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रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर : मुम्बई – हावड़ा वाया नागपुर

रेल विभाग में रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर अर्थात बिछी हुई पटरियों का बड़ा महत्व है। बीते वर्षोंसे रेल प्रशासन अपना रेल पटरियों का जाल बढाने की जद्दोजहद में लगा है। इकहरी का दोहरीकरण, तिहरी करण और कहीं कहीं तो चार चार लाइनोंपर भी गाड़ियाँ चल रही है।

हावड़ा – मुंबई नागपुर होकर, रेलवे का महत्वपूर्ण मार्ग है। इसका महत्व यात्री यातायात से ज्यादा मालगाड़ियोंके लिए ज्यादा माना जाता है। इस मार्ग पर कोयला, लोह अयस्क के बड़ी दमदार यातायात चलती है। हाल ही में, देशभर के विद्युत ताप घरोंमें कोयला सुचारू रूप से पहुंचे इस लिए दपुमरे झोन ने अपनी कई महत्वपूर्ण यात्री गाड़ियाँ एक महिनेके लिए रदद् कर दी। इससे आप इस मार्ग पर यातायात का कितना दबाव है यह समझ सकते है। इस पूरे मार्ग को चार लाइनोंवाला किया जा रहा है।

हावड़ा – मुम्बई वाया नागपुर मार्ग की हालिया स्थिति हमारे रेल प्रेमी मित्र और रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर के इनसाइक्लोपीडिया श्री गणेश अय्यर के साथ समझते है एक नजर में..

हावड़ा – संतरागाछी
दूरी – 7 किमी
स्थिति – चौथी लाइन चालू है
संतरागाछी – खड़गपुर
दूरी – 110 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन चालू है।
खड़गपुर – आदित्यपुर
खड़गपुर – कलाईकुंडा (9 किमी) तीसरी लाइन निर्माणाधीन
कलाईकुंडा-झारग्राम (30 किमी) तीसरी लाइन चालू है
झारग्राम-आदित्यपुर (101 किमी) तीसरी लाइन निर्माणाधीन है।
आदित्यपुर – चक्रधरपुर
दूरी – 67 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन चालू है।
चक्रधरपुर – राउरकेला
चक्रधरपुर – गोइलकेरा
दूरी – 33 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन चालू है
गोइलकेरा – मनोहरपुर
दूरी – 27 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन चालू है।
मनोहरपुर – बोंडामुंडा
दूरी – 30 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन चालू है
बोंदामुंडा – राउरकेला
दूरी – 7 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन चालू है। चौथी लाइन निर्माणाधीन है।
राउरकेला – झारसुगुडा
राउरकेला – कलुंगा (13 किमी) तीसरी लाइन निर्माणाधीन है
कलुंगा – राजगांगपुर (17 किमी) तीसरी लाइन चालू है
राजगांगपुर – तंगरमुंडा (28 किमी) तीसरी लाइन निर्माणाधीन है
तंगरमुंडा – झारसुगुड़ा (43 किमी) तीसरी लाइन चालू है।
झारसुगुड़ा – चाँपा
दूरी – 152 किमी
झारसुगुडा – ब्रजराजनगर (12 किमी) तीसरी लाइन चालू है
ब्रजराजनगर – बेलपहाड़ (9 किमी) चौथी लाइन चालू है
बेलपहाड़ – रॉबर्टसन (77 किमी) तीसरी लाइन चालू है। चौथी लाइन निर्माणाधीन है।
रॉबर्टसन – झराडीह (14 किमी) चौथी लाइन चालू है
झरडीह – सरगांव (31 किमी) तीसरी लाइन चालू है। चौथी लाइन निर्माणाधीन है।
सरगांव – चाँपा (8 किमी) चौथी लाइन चालू है
चाँपा – राजनांदगांव
दूरी – 229 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन चालू है। सरोना और उरकुरा के बीच चौथी लाइन भी चालू है।
राजनांदगांव – कलुमना
राजनांदगांव – डोंगरगढ़ (31 किमी) तीसरी लाइन निर्माणाधीन
डोंगरगढ़ – पनियाजोब (8 किमी) तीसरी लाइन चालू है
पनियाजोब – बोरतलाव (9 किमी) तीसरी लाइन निर्माणाधीन है
बोरतलाव – दारेकसा (8 किमी) तीसरी लाइन चालू है
दरेकासा – तुमसर रोड (98 किमी) तीसरी लाइन निर्माणाधीन
तुमसर रोड – भंडारा रोड (18 किमी) तीसरी लाइन चालू है
भंडारा रोड – कलुमना (56 किमी) तीसरी लाइन निर्माणाधीन
कलुमना – नागपुर
दूरी – 5 किमी
स्थिति – डबल लाइन चालू है।
नागपुर – वर्धा
दूरी – 79 किमी
स्थिति – बुटीबोरी – सिंदी (18 किमी) तीसरी और चौथी लाइन चालू। बाकी सेक्शन में काम चल रहा है।
वर्धा – भुसावल
दूरी – 314 किमी
स्थिति – डबल लाइन चालू है।
भुसावल – जलगांव
दूरी – 24 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन चालू है। चौथी लाइन निर्माणाधीन है।
जलगांव – मनमाड
दूरी – 160 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन निर्माणाधीन।
मनमाड – इगतपुरी
दूरी – 124 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन स्वीकृत।
इगतपुरी – कसारा
दूरी – 16 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन चालू है
कसारा – कल्याण
दूरी – 67 किमी
स्थिति – तीसरी लाइन निर्माणाधीन।
कल्याण – लोकमान्य तिलक टर्मिनस
दूरी – 37 किमी
स्थिति – 5 – 6 वीं लाइन चालू है।

इस लेख सभी मैप, http://www.indiarailinfo.com के सौजन्य से।

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रेलवे स्टेशनोंपर यात्रीयोंके लिए मूलभूत सुविधाएं

रेल प्रशासन अपने यात्रिओंको रेलवे स्टेशनोंपर कुछ मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराता है। हाल ही में इन सुविधाओं का जायजा लेने रेलवे की PAC पेसेन्जर एमिनिटीज कमिटी मध्य रेलवे के भुसावल मण्डल का दौरा कर रही है। PAC कमिटी संसद सद्स्योंके बीच से बनाई जाती है और कमिटी सदस्यों का कार्य रेलवे द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली यात्री सुविधाओंकी परिस्थिति को समझना और सुधार करने की सूचना करना यह है। सर्वप्रथम हमे यह समझना होगा की रेल प्रशासन, यात्रिओंको कौन कौनसी यात्री सुविधा मूलभूत प्रकारसे, प्राथमिकता से उपलब्ध कराना आवश्यक है।

रेल विभाग ने सर्वप्रथम 1952 में यात्री सुविधाओं के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। इसके बाद 1995, 1999, 2003 एव 2007 में इस सुची का सुधार किया गया। उक्त सूची 2016 की है। यात्री सुविधाओं का स्तर रेलवे स्टेशन का वर्ग, यात्री संख्या, स्टेशनकी विशेषता अर्थात तीर्थस्थान, पर्यटन केंद्र या औद्योगिक केंद्र इत्यादि, उपलब्ध निधि इन चार मदों से तय किया जाता है।

स्टेशन की कैटेगरी इस प्रकार तय होती है।

न्यूनतम आवश्यक यात्री सुविधाए :- टिकट बुकिंग, प्लेटफार्म, शेड / छांव के पेड़ (छोटे स्टेशन) पेय जल, गाड़ी की प्रतीक्षा करनेवाले यात्रिओंके लिए हॉल, बैठने हेतु आसन व्यवस्था, स्टेशन की समयसारणी

अनुसंशित यात्री सुविधाएं :- यह सुविधाए स्टेशन के स्तर और यात्री मांग अनुसार उपलब्ध कराई जाती है। ठण्डा पेय जल के लिए वॉटर कूलर्स, सार्वजनिक उद्घोषणा, संगणक द्वारा उद्घोषणा, वाहन तल अर्थात पार्किंग सुविधा, सार्वजनिक शौचालय, पब्लिक फोन, एटीएम इत्यादि

वांछित यात्री सुविधाएं :- यह सुविधाएं भी स्टेशन के स्तरानुसार होती है। कैटरिंग एवं फूड स्टॉल, बुक स्टॉल, दवा या कटलरी के स्टॉल्स, ट्रेन इंडिकेटर, कोच इंडिकेटर, एस्कलेटर, लिफ्ट्स, रैम्प, वातानुकूलित वेटिंग हॉल्स, रिटायरिंग रूम्स इत्यादि

इसके अलावा दिव्यांग यात्रियों, महिला यात्रियों के लिए सुविधाओंका प्रावधान किया जाता है।

यहां हम मध्य रेल की वेबसाइट cr.indianrail.gov.in के सौजन्य से यात्री सुविधाओंके बारे लिखी जानकारी आपके लिए उधृत कर रहे है।

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मुम्बई की वातानुकूल उपनगरीय गाड़ियोंकी सूची 14 मई से लागू

14 मई से सभी हार्बर लाइन वातानुकूल उपनगरीय गाड़ियाँ हटाई जा रही है। मध्य रेलवे उन्हें मुख्य लाइन पर स्थानांतरित कर रहा है। इससे मुख्य मार्ग की 12 वातानुकूल सेवाएं बढ़ेगी। साथ ही कुछ सेवाएं यात्री मांग अनुसार छुट्टियों के दिनोंऔर रविवार को भी चलाई जाएंगी।

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आत्ता सोलापुरी दणका! दौंड जवळ म रे चा 17 दिवस रेल ब्लॉक ; 25 गाड्या रदद्, 5 आंशिक रदद्, 8 गाड्या मार्ग परिवर्तन करतील

मध्य रेलवे चे हे परिपत्रक पहा आणि त्याप्रमाणे आपल्या रेलवे प्रवासाचे नियोजन करून घ्या.

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अरे! यह क्या? कैंसल्ड?

पश्चिम रेलवे रतलाम मण्डल में आखिर यह चल क्या रहा है? डॉ आंबेडकर नगर महू – सनावद के गेज रूपांतरण में सर्वे सर्वे वाला खेल अचानक निविदाएं बुलाना, निविदाएं रदद् करना कैसा हो गया?

अभी अभी तो इस क्षेत्र में लोगोंके चेहरोंपर मुस्कान लौटी थी की नर्मदाजी पर रेल पुलिया का टेण्डर निकला है, और आज क्या देखते है की वह टेण्डर ‘कैंसल्ड’ दिखा रहा है?

इस क्षेत्र के लोग, रेल अधिकारियोंके इन बाजीगरीयोंसे बिल्कुल ही उकता गए है और जिस तरह इंदौर के ताई, भूतपूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन बोल गईं थी की उनकी नजरोंके सामने शायद ही यह गेज कन्वर्शन पूरा होगा, उसी तरह आम जनता भी सोचने लग गयी है। कहाँ एक वह हुकुम देने वाले होळकर और 3-4 वर्षोंमें गाड़ी चलवा देने वाले ब्रिटिश और कहाँ यह आज के रेल इंजीनियर और उनके राजनीति वाले आका?

अरे भाई, आपसे नही हो पा रहा तो पुरानी गेज पर छोटी गाड़ियाँ ही चलवा दीजिये और नही तो यह घोषित कर दीजिए की न आपसे सर्वे हो रहे न ही पुल और सुरंगे। या यह कह दीजिये की आप नही चाहते की इस क्षेत्र से बड़ी लाइन हो, सीधी गाड़ियाँ चले और क्षेत्र का विकास हो।