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क्या रेल यात्रिओंका यह जुनून, हुजूम, संक्रमण काल के उन प्रवासियों की याद नही दिला रहा?

21 अप्रैल 2024, रविवार, चैत्र, शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी, विक्रम संवत 2081

“भारतीय रेल की आरक्षण व्यवस्था पतन के बिल्कुल कगार पर खड़ी है।” यह बयान बहुत नाट्यमय लग रहा हो, मगर यह किसी हद तक सच है। महीनों पहले बुक किया आरक्षित टिकट हो या मुँह मांगा दाम चुका कर लिया गया प्रीमियम तत्काल का आरक्षण हो, आपको अपनी सीट पर बिठाकर यात्रा करने की शाश्वती नही देता। कोच की यात्री क्षमता महज एक ढकोसला बनकर रह गया है।

इस ग्रीष्मकालीन छुटियोंमे केवल एक क्षेत्रीय रेलवे, पश्चिम रेलवे 2200 विशेष अतिरिक्त फेरों का नियोजन कर रहा है और इसी तरह अन्य क्षेत्रीय रेलवे भी यात्रिओंके लिए अतिरिक्त गाड़ियोंकी व्यवस्था कर रहे है। इस वर्ष ग्रीष्मकालीन विशेष गाड़ियोंके फेरोंकी कुल संख्या करीबन दस हजार तक पहुंच गई है। इसके बावजूद नियमित मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे यात्रिओंका जुनून उन्हें उच्च वर्ग के कोचेस में अतिक्रमण करने को रोकने में असमर्थ हो रहा है।

रेल विभाग उसके काउंटर्स और UTS सिस्टम के जरिए प्रत्येक यात्री को उसकी माँग अनुसार टिकट देते जा रहा है। जिसका गाड़ियोंमे उपलब्ध अनारक्षित आसनों से कोई तालमेल नजर नही आता।

एक तरफ नियमित मेल/एक्सप्रेस की कोच संरचनामें पहले ही अनारक्षित कोच पर्याप्त नही थे और बचीखुची कसर रेल विभाग की ‘कोच संरचना मानकीकरण’ योजना ने पूरी कर दी। इस योजनाने नियमित मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे अपर्याप्त अनारक्षित कोच की पूर्वपार संख्या को और सिमटा दिया। ऐसे भी ग़ैरवातानुकूलित स्लिपर कोच में कम अंतर यात्रा करनेवाले यात्री, काउंटर से खरीदे हुए और चार्टिंग के बाद प्रतिक्षासूची में कायम रहे चुके यात्री बेहिचक यात्रा कर जाते थे, अब तो रेल विभाग की रेलवे प्लेटफॉर्म्स पर सुपर तत्काल व्यवस्था (?) कार्यरत है। टिकट चेकिंग दस्ते उन्हें प्लेटफॉर्म्स पर ही अनाधिकृत यात्रा शुरू करने से पहले ही दण्डित कर ‘पैनाल्टी रसीद के तौर पर, आरक्षित कोचों में यात्रा करने का अग्रिम परमिट पकड़ा देते है। यह यात्री भी स्लिपर कोचों में गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशनोंसे से ही “बोनाफाइड पैसेंजर” टिकट चेकिंग स्टाफ़ द्वारा ‘प्रमाणित प्रमाणपत्र’ पेनाल्टी रसीद लेकर जम जाते है। तातपर्य यह है, नियमित मेल/एक्सप्रेस के कुल स्लिपर समेत 7, 8 ग़ैरवातानुकूलित कोच अपने प्रारम्भिक स्टेशन से ही खचाखच भर जाते है। आगे के प्रत्येक स्टेशन पर अनारक्षित टिकट धारकोंकी यह कहानी दोहराई जाती है और गाड़ियोंमे यात्रिओंका हुजूम बढ़ते चला जाता है।

याद कीजिए, यह वहीं उत्तर भारतीय प्रवासी है, जो संक्रमण के फैलाव की रोकथाम के हेतु यात्री गाड़ियोंके बन्द किए जाने पर पैदल ही हजारों किलोमीटर की यात्रा के लिए निकल पड़े थे। आज जब गाड़ियाँ सामने खचाखच भरी दिख रही है तो कोच के टॉयलेट, पैसेज, वेस्टिब्यूल और दरवाजों में लटक कर यात्रा को अन्जाम तक पहुँचाने का जुनून रखते है। इतना भयंकर जुनून इन यात्रिओंपर सवार होता है, की इन्हें अपने जीवन तक की परवाह नही है तो उच्च वर्ग के कोचों में अनाधिकृत प्रवेश की क्या होगी? उच्च वर्ग के कोचेस में कोई एखाद दो अनाधिकृत यात्री पाए जाते तो उनसे ड्यूटी स्टाफ़ निपटने का प्रयत्न करेगा मगर 50, 100 यात्रिओंके हुजूम को यह वाणिज्यिक कर्मी अकेले किस तरह झेल पाए?

टिकट बुकिंग पैटर्न देखिए, आजकल यात्री भले ही लम्बी दूरी की यात्रा करने का इच्छुक हो और उसे उसके निर्धारित गन्तव्य का आरक्षण न मिल पाए तो वह जहाँ तक की आरक्षित टिकट मिल जाए (जॉइनिंग स्टेशन के खाली कोटे में) खरीद कर गाड़ी में चढ़ जाता है और बुक्ड स्टेशन पर जगह खाली करने मे आनाकानी करता है। जे उसने अपनी आरक्षित सीट छोड़ भी दी तो कोच नही छोड़ता, वही आसपास जमे रहता है। ऐसे यात्री भी गाड़ियोंमे भीड़ करते नजर आएंगे। अब रेल टिकट बुकिंग में यात्री की मंशा समझने की तकनीक तो है नही, के वह यह भी सोच ले, गन्तव्य स्टेशन पर यात्री अपने नए आए हुए यात्री के लिए जगह खाली नही करेगा?

रेल विभाग ने एक अरसे से अपना एमिनिटीज स्टाफ़ कम कर के बहुत बड़ी चूक कर दी है। पहले प्रत्येक आरक्षित कोच चाहे वह वातानुकूल हो या ग़ैरवातानुकूलित चल टिकट निरीक्षक TTE रहता ही था, जो प्रत्येक आरक्षित यात्री का लेखाजोखा रखता था। साथ ही अनाधिकृत अवैध यात्रिओंकी घुसपैठ को भी कड़ाई से रोके रखता था। धीरे धीरे रेल विभाग टिकट चेकिंग की मूल्यावर्धित आय के ऊँची छलांगे लगाते लक्ष्यों की ओर आकर्षित होता गया और आरक्षित यात्रिओंकी सारी सुख-सुविधाओं को उसने ताक पर रख दिया। अब पूर्ण 22 कोच की गाड़ियोंके 20 यात्री कोच में बमुश्किल 2 से 3 TTE, कन्डक्टर एमिनिटी स्टाफ़ की ड्यूटी पर होते है, जो अपना काम सुचारू रूप से कतई नही कर पाते।

दूसरा कारण है, यात्रिओंका हुजूम, जुनून। कोई इनको समझाए, प्रशासनिक कायदे, कानून आम जनता याने उनके स्वतः के हितों को सहेजने के लिए बने है। अनारक्षित कोच पर यात्री क्षमता जब 90/100 यात्री लिखी हो तो उसमे 500 यात्री क्यों सवार होना चाहते है? इस तरह तो दस हजार क्या लाख भर के फेरे चलवा दिए तब भी कम पड़ेंगे और यह रोडवेज नही है, इस पर मनमाने तरीके से गाड़ियाँ नही चल सकती, न ही यात्री लद सकते है। रेल परिवहन के अपने नियम, तरीके और क्षमताएं है।

शायद वह वक्त दूर नही, की अब रेल प्रशासन मिक्स्ड यात्री वर्ग की गाड़ियाँ चलाना बन्द कर दे। ग़ैरवातानुकूलित गाड़ियाँ अलग चलेंगी और वातानुकूल गाड़ियाँ बिल्कुल अलग। हवाई जहाज की तरह सम्पूर्ण वातानुकूल गाड़ियाँ 500/1000 किलोमीटर बिना रुके चलेगी और ग़ैरवातानुकूलित गाड़ियाँ अपने सभी नियमित स्टोपेजेस के साथ चलती रहेंगी। रेल विभाग की वन्दे सीरीज शायद इस तरह की गाड़ियोंके परिचालन का आगाज़ है। कम अंतर के लिए मेमू, वन्दे मेट्रो गाड़ियाँ आ गई है, आने जा रही है। जो 300 से कम किलोमीटर के गन्तव्य के यात्रिओंको साधेंगी।

लम्बी दूरी की, किसी भी तरह की गाड़ी चाहे वह ग़ैरवातानुकूलित अमृत भारत ट्रेन हो या सम्पूर्ण वातानुकूल वन्देभारत स्लिपर ट्रेन हो पूर्णतः आरक्षित ट्रेन रहें। द्वितीय श्रेणी के लम्बी दूरी के टिकटोंको 2S आरक्षित श्रेणी में बदला जाना चाहिए। फिलहाल चल रही, लम्बे अंतर की नियमित मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे भी ARP किसी भी अग्रिम आरक्षण तिथि को आधार बनाकर अनारक्षित टिकट बुकिंग को पूर्णतः बन्द करना आवश्यक है।

300 किलोमीटर से ज्यादा अंतर का अनारक्षित टिकट और उसपर की जाने वाली 36, 48 घण्टों की रेल यात्रा अमानवीय श्रेणी में समझ, उसके आबंटन पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। काउंटर्स पर बेचे जानेवाले PRS प्रतिक्षासूची टिकट भी तत्काल स्वरूप में बन्द करना होगा। अवैध यात्रा करने के अग्रिम परमिटों की जो दुकानदारी रेलवे प्लेटफार्म पर चलाई जा रही है, उसे बन्द करना होगा। ट्रेनोंसे उतरने वाले यात्रिओंके टिकटोंकी की जाँच के साथ अब प्लेटफॉर्म्स पर अन्दर आने वाले सम्भावित यात्रिओंके टिकटोंकी जाँच करना होगा। आनेवाले 60 मिनटों में यदि कोई अनारक्षित ट्रेन न हो तो उस टिकटधारियों का प्लेटफॉर्म्स पर प्रवेश रोक दिया जाए।

रेल विभाग को यदि अपनी यात्री व्यवस्था में सुधार करना है तो इस तरह के कड़े निर्णय लेना ही होगा।

( आरक्षित कोचों में अवैध घुसपैठ के अनगिनत वीडियो, तस्वीरें सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। कई तो हम हमारे ब्लॉग में पहले डाल भी चुके है और पाठक भी इन परिस्थितियों से भलीभाँति अवगत है। इसीलिए प्रस्तुत लेख में उन्हें जोड़ने के लिए, कटाक्ष से टाला गया है।)

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मध्य रेल की 7 जोड़ी अतिरिक्त ग्रीष्मकालीन विशेष गाड़ियाँ साथ ही राजकोट – महबूबनगर, उधना पटना, बरौनी और वलसाड दानापुर के भी फेरे चलेंगे।

20 अप्रैल 2024, शनिवार, चैत्र, शुक्ल पक्ष, द्वादशी, विक्रम संवत 2081

छुट्टियों में जारी यात्रिओंकी भीड़ को देखते हुए, मध्य रेल ने लोकमान्य तिलक टर्मिनस से गोरखपुर, दानापुर के बीच अतिरिक्त गाड़ियोंका प्रायोजन किया है। इसके साथ ही पुणे से दानापुर, कानपुर और जयपुर के बीच भी अतिरिक्त विशेष गाड़ियाँ चल रही है। नागपुर से गोरखपुर के बीच एक जोड़ी विशेष फेरा चलाया जा रहा है। गाड़ियोंका विवरण निम्नलिखित है,

संक्षिप्त सूची

01083/84 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर लोकमान्य तिलक टर्मिनस TOD विशेष (2फेरा) वाया भुसावल, इटारसी, बीना, झाँसी, कानपुर, लखनऊ, गोण्डा, बस्ती

01085/86 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर लोकमान्य तिलक टर्मिनस TOD विशेष (2फेरा) वाया भुसावल, इटारसी, बीना, झाँसी, कानपुर, लखनऊ, गोण्डा, बस्ती

01425/25 पुणे दानापुर पुणे TOD विशेष (2 फेरे) वाया भुसावल, इटारसी, जबलपुर, प्रयागराज छिंवकी, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन

01081/82 लोकमान्य तिलक टर्मिनस दानापुर लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशेष (2फेरे) वाया भुसावल, इटारसी, जबलपुर, प्रयागराज छिंवकी, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन

01433/34 पुणे जयपुर पुणे साप्ताहिक विशेष (2 फेरे) वाया कल्याण, वसई रोड, सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर

01429/30 पुणे कानपुर पुणे साप्ताहिक विशेष (2 फेरे) वाया मनमाड़, भुसावल, इटारसी, बीना, झाँसी

01207/08 नागपुर गोरखपुर नागपुर (1फेरा) वाया इटारसी, बीना, झाँसी, कानपुर, ऐशबाग, गोण्डा, बस्ती

इसके अलावा निम्नलिखित गाड़ियाँ अन्य क्षेत्रीय रेलवे की चलाई जा रही है, जो मध्य रेल से गुजरेंगी,

अतिरिक्त ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेन सेवाएं

रेलवे ने यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को कम करने के लिए अतिरिक्त ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेन सेवाएं चलाने का निर्णय लिया है विवरण इस प्रकार है:

राजकोट और मेहबूबनगर विशेष ट्रेन (20 सेवा)

09575 साप्ताहिक विशेष दिनांक 22.04.2024 से 24.06.2024 तक प्रत्येक सोमवार को 13.45 बजे राजकोट से प्रस्थान करेगी और अगले दिन 19.35 बजे मेहबूबनगर पहुंचेगी। (10 सेवा)
09576 साप्ताहिक विशेष दिनांक 23.04.2024 से 25.06.2024 तक प्रत्येक मंगलवार को 21.35 बजे मेहबूबनगर से प्रस्थान करेगी और तिसरे दिन 05.00 बजे राजकोट पहुंचेगी। (10 सेवा)
हाल्ट : वांकानेर, सुरेंद्रनगर, अहमदाबाद, नडियाद, आणंद, वडोदरा, सूरत, नंदुरबार, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली, बसमत, पूर्णा, नांदेड़, मुदखेड़, धरमाबाद, बासर,निजामाबाद, कामारेड्डी, मेडचल, काचीगुड़ा, शादनगर और जडचर्ला स्टेशनों पर रुकेगी।
संरचना: 1 एसी 2-टियर, 2 एसी 3-टियर, 10 शयनयान श्रेणी और 2 द्वितीय श्रेणी के सामान्य डिब्बे होंगे।

बलसाड और दानापुर विशेष ट्रेन (20 सेवा)

09025 साप्ताहिक विशेष दिनांक 22.04.2024 से 24.06.2024 तक प्रत्येक सोमवार को 08.40 बजे बलसाड़ से प्रस्थान करेगी और अगले दिन 12.00 बजे दानापुर पहुंचेगी। (10 सेवा)
09026 साप्ताहिक विशेष दिनांक 23.04.2024 से 25.06.2024 तक प्रत्येक मंगलवार को 14.30 बजे दानापुर से प्रस्थान करेगी और अगले दिन 21.30 बजे बलसाड पहुंचेगी। (10 सेवा)
हाल्ट – भेतस्थान, नंदुरबार, भुसावल, खंडवा, इटारसी, जबलपुर, कटनी, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, पंडित दिन दयाल उपाध्याय जं., बक्सर और आरा।
संरचना: 1 एसी 2-टियर, 2 एसी 3-टियर, 10 शयनयान श्रेणी और 2 द्वितीय श्रेणी के सामान्य डिब्बे होंगे।

उधना और पटना विशेष ट्रेन (22 सेवा)

09045 साप्ताहिक विशेष दिनांक 19.04.2024 से 28.06.2024 तक प्रत्येक शुक्रवार को 08.35 बजे उधना से प्रस्थान करेगी और अगले दिन 10.30 बजे पटना पहुंचेगी। (11 सेवा)
09046 साप्ताहिक विशेष दिनांक 20.04.2024 से 29.06.2024 तक प्रत्येक शनिवार को 13.05 बजे पटना से प्रस्थान करेगी और अगले दिन 14.50 बजे उधना पहुंचेगी। (11 सेवा)
हाल्ट – नंदुरबार, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, पिपरिया, नरसिंगपुर, जबलपुर, कटनी, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, पंडित दिन दयाल उपाध्याय जं., बक्सर और आरा।
संरचना: 1 एसी 1 टियर , 2 एसी 2-टियर, 6 एसी 3-टियर, 08 शयनयान श्रेणी और 3 द्वितीय श्रेणी के सामान्य डिब्बे होंगे।

उधना और बरौनी विशेष ट्रेन (20 सेवा)

09033 द्विसाप्ताहिक विशेष दिनांक 22.04.2024 से 26.06.2024 तक प्रत्येक सोमवार और बुधवार को 20.35 बजे उधना से प्रस्थान करेगी और तिसरे दिन 03.00 बजे बरौनी पहुंचेगी। (10 सेवा)
09034 द्विसाप्ताहिक विशेष दिनांक 24.04.2024 से 28.06.2024 तक प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को 09.25 बजे बरौनी से प्रस्थान करेगी और अगले दिन 19.00 बजे उधना पहुंचेगी। (10 सेवा)
हाल्ट – नंदुरबार, भुसावल, खंडवा, इटारसी, पिपरिया, नरसिंगपुर, जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, पंडित दिन दयाल उपाध्याय जं., बक्सर, आरा और पटना।
संरचना: 1 एसी 2-टियर, 2 एसी 3-टियर, 10 शयनयान श्रेणी और 2 द्वितीय श्रेणी के सामान्य डिब्बे होंगे।

आरक्षण: विशेष ट्रेन के लिए विशेष शुल्क पर बुकिंग सभी कम्प्यूटरीकृत आरक्षण केंद्रों और वेबसाइट http://www.irctc.co.in पर शुरू है।
उक्त विशेष ट्रेन सेवाओं के समय एवं हाल्ट की विस्तृत जानकारी के लिए कृपया http://www.enquiry.Indianrail.gov.in देखें या NTES ऐप डाउनलोड करें।
यात्रियों से अनुरोध है कि वे इन ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेन सेवाओं का लाभ उठाएँ।

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और भी हॉलिडे स्पेशल्स चल रही है…

18 अप्रैल 2024, गुरुवार, चैत्र, शुक्ल पक्ष, दशमी, विक्रम संवत 2081

07625/26 नान्देड़ पनवेल नान्देड़ द्विसाप्ताहिक विशेष

07621/22 नान्देड़ निजामुद्दीन नान्देड़ साप्ताहिक विशेष वाया मनमाड़, भुसावल, भोपाल, झाँसी, मथुरा

07309/10 वास्को मुजफ्फरपुर वास्को साप्ताहिक विशेष वाया पनवेल, भुसावल, इटारसी, जबलपुर, प्रयागराज छिंवकी, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, पाटलिपुत्र, हाजीपुर

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भारतीय रेल में यात्रिओंकी दुर्दशा : कठिन समस्याऐं और बिकट उपचार! अजी, आरक्षित शयनयान की छोड़िए, अवैध यात्रियोंकी घुसपैठ अब सीधे वातानुकूल कोचों में भी हो गई है!

16 अप्रैल 2024, मंगलवार, चैत्र, शुक्ल पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2081

आजकल भारतीय रेल का यात्री आरामदायक यात्रा के मद्देनजर, एकदम से बेसहारा और असुरक्षित हो गया है। यकीन न हो और हमारे बयान में इतनी सी भी अतिशयोक्ति लग रही हो तो किसी भारतीय रेल के रेलवे स्टेशन पर पहुंच जाइए, जहाँ कोई मेल/एक्सप्रेस आनेवाली हो। गाड़ी पहले से ही खचाखच भरी होगी और दावा कर सकते है की किसी भी ग़ैरवातानुकूलित कोच में आपको पैर धरने तक की जगह नसीब नही होगी। यदि आरक्षण वातानुकूल कोच है किया हुवा है, तो मन्नत मांग लीजिए ताकी अपनी सीट पर सुगमता से पहुँच जाए।

यह आए दिन का माज़रा है। वैसे यह दिन रेलवे के भीड़भाड़ वाले दिन ही है मगर हमारी रेलवे की कार्यप्रणाली बताती है, बारह माह में नौ महीने भीड़ से भरपूर होते है। केवल फरवरी, मार्च एवं अगस्त महीने रेल रिकॉर्ड में ‘लीन पीरियड’ याने कम भीड़ वाला होते है। यूँ देखे तो, आजकल रेल विभाग द्वारा निर्देशित लीन पीरियड में भी आजकल गाड़ियोंमे आरक्षण नही मिल पाता। अब आरक्षित कोचों, फिर वह स्लिपर कोच हो या वातानुकूल थ्री टियर अवैध घुसपैठ क्यों होती है यह समझने का प्रयास करते है।

रेल फैन @Manish22_RF ट्वीट से साभार

1: अमर्याद प्रतिक्षासूची के टिकटोंका आबंटन : रेल विभाग अपने ऑनलाईन IRCTC पोर्टल एवं PRS काउंटर पर छपे हुए आरक्षित टिकटोंकी बिक्री करता है। प्रत्येक गाड़ी में, गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशन से जनरल वेटिंग लिस्ट एवं RAC टिकट बुक होते है। इसके आगे कमसे कम 3 या 4 जगह PQWL पुलिंग कोटा और RLWL रिमोट लोकेशन टिकट के कोटे द्वारा टिकटोंका बुकिंग किया जाता है। RLWL में तो प्रतिक्षासूची ज्यादा लम्बी नही होती (करीबन 100 WL) मगर GNWL और PQWL में यही सूची अमर्याद होती है। 800, 900 WL भी दिख जाते है, जो बमुश्किल 5 से 10% कन्फर्म हो पाती है। जनरल WL में खाली स्लॉट्स देख कर भी सीटे भरी जाती है। इस बात की संभावना, आम तौर पर RLWL में नही होती और इसके चलते इस प्रतिक्षासूची मे कन्फर्म होने की सम्भवना न के बराबर होती है।

चूँकि IRCTC के ऑनलाईन टिकट चार्टिंग के बाद प्रतिक्षासूची में रह जाते है तो अपने आप कैन्सल हो कर धनवापसी, रिफण्ड सक्रिय हो जाते है। वहीं PRS के छपे टिकटों में यात्री के पास एक पूर्ण देय रकम का भले ही वह आखिर तक प्रतिक्षासूची मे रहा हो, टिकट होता है और उसके बलबूते वह अपनी रेल यात्रा पर निकल पड़ता है। यह ‘फुल्ली पेड़’ टिकटधारी यात्री इस बात को मानने को तैयार ही नही की वह आरक्षित कोच में अवैध यात्रा कर रहा है। चल टिकट निरीक्षक TTE की संख्या में कमी की वजह से यह प्रतिक्षासूची धारक जबरन आरक्षित कोचों में यात्रा करते पाए जाते है।

2: साधारण टिकटों की सहज और अमर्याद उपलब्धतता : आरक्षित टिकटोंपर रेल विभाग किसी हद तक अंकुश लगाती है मगर टिकट खिड़कियों पर सीधे उपलब्ध अनारक्षित टिकटों का क्या? यह चौबीसों घण्टे और अमर्याद संख्या में जब चाहों, जैसे चाहों उपलब्ध है। यह रेल टिकट,  यात्री के लिए रेल यात्रा के सारे पर्याय खोल देता है। चाहें उस गाड़ीमे, जिस भी वर्ग में बन पड़े यात्री अपनी रेल यात्रा की शुरुआत कर सकता है, बशर्ते उसे गाड़ी पर मौजूद टिकट चेकिंग स्टाफ़ से सम्पर्क करना है, जगह की उपलब्धि समझना है और किराया डिफरेंस चुकाकर यात्रा करनी है। एकदम सहज नियमावली है। मगर आजकल अवैध यात्रा करने से पहले ही यात्री अपना दण्ड, पेनाल्टी बनवाकर सीधे आरक्षित कोच में जम जाते है। यह इतना सहज है, जैसे दरोगा को कह कर, पैनाल्टी पहले ही चुका कर डकैती करना। 😢 गाड़ियों के प्रारम्भिक स्टेशनोंपर, प्लेटफार्म पर टिकट चेकिंग स्टाफ़ मौजूद रहता है और आजकल टिकट चेकिंग के ऊँचे लक्ष्य निर्धारण के चलते यह असंवैधानिक कार्य बड़े धड़ल्ले से पूरा किया जाता है।

3 : गाड़ी की कोच संरचना का मानकीकरण : रेल विभाग ने यात्रिओंको हितों को बिना किसी संज्ञान में लिए विद्यमान मेल/एक्सप्रेस की कोच संरचना से ग़ैरवातानुकूलित कोचों को 60 से 80% कम कर दिया। किसी एक दिन अचानक जाहिर हो जाता है, आने वाले ARP एडवांस रिजर्वेशन पीरियड की तिथि से फलाँ गाड़ी की कोच संरचना बदल जाएगी। ग़ैरवातानुकूलित कोच जो फिलहाल 10 स्लिपर, 4 साधारण यह है, 2 स्लिपर और 2 साधारण रह जाएगी। संरचना में स्लिपर कोचों की जगह वातानुकूल कोच रहेंगे (उदा.12779/80 निजामुद्दीन गोवा एक्सप्रेस) क्या होगा? क्या हो रहा है? साधारण टिकट धारी यात्री जबरन वातानुकूल कोचों में, आरक्षित यात्रिओंकी जगहों पर बलपूर्वक यात्रा कर रहे है। आए दिन शिकायतें हो रही है और रेल प्रशासन हतबल होता दिख रहा है। क्योंकि उनके पास इस तरह की समस्याओं से निपटने की शायद कोई गाइडलाइंस, दिशानिर्देश नही है। गाड़ी चलते रहती है और यात्री शिकायत करते करते अपने गन्तव्य स्टेशन तक पहुंच कर अपनी सुखद, सुरक्षित (?) रेल यात्रा की राहत महसूस करता है।

4: कम अंतर चलनेवाली गाड़ियोंमे, पुराने कोच की जगह नए मेमू संरचना में गाड़ियोंका बदलना : रेल विभाग ने बीते 3, 4 वर्षों में कम अंतर की रेलगाड़ियों में बदलाव करने का निर्णय लिया। इन गाड़ियोंमे पुराने ICF कोचों की जगह नई आधुनिक मेमू गाड़ियाँ लाई गई। निर्णय बहुत अच्छा था मगर कुछ गड़बड़ी हो गई। मेमू गाड़ियोंमे कोच संख्या 4 के स्लैब में बढ़ती है। रेलवे ने अमूमन सभी मेमू गाड़ियोंमे 8 कोच की संरचना रखी जो पूर्वचलित ICF की 14, 16 कोचों की गाड़ियोंके मुकाबले बहुत अपर्याप्त साबित हुई। जहाँ ICF के साधारण कोच की मानक यात्री क्षमता 90 समझ आती है मगर सीटों के ऊपर लगें लगेज रैक/अपर बर्थ पर भी उतने ही यात्री यात्रा कर सकते है। अर्थात पुराने ICF साधारण कोच में भीड़भाड़ के दिनों में बड़ी सहजता, सुगमता से 150/180  यात्री बैठकर यात्रा कर लेते थे। याने 16 कोच की संरचना में अढ़ाई  से तीन  हजार यात्री। “विद्यमान स्टेनलेस स्टील मेमू के ट्रेन सैट में आठ कोच रहते हैं – दोनों छोर पर दो ड्राइविंग मोटर कोच (डीएमसी) जिसमें 55 यात्रियों के बैठने की क्षमता और 171 यात्रियों के खड़े होने की क्षमता (कुल 226 यात्री) है और छह ट्रेलर कोच (टीसी) जिसमें 84 यात्रियों के बैठने की क्षमता और 241 यात्रियों के खड़े होने की क्षमता (कुल 325 यात्री) है। इस प्रकार, इस स्टेनलेस स्टील मेमू रेक की कुल वहन क्षमता 2402 यात्रियों की है।चूँकि यह कम अंतर की रेल यात्रा, उपनगरीय रेल यात्रा जितनी भी कम नही होती, जिनमे यात्री 10, 15 मिनटोंकी रेल यात्रा खड़े खड़े कर लेता है और ना ही उसके पास इन ग़ैरउपनगरिय यात्रिओंकी तरह यात्री सामान होता है। आम रेल यात्री भले ही मेमू गाड़ियाँ आधुनिक और तेज हो, आज के यातायात साधनोंकी माँग हो मगर पुराने ICF कोचों की ‘कम्फर्ट’ से दूर ही है। खैर, कालाय तस्मै नमः!

उपरोक्त प्रथमदृष्टया समस्याओं पर रेल विभाग किस तरह की उपाय योजना कर रहा है या कर सकता है! :

1: रेल विभाग को अपने आरक्षण प्रणाली में अमुलाग्र बदलाव करना होगा। 120 दिनों की ARP एडवांस रिजर्वेशन पीरियड को कम करना या लोकप्रिय गाड़ियोंमे क्रमशः घटाना या लम्बे अवधि में सीट बुकिंग के लिए अतिरिक्त राशि  लगाना। इससे चार चार महीने पहले ही अनावश्यक रीति से सीटें अटका कर रखने वालों पर कुछ अंकुश आएगा।

2: आरक्षण कोटा को टप्पे टप्पे से उपलब्ध कराना। जैसे तत्काल, प्रीमियम तत्काल कोटे के लिए कुछ सीटे बचाए रखी जाती है, उसी भाँति 120 दिनों की ARP में आखरी माह में, आखरी सप्ताह में कोटे को बाँटना।

3: PRS काउन्टर से प्रतिक्षासूची के टिकट का आबंटन पूर्णतः तत्काल प्रभाव से रोकना, बन्द करना और आगे चलकर ऑनलाईन ई-टिकट में भी प्रतिक्षासूची टिकटोंको क्रमशः बन्द करना।

4: अनारक्षित टिकट पर डिस्टेन्स रिस्ट्रिक्शन अर्थात दूरी पाबंदी जारी करना। यह टिकट केवल 300 किलोमीटर की दूरी अर्थात 4, 5 घंटे की यात्रा  के ही उपलब्ध कराए जाए। इससे लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे अनारक्षित यात्रा पर अंकुश लगेगा।

5: रेल विभाग अपनी विद्यमान मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंका वर्गीकरण करना चाहिए। मिक्सड कोच संरचना न हो। गाड़ियाँ दो प्रकार की बनाई जाए। पूर्णतः  ग़ैरवातानुकूलित और पूर्णतः वातानुकूल। इससे उच्च वर्ग के कोचों का रखरखाव सुचारू तरीके से हो पाएगा।

6: प्रीमियम गाड़ियोंमे केवल आरक्षित, वातानुकूल कोच रहें। यह गाड़ियाँ सीमित स्टोपेजेस के साथ मुख्य टर्मिनल्स जैसे मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुम्बई सेंट्रल,के. एस. आर. बंगलुरू सेंट्रल, नई दिल्ली, चेन्नई सेंट्रल, हावड़ा इत्यादि स्टेशनोंसे अपनी सेवाएं दे और नॉन प्रीमियम गाड़ियाँ सैटेलाइट टर्मिनल्स से अपनी सेवाएं दे। इससे गाड़ियोंमे, स्टेशनोंपर अनावश्यक भीड़ से निज़ात मिल पाएगी। हालाँकि रेल विभाग ने इस पहलु पर काम शुरू किया है, मगर  विद्यमान मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंको लेकर, उसकी कोच संरचना बदलने से बड़ी गड़बड़ी हुई है। रेल विभाग को चाहिए की उनकी कुछ विद्यमान से शुरू कर, मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंको क्रमशः आरक्षित करते हुए धीरे धीरे पूर्णतः आरक्षित गाड़ी में बदले और बाद में उन्हें पूर्णतः वातानुकूल रखना है या ग़ैरवातानुकूलित रखना है इस पर निर्णय ले।

मित्रों, यात्रिओंकी समस्याएं बहुत गम्भीर है। हम अपनी समझ और अनुभव से  जो भी कुछ  उपाय यहाँ  बता रहे है, हो सकता है, रेल विभाग अपने प्रबुद्ध अफसरों, विचारवन्तों के उपाय योजनाओं से भिन्न हो या कमतर हो, उन्हें लागू करें या ना करें, कुछ और ही समाधान निकालें। मगर समस्या तो है और दिनोंदिन यह विकराल रूप धरते जा रही है। चेकिंग स्टाफ़ पर हमले, यात्रिओंके जानमाल का नुकसान भी होना शुरू हो गया है। आम रेल यात्री एक तो शिकायत नही करता, कर भी दें तो उसको अन्जाम तक पहुंचने तक डटा नही रहता। वह अंदर की अंदर कलपता है और यात्रा पूरी हुई, तो यात्रा दौरान हुई तकलीफों को वही भुला देता है। रेल विभाग में समस्याओं के निवारण हेतु सुरक्षा बल के जवान भी मौजूद रहते है मगर क्या वह इतनी संख्या में है, की किसी भी अधिकृत यात्री की रेल यात्रा सुखद, सुरक्षित और सुगम करा सकें?