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भारतीय रेल की अनारक्षित यातायात पर नियंत्रण करने की असाधारण कवायद!

25 मार्च 2025, मंगलवार, चैत्र, कृष्ण पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2081

“रेलवे स्टेशनोंपर अनियंत्रित भीड़, भगदड़ मची, इतने घायल” इस तरह के समाचार तो इन दिनों में आपने पढ़े ही होंगे और ऐसी यात्रिओंकी अनियंत्रित भीड़ को सहेजने, सम्भालने और उन्हें सुरक्षित करने हेतु, रेल प्रशासन द्वारा किए जानेवाले उपाय की खबरे भी आपके पढ़ने में निश्चित ही आई होंगी, वहीं यात्रिओंको गलियारों, तम्बूओं में रोक कर, बैरिकेडिंग कर के, धीमे धीमे नियंत्रित कर प्लेटफार्म पर छोड़ना। इसके आगे रेल प्रशासन द्वारा और भी विस्मयजनक उपचार अपनाने की खबरें मीडिया में आ रही है। यात्री भौचक है, आखिर हमारे साथ करना क्या चाहते हो?

दरअसल 2 – 4 दिनों पहले नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अनियंत्रित भीड़ की स्थिती की खबरें थी। युँ तो रेल प्रशासन ने तुरन्त ही हरक़त में आकर कोई आपदा घटित होने से पहले, स्थिती को सम्भाल लिया। मगर बात फिर वही अटक गई की इस यात्रिओंकी अनियंत्रित भीड़ पर क्या उपाय कारगर हो सकते है? इस पर बैरिकेडिंग के साथ साथ कुछ प्रस्ताव ऐसे आए है,

अनारक्षित टिकटोंकी की बेलगाम बिक्री पर नियंत्रण लाना चाहिए। अब किसी गाड़ी की क्षमता से केवल डेढ़ गुना ही टिकट वितरित किए जाएजब की फिलहाल जो यात्री, जितने टिकट की मांग करें, उसे बेच दिया जाता है।

अनारक्षित टिकट जारी करते वक्त उस पर उक्त मार्ग पर चलनेवाली गाड़ी का क्रमांक भी दर्ज किया जाए। प्रशासन यह सोचती है, इससे उनके पास उक्त गाड़ी की यात्री संख्या का लेखाजोखा रहेगा। हालाँकि रेल नियमावली में पहले ही इसके लिए एक व्याख्या बनाई गई है। टिकट जारी होने के समय से तीन घण्टे के अन्दर, यात्रा शुरू की जानी चाहिए। टिकट खरीदने के बाद तीन घण्टे तक कोई गाड़ी नही है या यात्री अपनी यात्रा शुरू न कर पाए तो सम्बन्धित स्टेशन मैनेजर से उस टिकट को पुनः वैध करवा सकता है।

किसी मार्ग पर चलनेवाली गाड़ियाँ लगातार देरी से आने की सम्भावना है, तो अतिरिक्त विशेष गाड़ी का प्रबन्ध किया जाए।

कहा जाता है, रेल प्रशासन द्वारा, उक्त प्रस्ताव, आनेवाले 4 – 6 महीनोंमें लागु किए जाने की तैयारी है।

इन प्रस्तावोंको लागू करने में और रेल विभाग की प्रचलित नियमावली को देखा जाए तो यह सहज समझा जा सकता है, की मर्ज़, व्याधि कुछ है और ईलाज़ कुछ और ही सोचा जा रहा है।

पहले हम उपरोक्त प्रस्तावों में आने वाली बाधाओंको समझते है,

उदाहरण लीजिए, मुम्बई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस या लोकमान्य तिलक टर्मिनस किसी एक टर्मिनस पर कोई गाड़ी के लिए अनारक्षित यात्रिओंकी भीड़ जुट जाती है। अब कोई भी नियमित गाड़ी में कमसे कम 4 अनारक्षित कोच रहते है, अर्थात 360 से 400 यात्रियोंकी आसन क्षमता और इससे डेढ़ गुना ही टिकट उपलब्ध किए जाएंगे। वैसे आजकल की यात्री संख्या देखी जाए तो उपलब्ध कराए जानेवाले टिकटों की संख्या बहुत कम है। फिर भी मान लीजिए, गाड़ी के प्रारंभिक टर्मिनस पर इतने टिकट बेच कर उक्त गाड़ी के टिकट की बिक्री बन्द कर दी गई। अब अगले स्टेशन दादर, ठाणे, कल्याण युँ करते करते समझिए गाड़ी गोरखपुर, पटना, हावड़ा, लखनऊ ऐसे गंतव्यों के लिए जानेवाली है, मार्ग में बीसियों स्टेशन पर ठहराव लेने वाली है, क्या हर स्टेशन के लिए रेल प्रशासन 540 से 600 टिकट बेचेगा? या हर स्टेशन का कोटा प्रणाली (आरक्षण प्रणाली के अनुसार) जारी करेगा? और प्रारम्भिक स्टेशन पर ही डेढ़ गुना भरे साधारण कोच में आने वाले मार्ग के हर स्टेशन के यात्री कहाँ और कैसे समाहित किए जाएंगे? डेढ़ गुना जारी किए जाने वाले टिकट की गिनती केवल प्रारम्भिक स्टेशन से गन्तव्य स्टेशन तक कि रहेगी या बीच के स्टेशनोंके लिए जारी टिकट उन डेढ़ गुना कोटे में गिने जाएंगे? है न पेचीदा प्रश्न?

और जब इस तरह की सांख्यिकी करनी ही है तो सबसे आसान काम यह है, सभी अनारक्षित टिकटों को अनिवार्य रूप से द्वितीय श्रेणी आरक्षित में बदल दिया जाए! एक एक यात्री और एक एक जगह का हिसाब लग जाएगा। इसमे आसन संख्या जितने कन्फ़र्म और उतनी ही संख्या जितने RAC टिकट जारी किए जा सकते है। RAC यात्री ऊपर के बर्थ पर बैठ कर या कॉरीडोर में खड़े रहकर या फर्श पर एड्जस्ट कर अपनी यात्रा ऐच्छिक रूप से कर सकते है। वरना अपना RAC टिकट रद्द कर धनवापसी ले सकते है। स्लिपर श्रेणी के RAC में, एक लोअर बर्थ दो यात्रिओंमें देना भी तो एक तरह की एडजस्टमेंट ही है। द्वितीय श्रेणी के अनारक्षित और आरक्षित टिकटों के किरायोंमे महज ₹15/- का आरक्षण शुल्क ही ज्यादा लगता है, मगर इस उपाय से अनारक्षित यात्रिओंकी संख्या पर बड़ी आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है।

बाकी अनारक्षित टिकटों पर गाड़ी क्रमांक अंकित करना क्या उक्त टिकट धारक को गाड़ी में आसन मिल जाने या उसकी रेल यात्रा सुगम होने की गारण्टी प्रदान कर पाएगा?

कई बार देखा गया है, अनारक्षित विशेष गाड़ियाँ उनके प्रचार, प्रसार एवं सूचना के अभाव में खाली ही चलती रहती है, जब की उसी मार्ग की नियमित गाड़ियोंमे पैर धरने की जगह नही रहती।

पहले सुपरफास्ट श्रेणी एवं मेल गाड़ियोंमे ‘डिस्टेन्स रिस्ट्रिक्शन’ नामक पाबन्दी चलाई जाती थी। किसी गाड़ी में 600 किलोमीटर तो किसी मे 200 किलोमीटर के टिकट की पाबन्दी होती थी। इससे कम अन्तर के यात्री इन गाड़ियोंमे यात्रा नही कर पाते थे। सुपरफास्ट गाड़ियोंके स्टोपेजेस भी कम होते थे, जिससे अपनेआप ही कम अन्तर के यात्री इन गाड़ियोंसे दूर रहते थे। अब हुवा यह है की सुपरफास्ट गाड़ियोंमे बेतहाशा स्टोपेजेस बढ़ गए है या बेशुमार स्टोपेजेस वाली गाड़ियोंको भी सुपरफास्ट की श्रेणी में लाया गया है।

रेल विभाग को अनारक्षित टिकटोंकी बिक्री पर, स्वयं अनारक्षित टिकटों के अस्तित्व पर गम्भीर विचार करना होगा। 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी के लिए चलनेवाली गाड़ियोंमे अनारक्षित टिकटोंकी बिक्री पर अनिवार्य रूप से बन्दी लगानी होगी। इन गाड़ियोंमे के द्वितीय श्रेणी कोच में केवल आरक्षित 2S वर्ग की ही बुकिंग की जानी चाहिए। इससे लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे स्टोपेजेस भी कम किए जा सकते है और इनकी औसत गति भी बढ़ाई जा सकती है।

500 किलोमीटर तक परिचालित गाड़ियोंको इंटरसिटी एक्सप्रेस के प्रारूपमें, केवल सिटिंग वर्ग के कोच के साथ चलाया जा सकता है। 500 किलोमीटर की रेल यात्रा अमूमन 8-10 घंटो में पूर्ण हो सकती है। इसमे कुछ कोच आरक्षित 2S, CC वातानुकूलित चेयर कार, यात्रिओंके माँग पर जोड़े जा सकते है। हालाँकि रेल विभाग ने इस प्रणाली पर मेमू एक्सप्रेस, वन्देभारत सीरीज की गाड़ियाँ लाई है, मगर यह व्यवस्था पूर्ण रूप से, प्रत्येक मुख्य रेल मार्गपर, जहाँ यात्रिओंकी अच्छी मांग है, लागू नही हो पाई है। इसके चलते यात्रिओंमें भारी असमंजस की स्थिती है। एक तरफ उनकी सस्ते किरायोंवाली कई सवारी गाड़ियाँ, एक्सप्रेस गाड़ियोंमे बदल दी गई। दूसरी तरफ यात्रिओंकी संख्या के अनुपात में इंटरसिटी या मेमू गाड़ियाँ उपलब्ध नही रहने से कम अन्तर के यात्री भी अनारक्षित टिकट ले कर लम्बी दूरी की गाड़ियोंका रुख करते है।

एक और समस्या रेल व्यवस्था के गले अटकी पड़ी है। वह है, ग़ैरउपनगरिय रेल मार्गों के सीजन टिकट। उपनगरीय रेल मार्गोंपर तो लोकल, सबर्बन गाड़ियाँ रेल विभाग द्वारा चलाई जाती है मगर गैरउपनगरीय रेल मार्गोंपर उतनी साधारण गाड़ियाँ उपलब्ध नही होती और यह सीजन टिकट धारक, सीधे जो सामने उपलब्ध गाड़ी है, उसमे सवार होकर अपने गंतव्य पर निकल पड़ते है। इन यात्रिओंका दबाव न सिर्फ अनारक्षित कोचों बल्कि आरक्षित कोचों पर भी पड़ता है। इन ग़ैरउपनगरिय सीजन टिकट पर गाड़ी क्रमांक लिखा जाना चाहिए, चूँकि इस क्षेत्र में कम अन्तर, 150 किलोमीटर के लिए उपलब्ध गाड़ियाँ बहुत कम होती है और उनके क्रमांक सीजन टिकट पर अंकित किए जा सकते है। ऐसे में केवल अंकित गाड़ियों में ही सीजन टिकट धारक यात्रा कर पाएगा, अन्य गाड़ियाँ उसके लिए प्रतिबन्धित होगी। इससे यात्रिओंका यह गुट भी लम्बी दुरियोंकी गाड़ी से दूर किया जा सकता है।

साथ ही यह कह देना अन्यथा नही होगा की, सुपरफास्ट गाड़ियोंमे, सुपरफास्ट शुल्क लगाकर सीजन टिकट उपलब्ध कराना यह रेल विभाग का सुपरफास्ट गाड़ियोंके साथ किया गया एक भद्दा मज़ाक ही है। इसी तरह एक तरफ गाड़ी में अनारक्षित टिकटोंका बेशुमार आवंटन और बाद में उन्हें अमानवीय पद्धति से रोकना, हाँकना और नियंत्रित करना भी एक तरह से यात्रिओंके साथ खिलवाड़ ही है। यात्रिओंका हक होना चाहिए की वह टिकट खरीदते ही उसकी रेल यात्रा सुनिश्चित हो।

अन्ततः हम यह कहेंगे कि रेल प्रशासन की कौनसी ऐसी मजबूरी है, की जहाँ किसी भी परिवहन व्यवस्था में यात्री उसका मूल्य चुकाता है और यात्रा का लाभ लेता है और यहाँ रेलवे कहती है, की वह यात्री के कुल किराए में 43% किराया खुद चुका रही है और महज 57% किराया मूल्य में यात्रिवहन कर रही है? क्या लगभग आधा किराया वसूल कर यह जताया जा रहा है, की एड्जस्ट कर लीजिए, हम आपको रियायत में ले जा रहे है?

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वडोदरा – अहमदाबाद डाउन रेल मार्ग बाधित; यात्री गाड़ियाँ रद्द/आँशिक रद्द/ मार्ग परिवर्तन

24 मार्च 2025, सोमवार, चैत्र, कृष्ण पक्ष, दशमी, विक्रम संवत 2081

🚨 यात्रा सलाह: ट्रेन रद्दीकरण 🚨

अहमदाबाद डिवीजन में तकनीकी समस्याओं के कारण 🚧, 24/03/2025 को निम्नलिखित मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं 🚆❌:
1️⃣ ट्रेन नंबर 12931 (MMCT-ADI) ADI डबल डेकर
2️⃣ ट्रेन नंबर 19033 (BL-ADI) गुजरात क्वीन
3️⃣ ट्रेन नंबर 22953 (MMCT-ADI) गुजरात सुपरफास्ट एक्सप्रेस
4️⃣ ट्रेन नंबर 20959 (BL-VDG) BL वडनगर सुपरफास्ट एक्सप्रेस

हमें हुई असुविधा के लिए गहरा खेद है। 🙏

आगे की अपडेट के लिए बने रहें। 📢

ट्रेन संख्या 19417 मुम्बई सेंट्रल अहमदाबाद एक्सप्रेस (JCO 23/03/2025) को वडोदरा जंक्शन (BRC) पर शॉर्ट-टर्मिनेट किया गया है। 

ट्रेन संख्या 14702 बान्द्रा टर्मिनस श्रीगंगानगर अरावली एक्सप्रेस JCO 23-3-2025 को वडोदरा जंक्शन (BRC)- रतलाम (RTM)- चंदेरिया (CNA)- अजमेर जंक्शन (AII) के रास्ते डायवर्ट किया जाएगा।

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अवधारणाओंसे खिलवाड़ : कैसे चल पाएगी रेल सुनियोजित पद्धति में..

23 मार्च 2025, रविवार, चैत्र, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2081

भारतीय रेल, हर भारतीय के मन मे बसी, दिल से लगी एक यातायात व्यवस्था। सुचारू, सुरक्षित और सबसे बड़ी बात, किफायती। बीते वर्षोंतक यह व्यवस्था दुरुस्त थी या यूँ कहे की उस पर पड़ने और बढ़ने वाले बोझ को इत्मीनान से खींच रही थी। बोझ लगातार बढ़ते चला जा रहा था, चरमराहट भी लग रही थी मगर हमे आदत है, ‘ थोड़ा सा एडजस्ट’ करते रहने की, सो एडजस्टमेंट चलता रहा और रेल गाड़ियाँ भी चलती रही, चलती जा रही है।

भारतीय रेल में माल वहन और यात्री सेवा ऐसे मुख्यतः दो परिचालन होते है। यात्री सेवा सीधे जनमानस को जोड़ती है तो माल परिवहन यात्रिओंसे थोड़ा दूर ही है। हालाँकि माल परिवहन भी जन हित मे ही होता है। जैसे ईंधन, बिजली संयंत्र का कोयला, कलकारखानों के लिए अयस्क इत्यादि मगर बात वहीं की यात्री को इनसे सीधा फर्क नही पड़ता इसलिए उन्हें इन मालगाड़ियों के परिचालन में ज्यादा औचित्य नही रहता।

देश मे जैसे जैसे आर्थिक विकास बढ़ते चला गया, कारखाने, बिजली उत्पादन संयंत्र लगने लगे, इन मालगाड़ियों की आवाजाही भी बढ़ने लगी। रेल की बुनियादी व्यवस्था अर्थात पटरियाँ, लोको, मालवहन डिब्बे, मालगाड़ियों की गति इनके विकास पर ज्यादा ध्यान नही दिया गया, बस उपलब्ध ढाँचे में, यात्री गाड़ियाँ बराबर बढाते चले गए।

यात्री गाड़ियोंमे के परिचालन में भी एक अवधारणा के अनुसार गाड़ियाँ चलाई जाती थी। मुख्य रेल मार्ग पर लम्बी दूरी की मेल/एक्सप्रेस गाड़ियाँ, महानगरों के लिए उपनगरीय रेल और दो बड़े जंक्शन स्टेशनोंको जोड़ने वाले उप मार्ग अर्थात ब्रांच लाइन्स पर सवारी गाड़ियाँ। यह सवारी गाड़ियाँ सभी छोटे छोटे स्टेशनोंपर रुकती थी और मेल/एक्सप्रेस गाड़ियाँ बड़े और जंक्शन स्टेशनोंपर रुकती थी। दो पद्धती के किराए, सवारी गाड़ी या एक्सप्रेस गाड़ी। आरक्षित या अनारक्षित। फिर आरक्षित में अलग अलग वर्ग। यात्री गाड़ियोंकी अवधारणा यह थी, छोटे स्टेशनोंके यात्री सवारी गाड़ी में यात्रा करते थे और लम्बी रेल यात्रा के लिए जंक्शन स्टेशनोंसे अपनी गाड़ियाँ बदलते थे। मेल/एक्सप्रेस गाड़ियाँ छोटे स्टेशनों, उपनगरों में नही रुकती थी और इसके लिए किसी यात्री को कोई दिक्कत या परेशानी नही थी। रेलगाड़ियोंकी यह कन्सेप्ट, अवधारणा आम रेल यात्रिओंको सर्वसम्मत थी।

धीरे धीरे विकास का वेग बढ़ता गया और यात्रिओंकी तेज रेल सेवा की माँग भी सामने आयी। उपलब्ध अवधारणा में सुपरफास्ट नामक यात्री सेवा बढाई गई। यह गाड़ियाँ मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके मुकाबले थोड़ी तेज और कम स्टोपेजेस के साथ चलती थी। सुपरफास्ट गाड़ियोंमे और नया क्या लाया जा सकता था? मगर राजनेता और राजसेवा, इन्होंने एक दिन में एक फेरा पूर्ण करने वाली शताब्दी एक्सप्रेस और राज्यों की राजधानी से देश के राजधानी को जोड़ने वाली ‘राजधानी’ एक्सप्रेस का अविष्कार किया। यह प्रीमियम, उच्च दर्जे की गाड़ियाँ थी। यात्रिओंको तेज गति के साथ साथ अति विशिष्ट आरामदायक सेवा और अचूक समयपालन का वादा यह इन गाड़ियोंकी विशेषता थी। भारतीय रेल में गाड़ियोंकी श्रेणियाँ बढ़ने लगी।

अमुक नेता ने अमुक गाड़ी का अविष्कार किया तो नए आए नेताजी भला पीछे क्यों कर रह जाते? एक एक मंत्री जी आए और अवधारणाओं में विस्तार या युँ कहे खेला होता चला गया। शताब्दी के स्पर्धा में जनशताब्दी, तेजस। राजधानी की स्पर्धा में दुरन्तो, सम्पर्क क्रांति, हमसफ़र और गरीब रथ जैसी गाड़ियाँ लाई गई। हर बार पुरानी अवधारणा को रबड़ की तरह खींचा गया, कही तोड़ा, मरोड़ा गया। किसी को राजधानी जैसी मगर देश की राजधानी से जुड़ने वाली नही ऐसी तेज गाड़ी का अविष्कार करना था तो किसी को निम्न आय वालोंको सस्ते में वातानुकूलित कोच में यात्रा करवाना था। राजधानी जैसी ही मगर जिनमे सिर्फ उच्च श्रेणी ही न हो अपितु सर्वसाधारण कोच भी चले तो सम्पर्क क्रांति का अविष्कार हुवा।

वैसे आजकल मेन लाइन, ब्रान्च लाइन ऐसा कुछ नही रह गया है। लम्बी दूरी की गाड़ियाँ ब्रान्च लाइन से मुख्य मार्ग और फिर किसी ब्रान्च लाइन, फिर मेन लाइन ऐसे कूदते-फांदते निकल जाती है। इससे होता यह है, जंक्शन स्टेशनोंपर गाड़ियोंका दबाव बढ़ते चला जाता है, प्लेटफार्म कम पड़ने लगते है और गाड़ियोंकी औसत गति एक सीमा में बंधकर रह जाती है। आपने यह कई बार सुना होगा, अब गाड़ियाँ 110, 130 kmph की गति से चलेंगी मगर कुल औसत देखिए, 55, 60 से ज्यादा नही मिलेगी। आज भी भारतीय रेल की कोई भी गाड़ी अपनी पूर्ण यात्रा 100 kmph की औसत गति से नही कर रही है।

एक बात बताए की, जब शताब्दी चल रही है तो उसी अवधारणा की अलग गतिमान या नवनिर्मित वन्देभारत को अलग किराया श्रेणी, अलग दर्जे की विशेष जरूरत थी? शताब्दी को वन्देभारत में रीप्लेस, प्रतिस्थापित कर देते तो शायद उतना बड़ा इतिहास नही न बनता था, है न? वन्देभारत, वन्देभारत न रहती, नई शताब्दी बन कर रह जाती। 😊 वहीं बात अब राजधानी और वन्देभारत स्लिपर में भी लागू होती है। वन्दे मेट्रो और वातानुकूलित मेमू में कितनाक तो फर्क होगा? हाँ, नाम का, दाम का जरूर फर्क आएगा। वातानुकूलित मेमू उपनगरीय और दो शहरों के बीच चली तो वन्दे मेमू, है ना? वैसे आज भी आम यात्रिओंमें आधुनिक आठ या बारह कोच की मेमू गाड़ियोंसे पुरानी सवारी गाड़ियोंको चाहने वाले बहुतेरे मिल जाएंगे। वह पुराने कोच लोगोंको ज्यादा उपयोगी लगते है। खैर, जमाना बदलेगा, तकनीक नई आएगी तो गाड़ियाँ भी बदलेगी। खास कर नया नेता आएगा, नए नाम की गाड़ियाँ लाएगा।😊

अब इन नई – नई गाड़ियोंको ले तो आए मगर उन्ही उपलब्ध टाइम स्लॉट्स में गाड़ियाँ घुसाते, एड्जस्ट करते चले गए। किसी एक वन्देभारत का उद्धाटन याने अगल-बगल की बीस गाड़ियोंकी समयसारणी का हिलना तय। उपलब्ध ढाँचे में एक तेज गाड़ी को प्रविष्ट करना याने अनेक पूर्व परिचालित गाड़ियोंको धीमा करना। यह तो अन्य यात्री गाड़ियोंकी बात मगर मालगाड़ियों का क्या? उन पर भी असर तो होना ही था, मालगाड़ियों को कितना एड्जस्ट कराते? एक वक्त आया की मेल/एक्सप्रेस/सुपरफास्ट गाड़ियोंको बगल में खड़ा रख कोयले से लदी मालगाड़ियों को ‘टॉप प्रायोरिटी’ में चलाना पड़ा। बेचारी ‘आजादहिन्द’ आज तक इन झटकोंसे उबर नही पा रही।😊 4 – 4 मालगाड़ियों की एक साथ जोड़कर 300 डिब्बों की शेषनाग, वासुकी, पायथन नामक गाड़ियाँ चलानी पड़ी।

फिर भूले-बीसरें, ठण्डे बस्ते में पड़ी माँगों के पुलिंदे खोले गए और पता चला की मालगाड़ियों के लिए समर्पित गलियारों, अलग ररेल मार्ग की माँग वर्षोंसे प्रलम्बित है। यह प्रोजेक्ट, यह बुनियादी सुविधा हाथ ली गई और दिल्ली – हावड़ा पूर्व मालगाड़ी गलियारा और दिल्ली – मुम्बई पश्चिम गलियारा का निर्माण हुवा। वर्षोंतक निर्माणाधीन इन प्रोजेक्ट्स पर अब मालगाड़ियां चलने लग गई है, हालाँकि अब भी यह पूर्ण रूप से जुड़े नही है, बस थोड़े ही बाकी रहे है।

इन समर्पित गलियारों के साथ ही हर मुख्य रेल मार्ग के जहाँ दो मार्ग है, उनका तिहरीकरण, चौपदरीकरण, जहाँ एकल मार्ग है, उसका दोहरीकरण सर्वोच्च प्राधान्यता से लिया गया और यह कार्य पूरे देशभर में चल रहा है। इसके साथ ही पूरे देशभर में रेल विद्युतीकरण लगभग पूरा होने को है। इससे देश के प्रत्येक रेल मार्ग पर लोको बदलने की समस्या पूर्ण रूप से खत्म हो जाएगी साथ ही महंगे ईंधन और प्रदूषण पर भी लगाम लगाया जाएगा।

आगे भारतीय रेल का भविष्य उज्ज्वल है। जब यह सारे बुनियादी ढांचे बन जाए, तेज गति की गाड़ियाँ अलग मार्ग पर चलाकर औसत गति बढ़ाई जा सकेगी और तभी इन LHB कोच, मेमू गाड़ियाँ, वन्देभारत ट्रेनसेट्स जिनकी गति क्षमता 160 – 200 kmph की है, अपनी पूर्ण क्षमता से चलेंगी, अपनी अवधारणाओं, कन्सेप्ट्स पर खरी उतरेंगी।

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मध्य रेल की 332 ग्रीष्म कालीन विशेष गाड़ियाँ ; मुम्बई – नागपुर, करमाळी, तिरुवनंतपुरम, पुणे – नागपुर और दौंड – कलबुर्गी के बीच चलेंगी।

20 मार्च 2025, गुरुवार, चैत्र, कृष्ण पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2081

मध्य रेलवे 332 ग्रीष्मकालीन विशेष रेलगाड़ियाँ चलाएगा

ग्रीष्म छुट्टियाँ शुरू होने और यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, मध्य रेलवे ने यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को कम करने के लिए मुंबई – नागपुर/कर्माली/तिरुवनंतपुरम, पुणे – नागपुर और दौंड – कलबुर्गी के बीच 332 ग्रीष्मकालीन विशेष रेलगाड़ियाँ चलाने का निर्णय लिया है।

उक्त गाड़ियोंका विवरण इस प्रकार है:

1. मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – नागपुर – मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनसद्वि-साप्ताहिक विशेष (50 यात्राएँ)

गाड़ी संख्या 02139 द्वि-साप्ताहिक विशेष 06.04.2025 से 29.06.2025 तक प्रत्येक मंगलवार और रविवार को मुम्बई से 00.20 बजे रवाना होगी और उसी दिन 15.30 बजे नागपुर पहुँचेगी। (25 ट्रिप)

गाड़ी संख्या 02140 द्वि-साप्ताहिक विशेष  06.04.2025 से 29.06.2025 तक प्रत्येक मंगलवार और रविवार को 20.00 बजे नागपुर से रवाना होगी और अगले दिन 13.30 बजे मुम्बई पहुंचेगी (25 ट्रिप)

संरचना: एक एसी-2 टियर, 5 एसी-3 टियर, 10 स्लीपर क्लास, 4 सामान्य द्वितीय श्रेणी और 2 सामान्य द्वितीय श्रेणी सह गार्ड ब्रेक वैन।

हाल्ट: दादर (केवल 02139 मुम्बई नागपुर विशेष के लिए), ठाणे, कल्याण, इगतपुरी (केवल 02140 नागपुर मुम्बई विशेष के लिए), नासिक रोड, मनमाड, जलगांव, भुसावल, मलकापुर, शेगांव, अकोला, मुर्तिजापुर, बडनेरा, धामनगांव और वर्धा।

2. मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – करमाली – मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस साप्ताहिक स्पेशल (18 ट्रिप)

गाड़ी संख्या 01151 साप्ताहिक विशेष 10.04.2025 से 05.06.2025 तक प्रत्येक गुरुवार को 00.20 बजे मुम्बई से रवाना होगी और उसी दिन 13.30 बजे करमाली पहुंचेगी (9 ट्रिप)।

गाड़ी संख्या 01152 साप्ताहिक विशेष 10.04.2025 से 05.06.2025 तक प्रत्येक गुरुवार को 14.15 बजे करमाली से रवाना होगी और अगले दिन 03.45 बजे मुम्बई पहुंचेगी (9 ट्रिप)।

संरचना: एक एसी-2 टियर, 5 एसी-3 टियर, 10 स्लीपर क्लास, 4 सामान्य द्वितीय श्रेणी और 2 सामान्य द्वितीय श्रेणी सह गार्ड ब्रेक वैन।

ठहराव: दादर, ठाणे, पनवेल, पेन, रोहा, मानगांव, खेड़, चिपलून, संगमेश्वर रोड, रत्नागिरी, अडावली, विलावडे, राजापुर रोड, वैभववाड़ी रोड, कंकावली, सिंधुदुर्ग, कुडाल, सावंतवाड़ी रोड और थिविम।

3. लोकमान्य तिलक टर्मिनस – करमाली – लोकमान्य तिलक टर्मिनस साप्ताहिक स्पेशल (18 ट्रिप)

गाड़ी संख्या 01129 साप्ताहिक विशेष 10.04.2025 से 05.06.2025 तक प्रत्येक गुरुवार को लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 22.15 बजे रवाना होगी और अगले दिन 12.00 बजे करमाली पहुंचेगी (9 ट्रिप)।

गाड़ी संख्या 01130 साप्ताहिक विशेष गाड़ी 11.04.2025 से 06.06.2025 तक प्रत्येक शुक्रवार को 14.30 बजे करमाली से रवाना होगी और अगले दिन 04.05 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी (9 ट्रिप)।

संरचना: एक फर्स्ट एसी, दो एसी 2-टियर, छह एसी 3-टियर, 8 स्लीपर क्लास, 2 जेनरेटर कार और 1 पेंट्री कार (लॉक की हुई स्थिति में)।

ठहराव: ठाणे, पनवेल, पेन, रोहा, मानगांव, वीर, खेड़, चिपलून, संगमेश्वर रोड, रत्नागिरी, अडावली, विलावडे, राजापुर रोड, वैभववाड़ी रोड, नंदगांव रोड, कंकावली, सिंधुदुर्ग, कुडाल, सावंतवाड़ी रोड और थिविम।

4. लोकमान्य तिलक टर्मिनस – तिरुवनंतपुरम उत्तर – लोकमान्य तिलक टर्मिनस साप्ताहिक स्पेशल – (18 ट्रिप)

गाड़ी संख्या 01063 साप्ताहिक विशेष 03.04.2025 से 29.05.2025 तक प्रत्येक गुरुवार को 16.00 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस से रवाना होगी और अगले दिन 22.45 बजे तिरुवनंतपुरम उत्तर पहुंचेगी। (9 ट्रिप)

गाड़ी संख्या 01064 साप्ताहिक विशेष 05.04.2025 से 31.05.2025 तक प्रत्येक शनिवार को 16.20 बजे तिरुवनंतपुरम उत्तर से रवाना होगी और तीसरे दिन 00.45 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी। (9 यात्राएँ)

संरचना: एक एसी-2 टियर, छह एसी-3 टियर, 9 स्लीपर क्लास, 4 सामान्य द्वितीय श्रेणी, 1 सामान्य द्वितीय श्रेणी सह गार्ड की ब्रेक वैन और 1 जेनरेटर कार।

हॉल्ट: ठाणे, पनवेल, पेन, रोहा, खेड़, चिपलून, संगमेश्वर रोड, रत्नागिरी, कंकावली, सिंधुदुर्ग, कुडाल, सावंतवाड़ी रोड, थिविम, करमाली, मडगांव जंक्शन, कारवार, गोकर्ण रोड, कुमता, मुर्देश्वर, भटकल, मूकाम्बिका रोड बिंदूर, कुंडापुरा, उडुपी, सूरतकल, मंगलुरु जंक्शन, कासरगोड, कन्नूर, कालीकट, तिरुर, शोरानूर, त्रिशूर, एर्नाकुलम टाउन, कोट्टायम, चंगनासेरी, तिरुवल्ला, चेंगन्नूर, मावेलिकारा, कायनकुलम और कोल्लम।

5. पुणे – नागपुर – पुणे साप्ताहिक सुपरफास्ट एसी विशेष (24 ट्रिप)

गाड़ी संख्या 01469 एसी साप्ताहिक सुपरफास्ट विशेष 08.04.2025 से 24.06.2025 तक प्रत्येक मंगलवार को 15.50 बजे पुणे से रवाना होगी और अगले दिन 06.30 बजे नागपुर पहुंचेगी (12 ट्रिप)।

गाड़ी संख्या 01470 एसी साप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल 09.04.2025 से 25.06.2025 तक प्रत्येक बुधवार को 08.00 बजे नागपुर से रवाना होगी और उसी दिन 23.30 बजे पुणे पहुंचेगी (12 ट्रिप)।

संरचना: तीन एसी 2 टियर, 15 एसी 3-टियर, 1 सामान्य द्वितीय श्रेणी सह गार्ड ब्रेक वैन और 1 जेनरेटर वैन।

6. पुणे – नागपुर – पुणे साप्ताहिक सुपरफास्ट विशेष (24 ट्रिप)

गाड़ी संख्या 01467 साप्ताहिक सुपरफास्ट विशेष 09.04.2025 से 25.06.2025 तक प्रत्येक बुधवार को 15.50 बजे पुणे से रवाना होगी और अगले दिन 06.30 बजे नागपुर पहुंचेगी (12 ट्रिप)।

गाड़ी संख्या 01468 साप्ताहिक सुपरफास्ट विशेष 10.04.2025 से 26.06.2025 तक प्रत्येक गुरुवार को 08.00 बजे नागपुर से रवाना होगी और उसी दिन 23.30 बजे पुणे पहुंचेगी (12 ट्रिप)।

संरचना: एक प्रथम एसी, एक एसी 2-टियर, दो एसी 3-टियर, 5 स्लीपर क्लास, 6 सामान्य द्वितीय श्रेणी और 2 सामान्य द्वितीय श्रेणी सह गार्ड ब्रेक वैन।

01469/01470 और 01467/01468 के लिए ठहराव:- उरुली, दौंड कॉर्ड लाइन, अहमदनगर, बेलापुर, कोपरगांव, मनमाड, जलगांव, भुसावल, मलकापुर, शेगांव, अकोला, बडनेरा, धामनगांव और वर्धा

7) दौंड – कलबुर्गी – दौंड अनारक्षित विशेष – सप्ताह में 5 दिन (128 ट्रिप)

गाड़ी संख्या 01421 अनारक्षित विशेष ट्रेन 05.04.2025 से 02.07.2025 तक सप्ताह में 5 दिन (गुरुवार और रविवार को छोड़कर) दौंड से 05.00 बजे प्रस्थान करेगी और उसी दिन 11.20 बजे कलबुर्गी पहुंचेगी। (64 ट्रिप)

ट्रेन संख्या 01422 अनारक्षित स्पेशल 05.04.2025 से 02.07.2025 तक सप्ताह में 5 दिन (गुरुवार और रविवार को छोड़कर) कलबुर्गी से 16.10 बजे रवाना होगी और उसी दिन 22.20 बजे दौंड पहुंचेगी। (64 ट्रिप)

8) दौंड – कलबुर्गी – दौंड अनारक्षित स्पेशल – द्वि-साप्ताहिक (52 ट्रिप)

गाड़ी संख्या 01425 अनारक्षित स्पेशल 03.04.2025 से 29.06.2025 तक प्रत्येक गुरुवार और रविवार को दौंड से 05.00 बजे रवाना होगी और उसी दिन 11.20 बजे कलबुर्गी पहुंचेगी। (26 ट्रिप)

गाड़ी संख्या 01426 अनारक्षित स्पेशल 03.04.2025 से 29.06.2025 तक प्रत्येक गुरुवार और रविवार को 20.30 बजे कलबुर्गी से रवाना होगी और अगले दिन 02.30 बजे दौंड पहुंचेगी। (26 ट्रिप)

01421/01422 और 01425/01426 के लिए संरचना:, 10 सामान्य द्वितीय श्रेणी और 2 सामान्य द्वितीय श्रेणी सह गार्ड ब्रेक वैन

01421/01422 और 01425/01426 के लिए ठहराव: भीगवान, पारेवाड़ी, जेउर, केम, कुर्दुवाड़ी, माधा, मोहोल, सोलापुर, टिकेकरवाड़ी, होटगी, अकालकोट रोड, बोरोटी, दुधानी और गणगापुर।

आरक्षण: विशेष ट्रेन संख्या 02139, 02140, 01151, 01152, 01129, 01130, 01063, 01469, 01470, 01467 और 01468 के लिए बुकिंग विशेष शुल्क पर 24.03.2025 को सभी कम्प्यूटरीकृत आरक्षण केंद्रों और वेबसाइट http://www.irctc.co.in पर खुलेगी।

अनारक्षित कोचों के लिए अनारक्षित टिकटें सुपरफास्ट मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए लगाए जाने वाले सामान्य शुल्क और सुपरफास्ट शुल्क के साथ यूटीएस के माध्यम से या टिकट खिड़की से खरीदी  जा सकती हैं।

विस्तृत समय और ठहराव के लिए कृपया http://www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाएं या एनटीईएस ऐप डाउनलोड करें। ——-

यह प्रेस विज्ञप्ति जनसंपर्क विभाग, मध्य रेलवे, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुंबई द्वारा जारी की गई है।

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मुम्बई हावड़ा मार्गपर, रायगड़ – झारसुगुड़ा खण्ड के कोटरलिया स्टेशन पर रेल ब्लॉक

17 मार्च 2025, सोमवार, चैत्र, कृष्ण पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2081

मुम्बई हावड़ा मार्गपर, दपुमरे SECR क्षेत्र में, रायगड़ – झारसुगुड़ा खण्ड के कोटरलिया स्टेशन पर  रेल की तीसरी एवं चौथी मार्गिका को मुख्य रेल मार्ग से सम्पर्कता प्रदान करने हेतु दिनांक 11 से 24 अप्रैल तक तेरह दिनों का रेल ब्लॉक दिया गया है। इस ब्लॉक के दौरान, 36 मेल/एक्सप्रेस/सवारी गाड़ियाँ अलग-अलग तिथियोंको रद्द रहेंगी। साथही चार – चार यात्री गाड़ियाँ मार्ग बदलकर/ आँशिक रद्द की जा रही है। रेल ब्लॉक के दौरान होने वाले उक्त बदलावों का विस्तृत विवरण निम्नप्रकार से है।

रद्द की गई गाड़ियाँ :

68737/38 रायगड़ बिलासपुर रायगड़ प्रतिदिन मेमू JCO दिनांक 11 से 24 अप्रैल तक 14-14 फेरे रद्द रहेंगी।

68735/36 रायगड़ बिलासपुर रायगड़ प्रतिदिन मेमू JCO दिनांक 11 से 24 अप्रैल तक 14-14 फेरे रद्द रहेंगी।

18113/14 टाटानगर बिलासपुर टाटानगर प्रतिदिन एक्सप्रेस JCO दिनांक 10 से 24 अप्रैल तक 14-14 फेरे रद्द रहेंगी।

18109/10 टाटानगर – नेताजी सुभाषचंद्र बोस इतवारी – टाटानगर प्रतिदिन एक्सप्रेस JCO दिनांक 11 से 24 अप्रैल तक 14-14 फेरे रद्द रहेंगी।

20828 सान्तरागाछी जबलपुर साप्ताहिक हमसफ़र JCO दिनांक 16 और 23 अप्रैल के दो फेरे रद्द रहेंगी। वापसी में 20827 जबलपुर सान्तरागाछी साप्ताहिक हमसफ़र JCO दिनांक 17 और 24 अप्रैल के दो फेरे रद्द रहेंगी।

17008 दरभंगा सिकंदराबाद द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस JCO दिनांक 11, 15, 18, 22  और 25 अप्रैल के पाँच  फेरे रद्द रहेंगी। वापसी में 17007 सिकंदराबाद दरभंगा द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस JCO दिनांक 08, 12, 15, 19, 22 अप्रैल के पाँच फेरे रद्द रहेंगी।

20822 सान्तरागाछी पुणे साप्ताहिक हमसफ़र JCO दिनांक 12 और 19 अप्रैल के दो फेरे रद्द रहेंगी। वापसी में 20821 पुणे सान्तरागाछी साप्ताहिक हमसफ़र JCO दिनांक 14 और 21 अप्रैल के दो फेरे रद्द रहेंगी।

12880 भुबनेश्वर लोकमान्य तिलक टर्मिनस द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 10, 14, 17 और 21 अप्रैल के चार फेरे रद्द रहेंगी। वापसी में 12879 लोकमान्य तिलक टर्मिनस भुबनेश्वर द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 12, 16, 19 और 23 अप्रैल के चार फेरे रद्द रहेंगी।

22843 बिलासपुर पटना साप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 11 और 18 अप्रैल के दो फेरे रद्द रहेंगी। वापसी में 22844 पटना बिलासपुर साप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 13 और 20 अप्रैल के दो फेरे रद्द रहेंगी।

12870 हावड़ा मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस साप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 11 और 18 अप्रैल के दो फेरे रद्द रहेंगी। वापसी में 12869 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस हावड़ा साप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 13 और 20 अप्रैल के दो फेरे रद्द रहेंगी।

12151 लोकमान्य तिलक टर्मिनस शालीमार समरसता द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 09, 10, 16 और 17 अप्रैल के चार फेरे रद्द रहेंगी।वापसी में 12152 शालीमार लोकमान्य तिलक टर्मिनस समरसता द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 11, 12, 18 और 19 अप्रैल के चार फेरे रद्द रहेंगी।

22894 हावड़ा साईं नगर शिर्डी साप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 10 और 17 अप्रैल के दो फेरे रद्द रहेंगी। वापसी में 22893 साईं नगर शिर्डी हावड़ा साप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 12 और 19 अप्रैल के दो फेरे रद्द रहेंगी।

12812 हटिया लोकमान्य तिलक टर्मिनस द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 11, 12, 18 और 19 अप्रैल के चार फेरे रद्द रहेंगी। वापसी में 12811 लोकमान्य तिलक टर्मिनस हटिया द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 13, 14, 20 और 21 अप्रैल के चार फेरे रद्द रहेंगी।

12129/30  पुणे हावड़ा पुणे आज़ाद हिन्द प्रतिदिन सुपरफास्ट JCO दिनांक 11 से 24 अप्रैल तक 14-14 फेरे रद्द रहेंगी।

12860/59 हावड़ा मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस हावड़ा गीतांजली प्रतिदिन सुपरफास्ट JCO दिनांक 11 से 24 अप्रैल तक 14-14 फेरे रद्द रहेंगी।

12222 हावड़ा पुणे द्विसाप्ताहिक दुरन्तो सुपरफास्ट JCO दिनांक 10, 12, 17 और 19 अप्रैल के चार फेरे रद्द रहेंगी। वापसी में 12221 पुणे हावड़ा द्विसाप्ताहिक दुरन्तो सुपरफास्ट JCO दिनांक 12, 14, 19 और 21 अप्रैल के चार फेरे रद्द रहेंगी।

12905 पोरबंदर शालीमार द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 09, 10, 16 और 17 अप्रैल के चार फेरे रद्द रहेंगी। वापसी में 12906 शालीमार द्विसाप्ताहिक सुपरफास्ट JCO दिनांक 11, 12, 18 और 19 अप्रैल के चार फेरे रद्द रहेंगी।

12101 लोकमान्य तिलक टर्मिनस शालीमार समरसता सप्ताह में चार दिवसीय, ज्ञानेश्वरी सुपरफास्ट JCO दिनांक 11, 12, 14, 15,  18, 19, 21 और 22 अप्रैल के आठ फेरे रद्द रहेंगी। वापसी में 12102 शालीमार लोकमान्य तिलक टर्मिनस ज्ञानेश्वरी सप्ताह में चार दिवसीय,  सुपरफास्ट JCO दिनांक 13, 14, 16, 17, 20, 21, 23 और 24 अप्रैल के आठ फेरे रद्द रहेंगी।

नियमित मार्ग को बदलकर चलनेवाली गाड़ियाँ :

12809/10 हावड़ा – मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – हावड़ा प्रतिदिन सुपरफास्ट मेल वाया नागपुर, JCO दिनांक 11 से 24 अप्रैल तक, दोनों ही दिशाओंमें, 14- 14 फेरे झारसुगुड़ा से रायपुर के बीच परावर्तित मार्ग टिटिलागढ़ होकर चलाई जाएगी। उक्त तिथियोंमें यह गाड़ियाँ, ब्रजराजनगर, बेलपहाड़, रायगढ़, ख़रासिया, सकती, चाँपा, बिलासपुर, भाटापारा यह स्टेशन स्किप करते चलेंगी।

12262 हावड़ा – मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस सप्ताह में चार दिवसीय दुरन्तो सुपरफास्ट वाया नागपुर, JCO दिनांक 11, 14, 15, 16, 18, 21, 22 एवं 23 अप्रैल के आठ फेरे और 12261 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस हावड़ा सप्ताह में चार दिवसीय दुरन्तो सुपरफास्ट वाया नागपुर, JCO दिनांक 13, 15, 16, 17, 20, 22, 23 एवं 24 अप्रैल के आठ फेरे झारसुगुड़ा से रायपुर के बीच परावर्तित मार्ग टिटिलागढ़ होकर चलाई जाएगी। उक्त तिथियोंमें यह गाड़ियाँ बिलासपुर यह स्टेशन स्किप करते चलेंगी।

आँशिक रद्द की जानेवाली गाड़ियाँ :

68861/62 गोंदिया – झारसुगुड़ा – गोंदिया प्रतिदिन मेमू JCO दिनांक 11 अप्रैल से 05 मई तक, 25 – 25 फेरे केवल गोंदिया से बिलासपुर के बीच ही चलेगी। बिलासपुर से झारसुगुड़ा के बीच रद्द रहेगी।

12410 हज़रत निजामुद्दीन – रायगढ़ सप्ताह में पाँच दिवसीय, गोंड़वाना सुपरफास्ट एक्सप्रेस JCO दिनांक 09, 10, 12, 14, 15, 16, 17, 19, 21 एवं 22 अप्रैल के दस फेरे और 12409 रायगढ़ हज़रत निजामुद्दीन सप्ताह में पाँच दिवसीय गोंडवाना सुपरफास्ट वाया नागपुर, JCO दिनांक 11, 12, 14, 16, 17, 18, 19, 21, 22 एवं 24 अप्रैल के दस फेरे, केवल हज़रत निजामुद्दीन से बिलासपुर के बीच चलेंगी। उक्त फेरों में यह गाड़ी बिलासपुर से रायगढ़ के बीच रद्द रहेगी।