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सोलापुर विभाग में 15 दिन का रेल ब्लॉक, गाड़ियोंकी स्थिति जान लीजिए।

भाईयों, एक बात समझ लो, पूरे भारतीय रेल के नेटवर्कपर कहीं न कही, किसी न किसी सेक्शन में बुनियादी सुविधाओं के काम हो रहे है और इसीके चलते ब्लॉक भी लिए जा रहे है। कुछ पाना है तो कुछ तकलीफें भी सहना पड़ेगा। सोलापुर वाड़ी सेक्शन में रेल दोहरीकरण का कार्य किया जा रहा है, उसमे कलबुर्गी सावलगी स्टेशनोंके बीच 20 सितंबर से 6 अक्टूबर तक ब्लॉक लिया जा रहा है। जाहीर है कुछ गाड़ियाँ रद्द, कुछ गाड़ियाँ शार्ट टर्मिनेट रहेगी तो कुछ डाइवर्ट होकर चलाई जायेगी। देखते है कौनसी गाड़ियाँ और क्या स्थिति बनती है।

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भारतीय रेल के यात्रिओंके अच्छे दिन

आजकल मीडिया में “रेलवे की यात्रिओंकी वेटिंग लिस्ट जल्द ही समाप्त हो जाएगी, यात्रियों की डिमांड पर आतिरिक्त गाड़ियाँ चलाई जाएगी” ऐसी बातें सुनने को मिलती है। हमने सोचा, जरा हमारे पाठकोंको भी इन दावोक़े पीछेकी असली हकीकत समझा देते है।

इन बड़े बड़े दावोक़े पीछे असल में है, DFCCIL और इसका लॉन्ग फॉर्म है, डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड। यह एक पब्लिक सेक्टर कम्पनी है, जिसकी स्थापना 2006 मे की गयी और यह कम्पनी मिनिस्ट्री ऑफ इंडियन रेल्वेज के तहत आती है। यह कम्पनी के पूर्ण ऑपरेशनल होनेसे, आनेवाले 2, 3 वर्षोंमें भारतीय रेलवे के यात्री यातायात में कभी सोचा नही होगा ऐसी तब्दीलियाँ लेकर आएगी।

फिलहाल, यह कम्पनी अपने दो प्रोजेक्ट पश्चिम कॉरिडोर दिल्ली मुम्बई जो दादरी उत्तर प्रदेश से JNPT मुम्बई 1468 km और पूर्वी कॉरिडोर दिल्ली हावड़ा जो की लुधियाना, पंजाब से दानकुनी पश्चिम बंगाल 1760km रूट पर जोर शोर से काम कर रही है। जिसमे कई सारे अलग अलग हिस्से रेल यातायात अपना योगदान देना शुरू कर दिए है।

जनवरी 2018 में इन्ही दो बड़े प्रोजेक्ट को लिंक करने वाले 4 और नए प्रोजेक्ट्स की घोषणा की गई।
1: पूर्व – पश्चिम डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, कोलकाता से मुंबई 2000 km
2: ऊत्तर – दक्षिण डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, दिल्लीसे चेन्नई 2173 km
3: पूर्वतटीय डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, खरगपुर से विजयवाडा 1100 km
4: दक्षिण पश्चिम डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, चेन्नई से गोवा 890km

अब इस प्रोजेक्ट की भव्यता जानिए, जो आपको भारतीय रेल के प्रति गौरवान्वित कर देगी।
एक फ्रेट ट्रेन याने मालगाड़ी जो डेढ़ किलोमीटर लंबी रहेगी। जिसमे दो मंजिला कंटेनर्स लोड किए जाएंगे। कुल 400 कंटेनर्स जिनका कुल वजन 15000 टन रहेगा और इस गाड़ी को खींचने वाले 800 इलेक्ट्रिक लोको इंजिन विशेष रूपसे बनाए जाएंगे जिनकी शक्ति 12000 HP की रहेंगी।
यह हाई स्पीड फ्रेट ट्रेन कमसे कम 100 km/h गतिसे चलाई जाएगी।
यह पूरा नेटवर्क GSM और रेडियो कम्युनिकेशन से ट्रैक किया जाएगा। पूरे कॉरिडोर में कहींभी लेवल क्रॉसिंग नही होगी।
यह पूरा प्रोजेक्ट याने दोनों कॉरिडोर इलेक्ट्रीफाइड होनेसे इकोफ्रेंडली प्रदूषण रहित और किफायती रहेंगे।

लेकिन इससे यात्री परिवहन को फायदा कैसे होगा, आइए जानते है। फिलहाल सभी प्रमुख रेल मार्ग का दोहरीकरण हो चुका है और इन्ही अप एन्ड डाउन लाइनोंपर यात्री गाड़ियोंके साथ साथ मालगाड़ी भी चलाई जाती है। मालगाड़ियों की गति कम, लम्बाई ज्यादा होने से यह गाड़ियाँ यात्री गाड़ियोंके मार्ग में बाधा खड़ी कर देती है और वजह से यात्री गाड़ियोंको रोक रोक कर चलाना पड़ता है।

आज जो हालिया रेल मार्ग है उनपर क्षमतासे 150 से 200 % लोड है जो की फ्रेट कॉरिडोर की वजह से काफी हद तक कम हो जाएगा। गाड़ियाँ तीव्र गतिसे चलाई जा सकेगी, अतिरिक्त डिमांड रहनेपर एक्स्ट्रा गाड़िया किसी भी समय छोड़ी जा सकेगी।

आजकल की वेटिंग लिस्ट की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी। उल्टे नॉनस्टॉप पॉइंट टू पॉइंट तेज गाड़ियाँ भी इस फ्रेट कॉरिडोर से निकली जा सकती है।
बस! 2 – 4 वर्षोंका इंतजार कीजिए भारतीय रेलवे के यात्रिओंके सिर्फ अच्छे ही नही बहोत अच्छे दिन आने वाले है।

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क्या होता है, रेलवे का CRS

मनमाड पुणे के बीच, दौंड स्टेशन से 3 km की दूरी पर जो कॉर्ड लाइन, दौंड बाईपास लाइन का CRS, 17 सितंबर को यशस्वी सम्पन्न हुवा। इस कॉर्ड लाइनसे दौंड स्टेशनपर जो गाड़ी की दिशा बदलने के लिए लोको का शंटिंग करना पड़ता था उसकी जरूरत नही रहेगी, गाड़ी सीधे ही दौंड मैन जंक्शन पर गए बगैर, कॉर्ड लाइन से रवाना हो जाएगी। यहाँपर नया प्लेटफार्म बनाया गया है। दौंड स्टोपेज वाली गाड़ियाँ वहाँ अपना हॉल्ट ले लेगी।

अपने पाठकों की जानकारी के लिए बता दें, CRS याने Commission of Railway safety रेल संरक्षा आयोग। आप को यह जान कर आश्चर्य होगा की यह आयोग भारत सरकार के *नागरी विमानन मंत्रालय* के अधीन काम करता है, न की रेल मंत्रालय के।

इस आयोग का प्रमुख कार्य, रेल यात्रा तथा रेल परिचालन मे संरक्षा मामलों से सम्बंधित है तथा रेल अधिनियम (1989) मे दिए गये सांविधिक कार्यो को करता है, ये कार्य निरीक्षणात्मक, जांच सम्बंधी तथा परामर्शी प्रकृति के हैं। आयोग, रेल अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों अर्थात दुर्घटना नियमो के अंतर्गत सांविधिक जांच तथा समय समय पर जारी किए गए कार्यकारी अनुदेशों के अनुसार कार्य करता है। आयोग का सबसे महत्वपूर्ण कार्य यात्री यातायात के लिए खोली जाने वाली किसी भी नई लाइन के लिए रेल मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों तथा विनिर्देशो का पालन तथा यात्री यातायात को चलाने के लिए नई लाइनें सभी तरह से सुरक्षित हैै, को सुनिश्चित करना है। यह अन्य कार्यो जैसे गेज परिवर्तन, दोहरी लाइनों तथा विद्यमान लाइनों के विद्युतीकरण पर भी लागू होता है।

आयोग भारतीय रेलों मे घटने वाली गम्भीर प्रकृति की रेल दुर्घटनाओं की सांविधिक जांच करता है तथा भारत मे रेल संरक्षा से संबंधित सुधार के लिए सिफारिशें करता है।

यह आयोग नौ क्षेत्रीय कार्यालय से अपना कामकाज करता है,

अधिकार क्षेत्र – क्षेत्र मुख्यालय – कार्यक्षेत्र
1: सेंट्रल सर्कल – मुंबई
सेंट्रल रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे और कोंकण रेलवे

2 : पूर्वी सर्किल – कोलकाता
ईस्टर्न रेलवे और पूर्व मध्य रेलवे

3 : उत्तरी सर्कल- नई दिल्ली नॉर्दन रेलवे और दिल्ली मेट्रो रेल निगम

4 : पूर्वोत्तर सर्कल – लखनऊ पूर्वोत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे

5 : पूर्वोत्तर सीमांत सर्कल – कोलकाता
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे और मेट्रो रेल कोलकाता

6 : दक्षिण सर्कल – बंगलौर दक्षिण रेलवे और दक्षिण पश्चिमी रेलवे

7 : दक्षिण केन्द्रीय सर्कल – सिकंदराबाद दक्षिण मध्य रेलवे

8 : पश्चिमी सर्कल – मुंबई पश्चिमी रेलवे और उत्तर पश्चिम रेलवे

9 : दक्षिण पूर्वी सर्किल – कोलकाता दक्षिण पूर्व रेलवे, पूर्वी तट रेलवे. और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे

तो मित्रों, यह जानकारी है CRS याने कमीशन ओफ रेलवे सेफ्टी की।

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रेल ब्लॉक्स की पीड़ा

पुणे के घर की बैठक, पटेल साहब अपने इंजीनियर बेटे समीर को नसीहत दे रहे, “बेटे, रांची में आपका इंटरव्यू है। क्या आप मंगलवार तक रांची सही समय पोहोंच जाओगे?” समीर बोले, “हाँ पापाजी, इतवार को सीधी गाड़ी है, सोमवार को शाम पोहोंचा देगी मंगलवार को सुबह 10 बजे इंटरव्यू अटेंड हो जाएगा। मोअर देंन सफिशिएंट टाइम टू रिच।”

लेकिन होता क्या है, सुबह स्टेशनपर पहुंचे तो पता चला, ट्रेन कैंसल हो चुकी है। हैरान, परेशान समीर स्टेशन मास्टर के गया और बहस करने लगा, हम रांची कैसे जाएंगे? पता चला कल रात 10 बजे sms भेजे गए, की बिलासपुर विभाग में नॉन इंटरलॉकिंग के कार्य के चलते रेल प्रशासन ने पुणे हटिया एक्सप्रेस जो बिलासपुर होकर चलती है, रद्द कर दी है, जो उसने चेक ही नही किया था। वह पूरे भरोसेमे था की गाड़ी पुणे स्टेशन से शुरू होने वाली है तो लेटवेट होने का तो कोई झंझट ही नही है।

समीर को अब अपना भविष्य खतरे में दिखाई देने लगा। उसे याद आ रहा था, पिताजीने दो दिन पहले ही उसे जल्दी पोहोंचने के सलाह दी थी। अब पुणे से रांची सीधे जानेवाली कोई भी गाड़ी नही थी और रौरकेला तक जानेवाली दूसरी गाड़ियोंमे उसे आरक्षण उपलब्ध नही था। अब जनरल क्लास के अलावा उसके पास कोई चारा नही था और इसके बावजूद समयपर रांची पहुंचने की कोई गारंटी भी नही।

यह तो सिर्फ एक उदाहरण था, ऐसे कई लोग अपनी अपनी व्यथा लेकर स्टेशनपर रेलवे को और अपनी किस्मत को कोस रहे थे। किसीने 2-2 महीने पहले आरक्षण किया था तो कोई अपने तत्काल आरक्षण के भरे हुए प्रिमियम की दुहाई दे रहा था। यह सब परेशानी और दुविधा अकस्मात लिए गए ट्रैफिक ब्लॉक की वजह से थी।

एक बात तो निश्चित है, भरोसा किसी बात का नही किया जा सकता। भाईसाहब, भरोसे में जीना छोड़िए। आजकल रेल सफर बिना किसी अग्रिम सूचना के, शार्ट नोटिसपर रद्द किया जा रहा है। यह मैंटेनेंस विभाग को अपने कामोंको निपटाने फ्री हैंड दिए जाने की वजह से हो रहा है। माना की 12 घंटे पहले सूचना याने रेल सेवा से मोबाइल पर कन्फर्म टिकट धारकोंको मेसेज आया लेकिन क्या 12 घंटे में कोई अपनी इतने लंबे रेल यात्रा की आननफानन में पर्यायी व्यवस्था कर पाता है?

क्यों होता है ऐसा? क्या रेल प्रशासन अपने मेंटेनेन्स ब्लॉक 2 महीने पहले शेड्यूल क्यों नही कर सकता? दुर्घटनाए, अकस्मात आयी नैसर्गिक आपदा जैसे जलभराव, चट्टानोका पटरी पर आ जाना तब तो ट्रैफिक ब्लॉक होना समझा जा सकता है, वहाँ कोई भी पर्याय नही होता। लेकिन जो मेंटेनेन्स वर्क है, जिसके लिए ब्लॉक लिए जाने है उसके लिए पर्याप्त पूर्व सूचना दी जा सकती है, नियोजन करके पर्यायी मार्ग से गाड़ियाँ गन्तव्य तक ले जाई जा सकती है या फिर गन्तव्य के ज्यादा से ज्यादा पास के जंक्शन तक ले जाने की व्यवस्था हो सकती है।

रेल प्रशासन पर यात्रिओका भारी दबाव है। रेल मार्गोपर क्षमतासे 150 से 250% तक ट्रैफिक चलाई जा रही है। ऑपरेटिंग विभाग, इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी विभाग अपने काम में जिम्मेदारी और सजगता के साथ जुटे हुए है। गाड़ियाँ बढ़ाने, उनकी क्षमता और गति बढ़ाने के लिए हर दिन नए नए प्रयास और प्रयोग किए जा रहे है। नई अत्याधुनिक गतिमान एक्सप्रेस, नए LHB डिब्बे, गति बढाने के लिए नई पुश पुल लोको तकनीक, जगह जगह पर ट्रैकोंका विद्युतीकरण, स्टॉपेज समय कम हो इसलिए गाडीके डिब्बोमे पानी भरने हेतु उच्च क्षमता की वाटरफिलिंग तकनीक, बड़े बड़े जंक्शन स्टेशनपर गाड़ियोंकी भीड़ हो जाती है, उसके लिए अलगसे टर्मिनल स्टेशन्स और बायपास ट्रैक का निर्माण ऐसे कई कार्य रेल प्रशासन पूरे जोर शोर से कर रहा है। यह सब बुनियादी सुविधाएं अपना उपयोग देनेके काबिल होने में समय तो लगता ही है और तब तक ऐसे ब्लॉक्स आना लाज़मी भी है।

लेकिन, हमारी यात्रिओंकी ओरसे विनंती है, तकनीकी रखरखाव वाले ब्लॉक्स के लिए समुचित पूर्वसूचना दी जानी चाहिए और क्या क्या पर्याय उपलब्ध कराए गए है उसकी जानकारी भी यात्रिओंको दी जानी चाहिए।

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अकोला काचेगुड़ा के यात्री ध्यान दे।

दक्षिण मध्य रेल्बे के नान्देड विभाग में मालटेकडी मुगुट स्टेशन के बीच रेल के दोहरीकरण का नॉन इंटरलॉकिंग कार्य दिनांक 18 सितंबर से शुरू होने जा रहा है।

कृपया अकोला पूर्णा नान्देड काचेगुड़ा मार्ग के यात्री ध्यान दिजिएगा।

परिपत्रक में अपनी गाड़ियों की समयसारिणी देख ले।