Stories/ News Alerts

Uncategorised

रेल प्रशासन फिर एक बार ‘छुपी किराया वृद्धि’ की ओट में..

07 नवम्बर 2024, गुरुवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2081

भारतीय रेल में पिछली किराया वृद्धि करीबन दस वर्ष पहले हुई थी। उसके बाद आज 2024 तक कोई भी सीधी रेल किराया वृद्धि नही की गई है। यह बात और है, रेल प्रशासन किराया तालिका के अलावा अन्य तरीकोंसे अतिरिक्त किराया बढ़ा ही देती है। जिसमे किराया तालिका वहीं के वहीं मगर किराए ज्यादा लागू होते है।

यह अन्य तरीके से किराया वृद्धि में उनके लिए सबसे सरल प्रक्रिया साधारण मेल/एक्सप्रेस की श्रेणी को बदल कर उसे सुपरफास्ट में बदलना या सवारी गाड़ी को एक्सप्रेस में बदलना। गौरतलब यह है, आजतक जितनी भी सवारी गाड़ियाँ एक्सप्रेस में बदली गई, उन में स्टोपेजेस उतने ही रहने के कारण एक्सप्रेस की ‘फिल’ कभी आई ही नही है।

01 जनवरी 2025 से नई समयसारणी दाखिल होने जा रही है और सुना जा रहा है, उस मे साधारण मेल/एक्सप्रेस से सुपरफास्ट एवं सवारी से मेल/एक्सप्रेस में बदलने वाली गाड़ियोंकी लम्बी सूची है। 11077/78 पुणे जम्मूतवी पुणे झेलम एक्सप्रेस, 11057/58 मुम्बई अमृतसर मुम्बई पठानकोट एक्सप्रेस, 15066/65 पनवेल गोरखपुर पनवेल, 11407/08 पुणे लखनऊ पुणे साप्ताहिक, 11079/80 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर लोकमान्य तिलक टर्मिनस साप्ताहिक, 18237/38 कोरबा अमृतसर बिलासपुर छत्तीसगढ़, 11703/04 रीवा डॉ आंबेडकर नगर रीवा त्रिसाप्ताहिक इत्यादि सुपरफास्ट गाड़ियाँ बनने की सूची में नामजद है।

साधारण मेल/एक्सप्रेस से सुपरफास्ट बनाए जानेपर इन गाड़ियोंमे साधारण श्रेणी के किरायोंमें ₹15/-, स्लिपर क्लास में ₹30/-, वातानुकूलित थ्री टियर, वातानुकूलित टू टियर, वातानुकूलित चेयर कर में ₹45/- और वातानुकूलित प्रथम में ₹75/- प्रति सवारी सीधे जुड़ जाएंगे। लम्बी दूरी के सवारियों को अनुपात में यह वृद्धि कोई ज्यादा मायने नही रखेगी मगर कम अंतर के यात्रिओंको यह अतिरिक्त किराया और वह भी किसी अलग अनुभव अर्थात एक्सप्रेस से सुपरफास्ट में यात्रा करना बहुत खलेगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, भारतीय रेल का सुपरफास्ट श्रेणी का मानदंड। मात्र 55 kmph औसत से अपनी यात्रा पूर्ण करनेवाली गाड़ी सुपरफास्ट श्रेणी में ली जा सकती है। उपरोक्त दर्शाई गई गाड़ियाँ औसत 50 से 54kmph गति से अपनी यात्रा पूर्ण कर रही है। जो भी अतिरिक्त परिचालन समय दिया गया है, उसमे मामूली फेरफार किया जाए तो यह गाड़ियाँ सुपरफास्ट के मानदंड में सम्मिलित की जा सकेगी। जहाँ रेल विभाग अपने ट्रैकों की गतिसीमाएँ 130, 160 kmph कर रही है, गाड़ियोंके रैक उनके अनुकूल याने LHB युक्त किए जा रहे है और सवारी गाड़ियोंसे लेकर अमूमन सभी यात्री गाड़ियाँ 100, 130 की गति से दौड़ रही है। ऐसी अवस्था में रेल विभाग चाहे तो सुपरफास्ट का मानदंड ऊँचा कर सकती है।

एक तरफ रेल विभाग अपनी आय से जूझ रहा है और दूसरी ओर रेल यात्री किराया बढ़ाने के निर्णय को राजनीति आगे जाने नही देती। दूसरी तरफ उच्च श्रेणियों के किरायोंपर हवाई मार्ग के किरायोंका भी दबाव रहता है। हालात यह है, सुपरफास्ट चार्ज, विशेष गाड़ियोंमे अतिरिक्त किराए, सवारी गाड़ियोंका मेल/एक्सप्रेस में बदलना, आवश्यक डेमू/मेमू, इंटरसिटी गाड़ियोंके जगह महंगी प्रीमियम गाड़ियोंकी लॉन्चिंग यह सब एक तरह से किरायोंमें वॄद्धि के ही संकेत है। तत्काल, प्रीमियम तत्काल, किसी न किसी तरीके से यात्रिओंको वैसे भी अतिरिक्त किराया भुगतान करना पड़ता है। आम यात्री अब इस तरह तैयार हो चुका है, की उसे कमसे कम दस प्रतिशत किराया ज्यादा चुकाना पड़ सकें बशर्ते राजनीति न आड़ी आए।

Uncategorised

भारतीय रेल ला रहा नया इंटीग्रेटेड टिकट बुकिंग ऍप

04 नवम्बर 2024, सोमवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2081

आईआरसीटीसी नहीं इस ऐप से बुक‍ होगा ट्रेन का ट‍िकट! द‍िसंबर से बदल जाएगा रेलवे का पूरा स‍िस्‍टम

रेलवे की तरफ से अगले महीने नया ऐप पेश क‍िये जाने की उम्‍मीद है. इस ऐप के शुरू होने के बाद यात्र‍ियों को अलग- अलग सुव‍िधाएं एक ही प्‍लेटफॉर्म पर म‍िल जाएंगी, इससे सफर करने वालों को काफी सहूल‍ियत होगी.

Indian Railways New Super App: भारतीय रेलवे का दुन‍िया में चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है. रोजाना चलने वाली हजारों ट्रेनों से लाखों लोग अपने गंतव्‍य तक पहुंचते हैं. अगर आप भी ट्रेनों के जर‍िये सफर करते हैं तो यह खबर आपके काम की है. जी हां, रेलवे की तरफ से दिसंबर के अंत तक एक सुपर ऐप लॉन्च करने का प्‍लान क‍िया जा रहा है. इस एक ही ऐप के जर‍िये टिकट बुकिंग, खाने की डिलीवरी और ट्रेन का स्‍टेटस चेक क‍िया जा सकता है. इन सभी सुव‍िधाओं के एक ही प्‍लेटफॉर्म पर म‍िलने से यात्र‍ियों को काफी सहूल‍ियत होगी.

नए ऐप को आईआरसीटीसी से जोड़ा जाएगा
नया ऐप यात्रियों के लिए बहुत काम का होगा. इसे सीआरआईएस (CRIS) ने तैयार क‍िया है और टिकट बुकिंग वेबसाइट आईआरसीटीसी (IRCTC) के साथ जोड़ा गया है. इस ऐप के शुरू होने के बाद ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्र‍ियों को बहुत सी सुविधाएं मिलेंगी और रेलवे को भी इससे फायदा होगा. आपको बता दें सीआरआईएस एक संस्था है, जो रेलवे के लिए तकनीकी काम करती है.

इसके अलावा आईआरसीटीसी के ऐप औश्र वेबसाइट के जर‍िये अभी ट‍िकट की ऑनलाइन बुक‍िंग की जाती है. नए ऐप के जर‍िये रेलवे का प्‍लान सभी चीजों को स‍िस्‍टेमेट‍िंग करना और आमदनी बढ़ाना है.

कई कामों को लेकर हो जाएगा आसानी

रेलवे की तरफ से जल्‍द पेश क‍िये जाने वाले सुपर ऐप से टिकट बुकिंग से लेकर और भी कई काम आसानी से हो जाएंगे. इकोनॉम‍िक टाइम्‍स में प्रकाश‍ित खबर के अनुसार इस ऐप के द‍िसंबर के अंत तक शुरू होने की उम्‍मीद है. एक अधिकारी ने बताया आईआरसीटीसी सीआरआईएस और ट्रेन के टिकट लेने वाले यात्रियों के बीच इंटरफेस के रूप में काम करना जारी रखेगा. प्‍लान्‍ड तरीके से सुपर ऐप और आईआरसीटीसी के बीच इंटीग्रेशन का काम चल रहा है.

अभी इन ऐप को यूज करते हैं रेलवे यात्री

अधिकारी ने बताया कि नए ऐप में कई सुविधाएं जैसे यात्री टिकट-प्लेटफॉर्म टिकट बुक करना और ट्रेन का स्‍टेटस चेक करना आद‍ि होंगी. रेलवे यात्रियों को अभी अलग-अलग ऐप्स और वेबसाइट्स जैसे आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट (ट्रेन टिकट बुकिंग, बदलाव, और रद्द करने के लिए), आईआरसीटीसी ई-कैटरिंग फूड ऑन ट्रैक (ट्रेन में सीट पर खाना मंगाने के लिए), रेल मदद (शिकायत और सुझाव के लिए), यूटीएस (बिना सीट के टिकट बुक करने के लिए) और नेशनल ट्रेन इंक्‍वायरी सिस्टम (ट्रेन की स्थिति जानने के लिए) आद‍ि का यूज करना होता है.

10 करोड़ से ज्‍यादा बार डाउनलोड हुआ IRCTC का ऐप

अभी आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट रेल यात्रियों के बीच सबसे लोकप्रिय ऐप है, इसे 10 करोड़ से ज्‍यादा यूजर्स ने डाउनलोड कर रखा है. अभी यह रिजर्व्ड ट्रेन टिकट बुक करने का बेस्‍ट प्लेटफॉर्म है. अधिकारी ने बताया क‍ि आईआरसीटीसी सुपर ऐप को कमाई का नया जरिया मानता है. यद‍ि आप अपना ट्रेन टिकट क‍िसी प्राइवेट कंपनी के जर‍िये बुक कराते हैं तो भी वो कंपनी बुक‍िंग के ल‍िये आईआरसीटीसी का ही इस्तेमाल करती है.

पिछले साल आईआरसीटीसी ने 4,270 करोड़ रुपये कमाए और उसमें से 1,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ. इस कमाई का 30% हिस्सा सिर्फ टिकट बुक करने से आया.

यूटीएस ऐप को एक करोड़ से ज्‍यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है. यह ऐप मुख्य रूप से प्लेटफॉर्म टिकट और सीजन पास खरीदने के लिए इस्तेमाल होता है. सीआरआईएस (CRIS) रेलवे के कई अहम कामों के लिए सॉफ्टवेयर बनाता है और उसका रख-रखाव करता है.

Uncategorised

दुर्भाग्यपूर्ण हादसा : बान्द्रा टर्मिनल स्टेशन पर यात्रिओंकी भगदड़; नौ यात्री घायल, दो गम्भीर

27 अक्टूबर 2024, रविवार, कार्तिक, कृष्ण पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2081

दिनांक 27 अक्टूबर 2024, समय सुबह 2:45, बान्द्रा टर्मिनस रेलवे स्टेशन। 22921 बान्द्रा टर्मिनस गोरखपुर अंत्योदय (सभी अनारक्षित कोच) साप्ताहिक एक्सप्रेस अपने निर्धारित प्रस्थान समय 5:10 को रवाना होने के लिए सिद्ध हो रही थी। गाड़ी का खाली रैक, प्लेटफार्म क्रमांक एक पर लगने के लिए रेलवे यार्ड से निकलकर बस प्लेटफार्म पर बैक हो ही रहा था की हजारों यात्रिओंकी भीड़ जो बीती रात से गाड़ी में सवार होने की प्रतीक्षा कर रही थी, उमड़ पड़ी। गाड़ी के सभी दरवाजे, खिड़कियाँ बन्द अवस्था मे थे। मगर यात्रिओंकी भीड़ गाड़ी में चढ़ने के लिए बेताब थी। धक्कमपेल में कई यात्री प्लेटफार्म पर, पटरी पर गिर पड़े। खबर है, नौ यात्री इस भगदड़ में घायल हुए है, जिनमे दो की हालत गम्भीर है।

यह उधना रेलवे स्टेशन का दृश्य है। अमूमन त्यौहारों, छुट्टियों के दौरान महानगरों के सभी रेलवे टर्मिनल स्टेशन इसी तरह यात्री भीड़ से पटे रहते है।

मित्रों, कोई भी हादसे लापरवाही की वजह से होते है। दिवाली, छट पूजा की भीड़ रेलवे स्टेशनों, यातायात व्यवस्था में समा नही पा रही है। रेल प्रशासन ने कई अतिरिक्त गाड़ियोंका नियोजन किया है, उनको व्यापक प्रसिद्धि भी दी गई है। फिरभी रेल यात्री नियमित गाड़ियोंमे यात्रा करना ज्यादा पसन्द करते है। त्यौहारों, छुट्टियों में रेल यातायात पर इस तरह की भीड़ होना स्वाभाविक है, प्रति वर्ष होती है। रेल प्रशासन इस बात के लिए कोई अग्रिम तैयारी या सुरक्षा के दृष्टिकोण से नियोजन क्यों नही कर पाती, यह एक गम्भीर प्रश्न है।

रेल प्रशासन किस तरह ऐसी आपदाओं से, हादसोंसे यात्रिओंको बचा सकता है, आइए समझते है,

रेल प्रशासन अपनी विशेष गाड़ियोंका नियोजन तकरीबन 30 से 45 दिनों पहले कर लेता है और उनके परिचालन की घोषणा भी कर देता है। सभी विशेष गाड़ियाँ अतिरिक्त किराया दर से चलाई जाती है। इन गाड़ियोंमे वातानुकूलित, ग़ैरवातानुकूलित, आरक्षित, अनारक्षित सभी तरह के यात्री कोचेस रहते है। अंत्योदय या जनसाधारण वर्ग की तरह सम्पूर्ण अनारक्षित विशेष गाड़ियाँ भी इन बेड़ों में चलाई जाती है। ज्ञात रहें, यह हादसा भी अनारक्षित गाड़ी, अंत्योदय एक्सप्रेस पर ही हुवा है। दरअसल यह अनारक्षित गाड़ियोंमे यात्री भीड़ का कुछ भी पूर्वानुमान नही निकाला जा सकता, बस यह समझ कर चलें की इसमे इतनी यात्री क्षमता है और इतने यात्री ही सवार होंगे। इधर विशेष गाड़ियोंमें अतिरिक्त किराए और अनियमित परिचालन की वजह से यात्री उसे प्राधान्य नही देते और नियमित गाड़ियोंका रुख करते है।

रेल प्रशासन को चाहिए, संक्रमण काल के दौरान जिस तरह सभी अनारक्षित वर्गों को बिना किसी अतिरिक्त किराया लिए, मात्र पंधरह रुपए आरक्षित शुल्क लगाकर यात्रिओंके आसनोंको सुनिश्चित किया था उसी तरह सभी विशेष गाड़ियोंमे एक सप्ताह पूर्व आरक्षण शुरू कर यात्रिओंकी व्यवस्था करना चाहिए।

रेलवे प्लेटफार्म पर केवल आरक्षित यात्री का ही प्रवेश सुनिश्चित करना चाहिए और भीड़ के दौरान प्लेटफार्म टिकट का आबंटन बन्द किया जाना चाहिए।

रेल प्रशासन अपनी पूर्वघोषित विशेष गाड़ियोंके अलावा भी अतिरिक्त गाड़ियोंकी घोषणा करता है। यदि विशेष गाड़ियोंको अग्रिम बुकिंग कर चलाया गया तो रेल प्रशासन को भी यात्री माँग का अंदाजा आएगा और उस प्रकार नियोजन करते आएगा।

यह सभी त्यौहार, छुट्टी विशेष गाड़ियाँ लगभग एकतरफा अत्याधिक भीड़ और दूसरी तरफा बिल्कुल खाली अवस्था मे चलती है। रेल विभाग चाहे तो खाली अवस्था मे लौटती गाड़ियोंको मार्ग में अतिरिक्त ठहराव या नियमित गाड़ियोंकी प्रतिक्षासूची से लिंक कर नियमित गाड़ियोंकी भीड़ का नियोजन कर सकती है।

यह अत्यंत आवश्यक है की सभी विशेष गाड़ियाँ अपनी समयसारणी अनुसार चलाई जाए, ताकि यात्री उन्हें नियमित गाड़ियोंमें जगह उपलब्ध न होनेपर अपनी यात्रा के लिए चुने।

विशेष गाड़ियाँ चलाने के लिए नियमित टर्मिनल स्टेशन की जगह, वह स्टेशन से होकर गुजरें ऐसे स्टेशनोंसे या उससे निकटतम स्टेशन से चलाया जाना चाहिए। इससे नियमित टर्मिनल स्टेशनोंपर यात्री भीड़ का दबाव कम होने में मदद मिलेगी।

थोड़ी यात्रिओंमें अनुशासन की भी कमी है, यह बात निश्चित है मगर अग्रिम आरक्षण से इस समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। रेल प्रशासन उचित नियोजन हेतु,  भीड़ भरे अवसरों पर सभी नियमित अनारक्षित गाड़ियों और नियमित मेल/एक्सप्रेस के अनारक्षित कोच में भी केवल अग्रिम आरक्षण की पाबंदी ला सकता है।

Uncategorised

नए मेमू रैक की सौगात बनी रतलाम स्थानीय यात्रिओंके लिए मुसीबत!

25 अक्टूबर 2024, शुक्रवार, कार्तिक, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2081

पश्चिम रेल में स्थित रतलाम स्टेशन, मुम्बई – दिल्ली मार्ग का एक महत्वपूर्ण जंक्शन, साथ ही पश्चिम रेलवे का मण्डल मुख्यालय है। रतलाम जंक्शन से मुम्बई – दिल्ली मार्ग, चित्तौड़गढ़, अजमेर मार्ग और फतेहाबाद चन्द्रावतीगंज होते हुए इन्दौर का मार्ग जो गेज कन्वर्जन में बड़ी लाइन में परावर्तित हुवा है, उपलब्ध है।

रतलाम मण्डल में रतलाम से दाहोद, उज्जैन मेमू रैक से चल रही है तो भीलवाड़ा रतलाम महू के लिए डेमू रैक उपलब्ध है। हाल ही में उद्धाटित उज्जैन चित्तौड़गढ़ वाया फतेहाबाद सवारी पारम्परिक आई सी एफ कोच से चल रही है, वर्तमान में परिचालित यह डेमू गाड़ियोंके रैक इतने जर्जर हो चुके है की कई बार फेल हो जाने की वजहों से, आधी यात्रा में इन्हें मालगाड़ी के विद्युत लोको से खींच कर गन्तव्य तक लाया जाता है। मण्डल अधिकारियोंने कई बार क्षेत्रीय मुख्यालय को उपरोक्त परेशानी से अवगत कराया और फलस्वरूप मुख्यालय से उन्हें नए मेमू रैक की सौगात मिली। अब परेशानी यह है, मण्डल की माँग दो मेमू रैक की थी और उन्हें केवल एक रैक उपलब्ध कराया गया, जिससे मण्डल को रैक लिंक करने की भीषण समस्या खड़ी हो गई।

पहले रतलाम मण्डल का नए मेमू रैक को लेकर किया गया नियोजन देखिए,

फिलहाल डेमू / मेमू रैक से महू – रतलाम – भीलवाड़ा, दाहोद – रतलाम – उज्जैन और महू – रतलाम – चित्तौड़गढ़ इस तरह रैक लिंक करके सवारी गाड़ियोंका परिचालन हो रहा है। अब मेमू रैक आने से उपरोक्त रैक लिंकिंग बन्द करा कर दाहोद – रतलाम – भीलवाड़ा ऐसे किया जा रहा है। इससे आदिवासी अंचल के सर्वसाधारण यात्रिओंको रतलाम जंक्शन में गाड़ी बदलने की बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। खास कर, जब यात्रिओंको प्लेटफार्म क्रमांक 1 से 7 या 7 से 1 पर जाना – आना पड़ेगा।

निम्नलिखित रतलाम स्टेशन का दृश्य देखिए,

तस्वीर में दाहिने ओर प्लेटफार्म क्रमांक 1 एवं 2 है जिसपर अजमेर – इंदौर लाईन की गाड़ियाँ आ सकती है (रतलाम केबिन के वहा से भी यह कनेक्ट है यानी नागदा तरफ से आने वाली गाड़ी भी इन प्लेटफार्म पर आ सकती है )

दाहिने से बाए जाते हुए, प्लेटफार्म क्रमांक 4 , 5 , 6 दिल्ली – मुम्बई मुख्य रेल मार्ग पर स्थित है।

आखिरी बाए में, प्लेटफार्म क्रमांक 7 पर केवल मुम्बई – उदयपुर एवं अजमेर व्हाया चित्तौड़गढ़ की गाड़ियाँ ही ली जा सकती है।

विशेष बात, रतलाम जंक्शन पर प्लेटफार्म क्रमांक 03 है ही नही।

उपरोक्त प्लेटफार्म क्रमांक के बदलाव एवं नए मेमू रैक का परिचालन दिनांक 28/10/2024 से किया जाना है और स्थानीय यात्रिओंमें खासी नाराजगी दिखाई दे रही है। उपलब्ध व्यवस्था में अनपेक्षित बदलाव और प्लेटफार्म 01 की मुख्य स्टेशन से ऊपरी पैदल पुल से सीधी सम्पर्कता न होना यह सबसे कठिन समस्या है। यात्रिओंको अन्य प्लेटफार्म से एक क्रमांक के प्लेटफार्म पर आनेजाने के लिए तकरीबन 800 मीटर पार्किंग लॉट से होते हुए गुजरना और वह भी अपने यात्री सामान को ढोते हुए या बुजुर्ग, महिला यात्रिओंके लिए हालात बदतर करने वाला होगा।

स्थानीय नेताओं ने भी स्थानीय यात्रिओंको होनेवाली समस्याओं के मद्देनजर, उपरोक्त बदलाव स्थगित किए जाने का प्रस्ताव लाने की बात की है। एक मत ऐसे भी आया है, वर्तमान डेमू रैक जैसे भी हालात में परिचालित है, मेमू रैक उपलब्ध किए जाने तक चलते रहे और नया मेमू रैक वर्तमान उज्जैन – चित्तौड़गढ़ – उज्जैन वाया फतेहाबाद को दे दिया जाए ताकी मण्डल में उसका उपयोग जारी रहे। अब मण्डल अधिकारी नए रैक को लेकर क्या करते है, यह देखनेवाली बात रहेंगी।

Uncategorised

क्या आपका रेल आरक्षण, अपग्रेड होगा, जानें नियमावली

21 अक्टूबर 2024, सोमवार, कार्तिक, कृष्ण पक्ष, पंचमी, विक्रम संवत 2081

आजकल यात्री ने स्लिपर श्रेणी का टिकट बुक कराया और अपग्रेडेशन योजना में उसका टिकट वातानुकूलित श्रेणी में आ जाने से उच्च वर्ग में यात्रा की। अर्थात स्लिपर के किरायोंमे एसी की सवारी!

आरक्षित रेल टिकट में अपग्रेडेशन होना यह रेल मन्त्री लालूप्रसाद यादव के कार्यकाल की देन है। इसमे संहिता यह थी, अंतिम चार्टिंग के बाद निम्न श्रेणी के आरक्षण प्रतिक्षासूची में रह जाते थे और उच्च वर्ग की जगह खाली रह जाती थी अतः गाड़ी में उपलब्ध सभी आरक्षित टिकटों को उनकी श्रेणी से एक वर्ग ऊपर अपग्रेड कर टिकिटोंका रद्दीकरण रोकना और यात्रिओंको सुविधा प्रदान करना यह थी।

अब यह टिकिटोंका अपग्रेडेशन किस तरह और कौनसी नियमावली के अंतर्गत होता है, यह समझते है, निम्नलिखित परिपत्रक देखिए

अंतिम आरक्षण चार्टिंग में याने गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशन से रवाना होने चार घण्टे पूर्व, GNWL कोटे के आरएसी या प्रतिक्षासूची के टिकिटोंका प्रबंधन करने हेतु GNWL जनरल वेटिंग लिस्ट के कन्फर्म्ड PNR को प्राथमिकता दी जाती है।

अगली प्राधानता तत्काल योजना के तहत बुक किए गए कन्फर्म PNR में से रैंडम तरीके, बिना किसी निर्धारण के, अनियमित तरीके से चुना जाता है।

GNWL कोटे की कन्फर्म्ड टिकट सूची और TQ तत्काल कोटे की कन्फर्म्ड टिकट सूची से बारी – बारी से चयन करने की उपरोक्त प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी जब तक यात्रियों के प्रतिक्षासूची से सभी पात्र रिक्त सीटें भर नहीं जातीं या जब तक सभी प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों की टिकटें कन्फर्म नहीं हो जाती।

अपग्रेडेशन की इस योजना में RLWL रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट के यात्रियों को अपग्रेड नहीं किया जाता है।

जिन कन्फर्म यात्रियों को उच्च श्रेणी में अपग्रेड किया गया है, उनकी बर्थ/सीट उस श्रेणी के आरएसी/डब्ल्यूएल यात्रियों को आवंटित की जाती है। यदि अभी भी कुछ बर्थ रिक्त हैं तो ये रिक्त बर्थ अगली निम्न श्रेणी के कन्फर्म यात्रियों को आवंटित की जाएगी।

अपग्रेडेशन के लिए चुने गए, किसी एक PNR (अधिकतम 6) के सभी यात्रियों को एक साथ अपग्रेड किया जाता है। यदि एक ही कोच में सभी यात्रिओं को अपग्रेड करने के लिए पर्याप्त खाली बर्थ उपलब्ध नहीं हैं तो उनमें से किसी को भी अपग्रेड नहीं किया जाएगा।

यात्रियों से उनकी पसंद पूछे बिना ही उन्हें अपग्रेड किया जाएगा, जैसे कि स्लिपर क्लास से वातानुकूलित कोच, केबिन बर्थ से साइड बर्थ, लोअर बर्थ से अपर बर्थ इस तरह। हालांकि, अगर कोई यात्री बुकिंग के समय अनुरोध फॉर्म में अपग्रेडेशन के लिए ‘नहीं’ विकल्प का पर्याय चुनता है, तो PRS यात्री आरक्षण प्रणाली द्वारा उसके PNR को अपग्रेडेशन के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। आरक्षण फॉर्म में यह पर्याय उपलब्ध रहता है।

चूँकि किसी भी तरह के रियायती किराया टिकट को अपग्रेडेशन योजना के लिए स्वीकृति नही है अतः पूर्ण किराया भुगतान करने वाले आरक्षित यात्री और रियायती आरक्षित यात्री, दोनों के कमबाइन्ड टिकट रहने की सूरत में, यात्रिओंका बंटवारा न हो इसके लिए इस तरह के PNR को अपग्रेड नहीं किया जाएगा।

आजकल वैसे भी वरिष्ठ नागरिक किराया रियायत रद्द है, मगर बहुत से वरिष्ठ यात्री लोअर बर्थ कोटा का उपयोग करते है, उन्हें इस अपग्रेडेशन योजना में सम्मिलित नही किया जाता है।