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मध्य और पश्चिम रेलवे की गणपति स्पेशलपर कोंकण के यात्रिओंकी बेहद ठंडी प्रतिक्रिया

मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे ने जिस उत्साह से कोंकण रेलवे पर 172 और 12 स्पेशल गाड़ियाँ दिनांक 15 से 5 सितंबर तक चलाई है, उसके बिल्कुल विपरीत प्रतिक्रियाए कोंकण की ओर जानेवाले यात्रिओंमें है।

कल दिनांक 15 को मुम्बई से सावंतवाड़ी के लिए 2 स्पेशल्स और लोकमान्य तिलक टर्मिनस से कुडाळ और रत्नागिरी के लिए एक एक स्पेशल गाड़ी छोड़ी गई। कहा जा रहा है, सभी चारों गाड़ीयोंकी हालत यह थी, की किसी भी गाड़ी में 50 से अधिक यात्री नही थे। गाड़ियाँ खाली खाली ही, यात्रिओंके बगैर रवाना हुई।

ऐसा क्यों हुवा, जब हजारोंकी संख्या में कोंकण वासी गणेशोत्सव के लिए मुम्बई की ओरसे अपने गाँव मे उत्सव, पूजा के लिए जाते है? इसका प्रमुख कारण है, देरी। इन स्पेशल्स की घोषणा करने में कई गयी डावाँडोल निर्णय की वजह। रेलवे कई दिनोंसे राज्य शासन के सम्पर्क में थी। पत्राचार भी किए गए, लेकिन सामनेसे कोई प्रतिक्रियाही नही। चूँकि कोंकण क्षेत्र में यात्रिओंकी आवाजाही पर देखरेख रखनेवाली यंत्रणा की कोई व्यववस्था नही थी। अतः कार्यक्रम परवान चढ़ ही नही पा रहा था। एक तरफ महाराष्ट्र शासन ने महाराष्ट्रवासियों को राज्य अंतर्गत रेल यात्रा करने पर रेल प्रशासन को कह टिकट बुकिंग सिस्टम द्वारा ही बन्दी करवा रखी थी और यह सारी गाड़ियाँ राज्य अंतर्गत ही चलनी थी।

कोंकण की ओर यात्रा करनेवाले यात्रिओंमें यह भावना प्रबल थी, जब पूरे राज्य मे किसी को राज्य अंतर्गत रेल यात्रा नही करने दी जा रही तो कोंकण रेल भी शायद ही खुले। दूसरा परनेम टनल बन्द होने से कोंकण रेल मार्गसे चलनेवाली सीधी गाड़ियाँ भी 20/22 तारीख तक पुणे, मिरज, मडगांव मार्ग से घुमा दी गई थी।

जब सीधी गाड़ियाँ बन्द है, राज्य शासन विशेष गाड़ियोंको लेकर कोई फैसला नही कर पा रही है तो सहज है की यात्री जिसको अपने गांव जाना है, बेचारा कब तक इंतजार करें? आगे गांव पोहोंचकर 14 दिन क्वारनटाईंन भी किए जाने की अवस्था को झेलना था अतः बहुतांश कोंकनवासियों ने सड़क मार्ग से अपनी अपनी गाड़ियोंकी व्यवस्था की ओर गांव की ओर निकल लिए।

इधर जब रेलवे को राज्य शासन की ओरसे हरी झंडी मिली तब तक तो ” चिड़िया चुग गयी खेत” वाली स्थितियाँ हो गयी थी। अंततः मुम्बई की ओरसे कोंकण की दिशामे चलने वाली तमाम स्पेशल गाड़ियाँ खाली ही दौड़ लगा रही है। बचे हुए दिनोंकी गाड़ियोंके बुकिंग्ज में भी कुछ जोर दिखाई नही दे रहा है।

लचर नीतियोंके चलते ट्रेनोंका हाल बेहाल हो रहा है और रेलवे को बढ़ते घाटे में और थोड़ा अधिक घाटा उठाने के लिए मजबूर होना है।

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क्या महाराष्ट्र के लिए कोंकण अलग राज्य है?

रेल प्रशासन ने आज 15 अगस्त से 5 सितंबर तक गणपति विशेष गाड़ियोंकी घोषणा की है। इन गाड़ियोंकी टिकट बुकिंग्ज आज ही से आरक्षण केंद्रों और आईआरसीटीसी के माध्यम से की जाएगी।

तमाम महाराष्ट्रवासियों मन मे एक ही सवाल है, क्या महाराष्ट्र से कोंकण में जाना किसी अलग राज्य में जाने के जैसा है? इस प्रश्न का कारण है, महाराष्ट्र शासन की राज्यअन्तर्गत रेल यात्रा करने की नीति। जबसे रेल प्रशासन ने संक्रमण के चलते अपनी सारी टाइम्टेबल्ड, रेग्युलर यात्री गाड़ियाँ रद्द कर देशभर में केवल 230 विशेष गाड़ियोंके जरिए यात्री रेल सुविधा जारी रखी है, तब से महाराष्ट्र शासन ने अपने राज्य के भीतर ही भीतर रेल यात्रा टिकट बुक नही किए जाएंगे ऐसी व्यवस्था रेलवे से करवाई थी। वहींपर राज्य से किसी दूसरे राज्य में जाने या किसी दूसरे राज्य से महाराष्ट्र में आने के लिए रेल टिकट बुक कराने में कोई बाधा नही है।

आज भी सैकड़ो जरूरतमंद महाराष्ट्रवासियों को किसी पड़ोसी राज्य से अपनी रेल यात्रा शुरू या समाप्त करनी पड़ रही है। उदाहरण के लिए जलगाँव से मुम्बई, पुणे रेल से जाना हो तो यात्री बुरहानपुर से मुम्बई या पुणे का टिकट बुक करा के वहीं से यात्रा कर रहे है। गौरतलब यह है, की आज से जो गणपति विशेष गाड़ियाँ शुरू की गई है, सारी गाड़ियाँ महाराष्ट्र के अंतर्गत ही चलाई जानी है और इनके टिकट सहजतासे उपलब्ध है। यह कैसी नीति है?

सारे महाराष्ट्रवासियों के मन मे रह रह कर एक ही प्रश्न उठ रहा है, क्या कोंकण महाराष्ट्र राज्यका भाग नही है? फिर यह अलग नीति क्यों? कोंकण प्रभाग में जाने के लिए मुम्बई से रेल टिकट दिया जा सकता है तो मराठवाड़ा, खान्देश, विदर्भ, पश्चिम महाराष्ट्रवासियों को रेल यात्रा की सहुलियित क्यों नही दी जा रही है।

आज देश का प्रत्येक नागरिक इस संक्रमण में क्या एहतियात बरतनी चाहिए यह भलीभाँति जानता है और उसका कड़ाई से पालन भी कर रहा है। हमारी महाराष्ट्र शासन से आग्रहपूर्वक अनुरोध है, कृपया समस्त महाराष्ट्र की जनता के लिए भी रेल यात्रा की बुकिंग्ज खोल दी जाए ताकि मजबूर जनता को महंगे सड़क परिवाहन से यात्रा करनेसे छुटकारा मिले। विगत 2-3 महीनोंसे सैकड़ों मरीज, व्यापारी, व्यवसायिक इस बंधन में पिसे जा रहे है। यदि उपरोक्त बन्धन शिथिल किया जाता है तो सारे महाराष्ट्रके अंतर्गत रेलसे यात्रा करने के जरूरतमंद यात्री प्रदेश शासन के आभारी रहेंगे।

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मध्य रेल की गणपति विशेष गाड़ियाँ

मध्य रेलवे ने आखिरकार अपनी स्पेशल गाड़ियोंका पिटारा “गणपति विशेष ” गाड़ियोंके लिए खोल ही दिया है। आज मध्य रेल की तरफ से 162 विशेष गाड़ियोंकी घोषणा की गई है। ध्यान रहे, संक्रमण के चलते यह सारी गाड़ियाँ पूर्णतयः आरक्षित होगी। पहले गाड़ियाँ जान लेते है।

1: मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस सावंतवाड़ी मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्पेशल

01101 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस सावंतवाड़ी स्पेशल मुम्बई से रात 23:05 को चलेगी, सावंतवाड़ी दूसरे दिन सुबह 9:30 को पोहोचेगी यह गाड़ी दिनांक 15 से 22 अगस्त तक रोजाना चलेगी। उसी प्रकार 01102 सावंतवाड़ी मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्पेशल सुबह 10:10 को सावंतवाड़ी से निकलेगी और मुम्बई को रात 21:40 को पहुंचेगी। यह गाड़ी दिनांक 16 से 23 अगस्त तक रोजाना चलेगी।

स्टोपेजेस : दादर, ठाणे, पनवेल, रोहा, मानगाव, खेड़, चिपलुन, संगमेश्वर रोड़, रत्नागिरी, अदावली, राजापुर रोड़, वैभववाड़ी रोड़, कणकवली, सिंधुदुर्ग, कुडाल.

2: लोकमान्य तिलक टर्मिनस कुडाल लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्पेशल

01103 लोकमान्य तिलक टर्मिनस कुडाल स्पेशल रोजाना लोकमान्य तिलक टर्मिनस से रात 23:50 को कुडाल के लिए चलेगी और कुडाल दूसरे दिन सुबह 10:30 को पहुंचेगी। यह गाड़ी रोजाना दिनांक 15 से 22 अगस्त तक चलेगी।उसी तरह 01104 कुडाल से दोपहर 12:00 बजे निकलेगी और लोकमान्य तिलक टर्मिनस को रात 23:00 को पहुँचेगी। यह गाड़ी दिनांक 16 से 23 अगस्त तक रोजाना चलेगी।

स्टोपेजेस : ठाणे, पनवेल, रोहा, मानगाव, विर, खेड़, चिपलुन, सावर्डे, अरावली रोड, संगमेश्वर रोड़, रत्नागिरी, अदावली, विलवाड़े, राजापुर रोड़, वैभववाड़ी रोड़, नांदगांव रोड, कणकवली, सिंधुदुर्ग.

3: मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस सावंतवाड़ी मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्पेशल

01105 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस सावंतवाड़ी स्पेशल मुम्बई से रात 22:00 को चलेगी, सावंतवाड़ी दूसरे दिन सुबह 8:10 को पोहोचेगी यह गाड़ी दिनांक 15 से 22 अगस्त तक रोजाना चलेगी। उसी प्रकार 01106 सावंतवाड़ी मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्पेशल सुबह 8:50 को सावंतवाड़ी से निकलेगी और मुम्बई को रात 20:05 को पहुंचेगी। यह गाड़ी दिनांक 16 से 23 अगस्त तक रोजाना चलेगी।

स्टोपेजेस : दादर, ठाणे, पनवेल, रोहा, मानगाव, खेड़, चिपलुन, सावर्डे, संगमेश्वर रोड़, रत्नागिरी, विलवाड़े, राजापुर रोड़, वैभववाड़ी रोड़, कणकवली, सिंधुदुर्ग, कुडाल.

4: लोकमान्य तिलक टर्मिनस रत्नागिरी लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्पेशल

01107 लोकमान्य तिलक टर्मिनस रत्नागिरी स्पेशल रोजाना लोकमान्य तिलक टर्मिनस से रात 20:30 को रत्नागिरी के लिए चलेगी और रत्नागिरी दूसरे दिन सुबह 4:00 को पहुंचेगी। यह गाड़ी रोजाना दिनांक 15 से 22 अगस्त तक चलेगी।उसी तरह 01108 रत्नागिरी से सुबह 6:30 बजे निकलेगी और लोकमान्य तिलक टर्मिनस को दोपहर 14:20 को पहुँचेगी। यह गाड़ी दिनांक 16 से 23 अगस्त तक रोजाना चलेगी।

स्टोपेजेस : ठाणे, पनवेल, रोहा, मानगाव, विर, खेड़, चिपलुन, सावर्डे, अरावली रोड, संगमेश्वर रोड.

5: मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस सावंतवाड़ी मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्पेशल

01109 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस सावंतवाड़ी स्पेशल मुम्बई से सुबह 7:10 को चलेगी, सावंतवाड़ी को उसी दिन शाम 19:15 को पोहोचेगी यह गाड़ी दिनांक 25 अगस्तसे 5 सितंबर तक रोजाना चलेगी। उसी प्रकार 01110 सावंतवाड़ी मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्पेशल रात 20:35 को सावंतवाड़ी से निकलेगी और मुम्बई को दूसरे दिन सुबह 6:45 को पहुंचेगी। यह गाड़ी दिनांक 25 अगस्त से 05 सितंबर तक रोजाना चलेगी।

स्टोपेजेस : दादर, ठाणे, पनवेल, रोहा, खेड़, चिपलुन, सावर्डे, संगमेश्वर रोड़, रत्नागिरी, विलवाड़े, राजापुर रोड़, वैभववाड़ी रोड़, कणकवली, सिंधुदुर्ग, कुडाल.

6: मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस सावंतवाड़ी मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्पेशल

01111 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस सावंतवाड़ी स्पेशल मुम्बई से सुबह 5:50 को चलेगी, सावंतवाड़ी को उसी दिन शाम 16:15 को पोहोचेगी यह गाड़ी दिनांक 25 अगस्तसे 5 सितंबर तक रोजाना चलेगी। उसी प्रकार 01112 सावंतवाड़ी मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्पेशल शाम 18:15 को सावंतवाड़ी से निकलेगी और मुम्बई को दूसरे दिन सुबह 5:50 को पहुंचेगी। यह गाड़ी दिनांक 25 अगस्त से 05 सितंबर तक रोजाना चलेगी।

स्टोपेजेस : दादर, ठाणे, पनवेल, मानगांव, रोहा, खेड़, चिपलुन, संगमेश्वर रोड़, रत्नागिरी, अडावली, राजापुर रोड़, वैभववाड़ी रोड़, कणकवली, सिंधुदुर्ग, कुडाल.

7: लोकमान्य तिलक टर्मिनस सावंतवाड़ी लोकमान्य तिलक टर्मिनस

01113 लोकमान्य तिलक टर्मिनस सावंतवाड़ी स्पेशल मुम्बई से सुबह 5:30 को चलेगी, सावंतवाड़ी को उसी दिन शाम 15:50 को पोहोचेगी यह गाड़ी दिनांक 24 अगस्तसे 5 सितंबर तक रोजाना चलेगी। उसी प्रकार 01114 सावंतवाड़ी लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्पेशल शाम 17:15 को सावंतवाड़ी से निकलेगी और लोकमान्य तिलक टर्मिनस को दूसरे दिन सुबह 6:15 को पहुंचेगी। यह गाड़ी दिनांक 24 अगस्त से 05 सितंबर तक रोजाना चलेगी।

स्टोपेजेस : ठाणे, पनवेल, रोहा, मानगाव, विर, खेड़, चिपलुन, सावर्डे, अरावली रोड, संगमेश्वर रोड़, रत्नागिरी, अदावली, विलवाड़े, राजापुर रोड़, वैभववाड़ी रोड़, नांदगांव रोड, कणकवली, सिंधुदुर्ग, कुडाल.

8: लोकमान्य तिलक टर्मिनस रत्नागिरी लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्पेशल

01115 लोकमान्य तिलक टर्मिनस रत्नागिरी स्पेशल रोजाना लोकमान्य तिलक टर्मिनस से सुबह 11:55 को रत्नागिरी के लिए चलेगी और रत्नागिरी उसी दिन शाम 19:00 को पहुंचेगी। यह गाड़ी रोजाना दिनांक 25 अगस्त से 5 सितंबर तक चलेगी।उसी तरह 01116 रत्नागिरी से रात 20:30 बजे निकलेगी और लोकमान्य तिलक टर्मिनस को दूसरे दिन सुबह 4:15 को पहुँचेगी। यह गाड़ी दिनांक 25 अगस्त से 5 सितंबर तज तक रोजाना चलेगी।

स्टोपेजेस : ठाणे, पनवेल, रोहा, मानगाव, विर, खेड़, चिपलुन, सावर्डे, अरावली रोड, संगमेश्वर रोड.

इन सभी विशेष गाड़ियोंके डिब्बों की संरचना 13 स्लिपर क्लास, 6 सेकन्ड क्लास आरक्षित सिटिंग, 1 वातानुकूलित 2 टियर, 4 वातानुकूलित थ्री टियर ऐसी रहेगी।

इन सभी गाड़ियोंकी बुकिंग्ज कल दिनांक 15 अगस्त से आरक्षण सेंटर और आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर खुल जाएगी।

अब एक मन की बात हम भी कर लेते है, जब यह सारी गाड़ियाँ महाराष्ट्र के भीतर ही भीतर चलनेवाली है, तो कोंकनवासियों के साथ साथ बाकी महाराष्ट्रवासियों के लिए भी महाराष्ट्र अंतर्गत रेल यात्रा क्यों न खोल दी जाए? क्या कहते हो!

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रेलवे का निजीकरण

“151 निजी रेलगाड़ियाँ, 50 रेलवे स्टेशन भी होंगे निजी, जबलपुर स्टेशन बिकेगा 75 करोड़ रुपयोंमें” ऐसी खबरें पढ़, सुन आप हैरान हो गए होंगे। अब तक हमने पढा, सुना औऱ समझा की रेलवे, राष्ट्रीय सम्पत्ति है, इसे साफ सुथरा रखे। क्या सचमुच अब यह किसी ओर की हो जाएगी?

लगता तो कुछ ऐसा ही है, क्योंकी इन शब्दोंके मायने यही है। बिकी नहीं है, लीज पर दी गयी है। बिल्ट ऑपरेट एन्ड ट्रांसफर। ट्रेनें खाली 151 जोड़ी ही है, बाकी तो सब चलती रहेंगी न। एअरपोर्ट नही हुए निजी? तो वैसे ही रेलवे स्टेशन क्यों नही हो सकते?

मेरे भाई, रेलवे स्टेशनोंमें में और एअरपोर्ट में फर्क है, जमीन आसमान वाला फर्क। कई भारतीय अपने जीवन मे कभी एअरपोर्ट पर गए होंगे और कैयौने तो इसे चित्र में भी शायद ही देखा होगा। लेकिन रेलवे भारतियोंके दिलोंदिमाग में बसती है। देश की सबसे बड़ी, सबसे आरामदायक, सबसे किफायती और कोनेकोने पहुंच रखनेवाली हमारी नैशनल कैरियर रेल। आज भी हमारे देश मे आरक्षित वर्ग के डिब्बों में भी “एडजस्ट” होकर चलते रहने का रिवाज है। सैकड़ोंके डिब्बों में हजारों को यात्रा करते हम हमेशा ही देखते आए है। शादियोंकी बारातें, विभिन्न धर्मियोंके जुलूस, अनेकों नेताओंके प्रदर्शन रेलवे प्लेटफार्म से चलकर अपनी मंजिलोको तय करते है।

“गाड़ी आपके गांवसे खाने के समय पर गुजरने वाली है, टिफिन लेते आइयो स्टेशनपर” पता नही, इन निजी स्टेशनोंके दौर में यह हमारा भारतीय अपनापन भी रह पाएगा या नही। क्योंकी स्टेशन्स भी निजी होने जा रहे। इनके मालिक लोग अपने रेस्टोरेंट, अपनी होटलें, अपनी सिक्युरिटी सारी व्यवस्थाएं चाकचौबंद रखे रहेंगे। हवाई अड्डे के भाँति रेलवे स्टेशन के बाहर के अहाते में अपनी माँ, मामी, चाची, दादी को छोड़ दो, वह अपने आप गाड़ी में चढ़ जाएंगे, या लेने आए है तो जब बाहर आएंगे तब सम्भाल लेना। यह रिवाज हो जाएगा आवभगत का। बदल रहा है न सबकुछ?

कहा जाता है, इन निजी व्यवस्थाओंसे रोजगार का सृजन होगा। पता है, निजी गाड़ियोंमे रेलवे के कर्मचारियोंके नाम पर सिर्फ ड्राईवर और गार्ड होंगे। बाकी गाडीका चेकिंग स्टाफ़, मैनेजर, हाउसकीपिंग, सिक्युरिटी सारे निजी कम्पनियोंकी भर्ती होगी। हाल ही में जो गिनीचुनी निजी गाड़ियाँ चल रही है, उसकी हाउसकीपिंग एम्प्लोयी को नौकरी से हाथ धोना पड़ा कारण उसका मेकअप ठीक नही था, और आगे सुनिए, इन लोगोंको तनख्वाह कितनी मिलती है, महीने की 15 से 20 हजार। काम करने की अवधि होती है 15 से 18 घंटे। क्या करेंगे इस तरह के रोजगार सृजन का?

एक तरफ कहा जाता है, लीज पर स्टेशन देने से सरकार को इतने रुपए मिलेंगे, इतने खर्चे बचेंगे, निजी ट्रेनें चलाने से इतनी सीटे बढ़ेगी, उच्चस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। भाईसाहब उच्चस्तरीय सुविधाएं?, अजी सुविधा किस चिड़िया का नाम है? कभी गर्मी के दिनोंमें रेलवे से मुम्बई की ओरसे उत्तर भारत की ओर जानेवाली गाड़ियोंमे सफर किए हो? यात्रा करने की बात ही छोड़िए, टिकट ही ले कर दिखाए तो मालूम पड़ जाएगा घर मे बैठे रहने से ज्यादा सुविधाजनक कुछ नही होता। बात करते है उच्चस्तर की।

हायर क्लास याने उच्च वर्ग लोगोंकी बात करते होंगे तो उनके लिए वातानुकूलित वर्ग रहता है, लगभग सभी गाड़ियोंमे। देशकी 60,70% आबादी तो आजभी अपनी सोच बड़ी मुश्किल से सेकन्ड क्लास से स्लिपर क्लास और हद हो गई तो AC 3 टियर तक पोहोंची है। आज भी रेलवे में आर्डर देकर खाना खानेसे हिचकिचाते लोग अपने घर से पूड़ी सब्जी खाने ने ज्यादा आनंद पाते है। जितने लोग आरक्षित बर्थोंपर लेटे हुए रहते है, उससे कई ज्यादा उन बर्थोंके अगलबगल टिक कर अपनी यात्रा सफल सुफल कर लेते है और कइयोंको तो दरवाजोंके सामने, टॉयलेट के बगलवाली जगहोंपर बैठ कर मुम्बई से वाराणसी, छपरा, दरभंगा तक जाते देखा जा सकता है।

हमारे जुम्मनचच्चा कहते है, रेल प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव ही न करें ऐसा हमने कब कहा है? यह सब इंतजामात तो वह खुद भी कर सकती है। जब यह सारी व्यवस्थाएं ज्यादा दाम चुकानेवालोंके लिए किए जा रहे हो तो उन्ही से पैसा वसूल करो और “एसी वेसी” की सुविधाएं भी उन्ही के लिए करो, हमारे जैसी आम जनता के लिए बस जरूरत के समय हमारी सादे डिब्बों वाली गाड़ियाँ ही बढ़ा दिया करो। भाई सो कर नहीं कमसकम सुख से बैठ कर चले जाए इसका इंतजाम ही कर दिया करो, हैँ?

अब क्या कहे, जुम्मन चच्चा और लछमन काका जैसे लोगोंसे? बस आप दूर ही रहिए इन चिजोंसे, निजी गाड़ियोंसे, निजी बनने वाले स्टेशनोंसे। फिलहाल तो हमरी कासी, पवन, कुसिनगर तो बन्द नही न भइल? तो चली, हमहू उसी निकल जात रहें हमरे गाँव। जय राम जी की।

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अब तो हो ही जाए महू सनावद बडी लाइन

मित्रों, भारतभर में देश के चारों महानगरों को सड़क मार्ग और रेल मार्ग से जोड़ने पर भर दिया जा रहा है। यह भारत का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। साथ ही दो मार्ग कन्याकुमारी से कश्मीर और ओखा से दीमापुर भी बनाए जाएंगे। यह सड़क मार्ग के प्रोजेक्ट को भारतमाला नाम दिया गया है।

हमारे देश में फोर लेन, सिक्स लेन सड़क मार्ग का निर्माण चल रहा है, हवाई अड्डे बनवाए जा रहे पर आज भी आम जनता के लिए यात्रा करने हेतु भारतीय रेल्वे काफी महत्वपूर्ण है। रेलवे की यात्रा न सिर्फ सुरक्षित, आरामदायक है बल्कि बहोत किफायती भी है। पूरे भारतभर बिछी लाइनोंकी वजह से देश मे घूमने, यात्रा करने के लिए रेलवे बेहद उपयुक्त संसाधन है। पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण के सिरे रेल्वेसे बराबर जुड़े हुए है।

उत्तर भारत से दक्षिण भारत को रेल्वेसे जब जुड़े होने की बात हम करते है तब बिल्कुल मध्य भारत मे यक खंड ऐसा है, जो कई वर्षोंसे छोटी लाइन में अटका पड़ा है। बीच मे रेलवे की “युनिगेज पॉलिसी” आई और सभी जगहोंकी छोटी लाइनोंको बन्द करा कर उन्हें बड़ी लाइनोंमें तब्दील करने का सुनहरा सपना दिखा गयी। कई मार्ग के काम शुरू किए गए और पूरे होकर उनमें बड़ी लाइन की गाड़ियाँ भी धड़धड़ाते चलने लगी, मगर आज भी रतलाम – महू (डॉ आम्बेडकर नगर) – खण्डवा – अकोला जो की 473 किलोमीटर के खण्ड है, टुकड़े टुकड़े में बँटा है। रतलाम से महू बड़ी लाइन, महू से पातालपानी छोटी लाइन जो की अब हैरिटेज लाइन बना दी गयी है, सनावद स मथेला होते हुए खण्डवा बड़ी लाइन, खण्डवा से अमलाखुर्द बड़ी लाइन का कार्य जारी है (?) अमलाखुर्द से आकोट गेज कन्वर्शन मेलघाट बाघ प्रकल्प मुद्दे के चलते खटाई में, आकोट – अकोला बड़ी लाइन बनकर तैयार। यह आज का चित्र है।

यह पूरा रतलाम से लेकर अकोला तक ऐसा रेल मार्ग है जो उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने में यात्रिओंके कई घंटोंकी बचत करा सकता है, कीमती इन्धन की बचत हो सकती है। खण्डवा – आकोट मार्ग तो वन विभाग के फाइलोंकी मुश्किलोमे दब जाने की संभावना ज्यादा लग रही है मगर खण्डवा – महू मार्ग में ऐसी कोई मुश्किल नही है। इस मार्ग के ही बारे में आज विस्तार से बात करते है।

मैप सौजन्य : indiarailinfo.com

यह ताजा मैप है, इसमें साफ दिख रहा है की खण्डवा से मथेला होते हुए सनावद जुड़ चुका है और महू से सनावद तक कुछ भाग निर्माणाधीन तो कुछ भाग छोटी लाइन से जुड़ा नजर आता है। यह छोटी लाइन हैरिटेज लाइन है। इस लाइन का एक ब्रिटिशकालीन इतिहास है आइए वहींसे शुरू करते है।

इन्दौर प्रभाग होळकर साम्राज्य था। देशभर में ब्रिटीशोंने रेल लाइनोंका जाल बिछाने का काम शुरू कर दिया था। तब होळकर संस्थान ने अपने भूभाग में भी रेल लाइन बिछाने की पेशकश ब्रिटीशोंसे की। उस वक्त याने सन 1873 में ब्रिटीशोंने यह कार्य शुरू किया और 1877 में यह मार्ग मात्र साढ़े चार वर्षोंमें बनकर तैयार हुवा। कहा जाता है, होळकर संस्थान ने इस मार्ग को बनाने के लिए 1 करोड़ रुपए दिए थे।

अब स्वतंत्र भारत की हकीकत भी सुनिए 2007 में इस मार्ग को युनिगेज कार्यक्रम के तहत बड़ी लाइन में तब्दील करने की घोषणा की गई। तब बजट निकला था करीबन 1400 करोड़ जो बढ़कर अब हुवा है करीबन 2400 करोड़, जिसमे अलग अलग वर्षोंमें कुल 837 करोड़ मिल चुके है और रतलाम – महू बड़ी लाइन, सनावद – खण्डवा और आकोट – अकोला खण्ड बड़ी लाइनमे तब्दील हो चुके है। रतलाम महू खण्ड पर बड़ी लाइन की गाड़ियाँ भी चल पड़ी है मगर आज भी बचे बाकी सेक्शन्स बन्द होने की वजह से इस मार्ग की जनता परेशान है। किफायती, आरामदायक और सुरक्षित रेल यात्रा से वंचित है।

रतलाम – अकोला इस पूरे रेल प्रोजेक्ट में आज भी महू – सनावद सेक्शन जुड़ जाए तो रतलाम खण्डवा लाइन पूरी होकर मध्य रेलवे के मैन लाइन दिल्ली भोपाल इटारसी भुसावल मुम्बई मार्ग से जुड़ जाएगी। रतलाम – इन्दौर – मुम्बई, रतलाम – इन्दौर – पुणे अन्तर कमसे कम 200 से 300 किलोमीटर कम हो जाएगा। यही नही पश्चिमी राजस्थान भी दक्षिण, पश्चिम भारत से एक गतिमान और शॉर्ट कनेक्टिविटी पा लेगा। मालवा, निमाड़ और मध्य राजस्थान से देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई से एक बेहतर पर्यायी मार्ग के स्वरूप में भी रेल प्रशासन इसे देख सकता है।

केवल 85 किलोमीटर का गेज कन्वर्शन होने से यात्रिओंका कितना समय बचेगा, देश का कितना इन्धन बचेगा आप सोच सकते है। दरअसल इन्दौर क्षेत्र के लिए इतनी लाइनोंकी घोषणा हो चुकी है, जिसमे इन्दौर दाहोद, मनमाड़ इन्दौर प्रोजेक्ट्स है। उस वजह से यह लगता है, फलाँ प्रोजेक्ट से यह बेहतर है, या उससे वह ज्यादा फायदेमंद है और इसी चक्कर मे यह छोटीसी कनेक्टिविटी की तरफ ज्यादा ख्याल नही दिया जा रहा है। आज का हमारा प्रयास इसीलिए है, की महू – सनावद जोड़ने से क्या कुछ हासिल होने जा रहा है।