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समयसारणी का रुख किस ओर?

रेलवे की समयसारणी, क्या आप ने कभी पढ़ी है? अब आप बोलेंगे, समयसारणी भी कोई पढ़ने की चीज है, वह कोई नॉवेल या साहित्य थोड़े ही है जो उसे पढ़ेंगे? वह तो बस रेफरेन्स के लिए ठीक है, और आजकल तो ऑन लाइन चेक कर लीजिए काम हो जाता है।

मित्रों, आपको सुनकर आश्चर्य होगा, कई लोग रेलवे की समयसारणी देखते हुए घंटो बिता सकते है। गाड़ियाँ कैसे चलती है, एवरेज स्पीड क्या है, कहांपर लूज टाइमिंग्ज दिए गए है, कौनसी ट्रेन दूसरी गाड़ी को ओवरटेक कर रही है, बड़ा ही मजेसे समय कटता है। खैर! हम व्यर्थ ही हमारे सम्भाषण को लूप लाइन में लेकर चले गए। हमारा कहना है, आज कल के रेल गाड़ियोंकी एक्सटेंशन की माँग वाले ट्रेंड पर। जिसे देखो वह अपने चहेते स्टेशनपर गाड़ियोंको खींचने की बात करते दिखाई देता है। क्या यात्री संगठन और क्या सांसद, सभी लोग बड़े आसानी से फलाँ गाड़ी को हमारे स्टेशन तक विस्तारित करने की माँग पत्र रेल प्रशासन को थामते रहते है। रेल प्रशासन भी बड़ी आसानी से लम्बी लम्बी गाड़ियोंको और थोड़ा, और थोड़ा खींचकर उनकी पहलेसे ही लम्बी यात्रा को और लम्बी करते रहता है।

यह जो गाड़ियाँ खींचने का पैटर्न है, इससे जंक्शनोंका महत्व कम कम होते जा रहा है। पहले यात्री लोग ब्रांच लाइनोंसे जंक्शन स्टेशन तक आ कर मुख्य मार्ग की गाड़ियोंमे अपनी आगे की यात्रा करते थे। अब यह जंक्शन, ब्रांच लाइन, मैन लाइन वाली संकल्पना रह ही नही गयी है। कोई एक गाड़ी कई ब्रांच लाइनोंसे गुजर कर बीच मे मैन लाइनपर आती है, फिर किसी ब्रांच लाइन के स्टेशनपर जाकर समाप्त हो जाती है। यह स्वरूप लोकप्रिय तो है लेकिन रेलवे की मुख्य संकल्पना को बाधित करने वाला है, तभी जब रेलवे ने अपनी समयसारणी को ज़ीरो बेस पर लाकर पुनर्रचित करने की सोची तो सबसे पहले उन्होंने लिंक एक्सप्रेस बन्द कर दी, फिर लम्बी दूर की मन्दगति से चलनेवाली एक्सप्रेस को समयसारणी के बाहर किया, किसी एक विभाग से दूसरे विभाग में याने इन्टरडीविजनल सवारी गाड़ियोंको किसी एक ही डिवीजन तक सीमित करने का काम किया।

यात्री संगठन और गाड़ियोंका विस्तार मांगनेवाले राजनियकोंको यह बात समझ लेना चाहिए, आप जितनी गाड़ियोंकी दूरी उसका चालान विस्तार करके लम्बी खींचते चले जाओगे उतनी ही उनकी एवरेज स्पीड गिरते चली जाएगी, लूज टाइमिंग्ज बढ़ेंगे, यात्रिओंके संख्या में असमानता आयेंगी। उदाहरण के लिए कोल्हापुर गोंदिया महाराष्ट्र एक्सप्रेस लीजिए, इसमें कितने यात्री एंड टू एंड यात्रा करते होंगे? वैसे ही हावडा से श्रीगंगानगर तक 114 स्टापेजेस लेने वाली तूफान एक्सप्रेस, बांद्रा से देहरादून के बीच 98 स्टापेजेस, मुम्बई से फ़िरोजपुर के बीच 94 स्टापेजेस वाली इन गाड़ियोंमे भी शायद ही कोई एंड टू एंड चलनेवाले यात्री रहते होंगे। ऐसे कई उदाहरण ढूंढे जा सकते है।

इस पर इलाज यह है, यात्रिओंने कनेक्टिंग ट्रेन्स की मांग रखनी चाहिए। कनेक्टिंग ट्रेन्स याने किसी एक मार्ग से दूसरे मार्ग के सिरे तक जाने वाली गाड़ी। इसका उदाहरण ऐसा होगा, भोपाल स्टेशन ग्रांट ट्रंक मार्ग का बड़ा स्टेशन है और इसके आसपास पश्चिम रेलवे की कई ब्रांच लाइन आती है। उज्जैन, इन्दौर, रतलाम, नागदा इन स्टेशनोंको नागपुर, रायपुर, दक्षिण के, पूर्व के बड़े स्टेशनोंसे सीधी गाड़ियाँ न के बराबर है। ऐसे में रतलाम से उज्जैन होते हुए या इन्दौर होते हुए भोपाल तक मुख्य मार्ग की प्रीमियम गाड़ियोंसे कनेक्टिंग ट्रेन्स मिल जाए तो यहांके यात्रिओंकी बहोत सारी समस्या खत्म हो जाएगी। एक साप्ताहिक वलसाड पूरी ट्रेन को हाल ही में घूमते घुमाते जाने के बजाए सीधे मार्ग से चलाने का रेल प्रशासन के निर्णय पर आपत्ति उठाए जा रही है, लेकिन यह गाड़ी के बजाए यदि कोई कनेक्टिंग ट्रेन नागपुर तक मिल जाए तो पूरी जाने के लिए ढेर ऑप्शन यहां के यात्रिओंको मिलेंगे।

यह ठीक हब एंड स्पोक की परिभाषा है। इसके फायदे यह है, की कनेक्टिंग ट्रेनें न सिर्फ रोजाना बल्कि दिन में 2,3,4 फेरोंवाली भी हो सकती है, जब कि लम्बी दूरी की गाड़ी साप्ताहिक या द्विसाप्ताहिक ही मिल पाएगी। दूसरा डेली या ज्यादा फेरोंके चलते, कनेक्टिंग जंक्शन तक जगह की कोई परेशानी नही। तीसरा जैसे ही आप हब पर पोहोंच रहे हो आपको ट्रेन्स के ढेरों ऑप्शन मिल सकते है और ट्रेन्स ही क्यों सड़क मार्ग या हवाई मार्ग भी आपके लिए खुले है।

यह हब एन्ड स्पोक संकल्पना न सिर्फ रेलवे के सुनियोजन के लिए बल्कि आम यात्रिओंके अविरत सेवाओंके लिए भी बेहद कारगर है। यात्री संगठनोंको यह बात यदि पल्ले पड़ती है तो वह बजाय लम्बी लम्बी नई ट्रेनों की मांगों और पुरानी गाड़ियोंके बेवजह मार्गविस्तारोंके पीछे पड़े, छोटी छोटी कनेक्टिंग इण्टरसिटी, मेमू ट्रेन्स की ही मांग करेंगे। और हमारा दावा है की इस तरह की उनकी मांग प्रशासन की ओरसे, बड़ी आसानी से स्वीकृत भी हो सकती है।

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दुर्ग भोपाल दुर्ग अमरकंटक स्पेशल शुरू किए जाने की घोषणा

02853 दुर्ग भोपाल अमरकंटक स्पेशल, दुर्ग से 01 अक्तूबर से चल पड़ेगी तो वापसी में 02854 भोपाल दुर्ग अमरकंटक स्पेशल दिनांक 02 अक्तूबर से शुरू होने जा रही है। कृपया परीपत्रक देख ले।

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महाराष्ट्र मे भी राज्यान्तर्गत रेल गाड़ियाँ शुरू की जाए

संक्रमण के लॉक डाउन के बाद पूरे देश मे अनलॉक प्रकिया शुरू हो चुकी है। दुकानें, व्यापार, व्यवसाय, प्रोड्क्शन यूनिट्स खोले जा रहे है। महाराष्ट्र राज्य शासन ने भी “मिशन बिगिन अगेन” नाम से अनलॉक प्रकिया को शुरू किया है।

जिस तरह संक्रमण काल मे देश की आम जनता ने शांति और संयम से काम लिया है, उसी प्रकार से इस अनलॉक काल मे भी उसे जारी रखना जरूरी है, और रखा भी जा रहा है। महाराष्ट्र के महानगरोंमें उद्योग और व्यापार अब गति पकड़ रहे है। इन संस्थानोंको कर्मचारियोंकी, श्रमिकोंकी जरूरत पड़ने लगी है। व्यापारी प्रतिष्ठान अपने कर्मचारियोंको और औद्योगिक संस्थाए अपने श्रमिकोंको,मज़दूरोंको वापस अपने कामोंपर हाजिर होने के लिए बुला रहे है। विद्यार्थी और परीक्षार्थिभी अपनी कॉम्पिटिशन एग्जाम्स के लिए शहरोंका रुख करने लगे है। शासकीय, ग़ैरशासकीय, निजी दफ़्तरोमे अच्छीखासी चहलपहल रहने लगी है। लेकिन इतने लोगोंके लिए छोटे गांवों, शहरोंसे महानगरोंमें अपने कामपर जाने के लिए सड़क मार्ग के अलावा दूसरे पर्याय खास कर के रेल उपलब्ध नही है।

महाराष्ट्र में इन महानगरों को जोड़नेवाली महत्वपूर्ण रेल गाड़ियाँ अभी भी उनके यार्ड में खड़ी अनुमति का इंतजार कर रही है। इन महानगरोंके लिए अभी जो भी स्पेशल गाड़ियाँ चल रही है वह उत्तरप्रदेश या बिहार, केरल या कर्णाटक से लम्बी दूरी से आनेवाली गाड़ियाँ है, जिसमे प्रदेश के लोगोंको टिकट उपलब्ध नही हो पाता। रेलवे ने नियम कर रखा है बिना आरक्षण के यात्रा नही की जा सकती और लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे कम दूरी के यात्रिओंको कन्फर्म आरक्षण खाली नही मिलता। हमारा राज्य शासन से आग्रह है, कामकाज निमित्त प्रदेश की जनता का आवागमन सुचारू होना नितांत जरूरी है और इस हेतु निम्नलिखित गाड़ियाँ शीघ्रता से शुरू किए जाने की जरूरत है।

मुम्बई से पुणे होते हुए सोलापुर के लिए सिध्देश्वर एक्सप्रेस और हुतात्मा एक्सप्रेस।

मुम्बई पुणे के बीच इंद्रायणी, डेक्कन क्वीन और डेक्कन एक्सप्रेस

मुम्बई नागपुर के बीच सेवाग्राम एक्सप्रेस और विदर्भ एक्सप्रेस

मुम्बई नान्देड के बीच तपोवन एक्सप्रेस और देवगिरी एक्सप्रेस और मुम्बई जालना जनशताब्दी एक्सप्रेस

मुम्बई सावंतवाड़ी के बीच तुतारी एक्सप्रेस चलाई गई है, वैसे ही एक गाड़ी दिन में भी चलनी चाहिए, जनशताब्दी या मांडोवी एक्सप्रेस शुरू की जानी चाहिए।

पुणे से नागपुर के बीच चलनेवाली एक्सप्रेस और गरीबरथ एक्सप्रेस, पुणे से काजीपेठ के बीच भुसावल, अकोला वर्धा होकर चलनेवाली आनंदवन एक्सप्रेस और औरंगाबाद, नान्देड होकर चलनेवाली ताडोबा एक्सप्रेस भी शुरू की जानी चाहिए।

अभी हालात तो ऐसे है, की भारतीय रेलवे और राज्य शासन सवारी गाड़ियोंसहित सभी गाड़ियाँ चला ढें तो सोने पे सुहागा हो जाए, लेकिन यदि संक्रमण की वजह से शासन, प्रशासन की कोई मजबूरी है तो भी कुछ राज्यान्तर्गत गाड़ियाँ चला कर राज्य की मजबूर जनता की सहायता अवश्य ही कर सकते है। अब तक कई राज्योने अपने राज्यान्तर्गत गाड़ियाँ शुरू कर दी है और उस वजह से उनके राज्योंमें रोजगार भी गति ले चुका है। आशा है महाराष्ट्र राज्य शासन भी इस बात पर गौर करेगा और उचित निर्णय ले कर जनता की आवश्यकता की पुर्तता की जाएगी।

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नई दिल्ली तिरुवनंतपुरम नई दिल्ली केरल स्पेशल 30 सितम्बर से शुरू होगी।

वाह जी वाह, बड़ी अच्छी खबरें आ रही है। 02625 तिरुवनंतपुरम नई दिल्ली केरल डेली, पूर्णतयः आरक्षित स्पेशल गाड़ी दिनांक 30 सितम्बर से चल पड़ेगी और वापसी वाली 02626 नई दिल्ली तिरुवनंतपुरम केरल डेली पूर्णतयः आरक्षित स्पेशल दिनांक 03 अक्तूबर से चलने लगेगी। आप समयसारणी देख लीजिएगा।

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राजस्थानवासीयोंके लिए बड़ी खुशखबर, 4 जोड़ी गाड़ियाँ शुरू हो रही है।

1 अक्तूबर से पश्चिम रेलवे की 02991/92 उदयपुर जयपुर उदयपुर डेली स्पेशल, 09609/10 उदयपुर हरिद्वार उदयपुर त्रिसाप्ताहिक स्पेशल, 02995/96 बांद्रा टर्मिनस अजमेर बांद्रा टर्मिनस त्रिसाप्ताहिक स्पेशल, 02901/02 बांद्रा टर्मिनस उदयपुर बांद्रा टर्मिनस त्रिसाप्ताहिक स्पेशल। आप समयसारणी देखिए