यह झीरो बेस टाइमटेबलिंग, पैसेंजर गाड़ियोंको एक्सप्रेस बनाना या जोन की कई गाड़ियोंका रद्द किया जाना यह निजी गाड़ियोंके लिए जगह बनाने की कवायद चल रही है। लेकिन हमें यह लगता है, यह सारे शुरवाती झटके है। जब यह सारी निजी गाडियाँ पटरी पर दौड़ना शुरू हो जाएगी, जरूरतोंके हिसाब से रेग्युलर गाड़ियाँ भी बढ़ेगी। निजी गाड़ियोंके यात्री प्रीमियम सेवाओंको प्राधान्य देने वाले रहेंगे और आम यात्रिओंको भी एक अतिरिक्त व्यवस्था चुनने के लिए उपलब्ध रहेगी। अपनी जरूरत के हिसाब से वह इन गाड़ियोंको यात्रा के लिए चुन सकता है। जब तीसरी और चौथी पटरियां काम करने लग जाएगी तो छोटे छोटे अन्तर के लिए इंटरसिटी गाड़ियाँ चलाई जा सकती है।

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मुम्बई क्लस्टर 2 : प्राइवेट गाड़ियोंकी डिटेल्स

मुम्बई के 2 क्लस्टर है, आज उसमे का दूसरा क्लस्टर समझते है। यह क्लस्टर मुम्बई की दूसरी याने पश्चिम रेल्वे के लिए बनाया गया है। इसमे सबसे ज्यादा 12 जोड़ी याने 24 गाड़ियां है।

इस क्लस्टर की पहली गाड़ी है, मुम्बई दिल्ली मुम्बई रोजाना , राजधानी रूट। यह डेली गाड़ी मुम्बई सेंट्रल से शाम 16:00 को चलेगी और नई दिल्ली मे दूसरे दिन सुबह 7 :00 बजे पोहोचेगी। वापसी मे नई दिल्ली से दोपहर 14:45 को निकल मुम्बई सेंट्रल को दूसरे दिन सुबह 6:00 बजे पोहोचेगी। 1384 किलोमीटर का यह मार्ग सीधा सूरत, वडोदरा, रतलाम कोटा वाला मार्ग है।

दूसरी गाड़ी मुम्बई अहमदाबाद मुम्बई रूट 483 किलोमीटर याने यह क्लियर है की यह गाड़ी बांद्रा टर्मिनस अहमदाबाद के बीच चलेगी। यह भी गाड़ी रोजाना और शताब्दी के समय जितना समय लेगी और वही स्पीड से चलेगी। मुम्बई से रोजाना 23:45 को निकल सुबह 6:00 बजे अहमदाबाद पोहोचेगी। वापसी मे अहमदाबाद से सुबह 7:40 को निकल कर दोपहर 13:55 को मुम्बई पोहोचेगी। मार्ग सूरत, वडोदरा होकर ही है। कुल मिलाकर यह रिवर्स शताब्दी लग रही है।

तीसरी गाड़ी मुम्बई सूरत मुम्बई है। जिसका रूट किलोमीटर 263 दिया गया है। याने सीधा सीधा मुम्बई सेंट्रल से सूरत का अंतर है। यह गाड़ी भी रोजाना चलेगी। सूरत से सुबह 7:00 बजे निकल कर मुम्बई सेंट्रल सुबह 10:00 बजे और वापसी मे मुम्बई सेंट्रल से 15:30 को निकल सूरत 18:30 को पोहोचेगी। तीन घंटे का रनिंग टाइम और यात्रीओंके लिए बेहद उपयुक्त टाईमटेबल दिया है। यह गाड़ी यात्रीओंकी पसंदीदा रहनेवाली है।

चौथी गाड़ी मुम्बई वडोदरा मुम्बई रूट किलोमीटर 386 है। जिससे लगता है की दादर या बांद्रा से चलाई जा सकती है या फिर वडोदरा के स्थान पर छायापुरी या प्रत्यपनगर टर्मिनल का गंतव्य लिया जा सकता है। मुम्बई से 11:50 को निकल कर वडोदरा 16:05 को पोहोचेगी वापसी मे वडोदरा से 18:05 को निकल मुम्बई मे 23:00 को पोहोचेगी। मार्ग सूरत होकर शताब्दी की तरह स्पीड ऐसा रहेगा। टाईमटेबल थोड़ा अजीब है। डेली कम्यूटर्स के लिए खास नहीं।

पाचवी गाड़ी थोड़ी अजीब है। मुम्बई अकोला मुम्बई रूट किलोमीटर 713 याने जाहीर सी बात है की गाड़ी बांद्रा से चलकर उधना बाइपास करके जलगाव भुसावल होकर अकोला जायगी। सप्ताह मे दोनों ओरसे तीन दिन याने त्रिसाप्ताहिक चलेगी। मुम्बई से सुबह 6:10 को हर मंगलवार, शुक्रवार और रविवार पर निकलेगी और दूसरे दिन अकोला मे दोपहर 14:00 बजे पोहोचेगी। वापसी मे यह गाड़ी अकोला से बुधवार, शनिवार और सोमवार को दोपहर 15:15 को निकल कर दूसरे दिन सुबह 5:05 को मुम्बई पोहोचेगी। यह वापी वलसाड एरिया को शेगाव अकोला एरिया के लोगोको सीधे कनेक्ट करवाएगी।

छठी गाड़ी है मुम्बई नंदुरबार मुम्बई, सप्ताह मे 4 दिन मुम्बई से हर मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार और रविवार को सुबह 6:10 को चलकर नंदुरबार दोपहर को 13:10 को पोहोचेगी वापसी मे नंदुरबार से उसी दिन दोपहर मे 15:50 को निकलकर 23:15 को पोहोचेगी। यह इंटरसीटी गाड़ी लग रही है। इसका रूट किलोमीटर 410 से वही उधना बाइपास भेसतान होकर लग रहा है।

सातवी गाड़ी सूरत वाराणसी सूरत साप्ताहिक गाड़ी है। रूट किलोमीटर 1370 बताया गया है यह क्लियर है की यह गाड़ी उधना वाराणसी के मार्ग से ही चलेगी। सूरत से हर सोमवार को सुबह 8 20 को निकलकर दूसरे दिन सुबह 7:20 को वाराणसी पोहोचेगी वापसी मे वाराणसी से मंगलवार को सुबह 9:00 बजे निकल दूसरे दिन सुबह 8:45 को सूरत पोहोचेगी। इसका मार्ग जलगाव भुसावल जबलपुर प्रयागराज छिवकी होकर रहेगा। यह भी यात्रीओंके पसंद की गाड़ी रहेगी और फेरे भी बढ़ेंगे।

आठवी गाड़ी सूरत पटना सूरत, साप्ताहिक और रूट किलोमीटर 1679 से यह जान सकते है की यह गाड़ी भुसावल होकर नही जायगी इसका मार्ग वडोदरा, नागदा, बीना, कटनी, प्रयागराज, वाराणसी होकर चलेगी। सूरत से सुबह 8:20 को हर शुक्रवार को निकल शनिवार को दोपहर 13:00 बजे पटना पोहोचेगी। वापसी मे यह गाड़ी पटना से शनिवार को 14:45 को निकल कर सूरत को दूसरे दिन शाम मे 17:55 को पोहोचेगी।

अगली नौवी गाड़ी मुम्बई सेंट्रल से नई दिल्ली के बीच रोजाना चलनेवाली गाड़ी है। मार्ग मैंन लाइन वडोदरा, रतलाम कोटा होकर 1384 किलोमीटर का बताया गया है। मुम्बई सेंट्रल से हर रोज 15:25 को निकल नई दिल्ली को सुबह दूसरे दिन 6:40 को पोहोचेगी। वापसी मे नई दिल्ली से हर रोज दोपहर 13:25 को खुलकर मुम्बई सेंट्रल सुबह 5:00 बजे टीका देगी।

दसवीं गाड़ी है, इंदौर दानापुर सप्ताह मे चार दिन और रूट किलोमीटर 1256 यह जाहीर करता है की यह गाड़ी खजुराहो, प्रयागराज, वाराणसी होकर दानापुर जायगी। इंदौर से सोम, बुध, गुरु, शुक्र को 14:25 को निकल कर दूसरे दिन दोपहर मे 16:00 बजे दानापुर पोहोचेगी। वापसी मे यह गाड़ी दानापुर से हर मंगल, गुरु, शुक्र, और रविवार को 17:40 को निकल कर दूसरे दिन को रात 20:30 को पोहोचेगी।

ग्यारहवी गाड़ी यदि पश्चिम रेल्वे चलाती है तो इसका स्टार्टिंग पॉइंट गजब रहने वाला है। यह गाड़ी है मुम्बई एरिया से साइनगर शिर्डी एक्स्प्रेस, रूट किलोमीटर यह बताता है की गाड़ी वाया पुणे चलेगी। अब यह दादर से चलेगी या कहा से यह कहना मुश्किल लग रहा है। गाड़ी रोजाना चलनेवाली है। मुम्बई से रात 20:00 बजे निकल शिर्डी को सुबह 4:15 को पोहोचेगी और वापसी मे शिर्डी से 7:50 को निकल कर मुम्बई मे दोपहर को 15:55 को पोहोचेगी।

आखरी बारहवी गाड़ी मुम्बई इंदौर मुम्बई ट्राई वीकली गाड़ी है, रूट किलोमीटर 830 से अवन्तिका एक्स्प्रेस का ही मार्ग लग रहा है। मुम्बई से हर सोम बुध शुक्र को रात 20:00 को निकल कर इंदौर सुबह 10:00 बजे पोहोचेगी और वापसी मे इंदौर से हर मंगल गुरु शनिवार को शाम 17:00 बजे निकल कर मुम्बई को दूसरे दिन सुबह 7:00 बजे पोहोचेगी।