इस सम्बंध में एक आदेश CRS द्वारा महाप्रबंधक, मध्य रेल के नामें जारी किया गया है, सोशल मीडिया RailPost.in से प्राप्त हुवा जिसे हम यहाँ प्रस्तुत कर रहे है।






इस सम्बंध में एक आदेश CRS द्वारा महाप्रबंधक, मध्य रेल के नामें जारी किया गया है, सोशल मीडिया RailPost.in से प्राप्त हुवा जिसे हम यहाँ प्रस्तुत कर रहे है।






15 जानेवारी 2023, माघ, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2079
20833/34 विशाखापट्टनम सिकंदराबाद विशाखापट्टनम वन्देभारत एक्सप्रेस सप्ताह में 6 दिन प्रत्येक रविवार को छोड़कर, दिनांक 16 जनवरी से दोनोंही ओरसे चलना शुरू हो जाएगी। दोनों दिशाओं के दौड़ में यह गाड़ी राजामुंदरी, विजयवाड़ा, खम्मम और वरंगल इन स्टेशनोंपर ठहराव लेगी। ज्ञात रहे, यह गाड़ी पूर्णतः आरक्षित है।



आज दिनांक 15 जनवरी को वन्देभारत एक्सप्रेस की उद्धाटन विशेष 02844 सिकंदराबाद से विशाखापट्टनम के लिए चलाई जाएगी, जिसकी समयसारणी निम्नलिखित है।


साथ ही वन्देभारत एक्सप्रेस के उद्धाटन विशेष गाड़ी को देखने हेतु आज दिनांक 15 जनवरी को, स्कूली बच्चों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों के लिए राजामुंदरी से विजयवाड़ा और वरंगल से सिकंदराबाद के बीच एकल विशेष गाड़ियोंका आयोजन किया गया है। यह गाड़ियाँ उद्धाटन विशेष वन्देभारत एक्सप्रेस की तरह केवल निमंत्रितोंके लिए ही है, इनका अलगसे टिकट उपलब्ध नही किया जाएगा।

14 जानेवारी 2023, माघ, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2079
भारतीय रेलवे में हर रोज करीबन 2.5 करोड़ यात्री यात्रा करते है। जिसमे 35% टिकटें रेल्वेके PRS काउन्टर्स पर बुक होती है और बाकी 11 लाख से भी ज्यादा टिकटें हर रोज, रेल्वे के ऑनलाइन प्लेटफार्म आईआरसीटीसी के द्वारा बुक की जा रही है। ऑनलाइन आरक्षण प्रणाली अपने चरम पर काम कर रही है। काउन्टर्स की टिकटोंमें और ऑनलाइन टिकटों में सर्विस चार्ज का फर्क है, फिर भी ऑनलाइन टिकटोंका प्रचलन दिनोंदिन बढ़ते ही जा रहा है। हालांकि रोजाना करोडों यात्रीयोंमे 50% यात्री तो आरक्षण कर यात्रा निश्चित ही करते होंगे। अनारक्षित यात्रिओंकी संख्या उपनगरीय सेवाओंकी वजह से बढ़ जाती है। खैर, आज हमारा विषय टिकट बुकिंग की संख्या का नही उसमे लाये जाने के सुधारों का है।
रेल यात्रियों और रेल फैन में आजकल अनावश्यक रूप से आरक्षित यानोंमें अनारक्षित यात्री का जबरन यात्रा करना बड़ा चर्चा का विषय है। आरक्षित स्लीपर कोचों में, आमतौर पर दिन की यात्रा में ऐसी कुव्यवस्था हमेशा ही देखी जाती रही है, मगर यह चलन अब वातानुकूल थ्री टियर, टु टियर कोचेस में भी सहज हो गया है। आरक्षित यात्रिओंके लिए ऐसा मन्जर बेहद परेशानी भरा रहता है। रेल मदत के ट्विटर अकाउंटपर आपको इस तरह की शिकायतें हर रोज दिखाई देंगी। जिसमे भी 90% यात्री इन परेशानियोंसे समझौता कर यात्रा कर लेते है। वैसे बचे 10% शिकायतकर्ताओंको भी यही अमूमन यही करना पड़ता है।
संक्रमण काल मे रेल विभाग ने सभी यात्री गाड़ियाँ आरक्षित कर दी थी। द्वितीय श्रेणी अनारक्षित कोचों को ‘2S’ आरक्षित द्वितीय सिटिंग में बदल दिया गया था। जिस यात्री के पास कन्फ़र्म टिकट है, केवल उसे ही प्लेटफार्म पर प्रवेश दिया जा रहा था। इससे विना आरक्षण यात्रिओंकी संख्या में उल्लेखनीय कमी दिखाई दी थी और आरक्षित कोच के यात्रिओंको काफी राहत होती थी, उन की रेल यात्रा सही मायनों में सुखद, सुरक्षित और आनंददायी हो रही थी।
रेल विभाग सीजन टिकट आबंटन के वक्त जता देता है, उपरोक्त टिकट पर आरक्षित कोच में यात्रा करने की अनुमति नही है, इसके बावजूद MST यात्री आरक्षित कोच धड़ल्ले से यात्रा करते है। PRS काउन्टर्स के वेटिंग लिस्ट टिकट धारक भी आरक्षित कोच में जमे रहते है। अब टिकट जाँच दल भी इन यात्रिओंसे केवल जुर्माना वसूलता है, इन्हें आरक्षित कोच से उतारता नही है। इस विषयमे काफी शिकायतें रेल विभाग के पास पहुंचती है और शायद ही कार्रवाई होती है। इधर रेल की आय में जुर्माने से मिलने वाली रकमोंमे रिकॉर्ड दर्ज कराए जा रहे, जाँच दल को इसके ऐवज में पुरस्कृत किया जा रहा है।
कुल मिलाकर आरक्षित यात्रिओंको होनेवाली सारी परेशानी, PRS काउन्टर्स के वेटिंग लिस्ट यात्रिओं, MST धारक और बेतहाशा आबंटित अनारक्षित द्वितीय श्रेणी टिकट धारकोंकी वजह से हो रही है। रेल प्रशासन को इन मदों पर नियंत्रण करना अब आवश्यक हो गया है। टिकट जाँच दल आरक्षित कोचोंमे इन अवांछनीय यात्रिओंपर नियंत्रण रखने में बिलकुल अक्षम मालूम पड़ रहा है। रेल विभाग इसे टिकट बुकिंग में निम्नलिखित सुधार कर नियंत्रित कर सकता है।
भारतीय रेलवे में आरक्षण प्रणाली में जिस तरह पूर्णतः अनारक्षित गाड़ियाँ सूचि में शामिल नही की जाती, उसी तरह जिन गाड़ियोंमे कन्फ़र्म टिकटें खत्म हो गयी हो वहॉं प्रतिक्षासूची टिकटोंका आबंटन बन्द करना चाहिए।

500 किलोमीटर से ज्यादा चलनेवाली गाड़ी में, (इंटरसिटी एक्सप्रेस गाड़ियाँ अर्थात केवल दिन में अपनी यात्रा पूर्ण करती हो उन्हें छोड़कर) द्वितीय श्रेणी अनारक्षित टिकट बुकिंग बिल्कुल बन्द की जानी चाहिए। यह गाड़ियाँ पूर्णतः आरक्षित ही हो। द्वितीय श्रेणी कोच को भी आरक्षित ‘2S’ में बदल देना चाहिए।

MST टिकट प्रणाली में पुनर्वलोकन की नितान्त आवश्यकता है। फिर यह अंतर 150 किलोमीटर के बंधन को घटाकर कम करना, केवल इंटरसिटी, डेमू, मेमू गाड़ियोंकी यात्रा के लिए अनुमति देना (चूँकि सवारी गाड़ियोंके परिचालन का निर्णय अब भी अनिर्णीत है), टिकट पर गाड़ी नम्बर अंकित करना इत्यादि हो सकते है। इसके अलावा MST धारक को टिकट का दुरुपयोग करते हुए पकड़े जानेपर दण्डित करने के बजाय उसे MST टिकट खरीदने के लिए समयोचित प्रतिबन्धित करना ज्यादा कारगर सिद्ध होगा।

आरक्षित टिकटोंकी फाइनल चार्टिंग में भी सुधार की एक सूचना है। हर गाड़ी के तत्काल जिस तरह एक फिक्स्ड समय याने गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशन से चलने के एक दिन पहले, सुबह 10 बजे वातानुकूल श्रेणियों और सुबह 11 बजे ग़ैरवातानुकूल श्रेणियोंमे शुरू किया जाता है। ठीक उसी तरह फाइनल चार्टिंग का समय देशभर की सभी गाड़ियोंके लिए फिक्स्ड, एक ही समय तय किया जाना चाहिए। इसके लिए रात 00:00 से लेकर दिन की 12:00 बजे तक शाम 18:00 बजे और दोपहर की 12:01 से लेकर रात 23:59 तक कि गाड़ियोंके लिए सुबह 06:00 बजे का समय तय होना चाहिए। फिलहाल सभी PRS चार्टिंग स्टेशन से गाड़ी छुटने के 4 घंटे पहले फाइनल चार्टिंग करते है। उनमें भी SR दक्षिण रेल्वे परिचालन समयसारणी से सटीक 4 घंटे पहले और बाकी PRS जिन गाड़ियोंका चार्टिंग समय रात 22:00 से सुबह 08:00 के बीच मे आता हो उन्हें रात 20:00 से 22:00 तक कभी भी अपनी सहूलियत अनुसार करते है जो यात्रिओंके लिए बेहद तकलीफ़देह साबित होता है। खैर, यदि प्रतिक्षासूची पर रेल विभाग कुछ मजबूती से निर्णय के लेता है तो इसकी ज्यादा आवश्यकता नही रहेगी।
रेलवे प्रशासन पर प्रतिक्षासूची के अनगिनत टिकटोंको जारी कर के अतिरिक्त धन उगाही का आरोप लगते रहता है। अब वक्त आ गया है, की रेल्वे प्रशासन अपनी नैतिकता शुद्ध रखते हुए अनावश्यक संख्या में जारी किए जानेवाले प्रतिक्षासूची के टिकट और द्वितीय श्रेणी टिकट पर लगाम लगाए।
लेख में ली गयी टिकटों की तस्वीरें इंटरनेट से ली गयी है और केवल प्रतीकात्मक है। इन अन्जान तस्वीरकर्ताओंके हम लेख में तस्वीरे उधृत करने के लिए आभार प्रकट करते है।
13 जानेवारी 2023, माघ, कृष्ण पक्ष, षष्ठी, विक्रम संवत 2079
पाचोरा – जामनेर ह्या नैरो गेज रेल्वेचे ब्रॉड गेज मधे रुंदीकरण आणि जामनेर हुन पुढे बोदवड पर्यंत विस्तार हे रेलवे विकास काम जळगाव जिल्ह्यात अदमासे नोव्हेम्बर 2023 पासून सुरु होण्याची अपेक्षा आहे. त्या सन्दर्भात जमीन मोजणी, अधिग्रहण इत्यादि कामे लवकरच सुरु होण्याची शक्यता आहे. परन्तु यानिमित्त रेलवे अधिकाऱ्यांचे पाहणी दौरे आधीच सुरु झालेले आहेत.
भुसावळ विभागाचे विभागीय रेल्वे व्यवस्थापक एस एस केडिया यांनी पाचोरा – जामनेर छोट्या नैरो गेज रेल्वे मार्गाची पाहणी केली. यासाठी त्यांनी भुसावळ ते पाचोरा टॉवर वॅगन ने आणि पाचोरा ते जामनेर रस्त्याने प्रवास केला.
पाचोरा नॅरो गेजचा प्लॅटफॉर्म, सी एण्ड डब्ल्यू विभाग आणि रेल्वे ट्रॅकची पाहणी केली.
वरखेडी, शेंदुर्णी, पहूर स्थानकांची पाहणी करतांना, नकाशा पडताळून आवश्यक त्या सूचना दिल्या.
पहूर स्थानकाच्या जवळ, वाघूर नदीवर बांधलेल्या ब्रिटिश कालीन पुलाचे निरीक्षण केले. हा पूल खूप जुना असून तो 1918 मध्ये बांधण्यात आला होता.
जामनेर स्थानकाची व आरक्षण केंद्राची पाहणी, जामनेर स्थानकावर नव्याने बांधण्यात येणाऱ्या रेल्वे संग्रहालयाच्या जागेची पाहणी करण्यात आली. योग्य ते बदल करण्यास आवश्यक त्या सूचना देण्यात आल्या.
पाहणीवेळी डॉ.शिवराज मानसपुरे वरिष्ठ विभागीय वाणिज्य व्यवस्थापक, वरिष्ठ विभागीय अभियंता समन्वय श्री.तरुण दंडोतिया, उपमुख्य अभियंता बांधकाम श्री.पंकज धावरे व इतर अधिकारी उपस्थित होते.



मीडिया मीडिया….☺️
आजकल हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी का दौरा घोषित हुवा नही की मीडिया वाले सबन्धित शहरों के लिए ‘वन्देभारत’ की अटकलें लगाना शुरू कर देते है। वैसे भी हम भारतीयों को रेलवे से इतना लगाव है, की यदि अखबारों, सोशल मीडिया के खबरों की TRP नापी जाती तो रेल से जुड़ी खबरें अव्वल 10 स्थान पर अवश्य ही रहती।
हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री इन्दौर शहर प्रवासी भारतीयों के सम्मेलन के लिए पहुंचे थे। स्थानीय मीडिया अपने अलग ही शबाब पर था। उन्होंने इन्दौर – जयपुर, इन्दौर – जबलपुर ऐसी वन्देभारत लगभग चलवा ही दी थी। समयसारणीयाँ प्रकाशित की जा रही थी। यहाँतक की मार्ग की खींचातानी भी शुरू हो गयी। भई, खिचड़ी पकी नही और जीमने वाले पत्तल पर जम गए।😊
इन्दौर रेल क्षेत्र पश्चिम रेलवे में पड़ता है। प रे से आधिकारिक बयान आया, हमारे तरफ इन्दौर से वन्देभारत चलवाने जैसी कोई सूचना नही है। जयपुर क्षेत्र NWR उपरे और जबलपुर क्षेत्र WCR पमरे से भी इन्दौर वन्देभारत गाड़ी चलाये जाने की किसी सूचना का खण्डन किया गया। तब जाकर मीडिया ऐसी चुप हुई की हम तो इस खबर से जुड़े ही ना थे।
हमारे माननिय प्रधानमंत्री जी के आगामी दौरे मुम्बई महाराष्ट्र और तेलंगाना में है और वन्देभारत गाड़ी की अटकलों ने फिर जोर पकड़ लिया है। सिकंदराबाद – विशाखापट्टनम देश की आठवीं वन्देभारत एक्स्प्रेस की आधिकारिक सूचना भी पहुंच गई है। वही मुम्बई – सोलापुर की खबर भी मीडिया में धूम मचा रही है। फिर से बता दें, मध्य रेल से कोई आधिकारिक सूचना नही है। मगर अटकलों का क्या? मुम्बई – सोलापुर के साथ साथ अब पुणे – सोलापुर भी चर्चाओं में जोर पकड़ रही है।

एक बात तय है, प्रत्येक क्षेत्र में वन्देभारत गाड़ियाँ चलनेवाली है, बस बात आगेपीछे, कल परसों ऐसी रहेंगी। जिस तरह मीडिया स्वयं प्रस्तावित ☺️वन्देभारत गाड़ियाँ चलवा देती है, यदि 500 किलोमीटर के भीतर चलनेवाली इंटरसिटी गाड़ियोंकी वक़ालत करे तो कितना अच्छा होगा?