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रेलवे में ग्रुप बुकिंग आरक्षण

रतन आज फिर अपने चाचा सुखीरामजी के यहाँ आ गया, जब तक बारात की बुकिंग का कोई फुल एन्ड फाइनल नहीं हो जाता तब तक रतन का इस तरह का सिलसिला चलता रहेगा ऐसा लगता है खैर, देखते है, सुखीरामजी आज क्या सिखाते है।

“चाचाजी, कल आपने स्पेशल कोच बुक करने की और ग्रुप आरक्षण करने की बातें बताई। कोच बुकिंग, निर्धारित तारीख के लिए, कमसे कम 30 दिन और ज्यादा से ज्यादा 6 महीने पहले बुक करा सकते है। रेलवे ने इसके लिए FTR ( full tariff rate) की http://www.ftr.irctc.co.in ऐसी वेबसाइट बना रखी है। जिसपे स्पेशल कोच या स्पेशल ट्रेन भी बुक करा सकते है। लेकिन चाचाजी, ग्रुप रिजर्वेशन के लिए क्या करे ये तो बताइए।”

“देखो रतन, कल तो मैंने बताया की, अपने पूरे यात्रिओंकी लिस्ट, उनके पूरे नाम, उम्र, लिंग, और पहचानपत्र (फोटो और पता, आई डी) के साथ सीनियर DCM, वरिष्ठ विभगिय वाणिज्य प्रबंधक के नामे अर्जी देनी होगी।”

“यह सब तो ठीक है, लेकिन आगे क्या और कैसे करेंगे?” रतन।

“अरे रतनभाई, Sr.DCM का अनुमतिपत्र ले कर रिजर्वेशन ऑफिस जाकर वहाँ CRS चीफ रिजर्वेशन सुपरिटेंडेंट को देना है। आगे की कार्यवाही याने रिजर्वेशन टिकट बनाने का काम वोही लोग करेंगे।
हाँ, यह ग्रुप रिजर्वेशन में, हमे जो भी अप्लिकेबल याने लागू कन्सेशन मिलने चाहिए, जरूर मिलेंगे। वरिष्ठ नागरिक, बच्चे का 50% कन्सेशन, सब मिलेंगे।”

यह तो ठीक है, लेकिन ऐन वक्त हमारे कुछ लोग बदले गए, याने लिस्ट की जगह, कोई दूसरे लोग आने वाले रहे तो क्या करना होगा?

इसके लिए, रेलवे का चेंज ऑफ नेम ऐसा एक नियम है। इस नियम के तहत, पूरे ग्रुप के 10% तक के, न आ सकनेवाले लोगोंके नाम बदलने की सहूलियत है।
इस फैसिलिटी का उपयोग, हम गाड़ी छूटने के समय से 48 घंटे पहले तक ही कर सकते है।

एक बात अवश्य ध्यान रखनी है, की इस नाम बदल सकने की सुविधा में, ग्रुप बुकिंग के लिए और सरकारी कर्मचारियों जो अपनी ड्यूटी पर जा रहे है, इनके लिए नाम की बदली, परिवार के अंतर्गत तक ही सीमित रखने का बंधन नही है और यह सुविधा केवल कन्फर्म हो चुके आरक्षित टिकट के लिए ही है।

तत्काल टिकट और कन्सेशन वाले टिकटधारी यात्रिओंको यह सुविधा उपलब्ध नही है।

हाँ रतन, कुछ लोग अलग अलग आई डी लेकर, IRCTC की वेबसाइट पर जाकर, रेलवे के e ticket भी बनवा सकते है, लेकिन यह ठीक नही। दूसरा इसमें सभी टिकट, एक ही डिब्बे में मिलेंगे यह भी निश्चित नही है।

आ गया चाचाजी सब कुछ समझ मे। अब शादी की तारीख जैसे ही निश्चित हो जावें, सब डॉक्यूमेंट बनाकर और हिसाब से 120 दिन पहले पोहोंच जाएंगे रिजर्वेशन कराने। धन्यवाद।

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बारात ले जाने के लिए स्पेशल कोच करना है।

“अरे, रतन काहें परेशान होते हो, बस अभी बैठते है और पुरा के पूरा हिसाब निकलते है, जो सही बैठेगा तय हो जाएगा।” सुखलालजी बोले।

रतन आज सुबह ही राजस्थान से लौटा था। उसके छोटे भाई मखनी का रिश्ता राजस्थान में श्रीगंगानगर के पास 17 किलोमीटर की दूरीपर डूंगरी गाँव मे तय हो रहा था। मखनी विदेश में आईटी इंजीनियर था और वहीं साथ मे काम करनेवाली लड़की से उसका चक्कर चल गया। खास बात तो यह थी की लड़की अपने जाती की, और ठेठ राजस्थान के रईस खानदान की थी।

रतन के समधी, ठाकुर रणविजय इस रिश्ते से थोड़े नाराज़ ही थे, लेकिन आजकल की आबोहवा को समझते थे। मखनी का परिवार उन्हें अपनेसे उन्नीसा लग रहा था, अतः थोड़े अड़ाकर अपनी बात मनवाने की जिद कर रहे थे। उनका कहना था, “शादी इसी गांव में, पूरे रस्मोरिवाज के साथ 4 दिन तक चलेगी, हमारे परिवार में 40 साल बाद एक लड़की की विदाई होने जा रही है।”

इन्हीं बातों से परेशान रतन, सुखलालजी से सलाह मशविरा करने आया था। सुखलालजी रेलवे के रिटायर्ड स्टेशन प्रबंधक थे, और रेलवे की काफ़ी जानकारी रखते थे।

काफी मेहनत मशक्कत के बाद, सुखलालजी ने रतन के सामने ऑप्शन रखे, ” देख भई रतन, रेलवे से बारात ले जाने के तीन तरीके है। पहला टिकट निकालो और बैठ जाओ। लेकिन भुसावल से श्रीगंगानगर इतना 1614 किलोमीटर, बिना आरक्षण के जाना, इसे तो छोड़ ही दे।

दूसरा है, 150 लोगोंके जाने और आने के रिजर्वेशन बनाना। तो इसके लिए गाड़ी छूटने के 120 दिन पहले अग्रिम आरक्षण के नियमोंके तहत, हम टिकट बनवा सकते है। एक, चलने वाले 150 बरातियोंकी लिस्ट, दो कॉपी में बनवाई जाए, लिस्ट में यात्री का पूरा नाम, उम्र, लिंग और आई डी दर्ज होना चाहिए। अब यह लिस्ट, प्रोग्राम की याने लगन पत्रिका और अपने विभाग के वरिष्ठ विभागीय वाणिज्य अधिकारी के नाम अर्जी, यह सब लेकर रिजर्वेशन दफ्तर चलते है। वहाँसे हमे पार्टी की याने ग्रुप बुकिंग की परमिशन मिलेगी, रिज़र्वेशन सुपरिटेंडेंट हमे एक निर्धारित समय देंगे, उस के बाद ही हम इतने रिजर्वेशन कर सकते है।

अगला ऑप्शन है स्पेशल कोच करने का, इसके लिए वही कागजात याने लग्नपत्रिका, 150 लोगोंकी डीटेल लिस्ट और अपने क्षेत्र, मुम्बई के मुख्य परिचालन अधिकारी CPTM के नाम एक अर्जी। यह अर्जी हमे स्टेशन मैनेजर के पास देनी होगी। अर्जी में, हमारा पूरा प्रोग्राम, जाने आने की तारीख, गाड़ी, और वहाँ रुकने समय पूरा लिखित में देना होगा। फिर हमें गाड़ी की, कोच की उपलब्धता और हमारे द्वारा तय गाड़ी की क्षमता याने सभी तकनीकी बाते जानकर यह निश्चित किया जाएगा की हमारा प्रोग्राम कैसे सेट होगा। जब जाने और आने की गाड़ियाँ तय हो जाए तब हमें कोच के पंजीकरण की आर्डर मिलेगी। प्रति कोच ₹ 50,000/- मात्र अमानत के तौर पे भरना होगा। जैसे हम दो शयनयान बुक कर रहे है तो ₹ एक लाख डिपोजिट कराने होंगे।

इसके बाद गाड़ी छूटने के कमसे कम 48 घंटे पहले हमारा 144 क्षमता वाले दो शयनयान का टिकट बन जाना चाहिए। टिकट बनाते वक्त, हमारे डिपोजिट की आधी 50% रकम किराए के मूल्य में समाहित हो जाएगी। बची आधी रकम, जब हम कोच वापसी यात्रा पूर्ण करके रेलवे को सौंप देंगे तब जो भी कम ज्यादा हिसाब करके बची रकम हमे वापस मिल जाएगी।

अब किराए के नियम समझ ले, पार्टी कोच के टिकट में एक तरफ का कमसे कम अंतर 500 km चार्ज किया जाएगा। किसी भी यात्री को कन्सेशन याने सीनियर सिटीजन कन्सेशन या बच्चोंको आधा किराया, कन्सेशन नहीं मिलेगा। सभी लोगोंका या डिब्बे की क्षमताका, जो भी ज्यादा है उतने संख्यामे पूर्ण वयस्क का किराया देय रहेगा। डिब्बे की क्षमतासे ज्यादा लोग जा रहे है तो यात्रा शुरू करनेसे पहले ही उन एक्स्ट्रा लोगोंका टिकट बनवाना होगा, वरना यात्रा के दौरान अतिरिक्त लोग पाए जाने पर पेनाल्टी भरनी पड़ेगी। जाने आने के कुल किराया में, सर्विस चार्जभी जोड़ा जाएगा, जो की अभी बेसिक किराए के 30% चल रहा है।

गाड़ी के दोनों डिब्बे, हमारी एक तरफ की यात्रा पूरी होने से लेकर वापसी यात्रा शुरू होने तक जितनी देर खाली खड़े रहेंगे, उसका डिटेंशन चार्ज ₹ 900/- प्रति घंटा या कमसे कम ₹1500 /- जो भी ज्यादा हो, देना होगा।

यही नही, यदि हमारी गाड़ीमे डिब्बे कहीं दूसरे स्टेशन से लग के आ रहे है तो उसका एम्प्टी हौलेज चार्ज जो की कमसे कम 200 km या वास्तविक अंतर जो भी ज्यादा हो, उसका बेसिक किराया प्लस रिजर्वेशन चार्ज लागू रहेगा।

इसके बाद IRCTC का कुल किराए पे 5% फेसिलिटेशन चार्ज भरना होगा।

अब, रतन भाई आप इत्मीनान से, हर बात समझ के बताना की क्या करना है। कुछ और पूछना हो तो आ जाना हमारे पास, चलेंगे रेलवे स्टेशन पर और जानकारी लेने।

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रेल्वेसे बाईक ट्रांसपोर्ट करवानी है?

रेलवे के पार्सल एवं सामान विभाग की जानकारी, हम आपको विस्तृत तरीकेसे दे रहे है।

कल आप को पार्सल विभाग की थोड़ीसी जानपहचान करायी थी, आज बाईक, स्कूटर कैसे बुक करायी जाती है, इससे अवगत कराते है।

रेल द्वारा बाईक का परिवहन, ट्रांसपोर्ट कराना बेहद आसान, सुविधाजनक और किफायती है। आपकी दोपहिया गाड़ी ट्रांसपोर्ट कराने के दो तरीके है, पहला पार्सल बुकिंग और दूसरा लगेज बुकिंग। पार्सल बुकिंग जो केवल सुबह 10 से शाम 5 बजे तक, और इतवार, सरकारी छुट्टियोंको छोड़ बाकी दिन किया जा सकता है। लगेज के लिए 24घंटे x 365 दिन खुला है, लेकिन लगेज कराने के लिए आपके पास जहाँसे गाड़ी बुक करना है वहाँसे, जहाँ तक भेजनी है उस स्टेशन तक का टिकट होना जरूरी है, उसी टिकटपर आपकी गाड़ी बुक होगी।

आईए पहले नियम देख लेते है,
आपकी दो पहियाँ गाड़ी याने बाईक, मोपेड, या स्कुटर का ओरिजिनल RC बुक याने रजिस्ट्रेशन पेपर, और आपकी ओरिजिनल आई डी कार्ड, इन की एक, एक सेल्फ अटेस्टेड ज़ेरॉक्स कॉपी के साथ होना जरूरी है। यदि गाड़ी का मालिक कोई और है, तो उसका सम्मतिपत्र भी साथ रख ले।

उपरोक्त कागज़ात लेकर, बुक कराने वाली गाड़ी के साथ आप पार्सल ऑफिस पहुंच गए। आगे वहाँ पर बुकिंग की सुपुर्दगी के वक्त आपकी गाड़ी का ईंधन टैंक, फ्यूअल टैंक याने पेट्रोल या डीज़ल बिल्कुल खाली होना चाहिए।

गाड़ी की पॅकिंग करना, यह गाड़ी ट्रांसपोर्ट कराते वक्त का सबसे अहम कार्य है। गाड़ीकी हेडलाइट, सीट और बाकी नाजुक पार्ट्स बारदाने से, अच्छे तरीकेसे फुल्ल कवर किए जाने चाहिए। पैकिंग होने के बाद, गाड़ी के सामने और टेल लैंप की ओर एक स्लेट या गत्ते पर गाड़ी भेजने वाले और पाने वाले का विवरण अमिट स्याही में लिख कर अच्छी तरह से बांध दे।

अब आपकी गाड़ी बुकिंग के लिए तैयार है। किराया सूची तो आपके पास कल ही पोहोंच गई है। 60 cc से कम वाली गाड़ी को 100 kg, 60cc से 350cc तक 200kg और 350cc से ज्यादा वाली गाड़ी को 250kg वजन मानक तय है। यदि मानक वजन से गाडीका वास्तविक वजन ज्यादा है तो जो ज्यादा है उसे चार्ज किया जाएगा।

गाड़ी की कीमत घोषित करनी होती है, घोषित कीमत के 1% रकम, गाडी के बीमा के तौर पे, किराए में जोड़ी जाती है। उदाहरण के लिए, आपने गाड़ी की कीमत 50,000 बताई तो बीमे के 500 रुपए आपके किराए में जोड़े जाएंगे, इस तरह कुल कराया तय होगा। ध्यान रहे, इस कुल किराए में गाड़ी को स्टेशन प्लेटफॉर्म पर पोहचना, ट्रेन में लदान कराना, गन्तव्य पर उतरना और गतंव्य स्टेशन के पार्सल ऑफिस में पहुचना सब सम्मिलित है। यदि गाड़ी का टैंक खाली करना, दोनों नेमप्लेट बांधना और बारदाने वाली पॅकिंग करना आप खुद कर रहे है तो रेलवे रसीद पर छपी कीमत के अलावा कोई भी अतिरिक्त रकम आपको खर्च नही करनी है।

गाड़ी की बुकिंग तो हो गयी, अब पार्सल तरीकेसे हुई है तो आपको रेलवे रसीद सम्भलनी है, यदि लगेज तरीकेसे हुई है तो रसीद के साथ टिकट भी सम्भलनी है।

उपरोक्त सभी कागज़ात, रसीद, टिकट, गाड़ी की डिलेवरी के लिए बेहद जरूरी है। इसके नही रहते आपको गाड़ी की डिलिवरी मिलने में खासी मशक्कत करनी पड़ेगी, इंडेमनिटी बॉन्ड भरकर ही डिलेवरी मिल पाएगी, जो बड़ा ही सिर दर्द वाला काम है, तो साहब, कागजात सम्भाल कर रखने में ही ज्यादा समझदारी है।

हाँ, एक बात और, गाड़ी लगेज द्वारा बुकिंग की है, तो यह रेलवे पर निर्भर करता है, की आपकी बाईक, आप के टिकट वाले ट्रेन से ही लदान होगी या फिर किसी और ट्रेन से आएगी।

आजकल पार्सल बुकिंग इलेक्ट्रॉनिक पद्धति से होती है, अतः बुकिंग होने पर, गाड़ी लदान होने पर और आपकी गाड़ी गतंव्य पर, पार्सल ऑफिस पोहोंचने का आपको sms मिलता है।

सो, आशा करते है, आपकी सभी शंकाओंका समाधान हो गया होगा। फिर भी और कुछ पूछना हो तो हम हाज़िर है, अपनी वेबसाईट पर। धन्यवाद।