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राजस्थान, जोधपुर जाने वाले यात्रीगण कृपया ध्यान दे।

मध्य रेल, भुसावल डिवीजन का प्रेस नोट है।

अजमेर – पालनपुर के बिच नॉन इंटर लॉकिंग और डबल लाइन का कार्य होने से भुसावल से जोधपुर की ओर चलने वाली कुछ गाड़िया शोर्ट टर्मिनेट एवं कुछ को मार्ग परिवर्तन किया जा रहा है।

शार्ट टर्मिनेट
गाड़ी क्रमांक – 22663 चेन्नई – जोधपुर एक्सप्रेस यह प्रस्थान स्टेशन चेन्नई से दिनांक – 28.12.19 शनिवार को चलेगी जिसे अहमदाबाद में शोर्ट टर्मिनेट कर दिया जाएगा। गाड़ी अहमदाबाद से आगे जोधपुर नही जाएगी। उसी तरह गाड़ी क्रमांक – 22664 डाउन जोधपुर – चेन्नई एक्सप्रेस यह दिनांक – 30.12.19 को जोधपुर से प्रस्थान न करते हुए दिनांक 31 दिसम्बर को अहमदाबाद से अपने रेग्युलर समयसे प्रस्थान करेगी और आगे चेन्नई के लिए अपनी यात्रा करेगी।

मार्ग परिवर्तन
1) गाड़ी क्रमांक -17037 अप सिकंदराबाद – हिसार एक्सप्रेस सिकन्दराबाद से छूटने के दिनांक – 24.12.19 , 25.12.19 , 31.12.19 , 01.01.20 को यह गाड़ी परावर्तित रहेगी। बेरछा, चित्तौरगढ़ , अजमेर ,फालना , मेरता रोड होकर हिसार जाएगी। उसी तरह वापसी में भी मार्ग बदल कर, हिसार से आनेवाली गाड़ी क्रमांक – 17038 डाउन हिसार – सिकंदराबाद एक्सप्रेस हिसार से चलने के दिनांक- 27.12.19 , 29.12.19 , 03.01.20 को यह गाड़ी मेरता रोड ,फालना ,अजमेर, चित्तौरगढ़, बेरछा होकर सिकंदराबाद जाएगी।

गाड़ी क्रमांक –17623 अप नांदेड – श्रीगंगानगर एक्सप्रेस यह नान्देड से छूटने का दिनांक 02.01.20 को यह गाड़ी महेसाणा से आगे परावर्तित रहेगी। मेहसाणा, पाटन , भिलदी , समधारी , लुनी होकर श्रीगंगानगर जाएगी। उसी प्रकार वापसी में गाड़ी क्रमांक – 17624 डाउन श्रीगंगानगर- नांदेड एक्सप्रेस यह श्रीगंगानगर से चलने का दिनांक – 28.12.19 को यह गाड़ी लुनी, समधारी , भिलदी, पाटन , महेसाणा होकर नांदेड जाएगी।

कृपया निम्नलिखित उत्तर मध्य रेलवे के सर्क्युलर भी देख लीजिए, और अपनी यात्रा का नियोजन करें।

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मुम्बई मनमाड़ मुम्बई राज्यरानी चलेगी नान्देड तक।

नान्देड वासियोंके लिए बड़ी खबर है, मनमाड़ और मुम्बई के बीच चलने वाली 22101/22102 राज्य रानी एक्सप्रेस का हुजूर साहिब नान्देड तक प्रस्तवित विस्तार मंजूर हो गया है। नान्देड वासी तो मुम्बई की सीधी गाड़ी मिलने से बड़े आनन्दित है। इन दोनों स्टेशनोंको बीच फिलहाल 3 जोड़ी डेली चलने वाली तपोवन, नन्दीग्राम और देवगिरी एक्सप्रेस गाड़ियाँ है और 3 जोड़ी साप्ताहिक गाड़ियाँ है। जिसमे तपोवन एक्सप्रेस पुर्णतया सिटिंग क्षमता वाली इण्टरसिटी ट्रेन है तो बाकी दोनों गाड़ियाँ, नंदीग्राम और देवगिरी एक्सप्रेस ओवरनाइट, स्लिपर कोचेस वाली गाड़ियाँ है।

राज्यरानी एक्सप्रेस के नान्देड विस्तार से क्या कुछ बदल सकता है इस पर चर्चा करते है। कई रेलवे जानकारोंका यह मत था, यह गाड़ी बड़ी आसानीसे भुसावल के लिए विस्तारित हो सकती थी। भुसावल विस्तार के लिए उनके मुद्दे काफी सटीक और महत्वपूर्ण है। इस ट्रेन का नान्देड और भुसावल विस्तार में कितना फर्क है यह देखना अभ्यासपूर्ण होगा।

मनमाड़ से भुसावल का अंतर है 184km और नान्देड है 348km, याने लगभग दुगुना।

मनमाड़ भुसावल रेल मार्ग दोहरा, विद्युतीकरण और 130 – 160 km/h स्पीड मान्यता प्राप्त है याने मनमाड़ भुसावल अंतर काटने को किसी भी सुपरफास्ट गाड़ी को ज्यादा से ज्यादा 150 मिनट लगेंगे वही मनमाड़ से नान्देड मार्ग सिंगल, एकहरी रेल मार्ग, नॉन इलेक्ट्रिक डीज़ल लोको से चलाए जाने वाला मार्ग है। 384 किलोमीटर चलने के लिए किसी भी सुपरफास्ट गाड़ी को साढ़े छह घंटे, 400 मिनट दिए गए है। सिंगल लाइन वर्किंग की वजह से यहां गाड़ियाँ ज्यादा समय लेती है।

मुम्बई मनमाड़ भुसावल के बीच गाड़ी के लोको याने इंजिन, गार्ड, लोको पायलट और कमर्शियल, चेकिंग स्टाफ़ याने TTE भी सीधे एक ही रन में चल सकते है। वहीं मुम्बई मनमाड़ नान्देड के लिए मनमाड़ में सारा स्टाफ़ बदलेगा, लोको भी डीजल से इलेक्ट्रिक का बदलेगा। इस स्टाफ़ चेंजिंग और लोको शंटिंग में 20 से 30 मिनट मनमाड़ में जाया होंगे।

मुम्बई से भुसावल कुल अंतर 445 km 7 से 8 घंटे में पूरा होने से यह गाड़ी एक ही रेक में चलाई जा सकती है और इसके समय मे भी फेर फार नही होगा इससे मनमाड़ और नासिक से रेग्युलर अपडाउन करनेवाले यात्रिओंको समय परिवर्तन की कोई अनचाही तकलीफ़ नही होगी। लेकिन वही यह गाड़ी जब नान्देड के लिए विस्तरित हो रही है तो इसे कुल 610 km चलने के लिए कमसे कम 11 से 12 घंटे लगने है, जिसमे डबल रेक लगना तय है।

अब बात करे टाईम टेबल की, यदि राज्यरानी का नान्देड विस्तार भी हो और मनमाड़ – मुम्बई के बीच का समय भी न बदले तो यह गाड़ी ओवरनाइट ट्रेन बनती है और जब ओवरनाइट ट्रेन बनेगी तो इसका डिब्बा फॉरमेशन भी बदलेगा चेयरकार से सारी गाड़ी स्लिपर डिब्बो में बदलेगी। यदि डिब्बा संरचना नही बदलेगी और दोनों तरफ से याने मुम्बई और नान्देड से भी दिन में चले तो मनमाड़ नासिक मुम्बई के अपडाउन करने वालोंकी बड़ी आफ़त हो जाएगी।

मुम्बई से जलगाव, भुसावल की कनेक्टिविटी की जब भी बात होती है तो इस मार्ग पर ढेरों गाड़ियाँ चलती है यह कहकर केवल इन दो स्टेशनोंके बीच सीधी गाड़ी चलाने की आशा और अपेक्षा पर घडाभर पानी डाल दिया जाता है। प्रशासन यह नही देखता की भुसावल, जलगाँव, पाचोरा, चालीसगांव से कितने यात्री मुम्बई के लिए चलते है, उनके लिए लम्बी दूरी से आने वाली गाड़ियोंमे कहीं कोई जगह उपलब्ध नही रहती, खड़े खड़े यात्रा करनेके लिए मजबूर होना पड़ता है।

पहले काशी एक्सप्रेस में दो जनरल कोच, शालीमार एक्सप्रेस में दो स्लिपर कोच, हावड़ा मेल में एक स्लिपर कोच, सेवाग्राम एक्सप्रेस में एक जनरल कोच भुसावल से लगता था, चूँकि रेलवे द्वारा बीच के स्टेशनोंपर कोचेस का शंटिंग बन्द किया गया है इसलिए भुसावल से यात्रिओंके लिए जनरल कोच तो पूर्णतया बन्द हो गए और स्लिपर कोच की बुकिंग 120 दिन पहले ही लम्बी दूरी के यात्री IRCTC के ऑनलाइन बुकिंग के जरिए अटका लेते है, इस स्थिति में भुसावल से मुम्बई के लिए दिन में चलनेवाली इण्टरसिटी एक्सप्रेस की माँग एकदम वाज़िब लगती है। प्रशासन हुतात्मा एक्सप्रेस की ओर इशारा करता है तो यात्रिओंकी दलील भी सुन लीजिए, यह गाड़ी भुसावल से कल्याण, पनवेल के लिए ओवरनाइट ओर वापसी में इण्टरसिटी जैसी है। यदि यही गाड़ी भुसावल वासियोंके लिए है तो इसका समय परिवर्तन भी होना चाहिए, इसे दोनों ओरसे या तो ओवरनाइट कर दीजिए या दोनों ओरसे इन्टरसिटी रहने दे।

भुसावल, जलगाँव के यात्रिओंकी तो यह धारणा बनते जा रही है कि लोकप्रतिनिधि उनके प्रति घोर अनास्था और उदासीनता बरत रहे है और वह अपनी बेचारगी के साथ, लम्बी दूरीकी गाड़ियोंके, जनरल डिब्बों में खड़े खड़े यात्रा करने के लिए मजबूर है।

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उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर मण्डल में रेल ब्लॉक।

उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर मण्डल में रेल अनुरक्षण का कार्य शुरू हो रहा है, अतः मावल – भिमाना स्टेशनोके बीच 17 दिसम्बर से लेकर 18 जनवरी तक रेल ब्लॉक रहेगा। यात्रीगण कृपया निम्नलिखित सर्क्युलर देखें और अपनी रेल यात्रा का नियोजन करें।

आंशिक रद्द सेवांए

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हावड़ा से मुम्बई, पुणे के बीच चलने वाली 3 जोड़ी गाडीयाँ रद्द।

मध्य रेलवे ने परिपत्रक जारी किया है। हावड़ा खड़गपुर मार्ग में अवरोध की वजह से निम्नलिखित 3 जोड़ी गाड़ियाँ रद्द रहेंगी।

यह है साऊथ ईस्टर्न रेलवे का परिपत्रक –

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बस, रेल गाड़ी चलती रहे।

गाड़ियाँ भर भर के कैसे चलती है और भारतीय लोगोंमें टॉलरेन्स, सहनशीलता की चरमसीमा देखना हो तो मुम्बई से उत्तरप्रदेश के बीच चलने वाली किसी भी गाड़ी को देख लीजिए। बारहों महीने, किसी भी ट्रेन में पैर धरने तक की जगह नही होती है। क्या जनरल और क्या स्लिपर सारे के सारे डिब्बे एक समान यात्रिओंसे भरे रहते है।

एक धारणा है, स्लिपर डिब्बेमे केवल आरक्षित यात्री ही बैठते है। नही जी ऐसा बिल्कुल नही है। इन नार्थ बाउंड गाड़ियोंमे आप को स्लिपर डब्बोंमे रिजर्वेशनधारी यात्रिओंके अलावा भी कई प्रकार के यात्री मिलेंगे। जिसका रिजर्वेशन कन्फर्म है वह दिन की यात्रा में अपने अपने नम्बर पर बैठे मिलेंगे, सीजन पास धारी, रोजाना अपडाउन करनेवाले यात्री अप्पर बर्थ और साइड अप्पर बर्थ पर जमे मिलेंगे, जो TTE आने पर उन्हें अपना पास दिखाने के बजाए सलाम दुवा कर अपनी समय काटने के फिराक में रहते है, सर्विस पास वाले अपनी फर्स्ट क्लासकी ट्रैवल अथॉरिटी होने के बावजूद स्लिपर में केवल अपनी पास पर दस्तखत न हो और उसकी वैलिडिटी चलती रहे इसलिए घुसे रहते है। इसके साथ ही उसी गाडीका PRS वेटिंग लिस्ट टिकट वाले यात्री, 100-200 km चलनेवाले सेकन्ड क्लास के यात्री भी इसी आरक्षित डिब्बे में जबरन यात्रा कर रहे होते है।

यह तो हो गए अधिकृत यात्री या यूँ कहिए सेमी अधिकृत यात्री जिनके पास कहने के लिए कुछ तो कागज़ है जो उंन्हे रेलवे में प्रीमैसेस, एरिया में वैलिड करता है, लेकिन खोमचेवाले, चाय और स्टेशनरी बेचने वाले, भीख मांगने वाले, झाड़ू लगाने वाले, जबरन पैसे की उगाही करनेवाले तृतीयपंथी जो पूरी गाड़ीमे ऐसी धाक जमाकर चलते है, जैसे वे ही केवल इन गाड़ियोंमे सफर करने के हकदार है और बाकी यात्री उनके सहयोग और कृपासे चल रहे है। इतनी खचाखच भीड़ से भरे डिब्बों में यह अनाधिकृत विक्रेता इस सफाईसे अपना माल बेचते घूमते है की उनसे टिकट चेकिंग के स्टाफ़ ने भी प्रेरणा लेनी चाहिए जो भीड़ को देखते डिब्बे के पास ही नही पोहोंचते।

अब आप सोचते होंगे, आखिर ऐसा क्यों है, कोई कुछ बोलता क्यों नही, क्या अधिकृत यात्री भी इसपर आपत्ति नही जताते? उसकी वजह है, कई बार तो 6 जनोंके कम्बाइन आरक्षित टिकट में एखाद या दो, तीन यात्री कन्फर्म रहते है और बाकी वेटिंग लिस्ट तो वह भला क्यों करेंगे एक्स्ट्रा यात्रिओंकी कम्प्लेंट? इसी तरह सीजन पास धारी भी बड़े ग्रुप में यात्रा करते है और अपनी धाक जमाते है। अनाधिकृत विक्रेता स्थानिक निवासी रहते है, दूर गांव से चलते यात्री बेचारे उनसे कहां तक उलझेंगे?

कुछ यात्री होते है, जो अपना अधिकार, हक जताते है, स्लिपर में 72-80 अधिकृत यात्रिओंमेंसे कोई एखाद होता है जो ट्विटर पर शिकायत करता है, कार्रवाई भी होती है, उस डिब्बे की भीड़ को पड़ोस के डिब्बे में या आखरी वाले डिब्बे में खदेड़ दिया जाता है या फिर दण्डित किया जाता है, लेकिन शायद ही कभी आपने देखा होगा की सैकड़ो अनाधिकृत यात्रिओंको गाडीसे उतार दिया हो। कोई एक स्लिपर का डिब्बा ही थोड़े होता है गाड़ीमे? जिस डिब्बे से शिकायत आयी है उसमें से बाजू वाले डिब्बे में भीड़ शिफ्ट हो जाती है, अपडाउन वाले थोड़े इधर उधर हो जाते है और गाड़ी चलते रहती है, क्योंकी सबको किसी भी तरहसे अपने अपने गंतव्य पर पोहोंचने की चाहत रहती है।

क्या करें! केवल मज़बूरी और मजबूरी यही मात्र फैक्टर है जो इस पूरी रेल यात्रा में आपको दिखाई देता है।