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द म रेल SCR में रेल ब्लॉक, गाड़ियाँ की जाएगी रद्द

द म रेल के विजयवाड़ा – गुड़ीवाड़ा खण्ड पर विजयवाड़ा उत्तर पूर्व कैबिन से लेकर उप्पालुरु स्टेशन के बीच रेल दोहरीकरण के कार्यमे एन आई और प्री एन आई के दिनांक 07 अगस्त से 14 अगस्त तक, आठ दिन के काम के लिए रेल ब्लॉक लिया जा रहा है। उपरोक्त कार्य के चलते 18 मेल/एक्सप्रेस विशेष, 4 सवारी विशेष और 2 पार्सल विशेष गाड़ियाँ निम्नलिखित कार्यक्रम के अनुसार रद्द रहेंगी। 9 गाड़ियोंको परावर्तित मार्ग से चलाया जाएगा और 2 गाड़ियोंको रिशेड्यूल किया जाएगा। साथही 3 गाड़ियोंको शॉर्ट टर्मिनेट और 4 गाड़ियोंको शॉर्ट ओरिजिनेट किया जाएगा।

रद्द की गई गाड़ियाँ

परावर्तित मार्ग से चलनेवाली गाड़ियाँ एवं समय बदलाव रिशेड्यूल की गई गाड़ियाँ

शार्ट टर्मिनेट/ओरिजिनेट की जानेवाली गाड़ियाँ

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रेल यात्रा एक जैसी और किराया अलग अलग, समझते है स्पेशल एवं फेस्टिवल स्पेशल गाड़ियोंका फर्क

प्रोपोगंडा, भ्रम ऐसे मायाजाल है, की अच्छे अच्छोंकी परमभक्ति, अपार विश्वास भी टूट कर बिखर जाए। अखबारोंके स्थानीय वार्तापत्र के जरिए बड़ी बड़ी हेडलाइन्स में किरायोंके फर्क डालकर यात्रिओंके गले मे यह उतारा जाता है, रेल का किराया ज्यादा ले कर यात्रिओंको लूटा जा रहा है, मगर उसके पीछे क्या गणित है, तर्क या कारण क्या है इसको कोई रखने के लिए तैयार नही। क्या करें शायद वह लोगोंको तर्क की तह तक पहुंचने ही नही देना चाहते हो, खैर।

संक्रमण काल के बाद जब यात्री रेल गाड़ियोंको शुरू किया गया तो सबसे पहले उद्देश्य यही था, की जरूरतमन्द यात्री अपने गन्तव्यतक, घरोंतक पहुंच जाए और शुरुआत में केवल राजधानी गाड़ियोंको पटरी पर लाया गया। लम्बे दूरी के यात्री जो कामकाज से आए और विभिन्न शहरोंमें अटक गए, वह अपनी जगह सुनिश्चितता से, तेज गति और कम स्टापेजेस के साथ पहुंचे। संक्रमण काल में किस तरह प्राथमिकताएं निभाए इसका अनुभव तो किसी को नही था। जरूरत और प्रयोग के अंदाज में गाड़ियाँ बढ़ाई गई। चूँकि नियमित गाड़ियोंके सभी आरक्षण रद्द कर नए सिरे से गाड़ियाँ चलानी थी, इसके लिए पुरानी व्यवस्था, ‘स्पेशल और फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन्स’ का सहारा लिया गया। सारी गाड़ियोंको ‘0’ नम्बर से शुरू कर क्रमांक निश्चित किए गए, ताकि आपातकाल में गाड़ियाँ रद्द भी करनी पड़े तो ढांचागत सुविधाओंपर अतिरिक्त बोझ न आए। राज्योंको स्वास्थ्य सुविधा और निर्बंध का जिम्मा दिए जाने के चलते केवल उनके अनुरोध और अनुमती को मद्देनजर रखकर ही गाड़ियाँ कम ज्यादा करना या स्टापेजेस को शुरू या बन्द करना इनके निर्णय लिए जा रहे थे और अभी भी वही व्यवस्था कायम है। गाड़ियोंका नियमन पूर्णतयः राज्य प्रशासन के ही अधीन है

अब रही बात किरायोंके फर्क की तो रेल विभाग दो तरह की गाड़ियाँ चलवा रहा है। विशेष गाड़ियाँ जो नियमित किरायोपर चलती है और दूसरी उत्सव विशेष गाड़ियाँ जिनके किराए कुछ निर्बंध के कारण ज्यादा है। यात्रीगण कृपया यह बात ध्यान में ले ले, की इन सभी उत्सव गाड़ियोंका किराया, विशेष गाड़ियोंके किराया अधिनियम क्रमांक 30/2015 के वाणिज्य परीपत्रक में दिया गया है।

यही है वाणिज्यिक परीपत्रक 30/2015

railduniya.in इन उत्सव या फेस्टिवल गाड़ियोंके किरायोंका गणित नियमित मेल/एक्सप्रेस के किरायोंपर ही आधारित है, द्वितीय श्रेणी के किराए मुलभूत (बेसिक) किरायोंसे 10% ज्यादा होंगे और बाकी सारे श्रेणियोंमे याने स्लिपर क्लास, वातानुकूलित 1,2,3 टियर, चेयर कार आदि में 30% तक ज्यादा रहेंगे।

टिकट बुकिंग के लिए डिस्टेन्स रिस्ट्रिक्शन्स याने यात्रा दूरी का बंधन भी रहेंगा। द्वितीय श्रेणी सेकन्ड क्लास सिटिंग के लिए 100 km, वातानुकूलित चेयर कार के लिए 250 km, वातानुकूलित प्रथम श्रेणी के लिए 300 km और स्लिपर क्लास, वातानुकूलित 2, 3 टियर के लिए 500 km कमसे कम अंतर का किराया देय होगा।

इसका मतलब यह है, की आप भलेही 200 किलोमीटर की टिकट स्लिपर क्लास में बुक करते है, लेकिन आपको तय 500 किलोमीटर को जितना बेसिक किराया लगता है वह देना होगा और इतर जोड़ गणित भी देख लीजिए। उस बेसिक किरायोंमे 30% ज्यादा जोड़ने के बाद जो रकम आएगी वह होगा आपका ‘उत्सव स्पेशल’ का बेसिक किराया। और सुपरफास्ट चार्जेस, आरक्षण शुल्क ई. अतिरिक्त चार्जेस मिलाकर आपको किराया देना होगा।

क्षेत्रीय रेलवे, जो यह ट्रेन को चला रही है, सोचती है की एक दिशा में ही गाड़ी पूर्ण यात्री क्षमता से चल रही है और वापसी में खाली तो वह क्षेत्रीय रेलवे का निर्णय होगा कि एडिशनल 10 से 30 प्रतिशत किराया ले या न ले।

विशेष और उत्सव विशेष दोनोंही प्रकार की गाड़ियोंके किरायोंमे दिव्यांग और मरीजोंकी रियायत को छोड़कर, किसी भी तरह के रियायती टिकट की बुकिंग नही दी जाएगी।

तत्काल कोटा की बुकिंग भी नही होगी, यज्ञपी क्षेत्रीय रेलवे चाहे तो प्रीमियम तत्काल बुकिंग, यात्रिओंकी ज्यादा मांग होनेपर शुरू कर सकती है।

रेल प्रशासन यह चाहता है, की केवल जरूरतमन्द यात्री ही रेल यात्रा करे। राज्य परिवहन की बसें, टैक्सी या निजी वाहन की यात्री क्षमता रेल गाड़ियोंसे कई गुना कम रहती है। इसके अलावा यह सारे वाहन राज्य सीमा के अंर्तगत होने के कारण राज्य प्रशासन इसपर आसानी से नियंत्रण ला सकता है, मगर रेल गाड़ियाँ हज़ारों किलोमीटर, अलग अलग राज्योंसे चलकर आती है इसलिए उनके ऊपर स्थानीय नियंत्रण रखना इतना आसान नही है। यही उद्देश्य सामने रख कर रेल प्रशासन ने इतने सारे नियम, निर्बंध और अतिरिक्त किरायोंको लगाए रखा है, स्टापेजेस रद्द किए है, ताकी कमसे कम स्थानिक यात्री तो भी लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे यात्रा करना टाले। आपने देखा होगा कि बहुतांश उत्सव गाड़ियाँ लम्बी दूरी की, साप्ताहिक या द्विसाप्ताहिक ही है, प्रतिदिन चलनेवाली या इन्टरसिटीज नही।

यदि आप प्रशासन के इन प्रयासोंको सकारात्मक ढंग से समझने का प्रयत्न करते है, तो आपको यह पता चलेगी की सारी कवायद यात्री और इस आपातकाल में अपनी जान जोखिम में डाल कर भारत की जनता को सेवा देनेवाले रेल कर्मियोंकी सुरक्षा को प्राधान्य स्तर पर रखकर ही की जा रही है। अतः केवल आवश्यक कार्य हो तो ही यात्रा कीजिए। यह वक्त घूमने, फिरने, पर्यटन या धर्मस्थलों पर जाने का नही है। सुरक्षित रहिए, स्वस्थ रहिए।

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उत्तर रेलवे की दो महत्वपूर्ण गाड़ियाँ, हरियाणा एक्स और दिल्ली भिवानी सवारी जिसे अब हिसार तक विस्तारीत किया गया है, अगस्त के दूसरे सप्ताह से भरेगी फर्राटा

पुरानी 14085/86 तिलक ब्रिज सिरसा तिलक ब्रिज हरियाणा एक्सप्रेस नए विशेष गाड़ी क्रमांक और बदले समयानुसार दिनांक 08 अगस्त से 04087 तिलक ब्रिज से और दिनांक 09 अगस्त से 04088 सिरसा से प्रतिदिन चलना शुरू करेगी। कृपया निम्नलिखित समयसारणी पर गौर करे।

पुरानी 54423/24 दिल्ली जंक्शन भिवानी दिल्ली जंक्शन सवारी गाड़ी को नए विशेष गाड़ी क्रमांक और बदले समयानुसार, भिवानी से हिसार तक अनारक्षित मेल/एक्सप्रेस के रूपमे चलाया जाएगा। दिनांक 07 अगस्त से 04089 दिल्ली जंक्शन से और दिनांक 08 अगस्त से 04090 हिसार से प्रतिदिन चलना शुरू करेगी। कृपया विस्तारित और बदली हुई समयसारणी पर गौर करे।

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भारतीय रेलवे की आरक्षित टिकिट, एक तुलनात्मक चर्चा

भारतीय रेल की टिकट आरक्षण प्रणाली में दो तरह से टिकट निकाले जा सकते है। पहला है, आरक्षण केंद्र पर जाकर PRS छपा हुवा टिकट और दूसरा है ई- टिकट। वैसे आई- टिकट भी है जो बुक तो इंटरनेट से होता है मगर छापकर आपके घर पोहोचाया जाता है। आज हम ई-टिकट और PRS टिकट की बात करते है।

बहुत से यात्री ई-टिकट के बारे में जानते है, समझते है इसके बावजूद PRS टिकट को ही प्राधान्य देते है। ई-टिकट यात्री के लिए बहुत सुविधाजनक है। इस टिकट को वह अपने घर बैठे या मोबाईल ऍप के जरिए चलते फिरते चाहे किसी जगह हो तुरन्त ही खरीद सकता है। बशर्ते उसके पास इलेक्ट्रॉनिक संचार व्यवस्था हो, डिजिटल पेमेन्ट की सुविधा हो। वही PRS टिकट के लिए यात्री को आरक्षण केंद्र पर जाना होता है, आरक्षण फॉर्म भरना पड़ता है, टिकट का मूल्य चाहे नगद या डिजिटल में चुकाकर एक छपा टिकट प्राप्त करना होता है। यही पद्धति टिकट को रद्द करना हो तो अपनानी पड़ती है, चाहे आपका टिकट कन्फर्म हो या वेटिंग लिस्ट। ई-टिकट में वेटिंग लिस्ट टिकट, चार्टिंग होने के बाद भी वेटिंग रह जाए तो अपने आप रद्द हो जाते है। टिकट में बदलाव करना हो, जैसे बोर्डिंग चेंज या पार्शल कैन्सलिंग तो घर बैठे ही किए जा सकते है, वही PRS टिकट के किसी भी बदलाव के लिए आरक्षण केंद्र की दौड़ लगानी पड़ती है। ई-टिकट में आईआरसीटीसी और बैंक का सेवा शुल्क अतिरिक्त लगता है। शायद यह भी एक वजह है, की बहुत से यात्री PRS टिकट खरीदते है।

हमारे एक मित्र है, जो अक्सर PRS टिकट ही खरीदकर रेल यात्रा करते रहते है। हमने उनसे ई-टिकट के प्रति अनास्था का कारण पूछा तो उन्होंने एक बड़ा मजेदार उत्तर दिया। छपा टिकट हाथमे हो तभी रेल यात्रा का फील आता है। जो ई-टिकट हो तो ऐसा लगता है, कहीं WT (बीना टिकट) तो यात्रा नही न कर रहे? खैर। चर्चा जब अलग अलग व्यक्तियोँ से की गई तो अन्दर की बात कुछ और भी होती है यह समझ आया। एक व्यवसायी ने कहा, कैश में टिकट लिए तो अकाउंट का, आइडेंटिटी का झंझट नही।

किसी किसी यात्री को ई-टिकट निकालना यही बहुत बड़ी समस्या लगती है। जितना समय PRS केंद्र पर जाकर टिकट निकालने में लगता है, उससे कई ज्यादा समय ई-टिकट के एंट्रीज में लगता है। खास तो वह उनका ‘कैप्चा’ यह कितनी ही बार फीड करें तो भी वह इनवैलिड ही बताता है। पेमेन्ट में अलग परेशानी। वहां पेमेन्ट जमा हो जाती है, और टिकट ही नही बनती। ऐसा दो-तीन बार हो जाए तो या तो बुकिंग्ज फूल हहो कर ‘नॉट अवेलेबल’ की तख्ती सामने आ जाती है। न घर के न घाट के। टिकट भी गया और पैसा भी। रिफण्ड आएगा 3-4 दिन में।

ओनवर्ड जर्नी या कनेक्टिंग जर्नी यह ई-टिकट में एक और बड़ा झमेला है। समझिए आपके गन्तव्य के लिए आपके स्टेशन से सीधे गाड़ी नही है और आप दो हिस्से में यात्रा कर रहे है तो यह बेहद जरूरी है की आपकी दोनों आरक्षित टिकट लिंक हो, एक दूसरे से कनेक्ट हो। गाड़ियाँ समयपर चले तो बेहतर है, मगर आपकी पहली गाड़ी आपके कनेक्टिंग स्टेशन पर देरी से पहुंचे और तब तक आपकी दूसरी गाड़ी निकल जाए तो कनेक्टिंग ई-टिकट में आपको छूटी हुई गाड़ी का फूल रिफण्ड मिल सकता है और जो कनेक्टिंग टिकट नही है तो गयी भैंस आई मीन आपका टिकट पानी मे। वही PRS टिकट में एक प्रावधान और मिलता है, आप स्टेशनमास्टर से आपकी टिकट पर अगली गाड़ी से यात्रा की अनुमती ले कर आगे बढ़ सकते हो। फिजिकल टिकट और ई-टिकट में यह सबसे बड़ा फर्क हमे नजर आया।

PRS टिकट का ग़ैरफ़ायदा भी बहुत यात्री लेते है, जैसे चार्टिंग के बाद टिकट वेटिंगलिस्ट रह जावे तो भी उसी टिकट पर अपनी यात्रा करते रहते है। यह बताते है की उन्हें उनके वेटिंगलिस्ट टिकट की ताजा स्थिति पता नही, या टिकट बाबू ने बोला गाड़ीमे पता चल जाएगा। हमने यह कुछ बातें आपके सामने लाई है, कुछ और भी आपको पता हो या प्रैक्टिकल जानकारी हो तो हमे जरूर बताए।